जिला स्तरीय ‘कृषि स्थायी समिति’ की बैठक हुई संपन्न

बालाघाट : जिला स्तरीय “कृषि स्थायी समिति” की बैठक जिला पंचायत सभाकक्ष में पिछले दिनों सभापति टामेश्वर पटले की अध्यक्षता में संपन्न की गई. बैठक में सहकारिता विभाग, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, “आत्मा समिति”, जिला सहकारी बैंक, कृषि उपज मंडी समिति, मत्स्य विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि अभियांत्रिकी विभाग एवं कृषि से संबंधित अन्य विभागों की योजनाओं की जानकारी, लक्ष्य पूर्ति एवं विभागीय कार्यों की गतिविधियों की समीक्षा की गई.

बैठक में सभापति पटले द्वारा आत्मा परियोजना के अंतर्गत विकासखंड परसवाडा, बालाघाट, लालबर्रा, बिरसा, बैहर, खैरलांजी में स्टाफ के खाली पद को पूरा करने के लिए वरिष्ठालय को पत्र लिखने के निर्देश दिए गए, वहीं उद्यानिकी विभाग द्वारा विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई, जिस में पटले द्वारा पुष्प क्षेत्र विस्तार से संबंधित किसानों की सूची उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया. साथ ही, मसाला क्षेत्र विस्तार एवं सब्जी विस्तार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी ली गई.

इस दौरान सदस्य केसर बिसेन द्वारा केले की फसल के संबंध में जानकारी ली गई, जिस में सहायक संचालक उद्यानिकी द्वारा जानकारी दी गई कि विभाग ‌द्वारा बेरोजगार नौजवानों/युवतियों के लिए लघु उघोग खोलने के लिए विभाग से सब्सिडी प्रदान की जाती है. इच्छुक नौजवान या युवती विभाग के माध्यम से योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.

बैठक में सभापति पटले द्वारा सर्राठी जलासय ग्राम तेकाडी (लालबर्रा) के अंतर्गत मत्याखेट के लिए चल रहे समितियों के विवाद के संबंध में 7 दिसंबर के बाद कृषि फार्म मुरझड़ में बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए.

उपसंचालक, पशु चिकित्सा द्वारा मुर्रा भैंस योजना, नंदीशाला योजना, बकरीपालन योजना, आचार्य विद्यासागर योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. लंपी बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्य के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई. साथ ही, पटले द्वारा आगामी बैठक में जिला विपणन अधिकारी को बैठक में आवश्यक रूप से उपस्थित रहने के लिए निर्देशित किया गया.

बैठक में रबी – 2024 के लिए बीज की उपलब्धता की समीक्षा की गई, जिस में सदस्य केशर बिसेन द्वारा फसल चक्रीकरण के संबंध में चर्चा की गई. कृषि विभाग द्वारा सचालित योजनाओं जैसे राखासुमि. औन ईडिबल औयल (तिलहन), राखासुमि (टरफा), राखासुमि (दलहन), राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के स्वाइल हैल्थ एंड फर्टिलिटी योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के स्वाइल हैल्थ एंड फर्टिलिटी योजना के अंतर्गत नमूना एकत्रीकरण, राखासुमि (खरीफ) वर्ष 2024-25 के विकासखंडवार, मदवार, घटकवार भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों का अनुमोदन लिया गया.

जिले में कृषि उपज मंडी समिति द्वारा निर्मित भवनों की नीलामी की कार्यवाही जल्द से जल्द किए जाने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए. सचिव कृषि उपज मंडी द्वारा जानकारी दी गई कि कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. जल्द ही नीलामी की कार्यवाही की जाने वाली है.

उपसंचालक, कृषि द्वारा सुपर सीडर का उपयोग एवं महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, वहीं बालाघाट में स्थित बीज निगम का कार्यालय बालाघाट से हटा कर सिवनी में शिफ्ट किया जा रहा है एवं उपस्थित कर्मचारी का स्थानांतरण किया जा रहा है, जिस पर सभापति पटले द्वारा वरिष्ठालय को कलक्टर के माध्यम से पत्र प्रेषित करने के लिए निर्देशित किया गया.

