आत्मा सर्वोत्तम कृषक अवार्ड के लिए करें आवेदन

कटनी : राज्य शासन द्वारा कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम ‘आत्मा’ आगामी 26 जनवरी, 2025 को जिले के सभी विकासखंडों से 5-5 सर्वोत्तम किसानों को पुरस्कृत करने की योजना प्रसारित की गई है. इस पुरस्कार के लिए सर्वोत्तम किसान के चयन का आधार उन के द्वारा मूल्यांकन वर्ष 2023-24 में अपनाई गई कृषि तकनीक, उपज एवं उत्पादकता के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा. इस में विकासखंड स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार के लिए प्रति विकासखंड 5 किसान, जो कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, कृषि अभियांत्रिकी से संबंधित है, को 10,000 रुपए से पुरस्कृत किया जाएगा. जिला स्तरीय 5 सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार के लिए 25,000 रुपए से सर्वोत्तम कृषक को पुरस्कृत और सर्वोत्तम समूह पुरस्कार राशि 20,000 रुपए प्रत्येक समूह को (कुल 5 समूह) पुरस्कृत किया जाएगा.

इस पुरस्कार के लिए निर्धारित प्रपत्र में किसानों से प्रविष्टियां 14 अक्तूबर, 2024 तक आमंत्रित की गई हैं. किसान आवेदनपत्र अपने विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, ब्लौक टैक्नोलौजी मैनेजर से प्राप्त कर आवेदनपत्र भर कर विकासखंड स्तरीय कार्यालय में जमा कर सकते हैं.

किसानों की प्रविष्टियों का मूल्यांकन कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा. सर्वोत्तम अंक पाने वाले किसानों का चयन किया जाएगा. राज्य स्तरीय पुरस्कार का चयन राज्य स्तर से होगा और विकासखंड के लिए चयनित सर्वोत्तम किसान का आवेदन राज्य स्तर पर भेजा जाएगा.

इसी प्रकार आत्मा अंतर्गत कार्यरत कृषक रुचि समूह एवं कमोडिटी रुचि समूहों को भी जिला स्तर पर पुरस्कृत करने के लिए प्रविष्टियों के आवेदनपत्र विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, ब्लौक टैक्नोलौजी मैनेजर से प्राप्त कर निर्धारित समयसीमा में जमा किए जा सकते हैं.

आवेदनपत्र भरने में यदि कोई कठिनाई आए, तो कृषि विभाग, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, कृषि अभियांत्रिकी के कर्मचारियों, अधिकारियों का निष्पक्ष सहयोग प्राप्त किया जा सकता है. सर्वोत्तम कृषक एवं समूहों के चयन में पूर्ण निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बरती जाएगी.

उन्होंने किसानों से अपील की है कि वर्ष 2023-24 में अर्जित प्रगति अपनाई गई तकनीक व प्राप्त उत्पादन एवं उपज की सहीसही जानकारी आवेदनपत्र में भर कर लिफाफाबंद कर 14 अक्तूबर, 2024 तक विकासखंड स्तरीय कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं. जिन कृषकों, समूहों को गत वर्ष ऐसे पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं, वे आगामी 7 वर्षों तक आवेदन करने के पात्र नहीं रहेंगे.

फूलों की खेती ( Flower Farming) कर लाभ कमा रहे हैं ललित कुमावत

नीमच : फूलों की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, इसलिए आज फूलों की खेती किसानों को अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है. अगर फूलों की खेती को वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, तो मुनाफा कहीं और अधिक बढ़ जाता है. इसी काम को अंजाम दिया है नीमच के एक किसान ललित कुमावत ने.

नीमच जनपद के ग्राम निपानिया के किसान ललित कुमावत, पिता सुरेश कुमावत ने परंपरागत खेती के बजाय उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में फूलों की खेती कर खेती को लाभ का धंधा बना लिया है. ललित कुमावत ने 0.400 हेक्टेयर में गैंदा फूलों की खेती करना प्रारंभ किया और 50,000 रुपए खर्च हुए. गैंदा फूल 40 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रहे हैं. इस से ललित कुमावत को अच्‍छी आय प्राप्‍त हो रही है.

