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यहां अगर किसानों को खेती के साथ दूसरी जगहों से आमदनी हासिल करनी है, तो उन्हें खेती से जुड़े कारोबार जैसे मुरगी पालन, मधुमक्खी पालन, सूअर पालन, डेरी, रेशम कीट पालन, मशरूम उत्पादन वगैरह काम करने चाहिए. किसान अपनी सुविधा और मौजूद संसाधनों के आधार पर इन में से कोई भी कारोबार चुन सकते हैं.
यहां हम आप को ब्रायलर उत्पादन यानी मुरगा मीट उत्पादन के बारे में जानकारी दे रहे हैं. ब्रायलर पाल कर कम समय में ज्यादा आमदनी की उम्मीद की जा सकती?है, बशर्ते वैज्ञानिक तरीके व बाजार की जानकारी रख कर इस कारोबार में हाथ डालें.
अंडे और मीट के लिए करें मुरगी पालन
मुरगी पालन अंडे और मीट के लिए किया जाता?है. मीट हासिल करने वाले मुरगी पालन को ब्रायलर कहते हैं, जबकि अंडे पैदा करने वाले को लेयर फार्म कहते हैं.
लेयर फार्म में केवल मुरगियां पाली जाती हैं और ये 15-18 हफ्ते बाद अंडा देना शुरू करती हैं. शुरुआत में एक अंडे का वजन 35-40 ग्राम तक होता है. अंडे का वजन मुरगी की नस्ल पर निर्भर करता है. लेयर फार्म पर पाली जाने वाली मुरगियां सही उम्र आने पर ही 45 से 58 ग्राम तक का अंडा देती हैं और 72 हफ्ते तक अंडा देती रहती हैं.
ब्रायलर पालन में नर व मादा दोनों चूजों को एकसाथ पाला जाता?है और ये दोनों चूजे 28 से 42 दिन में काटने लायक हो जाते?हैं. 28 दिन में एक चूजे यानी एक ब्रायलर का वजन 12 सौ ग्राम व 42 दिन में ढाई किलो तक हो जाता?है.
रोस्टेड चिकन यानी तंदूरी चिकन में 12 सौ ग्राम वजन वाले ब्रायलर का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि तरी चिकन, चिकन बिरयानी, चिकन कोरमा में डेढ़ किलो से ढाई किलो तक के ब्रायलर पसंद किए जाते?हैं.
ब्रायलर का मीट जायकेदार, बिना रेशे वाला व मुलायम होता?है. गांव के बेरोजगार नौजवान व प्रगतिशील किसान ब्रायलर पालन कर के खुद का एक कारोबार खड़ा कर सकते हैं. तैयार ब्रायलर को आसानी से अपने नजदीकी बाजार में बेचा जा सकता है. खुद ही चिकन मीट की दुकान खोल कर ब्रायलर को बेच सकते हैं.
ब्रायलर पालन के लिए बरतें सावधानी
ब्रायलर को खिलाने के लिए बाजार में दाना आसानी से मिल जाता है. दाना हमेशा भरोसेमंद कंपनी से ही खरीदें. जब आप यह काम शुरू करेंगे तो चूजा, दाना, दवा, सामान वगैरह बेचने वाली कंपनियों के मार्केटिंग करने वाले व्यक्ति आप के पास खुद आने लगेंगे.
ब्रायलर पालन गहरी बिछावन यानी डीप लिटर या पिंजरों में किया जा सकता है. डीप लिटर में फर्श पर लकड़ी का बुरादा व धान की भूसी बिछा कर ब्रायलर को उस पर पालते हैं.
चूजों की ब्रूडिंग सब से अहम काम?है. खास कर सर्दी के मौसम में एक दिन के चूजों को 90 से 95 डिगरी फारेनहाइट तापमान पर रखते हैं. चूजा जैसेजैसे बड़ा होता जाता है वैसेवैसे तापमान कम करते जाते हैं. 28 दिन बाद उसे सामान्य तापमान पर ले आते हैं.
चूजों का रखें खास खयाल
पहले 2 दिन तक चूजों को 24 घंटे उजाला देना चाहिए. दूसरे हफ्ते 23 घंटे उजाला काफी है. 4 हफ्ते बाद चूजों को अलग से गरमी देने की जरूरत नहीं होती है. सर्दी के मौसम में बिजली का हीटर या बायोगैस ब्रूडर या बुरादे की बुखारी जला कर गरमी पैदा करें. पहले 2-3 दिन तक फर्श पर बिछी बिछावन पर अखबारी कागज या ब्रूडिंग पेपर बिछा दें और उसी पर चूजों को दाना डालें और चिकगार्ड का इस्तेमाल करें.
चूजों को बरतन में दानापानी देना चाहिए. ये बरतन बाजार से खरीदे जा सकते?हैं. दाने को गिरने या बरबाद होने से बचाने के लिए उम्दा तकनीक से बने फीडर इस्तेमाल करें.
मुरगी पालन के कुल खर्चे का 70 फीसदी दाने पर ही खर्च होता?है. बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण जरूर कराएं. टीके की पूरी जानकारी जहां से चूजा खरीदा हो, वहां से लें या पशु डाक्टर की सलाह लें. पीने के लिए साफ व ताजा पानी दें. Meat Business