बैठक में सदस्य झाम सिंह नागेश्वर, डुलेंद्र ठाकरे, सदस्य मंशाराम मडावी, उपसंचालक, कृषि, राजेश खोबरागड़े, डा. एनडी पुरी (पशुपालन विभाग), पूजा रोडगे (मतस्य विभाग), क्षितिज करहाडे (सहायक संचालक उद्यान), पामेश भगत (सहायक कृषि यंत्री), अर्चना डोंगरे (परि. संचालक आत्मा), सुनील कुमार सोने, पुरुषोत्तम बिसेन (बीज निगम), मनीष मडावी (सचिव, कृषि उपज मंडी) आदि उपस्थित रहे.

एक भी गांव, खेत नहीं बचेगा, सभी जगह पहुंचेगा पानी

दमोह : ब्यारमा नदी पर 14 हजार करोड़ रुपए का प्रोजैक्ट है, जिस का पानी दमोह जिले के पूरे गांवों में पहुंचेगा. जिले का एक भी गांव, खेत नहीं बचेगा, सभी के खेतों पर पानी पहुंचेगा. आने वाले समय में दमोह जिले में पानी की कोई दिक्कत नहीं होगी. डेम बनना बहुत बड़ा काम है. डेम से पूरे जिले में पानी फैलाना और ढाई लाख हेक्टेयर की सिंचाई होना है, बहुत बड़ी बात है.

जिले में सिर्फ 2 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होने के लिए बची है, बाकी में पहले से ही सिंचाई हो रही है, 4 डेम बने हुए हैं. इस आशय की बात प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने ग्राम नंदरई में प्रथम आगमन पर एक सभा को संबोधित करते हुए कही.

राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि 3 महीने पहले मुख्यमंत्री आए थे, हम ने उन से जब बात की कि ब्यारमा नदी पर एक डेम बनाया जाए, तो उन्होंने कहा कि इस की मंजूरी कर देंगे. बताते हुए खुशी है कि उस का टेंडर भी लग गया है, 30 करोड रुपए का सर्वे का टेंडर लग गया है, जिस में आप सभी की जिम्मेदारी है कि जब एजेंसी के लोग आएं तो कोई भी खेत न छूटे, एक बार पूरा एस्टीमेट या पूरी योजना बन गई. फिर कोई छूट गया, तो बहुत दिक्कत होती है.

राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि यहां के तालाबों में पानी की आवक नहीं हैं, जो कि सब से बड़ी दिक्कत है, खेतों से पाइपलाइन डल रही है, यह प्रयास किया जा रहा हैं कि साजली नदी से 2-3 किलोमीटर की पाइपलाइन मंजूर हो जाए. नंदरई और बांसा की सब से बडी सिंचाई की समस्या हल हो जाएगी.

उन्होंने कहा कि टंकी का काम शुरू हो जाएगा, इस में भी सालडेढ़ साल लगेगा, लेकिन हर घर तक टोंटी से पानी पहुंचेगा. छूटे हुए गांवों का फिर से सर्वे करा कर उन को जोड़ने का काम किया जा रहा है. खासतौर से नंदरई और बांसा जैसे गांव जो पूरे क्षेत्र में फैले हुए हैं, वहां सब से ज्यादा इस की आवश्यकता है, पानी गांव में तो आ गया है, लेकिन वहां नहीं पहुंचा.

राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि 40 फीसदी आबादी गांव में रह रही है, बाकी 60 फीसदी बाहर रह रहे हैं, यही स्थिति है, उस के लिए सर्वे किया जा रहा हैं. सर्वे के बाद आप सभी के घर पानी पहुंचाने का काम होगा.

इस अवसर पर उपाध्यक्ष जिला पंचायत मंजू धर्मेंद्र कटारे, गौरव पटैल, खरगराम पटेल, ललित पटेल, खिलान अहिरवार, नरेश सराफ, सुखई दाऊ, अशोक सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक, पंचायत प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि मौजूद थे.

पालतू पशुओं की होगी गिनती – जिले में 21वीं पशु संगणना का काम शुरू

नीमच : उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं ने बताया कि जिले में 21वीं पशु संगणना 2024 का काम प्रारंभ किया जा चुका है. पशु संगणना का यह काम भारत सरकार का राष्ट्रीय कार्यकम है. यह कार्य प्रत्येक 5 साल में किया जाता है.