गैंदा फूलों की खेती से ललित कुमावत को कुल 2 लाख रुपए की आय होने की संभावना है. खर्च निकाल कर उन्हें शुद्ध 1.50 लाख रुपए की आय होगी. इस तरह ललित कुमावत ने परंपरागत खेती के बजाय उन्‍नत तकनीकी से गैंदा फूलों की खेती कर खेती को लाभ का धंधा बना लिया है.

खेती के साथ गौपालन: आत्‍मनिर्भर बने किसान निर्मल

नीमच: आचार्य विद्या सागर गौसंवर्धन योजना का लाभ ले कर उन्‍नत नस्‍ल का गौपालन कर किसान एवं पशुपालक निर्मल पाटीदार एक समृद्ध पशुपालक बन गए हैं. इस योजना ने उन का जीवनस्‍तर काफी बदल दिया है. वे अब प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं.

परंपरागत रूप से खेती करने वाले नीमच जिले की मनासा जनपद के ग्राम चुकनी निवासी निर्मल पाटीदार पहले कृषि‍ कार्य से बमुश्किल अपने परिवार का खर्च चला पाते थे. वर्ष 2005 में निर्मल के पिता रतनलाल पाटीदार की एक प्रगतिशील पशुपालक से मुलाकात हुई और उन से प्रेरित हो कर रतनलाल ने बैंक ऋण ले कर 2 संकर नस्‍ल की गाएं खरीदीं, जिस से उन्‍हें 300 रुपए रोज की आमदनी होने लगी. अपने पिता रतनलाल पाटीदार के पशुपालन कार्य में निर्मल ने भी हाथ बंटाना प्रारंभ किया.

निर्मल कुमार ने वर्ष 2017-18 में पशुपालन अधिकारी डा. राजेश पाटीदार से मार्गदर्शन प्राप्‍त कर आचार्य विद्या सागर गौसंवर्धन योजना के तहत 10 क्रासब्रीड गायों को पालने के लिए ऋण लिया और राजस्‍थान से गाएं खरीद कर, पशुपालन कार्य करने लगे.

पशुपालक निर्मल पाटीदार कहते हैं कि वर्ष 2018 से उनके पास उन्‍नत नस्‍ल की 10 गाएं हो गई हैं. इस से उन्‍हें 900 रुपए प्रतिदिन आय होने लगी और जीवनयापन में सुधार होने लगा. वर्ष 2020-21 में उन्होंने 30 लिटर सुबह व 40 लिटर दूध शाम को कुल 70 लिटर दूध प्रतिदिन सांची दुग्‍ध संघ की डेयरी पर बिक्री किया, जिस से उन्‍हें 1500 रुपए रोजाना की आय हुई. इस प्रकार मासिक रुपए 45,000 और साढ़े 4 लाख से 5 लाख रुपए तक की सालाना आय हुई.

पशुपालन से अरिरिक्‍त (दूध व गोबर की खाद) की आय से वर्ष 2019 में निर्मल ने ट्रैक्टर खरीदा, जिस की किस्त भी दूध बेच कर होने वाली आय से चुका रहे हैं. वर्ष 2021 में पशुओं के लिए 1600 वर्ग फीट का शेड, जिस में फर्श सीसी का बनवाया है. इस शेड में पशुओं के लिए पंखे लगे हैं. चारे की कुट्टी बनाने के लिए विद्युतचलित चैफ कटर लगा लिया है.

इसी तरह आचार्य विद्या सागर गौसंवर्धन योजना का लाभ ले कर उन्‍नत नस्‍ल का गौपालन कर किसान एवं पशुपालक निर्मल पाटीदार एक समृद्ध पशुपालक बन गए हैं और अब वे प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं.

योजना का लाभ ले कर अजहरूद्दीन ने बकरीपालन को बनाया रोजगार

मंदसौर : जिले के तहसील सुवासरा गांव किशोरपुरा के रहने वाले अजहरूद्दीन मोहम्‍मद हुसैन मध्‍यमवर्गीय पशुपालक हैं. उन के परिवार की माली स्थिति ठीक नहीं होने के कारण इन्‍होंने खुद का व्‍यवसाय करने की सोची और उन्होंने पशुपालन विभाग से जानकारी ली.

