कृषि एवं कौशल विकास के साथ ही आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है

25 दिसंबर, 2023 को मध्य प्रदेश में भाजपा की डा. मोहन यादव सरकार में गौतम टेंटवाल को जब राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया था, तब न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देशभर के कृषि विज्ञान के छात्रों में खुशी और रोमांच का माहौल था, क्योंकि ऐसा बहुत कम होता है कि कृषि विज्ञान के छात्र सक्रिय राजनीति में आ कर अपना कैरियर बनाएं और मंत्री पद तक पहुंचें. लेकिन यह सब अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इस के पीछे गौतम टेंटवाल की अथक मेहनत,  लगन, समर्पण और प्रतिभा का भी योगदान था.

आरएके एग्रीकल्चर कालेज, सीहोर से बीएससी एग्रीकल्चर और फिर एमएससी पर्यावरण में करने के बाद गौतम टेंटवाल ने राजनीति विज्ञान से भी एमए की डिगरी ली और अब मंत्री पद की भारी व्यस्तता होने के बाद भी पीएचडी करने की इच्छा रखते हैं.

यही वह जज्बा है, जो किसी को भी शीर्ष पर पहुंचा देता है. हालांकि, गौतम टेंटवाल छात्र जीवन से ही आरएसएस के जरीए सक्रिय राजनीति में रहे हैं, लेकिन इसे पेशा उन्होंने बनाया साल 2008 में, जब राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा से वे पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे.

पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से जीत का परचम लहराया, तो उन्हें मंत्री पद से नवाजा गया और विभाग भी अहम मिला कौशल विकास यानी स्किल डवलपमैंट का, जिस पर इन दिनों सरकार खासा ध्यान दे रही है और तरहतरह की योजनाएं भी संचालित भी कर रही है.

भोपाल में गौतम टेंटवाल से उन के निवास पर लंबी बात हुई. पेश हैं, उस के महत्वपूर्ण अंश :

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सवाल : आप कृषि स्नातक हैं और अब कौशल विकास मंत्री हैं इस नाते कृषि और स्किल डेवलपमेंट को कैसे कनेक्ट करते हैं?

जवाब : यह बहुत अहम और अच्छा सवाल है, जिसे बोलचाल की भाषा में कहें तो खेतीकिसानी और कौशल विकास का गहरा और पुराना नाता है. किसान हमेशा से ही उपलब्ध साधनों, अनुभवों और नई तकनीक को अपनाता रहा है और कृषि की भाषा में कहें तो खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और मत्स्यपालन सहित कृषि आधारित दूसरे उद्योगों में कौशल विकास के जरीए रोजगार हासिल किए जा सकते हैं. इस के लिए जरूरी है कि इस डिजिटल युग में किसानों के लिए औनलाइन मार्केटिंग, ई-कौमर्स और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए. कौशल विकास इस में अहम रोल निभाता है.

सवाल : वह कैसे, जरा विस्तार से बताएंगे?

जवाब : जी. कुछ योजनाओं का जिक्र मैं यहां कर रहा हूं, जो बहुत लोकप्रिय हो रही हैं और किसानों के लिए लाभप्रद भी हैं. पहली है ‘ड्रोन दीदी’, जिस के तहत किसानो को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ कर खेती की पैदावार व कीटनाशकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खासतौर से महिलाओं के लिए लौंच किया गया है. इस में महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी जाती है और ड्रोन भी प्रदान किए जाते हैं. मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी इस के उत्साहजनक परिणाम आ रहे हैं.

दूसरी अहम योजना पीएमकेवायवाय यानी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना है, जिस के तहत युवाओं को कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है. एक और योजना है, जिस का जिक्र मैं खासतौर से करना चाहूंगा. वह है राष्ट्रीय कृषि विस्तार कार्यक्रम. इस में किसानों को नई तकनीक और विधियों की ट्रेनिंग दी जाती है. इसी तरह ई-नाम में किसानों को डिजिटल प्लेटफार्म पर अपनी पैदावार बेचने का मौका मिलता है.

सवाल : क्या वजह है कि किसान अभी भी नई तकनीक अपनाने से हिचकते हैं?