जिले में 21वीं पशु गणना का काम ग्रामीण क्षेत्रों में 48 प्रगणकों एवं शहरी क्षेत्रों में 17 प्रगणकों और 7 सुपरवाइजरों द्वारा किया जा रहा है. नीमच जिले के तीनों विकासखंडों में पशुगणना का काम 4 माह में पूरा किया जावेगा.

पशु गणना का काम औनलाइन एप के माध्यम से किया जा रहा है. पशु गणना में सभी 16 प्रकार के पालतू पशुओं की गणना घरघर जा कर की जाएगी, जिस में एप पर पशु के प्रकार को दर्ज करने के लिए विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्‍त की जाएगी. साथ ही, क्षेत्र के अंतर्गत पाए जाने वाले सभी प्रकार के पशुओं के नस्लों की जानकारी भी ली जाएगी.

पशु चिकित्‍सा विभाग द्वारा जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं की सहीसही जानकारी विभागीय अमले को अवगत कराएं, जिस से कि भविष्य में शासन द्वारा पशुपालन विकास की योजनाओं को मूर्त रूप दिया जा सके.

नवाचार देखने टीम के साथ पहुंचे कलक्टर

पांढुरना : कलक्टर अजय देव शर्मा द्वारा एपीसी बैठक के परिप्रेक्ष्य में 6 नवंबर, 2024 को विभाग द्वारा किए जा रहे कामों की समीक्षा की गई. उपसंचालक, कृषि, जितेंद्र कुमार सिंह द्वारा पांढुरना जिले में खरीफ फसल कपास का क्षेत्र विस्तार एवं कपास के साथ अंतरवर्तीय फसल के रूप में अरहर फसल अंतरवर्तीय पद्धति से कपास की खेती, ग्रीष्मकालीन ज्वार, मूंगफली, मक्का फसल को बढावा देने की बात कही गई.

पांढुरना कलक्टर अजय देव शर्मा द्वारा सभी कृषि संबंध विभाग उपसंचालक, पशुपालन, उपसंचालक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण एवं मैदानी अधिकारियों के साथ हिवरासेनाडवार के प्रगतिशील किसान नामदेव रबड़े के खेत में पहुंच कर उन के द्वारा किए जा रहे नवाचार पपीते की खेती, टमाटर, फूलगोभी, केले की खेती का निरीक्षण किया गया.

किसान नामदेव रबड़े द्वारा किए जा रहे नवाचार की सराहना की गई एवं जिले के सभी किसानों को इस तरह की पारंपरिक खेती के साथ ही नवाचार के रूप में अन्य फसलों को अपनाने की अपील की गई, जिस से किसानों को प्रति इकाई क्षेत्रफल से अच्छा लाभ प्राप्त हो सकेगा.

निरीक्षण के क्रम में प्रगतिशील किसान पूरन सिंह खानवे के खेत में पहुंच कर संतरे, पिंक ताइवान अमरूद की फसल का निरीक्षण किया गया.

निरीक्षण के दौरान उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग डा. एचजीएस पक्षवार, सहायक संचालक, कृषि, दीपक चौरसिया, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सुनील गजभिये, विनोद लोखंडे, नितिन डेहरिया, राहुल सरयाम, साक्षी खरात, उद्यानिकी विभाग के सिध्दार्थ दुपारे, पशु चिकित्सा विभाग के केतन पांडे एवं व्यापारी संघ के निकेश खानवे, आलोक नाहर, संजय, रूपेश कसलीकर, किशोर डाले, रूपेश राजगुरू एवं प्रगतिशील किसान उपस्थित थे.

‘अनुदान’ पोर्टल पर कृषि यंत्र खरीदने के लिए तुरंत करें आवेदन

सतना : संचालनालय कृषि अभियांत्रिकी मध्य प्रदेश भोपाल द्वारा ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर कृषि यंत्रों के लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं. सहायक कृषि यंत्री एचपी गौतम ने बताया कि किसान ड्रोन के आवेदन औन डिमांड श्रेणी के अंतर्गत जिले के इच्छुक आवेदक ड्रोन संचालित करने के लिए 25 नवंबर, 2024 से ड्रोन पायलट लाइसैंस के प्रशिक्षण के लिए कौशल विकास इंदौर में आवेदन कर सकते हैं. प्रशिक्षणार्थियों का चयन ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा.