अजहरूद्दीन को पशुपालक विभाग से बकरीपालन योजना की जानकारी मिली और इन्‍होंने खुद का बकरीपालन व्‍यवसाय शुरू किया. अजहरूद्दीन ने बकरीपालन योजना के अंतर्गत देशी नस्‍ल की 10 बकरी और एक बकरे को 77,456 रुपए में खरीदा. अजहरूद्दीन को बकरीपालन योजना में खुद का व्‍यवसाय करने के लिए पशुपालन विभाग से 30,982 रुपए का अनुदान मिला. बकरीपालन व्‍यवसाय करने के बाद हर महीने के 8,000 रुपए से अधिक कमा रहे हैं और अब वे अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं.

डा. आरएल सोनी ने निदेशक प्रसार शिक्षा का कार्यभार संभाला

उदयपुर : डा. आरएल सोनी ने अपने पूरे सर्विस काल में कृषि प्रसार क्षेत्र में रहते हुए कृषि एवं किसानों के उत्थान के लिए काम किया. उन के कुशल नेतृत्व के द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, बांसवाड़ा को 2 बार उत्कृष्ट केंद्र का पुरस्कार भी मिला. साथ ही, नीति आयोग द्वारा बांसवाड़ा केंद्र को अतुलनीय कार्यों के लिए ‘ए’ रेटिंग भी मिला.

कृषि विज्ञान केंद्र, वल्लभनगर के प्रथम प्रभारी रहते हुए केंद्र के भवन, किसानघर, प्रदर्शन इकाइयों की स्थापना की. इस के अलावा किसानों को सर्वोच्च मानते हुए उन की खेती को विज्ञान एवं तकनीकी से जोड़ कर अधिक उत्पादन, लाभकारी व टिकाऊ बनाने के लिए भी जमीनी स्तर पर काम किया. किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़ी तकनीकियों को लोगों तक पहुंचाया.

दक्षिणी राजस्थान के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसानों की छोटी जोत के लिए संबंधित कृषि प्रणाली के माध्यम से आय में बढ़ोतरी की. साथ ही, प्रसार शिक्षा निदेशालय के अतंर्गत कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. इस के अलावा उन्होंने लघु व सीमांत किसानों के लिए कम लागत की खेती जैसे जैविक खेती, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया.

डा. आरएल सोनी का कहना है कि किसानों की आय में अधिक वृद्धि करने व कृषि तकनीकियों की अधिक जानकारी दिलाने के लिए आईटी व एआई तकनीकियों के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. किसानों के खेतों को यंत्रीकरण व सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग से कृषि लागत में कमी लाने पर जोर दिया जाएगा.

नैशनल फिशरीज डिजिटल प्‍लेटफार्म पर करें पंजीयन

मंदसौर : एसके महाजन, सहायक संचालक, मत्‍स्‍योद्योग द्वारा बताया गया कि भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग द्वारा मत्स्यपालन व्यवसाय से जुड़े मत्स्यपालकों, मत्स्य सहकारी समितियों, मछुआरा समूह के सदस्यों, मत्स्य विक्रेताओं एवं मत्स्य उद्यमियों के लिए नैशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया गया है, जिस पर मत्स्य व्यवसाय से जुड़े सभी व्यक्तियों का पंजीयन किया जाना है.

नैशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफार्म पर पंजीयन स्वयं के मोबाइल फोन अथवा किसी भी कियोस्क सैंटर, कंप्यूटर सेवा केंद्र से आसानी से कराए जा सकते हैं. पंजीयन करने के लिए आधारकार्ड, बैंक पासबुक, पेनकार्ड, ईमेल आईडी एवं स्वयं का मोबाइल नंबर, जिस पर आधार लिंक हो, की आवश्यकता होगी.

नैशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफार्म पर पंजीयन के लिए वैबसाइट nfdp.dof.gov.in पर पंजीयन कर सकते हैं. व्यक्तिगत पंजीयन के लिए सहकारी समिति/मछुआ समूह के लिए चयन कर सकते हैं. पंजीयन की विस्तृत जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 9977442266 या 8349217053 एवं कार्यालय सहायक संचालक, मत्स्योद्योग, पुराना कलेक्ट्रेट खनिज विभाग के पास, मंदसौर मे कार्यालयीन समय में संपर्क कर सकते हैं.

प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को प्रोत्साहन जरूरी

सिंगरौली : मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा है कि उर्वरक की मांग बढ़ने पर डीएपी के स्थान पर एनपीके, एएसपी लिक्विड यूरिया नैनो यूरिया के प्रयोग के लिए किसानों को प्रेरित करें. एनपीके कौम्प्लेक्स के माध्यम से भी खेत में पोटैशियम की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित की जा सकती है. कालाबाजारी, अवैध भंडारण, नकली उर्वरक की संभावना रहती है. पुलिस का सहयोग लेते हुए निरीक्षण और चेकिंग की व्यवस्था को बढ़ाया जाए. कालाबाजारी करने वालों, मिलावट, मिस ब्रांडिंग और नकली उर्वरक खपाने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाए. उर्वरक अवैध परिवहन पर नियंत्रण के लिए एक जिले से दूसरे जिले में उर्वरक मूवमेंट पर सतत निगरानी रखें.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री निवास से सोयाबीन उपार्जन, खाद उपलब्धता और वितरण की वीडियो कौंफ्रेंसिंग में कलक्टर व कमिश्नर से चर्चा कर उक्त निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि खरीफ 2024-25 के लिए प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का प्राइस सपोर्ट स्कीम में मध्य प्रदेश को सोयाबीन उपार्जन की दी गई स्वीकृति के लिए आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश में उपार्जन के समुचित बेहतर प्रबंध करने के निर्देश अधिकारियों को दिए.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि आवश्यकतानुसार डीएपी के स्थान पर एनपीके, लिक्विड नैनो यूरिया के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जाए.

उन्होंने कलक्टरों को निर्देशित किया कि राजस्व अमला जनप्रतिनिधियों के साथ फसलों की क्षति आंकलन सुनिश्चित करें. खाद भंडारण के लिए डबल लौक की आवश्यकता होने पर कृषि उत्पादन आयुक्त से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने अमानक स्तर का खादबीज विक्रय, भंडारण और परिवहन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए. रबी 2024-25 के लिए खरीफ 2024 के अनुसार ही उर्वरक वितरण के लिए पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करें.

उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में रबी 2024-25 के लिए भी पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं. सभी जिला कलक्टर बेहतर तैयारी कर लें, वितरण व्यवस्था में कोई गड़बड़ी न हो, इस के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से समन्वय कर कार्रवाई सुनिश्चित करें.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप प्राकृतिक खेती को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाए. एनपीके और लिक्विड नैनो यूरिया के उपयोग के लिए किसानों को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करें. किसानों द्वारा इन के उपयोग से देश की अन्य राष्ट्रों पर निर्भरता भी कम होगी.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने खरीफ 2024 में एनपीके का उपयोग 45 फीसदी होने पर खुशी जताई, जो कि वर्ष 2023-24 में महज 26 फीसदी था. उन्होंने प्राइस सपोर्ट स्कीम पर सोयाबीन उपार्जन की कार्रवाई संवेदनशीलता से करने को कहा है.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा के अतिरिक्त सोयाबीन का उपार्जन प्रदेश सरकार करेगी. प्रदेश में 25 सितंबर से ई-उपार्जन पोर्टल पर किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. अधिक से अधिक किसानों से पोर्टल पर पंजीयन कराया जाए. आगामी 20 अक्तूबर तक किसानों का पंजीयन होगा. इस के बाद उपार्जन के लिए स्लाट बुकिंग की कार्रवाई 21 दिसंबर तक होगी. किसानों से 25 अक्तूबर से 31 दिसंबर, 2024 तक सोयाबीन का उपार्जन प्रदेश के 1400 केंद्रों पर किया जाएगा.

