बेल आमतौर पर सामान्य वजन वाले, जो लगभग 500 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक के ही बाजार में दिखाई देते हैं, लेकिन अब कृषि वैज्ञानिकों ने व्यावसायिक नजरिए से बेल की अनेक उन्नत प्रजातियां विकसित की हैं, जिसमें 7 किलोग्राम तक के वजन वाले बेल फल तैयार हो रहे हैं. Bael fruit cultivation

बेल फल एक औषधीय फल है. इसका वैज्ञानिक नाम Aegle marmelos है, और इसकी अनेक खासियतें हैं :

-पाचन तंत्र को मजबूत करता है.

-विटामिन सी का अच्छा स्रोत है.

-रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है.

बेल फल का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है.

बेल-7 (NB-7) : क्या है खासियत

7 किलो तक वजन वाली प्रमुख बेल की किस्म नरेंद्र बेल-7 (NB-7) है, जिसे फैजाबाद के आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है. यह किस्म व्यावसायिक खेती के लिए बेहतरीन है, जिसमें गूदा अधिक और बीज कम होते हैं. Bael fruit cultivation

नरेंद्र बेल किस्में :
संस्थान ने बेल की अनेक किस्में तैयार की हैं जिसमें NB-5, NB-9, NB-10 और NB-11 भी अपनी बेहतरीन पैदावार और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं.

नरेंद्र बेल की क्या है खूबियां:

# नरेंद्र बेल-5 (NB-5): यह किस्म शरबत और जूस बनाने के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है.

# नरेंद्र बेल-9 (NB-9): यह किस्म अच्छी उपज देने के लिए जानी जाती है.

# नरेंद्र बेल-10 (NB-10): यह किस्म भी भारी वजन और अच्छी व्यावसायिक गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है.

# नरेंद्र बेल-11 (NB-11): यह नवीनतम किस्मों में से एक है जो व्यावसायिक उत्पादन के लिए बेहतरीन है.

# NB-7 की मुख्य विशेषताएं: इस खास किस्म का वजन औसतन 2 से 3 किलोग्राम तक तो होता ही है, लेकिन उचित प्रबंधन से इस किस्म से 7 किलोग्राम या तक उससे अधिक भी वजन के फल मिल सकते हैं.

बेल से बनते हैं अनेक पौष्टिक उत्पाद Bael fruit cultivation 

बेल कैंडी, जैम और मुरब्बा बनाने के लिए बहुत लोकप्रिय है. यह पेट रोगों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है.
बेल की खेती से कितनी मिलती है पैदावार: बेल का 10 साल का पौधा लगभग 100 से 150 क्विंटल/हेक्टेयर तक पैदावार दे सकता है.

आज बागबानी के जरिए किसानों की अच्छी आमदनी हो रही है खासकर जब किसी औषधीय फल की खेती की जाए तो यह लाभ कहीं अधिक बढ़ जाता है. बेल की खेती भी इसी का एक उम्दा उदाहरण है.

सावधानी बरतने की जरूरत है.

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