आवेदन के लिए ड्रोन पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यालय कृषि यंत्री इंदौर के अंतर्गत कौशल विकास केंद्र में प्रारंभ किया जा रहा है. इच्छुक आवेदक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने के उपरांत दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्यालय कृषि यंत्री इंदौर में दस्तावेज सत्यापन एवं डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा. इस के लिए आवेदक की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास एवं आयु 18 से 65 वर्ष होनी चाहिए.

आवेदक को ड्रोन पायलट करने के लिए 17,000 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट सहायक कृषि यंत्री इंदौर के नाम पर कार्यालय कृषि यंत्री इंदौर में जमा करना होगा.

आवेदक के पास सरकार द्वारा जारी पहचान प्रमाणपत्र होना चाहिए. किसान ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत दस्तावेज सत्यापन के समय आवेदक को स्वयं की मैडिकल फिटनेंस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है. मैडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र का प्रारूप डाउनलोड करने के लिए मोबाइल फोन नंबर 9926920636 पर संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

नरवाई न जलाएं, बनाएं जैविक खाद

रीवा : कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों को धान और अन्य फसलों को काटने के बाद बचे हुए अवशेष (नरवाई) नहीं जलाने की सलाह दी गई है. इस संबंध में उपसंचालक, कृषि, यूपी बागरी ने कहा है कि नरवाई जलाने से एक ओर जहां खेतों में अग्नि दुर्घटना की आशंका रहती है, वहीं मिट्टी की उर्वरता पर भी विपरीत असर होता है. इस के साथ ही धुएं से कार्बनडाईऔक्साइड की मात्रा वातावरण में जाती है, जिस से वायु प्रदूषण होता है. मिट्टी की उर्वराशक्ति लगभग 6 इंच की ऊपरी सतह पर ही होती है. इस में खेती के लिए लाभदायक मित्र जीवाणु उपस्थित रहते हैं. नरवाई जलाने से यह नष्ट हो जाते हैं, जिस से भूमि की उर्वराशक्ति को नुकसान होता है.

नरवाई जलाने के बजाए यदि फसल अवशेषों को एकत्रित कर के जैविक खाद बनाने में उपयोग किया जाए, तो यह बहुत लाभदायक होगा. नाडेप और वर्मी विधि से नरवाई से जैविक खाद आसानी से बनाई जा सकती है. इस खाद में फसलों के लिए पर्याप्त पोषक तत्व रहते हैं. इस के आलावा खेत में रोटावेटर अथवा डिस्क हैरो चला कर भी फसल के बचे हुए भाग को मिट्टी में मिला देने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है.

उपसंचालक, कृषि, यूपी बागरी ने बताया कि धान की फसल के बाद नरवाई को खाद में बदलने और बिना जुताई किए बिना गेहूं, चना और सरसों की बोनी के लिए सुपर सीडर और हैप्पी सीडर का उपयोग बहुत लाभकारी है. इस से नरवाई नष्ट होने के साथ जुताई और बोआई का खर्च और समय दोनों बचेगा. साथ ही, नरवाई से खाद भी बन जाएगी.

उपसंचालक ने बताया कि नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से 60,000  से अधिक किसानों को एसएमएस भेज कर जानकारी दी गई है. इन्हें सुपर सीडर के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है. इस साल जिले में किसानों द्वारा 30 सुपर सीडर खरीदे गए हैं, जिन के उपयोग से नरवाई प्रबंधन किया जा रहा है और आग लगने की घटनाओं में कमी आई है.

जैविक खेती करने वाले किसानों को मिलेगा इंसेंटिव

दमोह : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने किसानो से चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि हमें प्राकृतिक खेती की ओर जाना होगा, हर किसान के मनमस्तिष्क में बैठ गया है कि जितना डीएपी और यूरिया डालेंगे उतनी ही पैदावार होगी, ऐसा नहीं है. इस सोच को बदलना पड़ेगा. हम ने इन सब के उपयोग से धरती को बीमार कर दिया है. इस से इनसान, पशुपक्षी कोई भी प्राणी स्वस्थ नहीं रह सकता है, इसलिए प्राकृतिक खेती की ओर जाना होगा.

