मछलीपालन (Fish Farming) से अच्छीखासी कमाई होती है, पर मछलियों की कुछ ऐसी किस्में हैं, जो उत्पादकों को कम खर्च में मोटी कमाई देती हैं. देश के सभी राज्यों की सरकारें मछलीपालन को बढ़ावा देने की कवायद में लगी हुई हैं और इस के लिए उत्पादकों को काफी मदद भी दी जा रही है. मछली उत्पादकों को यह जानना और समझना पड़ेगा कि किस किस्म की मछली की बाजार में ज्यादा मांग है. इस से उत्पाद को खपाने के लिए खास मशक्कत नहीं करनी पड़ती है और बेहतर मुनाफा भी मिल जाता है.
पंगेसियस मछली का उत्पादन कर के किसान अपनी कमाई को कई गुना बढ़ा सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि मीठे पानी में पंगेसियस मछली का वजन काफी तेजी से बढ़ता है और यह 8 महीने में ही डेढ़ किलोग्राम की हो जाती है. यह मछली भारतीय मछली की तुलना में 5 गुना ज्यादा तेजी से बढ़ती है.
झींगा मछली
झींगा मछली का जलजमाव वाले इलाकों में अच्छाखासा उत्पादन हो सकता है. बिहार में झींगा के माइक्रो ब्रेकियम रोजाबर्गी और माइक्रो विलियम मालकम सोनी वेराइटी का काफी बढि़या उत्पादन हो सकता है. गौरतलब है बिहार में हर साल 50 टन झींगा मछली की खपत होती है.
जयंती रोहू
जयंती रोहू की नई किस्म से मछलीपालकों की आमदनी में कई गुना ज्यादा का इजाफा हो सकता है. केंद्रीय मीठा जल मत्स्य अनुसंधान संस्थान की ताजा रिसर्च में इस का परीक्षण कामयाब रहा है. परीक्षण में पाया गया है कि साधारण रोहू मछली के मुकाबले उस की नई किस्म जयंती रोहू काफी तेजी से बढ़ती है.
सामान्य रोहू की तुलना में इस का वजन डेढ़ गुना ज्यादा होता है. इस मछली का रंग सुनहरा होता है और स्वाद सामान्य रोहू से काफी अच्छा होता है.