जवाब : नहीं, ऐसा नहीं है. किसान अब तेजी से नई तकनीक अपना रहा है, लेकिन यह भी सही है कि सभी किसान परंपरागत खेती का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं. देखिए, कौशल विकास का सीधा सा मतलब है, लोगों को विभिन्न कामों में माहिर बनाना. इस में तकनीकी जानकारी, आधुनिक उपकरणों और नई विधियों का प्रशिक्षण शामिल है.

इसी तरह कौशल विकास का मकसद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के मौके पैदा करना है. कृषि के क्षेत्र में कौशल विकास किसानों को अधिक उत्पादन करने और बेहतर तकनीकों को अपनाने में मदद करता है. कौशल विकास के जरीए किसान आधुनिक उपकरणों और तकनीक का उपयोग करना सीखते हैं. मसलन, ड्रिप इरिगेशन, जैविक खेती और हाईड्रोपोनिक्स. इस के अलावा कटाई के बाद फसल को सही तरीके से संरक्षित करना और फसल को बाजार में वाजिब दाम में बेचना भी तो कौशल विकास ही है.

सवाल : आजकल हर कहीं आत्मनिर्भर भारत की बात होती है. इस में कृषि और कौशल विकास कहां फिट होते हैं?

जवाब : देखिए, कृषि न केवल की मध्य प्रदेश की, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की भी रीढ़ है. हमें जोकुछ भी मिलता है, वह खेतीकिसानी से ही मिलता है. मेरा मानना है कि कृषि और कौशल विकास का तालमेल ही ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बना सकता है. अगर किसान नए कौशल सीखते, अपनाते हैं और उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाएं, तो वे न केवल अपनी आय को बढ़ा सकते हैं, बल्कि देश की माली हालत को भी मजबूत बना सकते हैं. कृषि एवं कौशल विकास को साथ ला कर ही आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

गांव ढ़ोलीखेड़ा बनेगा स्मार्ट गांव 

उदयपुर : 30 नवंबर, 2024. कृषि विज्ञान केंद्र, भीलवाड़ा द्वारा राज्यपाल स्मार्ट विलेज पहल कार्यक्रम के तहत एकदिवसीय वरिष्ठ नागरिक सेवार्थ शिविर का आयोजन चयनित गांव ढ़ोलीखेड़ा में किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर डा. अजीत कुमार कर्नाटक ने बताया कि राज्यपाल स्मार्ट विलेज के तहत चयनित गांव ढ़ोलीखेड़ा को अब स्मार्ट गांव बनाया जाएगा.

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत कृषि के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी का समावेश कर गांव में फसल उत्पादन, पशुपालन, मुरगीपालन, बागबानी द्वारा किसानों को अधिक आमदानी अर्जित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा.

उन्होंने आगे यह भी बताया कि एमपीयूएटी ने स्मार्ट विलेज योजना के अंतर्गत पूरे सेवा क्षेत्र में 5 गांवों का चयन किया है और उन्हें उसी तरह स्मार्ट गांवों में परिवर्तित किया जाएगा, जैसा कि हम ने पिछले 3 सालों में मदार में किया था.

डा. आरएल सोनी, निदेशक, प्रसार शिक्षा ने बताया कि कृषि में कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए किसानों को औषधीय फसलों एवं व्यापारिक फसलों की उन्नत खेती करने की आवश्यकता है. केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. सीएम यादव ने बताया कि इस शिविर में 165 वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया, जिन्हें निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और वृद्धावस्था पेंशन, ईकेवाईसी खाते की नकल, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, उन्नत कृषि यंत्रों पर अनुदान, वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना आदि जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी के साथ ही आ रही समस्याओं का निवारण किया गया. शिविर में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य की जांच कर दवाई भी उपलब्ध करवाई गई.

इस अवसर पर टीएसपी कैपिटल योजना के तहत मिनी औयल मिल और सोलर थ्रैशर का उद्घाटन कुलपति डा. अजीत कुमार कर्नाटक द्वारा किया गया. इस दौरान सरपंच बद्री लाल जाट, डीन सीओए, भीलवाड़ा, मुख्य वैज्ञानिक डीएफआरएस, भीलवाड़ा, केवीके के अन्य कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थिति थे.