उन्होंने कहा कि किसान से यह नहीं कहा जा रहा है कि पूरे के पूरे खेत में प्राकृतिक खेती करें. यदि आप के पास 5 एकड़ जमीन है, तो एक एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करिए. राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि वे खुद भी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, कभी भी रासायनिक खाद नहीं डालते हैं, जितने भी किसान डीएपी, यूरिया और पैस्टिसाइड डाल रहे हैं, उतनी ही पैदावार वे ले रहे हैं.

इस अवसर पर विधायक, दमोह, जयंत कुमार मलैया, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह लोधी, कलक्टर सुधीर कुमार कोचर सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे.

उन्होंने कहा कि हम ने खेत के केंचुओं को मार डाला, केंचुए किसान के मित्र हैं. खाद पर 15 लाख करोड़ रुपए सालाना इस में भारत सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है. यदि आप प्राकृतिक खेती करेंगे तो, उन्हें इंसेंटिव देंगे.

कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 10 सालों में किसान सम्मान निधि देने का काम किया. उन्होंने एमएसपी 10 साल में इतनी बढ़ाई है कि यदि आजादी के बाद इस दर से एमएसपी बढ़ती तो आज किसान के घर में समृद्धि रहती, परंतु ध्यान नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि साल 2014 में 1,250 रुपए एमएसपी थी, जो मोदी के आने के बाद अभी 2,625 रुपए हो गई है.

उन्होंने कहा कि जैविक खेती में और प्राकृतिक खेती में बहुत अंतर है. प्राकृतिक खेती में किसान को बाजार से 1 रुपए का सामान लाने की जरूरत नहीं होती है. आज किसान की लागत बढ़ गई है.

केंद्रीय राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने मिट्टी परीक्षण कराने पर बल देते हुए कहा कि इस के लिए अब जन जागरण अभियान चलाया जाए. इस दौरान उन्होंने जिले के विभिन्न स्थानों से आए जैविक खेती कर रहे किसानों से चर्चा की और उन का उत्साहवर्धन किया.

बगैर पीओएस (POS) मशीन के बिना उर्वरक विक्रय करने पर रजिस्ट्रेशन होगा रद्द

नीमच : उपसंचालक, कृषि, नीमच द्वारा मैसर्स भंडारी उर्वरक बीज भंडार, प्रो.- राजेश भंडारी, चीताखेड़ा द्वारा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 का उल्‍लंघन करने पर उन का उर्वरक पंजीयन क्र. RS/432/1401/49/2022, वैधता अवधि 22 अगस्त, 2027 को तत्‍काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

कृषि विभाग द्वारा उर्वरक विक्रेता मैसर्स भंडारी उर्वरक बीज भंडार, चीताखेड़ा का उर्वरक निरीक्षक द्वारा 21 नवंबर, 2024 को निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान एनपीके के 26 बैग एवं यूरिया के 270 बैग पाए गए, जिस में से 135 बैग लाइसैंस में दर्ज भंडारण स्‍थान के अन्‍यत्र स्‍थान पर पाए गए.

उक्‍त उर्वरकों के संबध में ’ओ’ फार्म चाहे गए, जिसे संबंधित द्वारा प्रस्‍तुत नहीं किया गया और मौके पर विक्रेता फर्म द्वारा भंडार पंजी का संधारण नहीं करना, मूल्‍य सूची और लाइसैंस का प्रदर्शन नहीं करना, फर्म पर फर्म के नाम का बोर्ड नहीं लगाना पाया गया. साथ ही, संबंधित फर्म के लाइसैंस में दर्ज प्रो. राजेश भंडारी के स्‍थान पर अन्‍य व्‍यक्ति रजनीश जैन द्वारा बिना पीओएस (POS) मशीन के उर्वरकों का विक्रय करना पाया गया, जो कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 का स्‍पष्‍ट उल्‍लंघन होने से पंजीयन निलंबित किया गया है.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए फार्मर रजिस्ट्री जरूरी