आवश्यकतानुसार इस में परिवर्तन भी किया जा सकता है. किसानों को भुगतान औनलाइन किया जाएगा. प्रदेश में 7 जिले सिंगरौली, दतिया, भिंड, कटनी, मंडला, बालाघाट, सीधी को छोड़ कर बाकी सभी जगह सोयाबीन का उपार्जन होगा. इन जिलों से प्रस्ताव आने पर सोयाबीन उपार्जन पर विचार किया जाएगा.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में कुछ स्थानों में भारी वर्षा से फसलों को हानि हुई है. कलक्टर क्षतिग्रस्त फसलों का सर्वे करा कर किसानों को फसल बीमा और अन्य लाभ देना सुनिश्चित करें. सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित उचित मूल्य दुकानों से खाद्यान्न वितरण की सतत निगरानी करें. वितरण में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्यवाही करें. सड़कों से निराश्रित गौवंश को हटाने के लिए भी प्रभावी कार्यवाही करें.

मुख्यमंत्री ने वीडियो कौंफ्रेंसिंग के माध्यम से मंत्रियों, सांसद और विधायकों से संवाद किया. वीडियो कौंफ्रेंसिंग के दौरान कलक्ट्रेट के एनआईसी से कलक्टर चंद्रशेखर शुक्ला, पुलिस अधीक्षक निवेदिता गुप्ता, सीईओ जिला पंचायत गजेंद्र सिंह नागेश, आयुक्त नगर निगम डीके शर्मा, डिप्टी कलक्टर माइकेल तिर्की, उपसंचालक, कृषि, आशीष पांडेय, जिला आपूर्ति अधिकारी पीसी चंद्रवंशी, उपायुक्त सहकारिता पीके मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे.

कैदियों ने सीखी मशरूम (Mushroom) उत्पादन की तकनीक

टीकमगढ़ : कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डा. बीएस किरार के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा दोदिवसीय क्षमतावर्धक प्रशिक्षण में बंदियों को मशरूम उत्पादन सिखाया गया. इस अवसर पर डा. आरके प्रजापति (प्रशिक्षण वैज्ञानिक), डा. एसके जाटव और हंसनाथ खान, केंद्र की टीम की तरफ से और जिला जेल प्रशासन के जेल अधीक्षक प्रतीक कुमार जैन, सियाराम यादव (जेल शिक्षक) सहित 40 बंदी उपस्थित रहे.

कैदियों में ज्यादातर लोग कृषि और ग्रामीण पृष्ठभूमि की खेती से जुड़े हुए हैं. बंदी सुधार के लिए जेल अधीक्षक द्वारा यह प्रयास है कि सजा पूरी होने के बाद ये लोग समाज की मुख्यधारा में फिर से वापस आ सकें. कैदियों के अंदर तकनीकी क्षमता पैदा करना है.

जिले में मशरूम उत्पादन बिक्री के लिए अब धीरेधीरे बाजार पैदा हो रहा है. इस को देखते हुए मशरूम आसानी से रोजगार दिलाने वाला नवाचार बनता जा रहा है, क्योंकि मशरूम उत्पादन के लिए जिले की जलवायु अनुकूल है. साथ ही, गांव में उपलब्ध बहुत मात्रा में गेहूं, उड़द, सोयाबीन एवं अन्य फसलों का भूसा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. अभी तक अपने जिले में तकरीबन 30 लोगों ने मशरूम जैसे ढिंगरी मशरूम, बटन मशरूम एवं दूधिया मशरूम का पैदा करना शुरू कर दिया है.

मशरूम एक 10×10 फीट आकार के बंद कमरे में आसानी से किया जा सकता है. मशरूम उत्पादन की तकनीक बेहद आसान और सस्ती है. ढाई सौ रुपए की लागत से 10 किलोग्राम भूसे से मशरूम पैदा करने में लगता है. 10 किलोग्राम भूसे से 8 किलोग्राम तक मशरूम पैदा किया जा सकता है, जिस की कीमत ढाई हजार रुपए तक होती है. मशरूम में कुपोषण को दूर करने की एवं खतरनाक रोगों से शरीर की रक्षा करने की क्षमता होती है.