66 मीटर लंबी पगड़ी बांध कर कुलपति का किया सम्मान

कृषि विज्ञान केंद्र, शाहपुरा के सेवा क्षेत्र के बोरानी गांव के लोगों द्वारा कुलपति डा. अजीत कुमार कर्नाटक को सम्मानित किया गया. वहां 6 गांवों के 66 किसानों ने 66 मीटर लंबी पगड़ी बांध कर उन के 66वें साल के जीवन की शुरुआत की व बधाई दी.

डा. आरएल सोनी ने निदेशक प्रसार शिक्षा का कार्यभार संभाला

उदयपुर : डा. आरएल सोनी ने अपने पूरे सर्विस काल में कृषि प्रसार क्षेत्र में रहते हुए कृषि एवं किसानों के उत्थान के लिए काम किया. उन के कुशल नेतृत्व के द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, बांसवाड़ा को 2 बार उत्कृष्ट केंद्र का पुरस्कार भी मिला. साथ ही, नीति आयोग द्वारा बांसवाड़ा केंद्र को अतुलनीय कार्यों के लिए ‘ए’ रेटिंग भी मिला.

कृषि विज्ञान केंद्र, वल्लभनगर के प्रथम प्रभारी रहते हुए केंद्र के भवन, किसानघर, प्रदर्शन इकाइयों की स्थापना की. इस के अलावा किसानों को सर्वोच्च मानते हुए उन की खेती को विज्ञान एवं तकनीकी से जोड़ कर अधिक उत्पादन, लाभकारी व टिकाऊ बनाने के लिए भी जमीनी स्तर पर काम किया. किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़ी तकनीकियों को लोगों तक पहुंचाया.

दक्षिणी राजस्थान के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसानों की छोटी जोत के लिए संबंधित कृषि प्रणाली के माध्यम से आय में बढ़ोतरी की. साथ ही, प्रसार शिक्षा निदेशालय के अतंर्गत कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. इस के अलावा उन्होंने लघु व सीमांत किसानों के लिए कम लागत की खेती जैसे जैविक खेती, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया.

डा. आरएल सोनी का कहना है कि किसानों की आय में अधिक वृद्धि करने व कृषि तकनीकियों की अधिक जानकारी दिलाने के लिए आईटी व एआई तकनीकियों के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. किसानों के खेतों को यंत्रीकरण व सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग से कृषि लागत में कमी लाने पर जोर दिया जाएगा.

स्मार्ट गूगल क्लासरूम में होगी पढ़ाई

उदयपुर, 5 अक्टूबर। महाराणा प्रताप कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सीटीएई, उदयपुर गर्व से विद्युत अभियांत्रिकी विभाग में अत्याधुनिक स्मार्ट क्लासरूम का उद्घाटन किया गया. मुख्य अतिथि डॉ. आर. सी. अग्रवाल उपमहानिदेशक (कृषि शिक्षा आईसीएआर) थे एवं अध्यक्षता माननीय डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक कुलपति (एमपीयूएटी)ने की. डॉ. कर्नाटक ने कहा की नए स्मार्ट क्लासरूम में उन्नत तकनीकी उपकरण और इंटरैक्टिव शिक्षण संसाधन शामिल हैं, जो एक समृद्ध और सहयोगी शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किए गए हैं.

स्मार्ट बोर्ड, उच्च-गुणवत्ता वाले प्रक्षिप्तक, सहयोगी कार्यस्थल, और एकीकृत ऑडियो-विजुअल सिस्टम जैसी सुविधाओं के साथ, ये क्लासरूम शिक्षण और अध्ययन के अनुभव को बढ़ाने का उद्देश्य रखते हैं. डॉ. आर. सी. अग्रवाल ने कहा कि “इन स्मार्ट क्लासरूम का उद्घाटन हमारे शैक्षणिक उत्कृष्टता की खोज में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है”. हमें विश्वास है कि शिक्षा में ये तकनीकी निवेश हमारे छात्रों को अपने पूर्णतम क्षमता तक पहुंचने के लिए सशक्त करेगी.