रतलाम : कलक्टर राजेश बाथम ने समस्त संबंधित हितग्राहियों से अपील की है कि वह अपनी फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से करवा लें. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का निरंतर लाभ प्राप्त करने के लिए फार्मर रजिस्ट्री बनाना अनिवार्य किया गया है. सर्वप्रथम अपने आधारकार्ड नंबर से मोबाइल फोन नंबर लिंक करें, इस के उपरांत अपने नजदीकी सीएससी केंद्र अथवा गांव के पटवारी के माध्यम से फार्मर रजिस्ट्री करवा सकते हैं अथवा व्यक्ति स्वयं लिंक पर जा कर मोबाइल नंबर से रजिस्टर कर आधार ओटीपी के माध्यम से स्वयं भी फार्मर रजिस्ट्री कर सकते हैं. एसएलआर अभिषेक मालवीय ने बताया कि आगामी समय में फार्मर आईडी अन्य योजनाओं में भी अनिवार्य होगी.

जिले के मैदानी अमले को निर्देशित किया गया है कि अधिक से अधिक प्रचारप्रसार कर किसानों की सहभागिता से फार्मर आईडी जेनरेट करने की कार्रवाई पूरी करवाई जाए. फार्मर रजिस्ट्री का उद्देश्य है कि समस्त भूधारियों के आधार लिंक्ड रजिस्ट्री तैयार करना है, जिस में भूधारियों को एक अन्य फार्मर आईडी प्रदान किया जाएगा. फार्मर रजिस्ट्री के उद्देश्यो में योजनाओं का नियोजन, लाभार्थियों का सत्यापन, कृषि उत्पादों का सुविधाजनक वितरण, प्रदेश के समस्त किसानों को राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सम और पारदर्शी तरीके से प्रदान करने के लिए लक्ष्य निर्धारण एवं पहचान किसानों के लिए कृषि ऋण व अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए कृषि सेवाओं की सुगमता शामिल है.

फार्मर रजिस्ट्री के लाभ के अंतर्गत पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लिए फार्मर रजिस्ट्री के अनिवार्यता की शर्त पूर्णता के साथ हितग्राहियों को लाभ प्राप्त करने में सुगमता रहेगी. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सैचुरेशन फसल बीमा योजना का लाभ प्राप्त करने में सुगमता, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद में किसानों के पंजीयन में सुगमता और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए बारबार सत्यापन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

फार्मर रजिस्ट्री का क्रियान्वयन पोर्टल पटवारी, स्थानीय युवा और किसान के लिए फार्मर रजिस्ट्री का क्रियान्वयन पोर्टल https://mpfr.agristack.gov.in है. मोबाइल एप Farmer registry MP है, मोबाइल एप Farmer sahayak MP App (स्थानीय युवा हेतु )के माध्यम से किया जाना है.

कलक्टर ने सुनेरा के किसान के खेत में ड्रोन फ्लाई का किया अवलोकन, 2 साल से नहीं जलाई पराली

शाजापुर : कलक्टर ऋजु बाफना ने पिछले दिनों गांव सुनेरा के किसान मनोहर सिंह गोठवाल के खेत में जा कर ड्रोन से किए जा रहे नैनो यूरिया के छिड़काव का अवलोकन किया. यहां कलक्टर ने किसान मनोहर सिंह एवं ड्रोन चलाने वाले संजय गुर्जर से चर्चा कर पूरी प्रक्रिया जानी.

किसान मनोहर गोठवाल ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के उपयोग एवं पराली व फसलों के अवशेष जलाने के कारण भूमि की उर्वराशक्ति कम हो रही है, इसे देखते हुए जैविक खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं.

वे विगत 2 सालों से अपने खेतों में पराली नहीं जलाते, बल्कि रोटावेटर एवं अन्य उपकरणों की सहायता से फसलों के अवशेषों को काटते हैं और गहरी जुताई कर उन्हें भूमि में ही नष्ट होने के लिए छोड़ देते हैं. इस से फसलों के अवशेष से खाद भी बन रही है और भूमि की उर्वराशक्ति में वृद्धि भी हो रही है.

इस मौके पर इफको के महेंद्र पटेल ने ड्रोन से स्प्रे की जानकारी दी. इस अवसर पर उपसंचालक, कृषि, केएस यादव और सुनेरा गांव के सरपंच सुखराम यादव भी उपस्थित थे.