कैदियों द्वारा प्रशिक्षण ले कर जेल में ही मशरूम लगाया गया है, जो 25 से 30 दिनों के बाद पैदा होने लगेगा. जेल अधीक्षक का कहना है कि मैनपावर यानी मानवशक्ति का उपयोग मशरूम उत्पादन में किया जाएगा, जिस से कैदियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और तकनीकी क्षमता उन को समाज की मुख्यधारा में लौटा लाएगी. जेल में वैसे तो कई प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण होते रहते हैं, मगर टीकमगढ़ में कृषि और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले कैदियों को देखते हुए उन के हिसाब से ऐसा पहली बार है. जेल अधीक्षक के सहयोग से कृषि विज्ञान केंद्र के साथ यह पहला प्रयोग शुरू किया गया है. आगे इस के अच्छे परिणाम की ओर देखा जा सकता है.

कैदियों ने खुद से भूसे और मशरूम बीज का प्रयोग कर के जेल की खाली पड़ी जगह पर उस को लगाया है और इस की आगे की ट्रेनिंग अन्य कैदियों की सीखे हुए कैदियों द्वारा की जाती रहेगी. तकनीकी मार्गदर्शन के रूप में केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा सहयोग मिलता रहेगा और अभी ढिंगरी मशरूम लगाया गया है, क्योंकि मशरूम की खेती मौसम, तापमान और नमी पर आधारित रहती है, इसलिए इस के बाद बटन और दूधिया मशरूम भी लगाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

सब्सिडी पर खरीदें पराली प्रबंधन यंत्र

दमोह : किसान गेहूं, सोयाबीन, मक्का एवं धान आदि की फसल आने पर हार्वेस्टर चलने के बाद खेत में बचे हुए ठूंठ यानी फसल अवशेष (नरवाई) को जलाते हैं, जिस से पर्यावरण प्रदूषित होता है. मिट्टी के पोषक तत्व एवं लाभदायक जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं. इस के बचाव के लिए फसल के अवशेष (नरवाई) प्रबंधन करना अति आवश्यक है.

सहायक कृषि यंत्री, कृषि अभियांत्रिकी, दमोह ने बताया नरवाई प्रबंधन के लिए नवीन कृषि यंत्रों का प्रयोग करना लाभदायक है जैसे, रोटावेटर, मल्चर, श्रेडर के उपयोग से फसल अवशेष (डंठल) को मिट्टी में मिला देते हैं. सुपर सीडर यंत्र एक ऐसा नवीन कृषि यंत्र है, जिस में धान फसल की कटाई के बाद बिना खेत की तैयारी के रबी फसल की बोनी कर सकते हैं, जिस में समय एवं मेहनत कम लगती है. स्ट्रा रीपर यंत्र से गेहूं की हार्वेस्टर से कटाई करने के बाद खड़ी नरवाई में इस मशीन का उपयोग करने से पशुओं के लिए भूसा तैयार किया जाता है एवं नरवाई को जलाना नहीं पड़ता है.

उन्होंने आगे कहा कि इन यंत्रों के उपयोग से नरवाई प्रबंधन के साथसाथ मिट्टी की जलधारण क्षमता एवं जीवांश की मात्रा बढ़ जाती है. इस से मिट्टी की उपज बढ़ने के साथसाथ पशुओं के आहर की उपलब्धता हो जाती है. उपरोक्त सभी नरवाई प्रबंधन यंत्रों पर कृषि अभियांत्रिकी मध्य प्रदेश द्वारा अनुदान दिया जाता है. कृषि अभियांत्रिकी की वैबसाइट dbt.mpdage.org पर जा कर किसान अपना पंजीयन कर उपरोक्त यंत्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं.

तय दर पर ही उर्वरक (Fertilizer) बेचें उर्वरक विक्रेता

नरसिहंपुर : यह जिला कृषि प्रधान है. जिले में खरीफ वर्ष 2024 में धान, सोयाबीन, उड़द, अरहर, मक्‍का, ज्‍वार आदि फसलें 2.20 लाख हेक्‍टेयर में बोनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जो शतप्रतिशत पूरा कर लिया गया है. वर्तमान में खरीफ फसलें पक कर तैयार हैं, जिन की कटाई व गहाई का काम चल रहा है.

जिले में रबी वर्ष 2024-25 में 3.20 लाख हेक्टेयर का लक्ष्‍य प्रस्‍तावित किया गया है. कुछ क्षेत्रों में खेत खाली हो गए हैं, जिन में रबी बोनी के काम के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं.

कलक्टर शीतला पटले के मार्गदर्शन में रबी सीजन के लिए जिले को लगातार उर्वरक (Fertilizer) की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है. वर्तमान में जिले में 37066 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण कर 32630 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि की तुलना में इस वर्ष अधिक है. इसी प्रकार जिले में 6571 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण कर 6514 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है. कौम्प्लेक्‍स 7805 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण कर 6695 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है और एसएसपी 8884 मीट्रिक टन का भंडारण कर 6650 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है.

जिले के किसान शासन द्वारा निर्धारित 266.50 रुपए यूरिया एवं 1350 रुपए डीएपी पर ही उर्वरक (Fertilizer) की खरीद करें. जिले से रबी वर्ष 2024-25 के लिए 65500 मीट्रिक टन यूरिया की मांग शासन से की गई है, जिस की आपूर्ति की जा रही है. जिले में लगातार उर्वरकों की रैक प्राप्‍त हो रही है.

जिले में डीएपी, एनपीके एवं म्यूरेट औफ पोटाश का भंडारण पर्याप्त मात्रा में है. जिले में डबल लौक को केंद्र से सभी सहकारी समितियों के केंद्रों को यूरिया की आपूर्ति की जा रही है. जो किसान समिति के सदस्य हैं, वे अपनीअपनी समितियों से उर्वरक (Fertilizer) की खरीद करें और बाकी किसान जिले के डबल लौक केंद्रों, विपणन सहकारी समिति, एमपी एग्रो एवं निजी विक्रेताओं के यहां से उर्वरक खरीद सकते हैं.

अधिकांश किसानों द्वारा केवल यूरिया एवं डीएपी उर्वरक (Fertilizer) का ही फसलों में उपयोग किया जा रहा है, जो केवल नाइट्रोजन, फास्फोरस तत्व की ही आपूर्ति करते हैं. पोटाश एक प्रमुख पोषक तत्व है, जिस का फसल के स्वास्थ्य एवं अनाज की गुणवत्ता से सीधा संबंध है. वर्तमान में कौम्प्लेक्स उर्वरक जैसे, 12:32:16, 20:20:0:13 आदि उपलब्ध हैं, जिस में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश तीनों तत्व पाए जाते हैं, जो जिले में पर्याप्‍त भंडारित हैं. इसलिए किसान कौम्प्लेक्‍स उर्वरकों का उपयोग करें.

उपसंचालक, कृषि ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे यूरिया का अनावश्यक भंडारण न करें. जिले में प्राप्त होने वाले उर्वरकों (Fertilizer) को मार्कफेड के डबल लौक, एमपी एग्रो के गोदाम, सहकारी समितियां एवं निजी विक्रेताओं के माध्यम से उर्वरकों (Fertilizer) का वितरण कार्य किया जा रहा है.

जिले के निजी विक्रेताओं के यहां 1580 मीट्रिक टन यूरिया एवं 1110 मीट्रिक टन कौम्प्लेक्‍स भंडारित है. किसान यूरिया उठाव के लिए अपनी भूमि की मूल ऋणपुस्तिका एवं आधारकार्ड साथ ले कर ही जाएं. उर्वरक (Fertilizer) खरीदते समय विक्रेता से कैश मैमो अवश्‍य लें. यदि किसी भी प्रतिष्ठान पर उर्वरक (Fertilizer) अधिक कीमत पर बेची जाती है, तो उस की सूचना संबंधित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी या संबंधित तहसीलदार को दें. कलक्टर के मार्गदर्शन में जिले में उर्वरकों का औद्योगिक गैरकृषि कार्यो में उपयोग, कालाबाजारी, अवैध भंडारण में परिवहन रोकने के लिए टीम का गठन किया गया है, जो विशेष अभियान चलाया जा रहा है. निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 एवं आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम, 1955 के तहत ठोस वैधानिक कार्यवाही की जाएगी.