अधिष्ठाता डॉ अनुपम भटनागर का कहना है कि यह पहल सीटीएई के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है. डॉ. विक्रमादित्य दवे का कहना है कि “हम ऐसे स्मार्ट क्लासरूम लॉन्च करने के लिए उत्साहित हैं जो हमारे छात्रों को नवीनतम और सबसे प्रभावी सीखने के वातावरण प्रदान करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.

हमारे पाठ्यक्रम में प्रौद्योगिकी के एकीकरण से न केवल शैक्षणिक अनुभव समृद्ध होगा, बल्कि यह हमारे छात्रों को आधुनिक कार्यबल की मांगों के लिए तैयार करेगा जिससे कॉलेज के पाठ्यक्रम को यूट्यूब पर प्रसार एवं पीडीएफ में नोट्स एवं गूगल क्लासरूम से कक्षायें संचालित हो सकेगी.” डॉ सुनील जोशी निदेशक प्लानिंग एंड मॉनिटरिंग, निदेशक अनुसंधान अरविंद वर्मा, इलेक्ट्रिकल विभाग के सदस्य डॉ जयकुमार मेहरचंदानी, डॉ नवीन जैन, डॉ विनोद कुमार यादव भी उपस्थित थे.

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मिलेट हट का उद्घाटन

विश्वविद्यालय के सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय में शनिवार को मिलेट हट का उद्घाटन डॉ राकेश चंद्र अग्रवाल, उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा), आईसीएआर, नई दिल्ली, द्वारा किया गया. डॉ. अग्रवाल ने बताया कि यह कदम ग्रामीण और शहरी समुदायों में मिलेट्स की खेती और उनके उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है.

इस अवसर पर कुलपति डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने कहा कि यह पहल स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों के पुनरुद्धार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है इसका उद्देश्य मिलेट्स (मोटे अनाज) के महत्व को प्रोत्साहित करना और स्वास्थ्य लाभ के लिए इसके उपयोग को बढ़ावा देना है. विश्वविद्यालय की अधिष्ठता, डॉ. धृति सोलंकी, ने बताया की मिलेट से आस पास के स्थानीय निवासियों एवं आस के ग्रामीण इलाकों के जनमान्य के लिए इसकी महत्ता एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा.

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. हेमू राठौड़, डॉ सरला लखवात एवं डॉ कमला महाजनी ने अपने विचार व्यक्त डॉ रेणु मोगरा द्वारा मिलेट हट व मिलेट से बने उत्पादों की जानकारी दी गयी. इस उद्घाटन के दौरान मिलेट्स से बने विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई.

19 सितंबर से 22 सितंबर तक लगेगा वर्ल्ड फूड इंडिया 2024

नई दिल्ली : केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने आज आगामी मेगा फूड इवेंट- वर्ल्ड फूड इंडिया 2024 की तैयारियों की समीक्षा के लिए नई दिल्ली में स्थित ‘भारत मंडपम’ का दौरा किया. इस का कार्यक्रम का आयोजन 19 सितंबर से ले कर 22 सितंबर, 2024 तक होना है.

इस यात्रा के दौरान चिराग पासवान के साथ मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कार्यक्रम के आयोजन में शामिल भारतीय वाणिज्य और उद्योग महासंघ (फिक्की) व इन्वेस्ट इंडिया के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे. इस दौरे में प्रदर्शनी हाल, सम्मेलन क्षेत्र और अन्य सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण शामिल था, जिन का उपयोग कार्यक्रम के दौरान किया जाएगा.

इस के अलावा चिराग पासवान ने कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा के लिए अधिकारियों और आयोजकों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की. इस में उन्होंने गुणवत्ता और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया.world food india 1

वर्ल्ड फूड इंडिया, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम है. इस का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में नवीनतम नवाचारों, प्रौद्योगिकियों और रुझानों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पूरे विश्व के हितधारकों को एक अनोखा अवसर प्रदान करना है. इस में ज्ञान सत्रों, पैनल चर्चाओं और नेटवर्किंग अवसरों की एक श्रंखला शामिल होगी, जो सहभागिता को बढ़ावा देने और खाद्य प्रसंस्करण के भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई है.

इस कार्यक्रम में अत्याधुनिक प्रदर्शनी स्थल, विशेष मंडप होंगे, जो भारत की समृद्ध क्षेत्रीय खाद्य विविधता को प्रदर्शित करेंगे. साथ ही, स्टार्टअप्स और नवप्रवर्तकों के लिए समर्पित क्षेत्र भी होंगे. ये तत्व भारत के डायनमिक खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र और वैश्विक मंच पर इस के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हैं.

इस आयोजन की तैयारी में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित संबद्ध मंत्रालयों व विभागों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल कर रहा है. मंत्रालय, वर्ल्ड फूड इंडिया- 2024 को एक ऐतिहासिक आयोजन बनाने और वैश्विक खाद्य उद्योग में अग्रणी रूप में भारत की उभरती भूमिका को प्रदर्शित करने के लिए अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है.

किसानों का दल जाएगा कृषि प्रशिक्षण (Agricultural Training) के लिए

रायसेन : उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की राज्य योजनांतर्गत रायसेन जिले के 30 किसानों का दल नोडल अधिकारी और ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी गैरतगंज सुरेंद्र सिंह रघुवंशी के साथ कृषक प्रशिक्षण सहभ्रमण हेतु सीहोर के लिए भेजा गया. कृषक दल को सहायक संचालक उद्यान रमाशंकर द्वारा हरी झंडी दिखा कर भेजा गया.

इस अवसर पर ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी अंजू शर्मा और शाखा प्रभारी पिंकी गाडगे भी उपस्थित रहीं.

भ्रमण सहप्रशिक्षण के लिए भेजने के पूर्व किसानों को मप्र शासन द्वारा संचालित उद्यानिकी की उन्नतशील विभिन्न योजनाएं जैसे फल क्षेत्र विस्तार योजना, सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना, मसाला क्षेत्र विस्तार योजना, ड्रिप, स्प्रिंकलर एवं मिनी स्प्रिंकलर संयंत्र, संरक्षित खेती योजनांतर्गत पौलीहाउस, नैटहाउस निर्माण करना, पौलीहाउस एवं नैटहाउस के अंदर सब्जी एवं फूलों की उच्च तकनीकी से खेती, प्लास्टिक मल्चिंग, जैविक खेती, वर्मी कंपोस्ट यूनिट, पैकहाउस यूनिट, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन एवं अन्य उद्यानिकी की खेती के बारे में अवगत कराया गया.

किसानों के दल को गांव ईटखेडी जिला सीहोर के अंतर्गत फल अनुसंधान केंद्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाई पर प्रशिक्षण एवं फलों, सब्जियों, मसाले की खेती पर प्रशिक्षण दिया जाएगा. उस के बाद सीआईएई भोपाल में भ्रमण दल को उन्नत कृषि यंत्रों के बारे में अवगत कराया जाएगा.

भ्रमण दल सीहोर से इछावर में कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा पुष्प फसल, जैविक खेती, सूक्ष्म सिंचाई, सब्जी, मसाला, फलों की उन्नतशील खेती के विषय में अवगत कराया जाएगा. रात्रि विश्राम किया जाएगा. इस के बाद 8   अगस्त को कृषि विज्ञान केंद्र, सीहोर में कृषि मौसम केंद्र का भ्रमण, आईईपीएसआईएनएम पर प्रशिक्षण एवं उद्यानिकी की विशिष्ट तकनीकी के बारे में बताया जाएगा.

आइडिया को मिल सकती है 25 लाख तक की ग्रांट

हिसार: अगर आप के पास कोई कृषि व कृषि से संबंधित बिजनेस करने का आइडिया है, तो आप को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से स्थापित एग्रीबिजनेस इंक्यूबेशन सैंटर (एबिक) के माध्यम से 25 लाख रुपए तक की अनुदान राशि दिला सकता है.

यह अनुदान राशि एक प्रक्रिया के तहत एचएयू स्थित एबिक के माध्यम से दी जाएगी. इस के लिए आप को सिर्फ चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की वैबसाइट www.hau.ac.in पर 10 सितंबर, 2024 तक औनलाइन आवेदन करना है.

इस सैंटर के माध्यम से युवा छात्र, किसान, महिला व उद्यमी, मार्केटिंग, नेटवर्किंग, लाइसैंसिंग, ट्रेडमार्क व पेटेंट, तकनीकी व फंडिंग से संबंधित प्रशिक्षण ले कर कृषि क्षेत्र में अपने स्टार्टअप को नया आयाम दे सकते हैं. इस के लिए छात्र कल्याण प्रोग्राम ‘पहल’ एवं ‘सफल’-2024 नाम से 3 प्रोग्रामों का विवरण इस प्रकार हैं :

छात्र कल्याण प्रोग्राम : यह प्रोग्राम छात्रों के लिए पहली बार प्रारंभ किया गया है, जो छात्रों को उद्यमी बनाने में मदद करेगा. इस प्रोग्राम के तहत केवल छात्र ही आवेदन कर सकते हैं चयनित छात्र को एक महीने का प्रशिक्षण व 4 लाख रुपए तक की अनुदान राशि प्रावधान की जाएगी. यह राशि चयनित छात्र को एकमुश्त दी जाएगी.

पहल : इस प्रोग्राम के तहत चयनित उम्मीदवार को एक महीने का प्रशिक्षण व 5 लाख रुपए तक की अनुदान राशि प्रावधान की जाएगी. यह राशि चयनित उम्मीदवार को एकमुश्त दी जाएगी.

सफल : इस प्रोग्राम के तहत चयनित उम्मीदवार को एक महीने का प्रशिक्षण व 25 लाख रुपए तक की अनुदान राशि प्रावधान की जाएगी. यह राशि चयनित उम्मीदवार को 2 किस्तों में दी जाएगी.

उन्होंने बताया कि पिछले 5 सालों में 65 स्टार्टअप्स को केंद्रीय कृषि एवं कृषि कल्याण मंत्रालय द्वारा लगभग 7 करोड़ की राशि स्वीकृत की जा चुकी है. कुलपति ने उक्त कार्यक्रमों से संबंधित विवरण पुस्तिका का विमोचन किया.

आवेदकों के लिए आयु व शिक्षा नहीं बनेगी बाध्य

आवेदक को अपने आइडिया का प्रपोजल एचएयू की वैबसाइट www.hau.ac.in पर औनलाइन आवेदन करना है, जोकि नि:शुल्क है. इस के बाद उस आइडिया का यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक व इंक्युबेशन कमेटी द्वारा एक महीने के प्रशिक्षण के लिए चयन किया जाएगा.

एक महीने के प्रशिक्षण के बाद भारत सरकार द्वारा गठित कमेटी आवेदक के आइडिया को प्रस्तुत करवाएगी और चयनित आवेदक को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुदान राशि स्वीकृत की जाएगी.

स्वरोजगार के साथसाथ दूसरे लोगों को भी रोजगार दे पाएंगे

कुलपति ने कहा कि युवाओं के लिए कृषि क्षेत्र में अपना व्यवसाय स्थापित करने का एक सुनहारा अवसर है. एबिक सैंटर से प्रशिक्षण व वित्तीय सहायता ले कर युवा रोजगार खोजने के बजाय रोजगार देने वाले बन सकते हैं. सैंटर के माध्यम से स्टार्टअप्स देश को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे.

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए 10 फीसदी अतिरिक्त अनुदान राशि देने का प्रावधान रखा है. साथ ही, युवा किसान व उद्यमी एबिक सैंटर के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में प्रोसैसिंग, मूल्य संवर्धन, सर्विसिंग, पैकजिंग व ब्रांडिग कर के व्यापार की अपार संभावनाएं तलाश सकते हैं. ये तीनों कार्यक्रम उन को आत्मनिर्भर बनाने में काफी मददगार साबित होंगे. सैंटर से अब तक जुड़े युवा उद्यमी व किसानों ने न केवल अपनी कंपनी का टर्नओवर करोड़ो रुपए तक पहुंचाया है, अपितु उन्होंने दूसरे लोगों को रोजगार भी दिया है.

इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डा. एसके पाहुजा, ओएसडी डा. अतुल ढींगड़ा, प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर डा. राजेश गेरा, मीडिया एडवाइजर डा. संदीप आर्य, एबिक के बिजनेस मैनेजर विक्रम सिंधु व राहुल दुहन मौजूद रहे.

कृषि उद्यमी की अनेक तकनीकों का मिला प्रशिक्षण

कटनी : मध्य प्रदेश शासन ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा आयोजित विकासखंड रीठी के दूरस्थ ग्राम पंचायत नयाखेड़ा में प्रोजैक्ट उन्नति के अंतर्गत मनरेगा में 100 दिवस कार्य कर चुके 35 महिला एवं पुरुषों को कृषि उद्यमी का 13 दिवसीय प्रशिक्षण भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान कटनी के संचालक पवन कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण समन्वयक सुनील रजक और अनुपम पांडे के सहयोग से प्रशिक्षक रामसुख दुबे द्वारा दिया गया.

प्रशिक्षण में अनाज दलहनी व तिलहनी फसलों की खेती और धान की  विधि व अरहर की धरवाड़ विधि से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया. शुष्क खेती और सिंचाई के अंतर्गत स्प्रिंकलर से 80-90 फीसदी पानी की बचत के लिए टपक सिंचाई के उपयोग को सही बतलाया गया.

रोग नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा विरडी और कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए जैव उर्वरक दलहनी फसल के लिए राइजोबियम एक दलीय फसल के लिए एजेक्टोबेक्टर और सभी फसलों के लिए फास्फेटिका से बीजोपचार, भूमि उपचार और जड़कंद उपचार का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया.

वहीं सब्जियों की पौध तैयार करने के लिए नर्सरी प्रबंधन एवं औषधीय पौधों के विषय में बताया गया. नियंत्रित तापमान पर सब्जियों एवं फूलों की खेती के लिए पौलीहाउस और कृषि के लिए उन्नत कृषि यंत्रों के अंतर्गत जुताई, बोआई, निंदाई, गुड़ाई एवं कटाईगहाई के यंत्रों के उपयोग और कस्टम हायरिंग केंद्र लगाने के लिए शासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दी गई. पशुपालन से लाभ, गाय, भैंस एवं बकरी की नस्ल, दुग्ध उत्पादन, संतुलित पशु आहार, विभिन्न रोग एवं उन के नियंत्रण व टीकाकरण चारा, बरसीम, ज्वार, बाजरा, मक्का एवं नेपियर घास से अधिक दूध उत्पादन प्राप्त करने के विषय में बताया गया.

प्रशिक्षण में सरपंच खिलावन सिंह, सचिव रामस्वरूप पटेल एवं रोजगार सहायक प्रकाश कुमार और तमाम प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे.

फलफूल, सब्जी और मधुमक्खीपालन पर फ्री ट्रेनिंग (Free Training)

हिसार: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान द्वारा 18 से 20 जून तक नर्सरी रेजिंग (फल, फूल, सब्जी) और 24 से 26 जून तक मधुमक्खीपालन पर 3 दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में देश व प्रदेश से किसी भी वर्ग, आयु के इच्छुक महिला व पुरुष भाग ले सकेंगे.

सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान के सहनिदेशक (प्रशिक्षण) डा. अशोक गोदारा ने बताया कि प्रशिक्षण में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय की तरफ से प्रमाणपत्र दिए जाएंगे. प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों द्वारा उत्पादन तकनीकों की जानकारी दे कर युवाओं का कौशल विकास किया जाएगा. व्यावहारिक ज्ञान के लिए प्रशिक्षण से संबंधित स्थापित इकाइयों का भी भ्रमण करवाया जाएगा.

यह प्रशिक्षण नि:शुल्क होगा. इच्छुक युवक व युवतियां पंजीकरण के लिए सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान में उपर्युक्त प्रशिक्षण की तारीख को ही सुबह 7 बजे पहुंच कर अपना पंजीकरण करवा कर प्रशिक्षण में भाग ले सकते हैं.

यह संस्थान विश्वविद्यालय के गेट नंबर-3, लुदास रोड पर स्थित है. प्रशिक्षण में प्रवेश पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा. पंजीकरण के लिए उम्मीदवारों को एक फोटो व आधारकार्ड की फोटोकौपी साथ ले कर आनी होगी.

एमपीयूएटी को प्रौद्योगिकी (Technology) पर 32 पेटेंट

उदयपुर : क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति संभाग चतुर्थ-अ की बैठक 2 मई, 2024 को कृषि अनुसंधान केंद्र, उदयपुर में आयोजित की गई. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलपति डा. अजीत कुमार कर्नाटक ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने गत वर्षों में विभिन्न प्रौद्योगिकी पर 32 पेटेंट प्राप्त किए. साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर बकरी की 3 नस्लें एवं भैंस की एक नस्ल को रजिस्टर्ड कराया. गत वर्ष को विश्वविद्यालय ने मिलेट वर्ष के रूप में मनाया एवं एक पिक्टोरियल गाईड भी जारी की.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि पिछले वर्ष अफीम की चेतक किस्म, मक्का की पीएचएम-6 किस्म के साथ असालिया एवं मूंगफली की किस्में विकसित की. उन्होंने सभी वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि सभी फसलों की नई किस्में विकसित की जाएं, ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके.

कुलपति डा. अजीत कुमार कर्नाटक ने कहा कि आज कृषि में स्थायित्व लाने के लिए कीट, बीमारी प्रबंधन एवं जल प्रबंधन पर काम करना होगा. उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय ने जैविक/प्राकृतिक खेती में राष्ट्रीय पहचान बनाई है.

उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के महानिदेशक ने विश्वविद्यालय से कहा कि भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के साथ मिल कर प्राकृतिक खेती की रूपरेखा तैयार की जाए.

अपने भाषण के दौरान उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता व डिजिटल इंजीनियरिंग पर उत्कृष्टता केंद्र पर बल दिया. साथ ही, उन्होंने सभी वैज्ञानिकों को आह्वान किया कि विश्वविद्यालय की आय विभिन्न तकनीकियों द्वारा बढ़ाई जाए.

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के निदेशक अनुसंधान डा. अरविंद वर्मा ने बैठक में अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के द्वारा विभिन्न फसलों पर किए गए अनुसंधान द्वारा विकसित तकनीकियों के बारे में बताया. साथ ही, उन्होंने जैविक खेती पर विकसित पैकेज औफ प्रैक्टिस की जानकारी सदन को दी.

उन्होंने कहा कि गत वर्ष औषधीय एवं सुंगधित परियोजना को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रथम स्थान मिला. विश्वविद्यालय ने गत वर्ष विभिन्न फसलों की 4 किस्में विकसित की.

डा. अरविंद वर्मा ने बताया कि हरित क्रांति के बाद कृषि तकनीकों के क्षेत्र में खासतौर पर बीज, मशीन और रिमोट संचालित तकनीकों में व्यापक बदलाव आया है. पिछले दशक में तकनीकी हस्तांतरण अंतराल ज्यादा था, लेकिन अब किसान ज्यादा जागरूक होने से तकनीकी हस्तांतरण ज्यादा गति से हो रहा है.

डा. पीके सिंह, अधिष्ठाता, अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय ने अपने उद्बोधन में सरकार द्वारा संचालित योजनाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने जल ग्रहण प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने अपने उद्बोधन में राजस्थान प्रतिवेदन में जल बजटिंग एवं विभिन्न फसलों में जल उपयोग क्षमता बढ़ाने के लिए सेंसर आधारित सिंचाई प्रणाली पर जोर दिया.

डा. लोकेश गुप्ता, राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता ने दूध की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया एवं उन्होंने पशुधन उत्पादकता बढ़ाने की तकनीकियों पर प्रकाश डाला.

बैठक के प्रारंभ में डा. राम अवतार शर्मा, अतिरिक्त निदेशक कृषि विभाग, भीलवाड़ा ने गत खरीफ में वर्षा का वितरण, बोई गई विभिन्न फसलों के क्षेत्र एवं उन की उत्पादकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी.