एचएयू में 30 जून को होगी प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam)

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के बीएससी औनर्स एग्रीकल्चर 4 वर्षीय कोर्स, बीएससी औनर्स एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट, बीटैक बायोटैक्नोलौजी, मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में बायोकैमिस्ट्री, कैमिस्ट्री, इनवायरमेंटल साइंस, फूड साइंस एंड टैक्नोलौजी, मैथेमेटिक्स, माइक्रोबायोलौजी, फिजिक्स, प्लांट फिजियोलौजी, सोशियोलौजी, स्टेटिसटिक्स व जूलौजी कोर्स, कालेज औफ बायो टैक्नोलौजी में एग्रीकल्चरल बायोटैक्नोलौजी, बायोइंफोरमेटिक्स व मोलेक्यूलर बायोलौजी एंड बायो टैक्नोलौजी में एमएससी कोर्स के लिए 30 जून, 2024 को आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बताया कि उपरोक्त पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए 8491 उम्मीदवारों ने आवेदन किए हैं. उन्होंने बताया कि प्रवेश परीक्षा के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय सहित हिसार शहर में 18 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, ताकि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े.

उन्होंने आगे बताया कि परीक्षा संबंधी सभी तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों के लिए बैठने से संबंधित अन्य समुचित व्यवस्था भी कर ली गई है. सभी परीक्षार्थियों को परीक्षा भवन में प्रवेशपत्र देख कर ही प्रवेश करने की अनुमति होगी.

कुलसचिव डा. बलवान सिंह मंडल के अनुसार, प्रवेश परीक्षा में नकल करने और दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. इस के लिए विशेष निरीक्षण दलों का गठन किया गया है. प्रत्येक उम्मीदवार की फोटोग्राफी भी की जाएगी.

उन्होंने यह भी बताया कि उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में मोबाइल, कैलकुलेटर व इलैक्ट्रोनिक डायरी जैसे इलैक्ट्रोनिक उपकरण ले कर जाने की अनुमति नहीं होगी. इन उपकरणों को उन्हें परीक्षा केंद्र के बाहर छोडऩा होगा, जिन की सुरक्षा की जिम्मेदारी उम्मीदवारों की ही होगी.
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डा. पवन कुमार ने बताया कि उम्मीदवारों को अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर के सत्यापित फोटो के साथ लाना होगा. बिना एडमिट कार्ड के वे परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं पा सकेंगे.

उन्होंने आगे बताया कि उपरोक्त प्रवेश परीक्षा का समय बीएससी 4 वर्षीय पाठ्यक्रम, बीएससी औनर्स एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट व बीटैक बायोटैक्नोलौजी के लिए प्रात: 10.00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक, जबकि शेष पाठ्यक्रमों के लिए प्रात: 10:00 से दोपहर 12.30 बजे तक होगा. परंतु उम्मीदवारों को परीक्षा आरंभ होने के एक घंटा पहले यानी 9.00 बजे तक अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा.

उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या के लिए उम्मीदवार विश्वविद्यालय के फ्लैचर भवन स्थित सहायक कुलसचिव (एकेडमिक) के कार्यालय में प्रात: 7.00 बजे से दोपहर 2.00 बजे तक आ कर मिल सकते हैं, अन्यथा कार्यालय के फोन नंबर 01662-255254 पर संपर्क कर सकते हैं. उम्मीदवार प्रवेश परीक्षा संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां विश्वविद्यालय की वैबसाइट  hau.ac.in  और  admissions.hau.ac.in पर उपलब्ध प्रोस्टपेक्टस में देख सकते हैं.

कृषि विश्वविध्यालय में आवेदन (Application) की बढ़ी तारीख

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर व पीएचडी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए उम्मीदवार अब 17 जून, 2024 तक आवेदन कर सकेंगे. उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय द्वारा आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 जून निर्धारित की गई थी. इसी प्रकार प्रवेश परीक्षा की तारीख में भी बदलाव किया गया है. अब 22 जून को होने वाली प्रवेश परीक्षा 30 जून को होगी और 30 जून को होने वाली प्रवेश परीक्षा 14 जुलाई को आयोजित की जाएगी. विभिन्न पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा संबंधित विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की वैबसाइट  hau.ac.in  और admissions.hau.ac.in पर उपलब्ध हैं.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने यह जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में इन दिनों शैक्षिणक सत्र 2024-25 के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है, जिस में कृषि महाविद्यालय, मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय, बायोटैक्नोलौजी महाविद्यालय, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय, कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय एवं इंस्टीट्यूट औफ बिजनैस मैनेजमेंट एंड एग्रीप्रेन्योरशिप गुरूग्राम में विभिन्न स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले किए जाएंगे.

पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम में होंगे दाखिले

कुलसचिव डा. बलवान सिंह मंडल ने बताया कि पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम में कम्यूनिकेशन स्किल इन इंगलिश, इंगलिशहिंदी ट्रांसलेशन, रिमोट सेंसिंग एंड जियोग्राफिकल इनफोरमेशन सिस्टम एप्लीकेशन इन एग्रीकल्चर एंड इन्वायरमेंट कोर्स भी शामिल है.

उन्होंने यह भी बताया कि उपरोक्त पाठ्यक्रमों में आवेदन के लिए उम्मीदवार का हरियाणा प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है. औनलाइन आवेदन फार्म एवं प्रोस्पेक्टस विश्वविद्यालय की वैबसाइट पर उपलब्ध हैं. सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के लिए आवेदन की फीस 1500 रुपए, जबकि अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, पीडब्ल्यूडी (दिव्यांग) उम्मीदवारों के लिए 375 रुपए होगी.

इस के अलावा उपलब्ध सीटों की संख्या, महत्वपूर्ण तिथियां, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, दाखिला प्रक्रिया आदि संबंधी सभी जानकारियां विश्वविद्यालय की वैबसाइट hau.ac.in और admissions.hau.ac.in पर दिए गए प्रोस्टपेक्टस में उपलब्ध हैं.

हकृवि और प्राग के अनुबंध से मिलेगी मजबूती

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के बीच अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध को अगले 5 साल के लिए बढ़ाया गया. इस अनुबंध के अनुसार दोनों संस्थान शिक्षा व कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख अनुसंधानों में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करेंगे.

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. बीआर कंबोज, जबकि चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग की ओर से प्रो. थामस सुब्रत अधिष्ठाता, फैकल्टी औफ इकोनोमिक्स एंड मैनेजमेंट ने इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए.

इस अवसर पर चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के डा. यान हुको, डा. शेल्वी कोबजेव, इंजीनियर सुकुमार और विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी व वैज्ञानिक उपस्थित रहे.

दोनों विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को होगा फायदा

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि इस प्रकार के समझौता ज्ञापनों के तहत हम आपसी हित के क्षेत्रों की पहचान और सुदृढ़ कर रहे हैं. इस अनुबंध के पश्चात मिल कर अनुसंधान कार्य करने के अतिरिक्त दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के आदानप्रदान, वैज्ञानिक संगोष्ठियों व शैक्षणिक बैठकों में भाग लेने, शैक्षणिक सूचनाओं के लेनदेन आदि को बढ़ाया जाएगा.

इस एमओयू से हकृवि के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग की अनुसंधान व प्रौद्योगिकी को जानने व शिक्षा ग्रहण करने को बढ़ावा मिलेगा. इस अनुबंध के तहत दोनों विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपनी शोध को नई तकनीकों के साथ दोनों संस्थानों में निपुणता के साथ पूरा करने में एकदूसरे का सहयोग करेंगे, जिस से शोध की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे.

इंटरेक्शन मीट का आयोजन

विश्वविद्यालय की इंटरनेशनल अफेयर सेल ने चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज के विदेशी प्रतिनिधियों के साथ एक इंटरेक्शन मीट का आयोजन किया गया, जिस में यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के वैज्ञानिक डा. थामस सुब्रत, डा. यान हुको, डा. शेल्वी कोबजेव और इंजीनियर सुकुमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों के साथ शोध और शैक्षणिक विषयों के बारे में चर्चा की. डा. थामस ने यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के विभिन्न पाठ्यक्रमों और शोध तकनीकियों के बारे में विस्तार से बताया.

उन्होंने भारतीय छात्रों को दी जाने वाली यूरोपीय संघ के इरास्मस मुंडस फेलोशिप के बारे में बताया. उन्होंने विद्यार्थियों को कार्यक्रम के माध्यम से छात्रवृत्ति एवं शैक्षणिक सहयोग की दिशा में प्रोत्साहित किया. उन्होंने इन फेलोशिप द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता जैसे यात्रा भत्ते, अनुसंधान अनुदान और ट्यूशन छूट पर व्यावहारिक जानकारी प्रदान की.

इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के छात्र शैक्षणिक गुणवत्ता के क्षेत्र में प्राग विश्वविद्यालय में अपने अध्ययन को पूरा कर सकते हैं. ज्ञात रहे कि इस अनुबंध के अंतर्गत गत वर्षों में विश्वविद्यालय के 61 विद्यार्थी चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं.

स्नातकोत्तर शिक्षा अधिष्ठाता डा. केडी शर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों का स्वागत किया. अंतर्राष्ट्रीय मामलों की प्रभारी डा. आशा क्वात्रा ने उन का आभार व्यक्त किया और मीटिंग के उद्देश्य के बारे में संक्षेप में बताया. अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संयोजक डा. अनुज राणा ने यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के वैज्ञानिकों का परिचय करवाया. इस अवसर पर मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डा. मंजु महता, सयुंक्त निदेशक डा. जंयती टोकस, आईडीपी के लाइज़न अफसर डा. मुकेश सैनी व डा. गणेश भी उपस्थित रहे.

किसानों (Farmers) को मिलेगा लाभ

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की उन्नत कृषि तकनीकों, शोध कार्यों व नवाचारों का कांगो गणराज्य के किसानों को भी लाभ मिलेगा. इसी कड़ी में कांगो गणराज्य के राजदूत वाबेंगा कालेबो थियो के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज से मुलाकात की. इस बैठक में हकृवि के अधिकारियों सहित हरियाणा के प्रगतिशील किसान भी उपस्थित रहे.

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को विश्वविद्यालय द्वारा कृषि क्षेत्र में किए जा रहे शोध कार्यों एवं उन्नत किस्म के बीजों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई. प्रतिनिधिमंडल को बासमती चावल एवं मक्का की खेती में खासतौर पर सहयोग देने पर चर्चा हुई.

बैठक में सदस्यों ने कृषि क्षेत्र में निवेश करने के लिए विशेष रूप से केंद्रीय कृषि अनुसंधान और कृषि व्यवसाय से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों को स्थापित करने में रुचि दिखाई. उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन के लिए संसाधनों का पता लगाने और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा के लिए हरियाणा के प्रगतिशील किसानों एवं कांगो के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए विस्तार से बातचीत की गई.

प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि कृषि क्षेत्र से संबंधित नवीनतम तकनीकों को अपना कर कांगो में आर्थिक विकास को गति प्रदान की जा सकती है. हरियाणा के प्रगतिशील किसानों ने बैठक में सिंचाई की नवीनतम विधियों, जलवायु परिवर्तन, कृषि उपकरण, कृषि पद्धतियों और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि करने के लिए स्थायी और लाभदायक पद्धति विकसित करने के लिए आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया.

बैठक में बीज उत्पादन, कृषि आत्मनिर्भरता, मक्का उत्पादन, जैविक उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग के अतिरिक्त भोजन की बरबादी को कम करने, कृषि उपज में मूल्य जोड़ने, भंडारण की बेहतर व्यवस्था करने और फसल कटाई के बाद प्रोसैसिंग सुविधाओं में निवेश करने पर जोर दिया.

कांगो गणराज्य के राजदूत वाबेंगा कालेबो थियो ने बताया कि प्रतिनिधिमंडलों के मध्य हुई बैठक से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों एवं किसानों से जुड़े विभिन्न महत्वाकांक्षी कार्यों को गति मिलेगी. विश्वविद्यालय की उन्नत तकनीकों व नवाचारों से कांगो गणराज्य की कृषि संबंधित तकनीकों व उपकरणों में काफी सुधार आएगा.

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर शिक्षा अधिष्ठाता डा. केडी शर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की.

बैठक में अंतर्राष्ट्रीय मामलों की प्रभारी डा. आशा क्वात्रा ने प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों का स्वागत किया. भारत सरकार के विदेश सहयोग विभाग के सलाहकार पवन चौधरी, कुलसचिव एवं विस्तार शिक्षा निदेशक डा. बलवान सिंह मंडल, ओएसडी डा. अतुल ढींगड़ा, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. एसके पाहुजा, छात्र कल्याण निदेशक डा. एमएल खिच्चड़, मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता, डा. नीरज कुमार, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डा. मंजु महता, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डा. बीना यादव व डा. पी. कीर्ति उपस्थित रहे.

कांगो प्रतिनिधिमंडल ने हकृवि के विभिन्न स्थलों का दौरा किया. प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न स्थलों को देखा. इन स्थलों में डा. मंगलसेन संग्रहालय, दीन दयाल उपाध्याय जैविक उत्कृष्टता फार्म, टिशू कल्चर लैब और एबिक का दौरा कर हकृवि के वैज्ञानिकों से अनुसंधान एवं तकनीक के बारे में जानकारी प्राप्त की.

उन्नत किस्मों से कपास (Cotton) की बढ़ेगी पैदावार

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किसानों को कपास का उत्पादन बढ़ाने, उन्नत किस्म के बीजों एवं तकनीकी जानकारी देने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए.

प्रशिक्षण शिविर में अनुसंधान निदेशक डा. जीतराम शर्मा ने किसानों को बताया कि गुलाबी सुंडी का प्रकोप खेतों मे रखी हुई लकड़ियों/बनछटियों के कारण फैलता है, इसलिए इन का उचित प्रबंधन किया जाए.

सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान के सहनिदेशक प्रशिक्षण डा. अशोक गोदारा ने बताया कि संस्थान द्वारा समयसमय पर विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं.

कपास अनुभाग के प्रभारी डा. करमल सिंह ने प्रदेश में कपास उत्पादन के लिए आवश्यक सस्य क्रियाओं से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि बीटी नरमा के लिए शुद्ध नाइट्रोजन, शुद्ध फास्फोरस, शुद्ध पोटाश व जिंक सल्फेट क्रमश: 70:24 24:10 किलोग्राम प्रति एकड़ की सिफारिश की जाती है. उर्वरक की मात्रा मिट्टी की जांच के आधार पर तय की जानी चाहिए. 5-6 साल में एक बार 5-7 टन गोबर की खाद जरूर डालनी चाहिए.

कपास अनुभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सोमवीर ने कपास की मुख्य विशेषताओं एवं किस्मों के बारे में अवगत करवाया, वहीं कीट वैज्ञानिक डा. अनिल जाखड़ ने कपास में लगने वाले कीट व उन के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी.

डा. संदीप कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया और डा. शुभम लांबा ने मंच का संचालन किया. इस के अतिरिक्त शिविर में किसानों को विश्वविद्यालय की तरफ से उत्पादक सामग्री भी प्रदान की गई.

विश्वविद्यालय (University) को ऊंचाई पर ले जाने का काम किया

हिसार: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के फ्लैचर भवन के सभा कक्ष में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सेवा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बीआर कंबोज मुख्य अतिथि थे. उन्होंने अगस्त, सितंबर, अक्तूबर व नवंबर माह के दौरान 25 सेवानिवृत्त हुए विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को शाल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया. कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सेवाओं की प्रशंसा की.

उन्होंने कहा कि सभी ने मिल कर विश्वविद्यालय को ऊंचाई पर ले जाने का काम किया है. यह अधिकारियों एवं कर्मचारियों के द्वारा किए गए उल्लेखनीय कामों का ही नतीजा है कि विश्वविद्यालय आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाए हुए है.

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय सदैव सेवानिवृत्त कर्मचारियों का ऋणी रहेगा. आप के द्वारा दिए गए योगदान का ऋण उतारा नहीं जा सकता. कर्मचारी अपनेआप को सेवानिवृत्त न समझ कर परिवार व समाज को अपनी सेवाएं प्रदान करें. उन्हें विश्वविद्यालय से जुड़े रह कर भी उस के विकास में अपना सकारात्मक योगदान देते रहना चाहिए.

उन्होंने कर्मचारियों से विश्वविद्यालय के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखने और भावी पीढ़ी से अपने अनुभव साझा करने का आह्वान किया, ताकि वे भी उन की तरह सहनशीलता के साथ कार्य निष्पादन कर सकें.

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने अधिकारियों से कहा कि जब कभी भी रिटायर्ड कर्मचारी विश्वविद्यालय में आएं, तो उन्हें उचित मानसम्मान दिया जाए.

विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक नवीन जैन ने रिटायर हुए कर्मचारियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के दरवाजे सदैव रिटायर कर्मचारियों के लिए खुले हुए हैं. वह अपने काम के लिए किसी भी समय यहां आ सकते हैं. उन्होंने रिटायर हुए कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी.

रजिस्ट्रार डा. बलवान सिंह मंडल ने सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों व कर्मचारियों को बधाई दी, साथ ही उन के अच्छे स्वास्थ्य व लंबी उम्र की कामना की.

इस अवसर पर ओएसडी डा. अतुल ढ़ींगड़ा, मीडिया एडवाइजर डा. संदीप आर्य व अंशुल भी उपस्थित रहे.

विश्वविद्यालय से गत 4 माह में कुल 5 वैज्ञानिक और 20 गैरशिक्षक कर्मचारी रिटायर हुए.

वैज्ञानिकों में डा. तेजेंदर पाल मलिक, डा. कुशल राज, डा. राकेश महरा, डा. योगेंद्र कुमार यादव व डा. एसएस जाखड़ हैं, जबकि गैरशिक्षक कर्मचारियों में सुदेश, राकेश कुमार, मदन लाल, शिव सेवक, अल्का अरोड़ा, केशव प्रसाद, शशि बाला, राममेहर सिंह, अशोक कुमार, राजेंद्र कुमार, बहादुर सिंह, पृथ्वी सिंह, मोहन लाल, छांगा राम, रामबाई, रतन सिंह, सियाराम, सतनारायण, कर्ण सिंह व रमेश कुमार शामिल हैं.

कृषि उत्पादन (Agricultural Production) में देशभर में आगे है हरियाणा

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में ‘कृषि वैज्ञानिकों का किसानों से संवाद- कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां’ विषय पर मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के सभागार में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस गोष्ठी में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बतौर मुख्यातिथि एवं प्रस्तोता व अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद, पंचकूला, पूर्व कुलपति, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल एवं अध्यक्ष, पंचनद शोध संस्थान, चंडीगढ़ के प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की.

विशिष्ट अतिथि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जगजीत सिंह घनघस रहे. यह गोष्ठी पंचनद शोध संस्थान, अध्ययन केंद्र, हिसार व चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई.

प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा लगातार किए जा रहे शोध कार्यों, उच्च तकनीकों और किसानों की कड़ी मेहनत के कारण प्रदेश के खाद्यान्न उत्पादन में रिकौर्ड बढ़ोतरी हुई है. खाद्यान्न उत्पादन, जो प्रदेश के गठन के समय मात्र 2.59 मिलियन टन था, जो 7 गुना बढ़ कर वर्ष 2022-23 में 18.43 मिलियन टन हो गया है. हरियाणा क्षेत्रफल की दृष्टि से अन्य राज्यों से छोटा है, जबकि केंद्रीय खाद्यान्न भंडार में योगदान देने वाला दूसरा सब से बड़ा राज्य है. देश के 60 फीसदी से अधिक बासमती चावल का निर्यात केवल हरियाणा से ही होता है. हरियाणा राज्य बाजरा, दलहन व तिलहन के उत्पादन में देशभर में अग्रणी है.

उन्होंने आगे यह भी बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा किसानों को उच्च गुणवत्ता के प्रमाणित बीज उपलब्ध करवाने के लिए 20 हजार क्विंटल से अधिक विभिन्न फसलों के बीज तैयार कर किसानों को वितरित किए जा रहे हैं. कृषि तकनीकी को किसानों तक पहुंचाना विश्वविद्यालय का एक ध्येय है, इसी कड़ी में विश्वविद्यालय द्वारा 6.50 लाख किसानों को मौसम एवं कृषि संबंधी जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही है. इस के अतिरिक्त प्रदेश के प्रत्येक गांव के 20-20 किसानों का डाटा बेस एकत्रित किया गया है, जिस के माध्यम से कृषि संबंधी जानकारियां प्रदान की जा रही हैं.

कृषि उत्पादन (Agricultural Production)

प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि विकसित भारत के मिशन में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

उन्होंने किसानों एवं युवाओं से संवाद स्थापित करने के साथसाथ किसानों को कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित करने का भी आह्वान किया और कृषि को आकर्षक बनाने के लिए युवाओं में सामाजिक, आर्थिक व मनौविज्ञानिक बदलाव की जरूरत है.

उन्होंने यह भी कहा कि बड़े हर्ष की बात है कि हकृवि किसानों से सीधे तौर पर जुड़ कर न केवल नईनई तकनीक व किस्में किसानों तक पहुंचा रहा है, बल्कि किसानों की समस्याओं के फीडबैक के आधार पर अपने शोध को गति भी प्रदान कर रहा है.

उन्होंने कहा कि पंचनद हकृवि के माध्यम से किसानों से संवाद शुरू करने की मुहिम को ओर अधिक गति प्रदान करेगा. उन्होंने कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों एवं रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग पर बल दिया.

विशिष्ट अतिथि जगजीत सिंह घनघस ने बताया कि राष्ट्र की प्रगति के लिए कृषि एवं पावर सैक्टर बहुत जरूरी है. प्रदेश में गत 10 सालों से उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मुहैया करवाने के साथसाथ कृषि क्षेत्र को 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है.

उन्होंने बताया कि लगभग 13 हजार लंबित कृषि नलकूप को भी बिजली से जोड़ा गया है. किसानों को सोलर पंप के माध्यम से सिंचाई करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है.

मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता व उपाध्यक्ष डा. नीरज कुमार ने गोष्ठी में आए सभी का धन्यवाद किया और मंच का संचालन सचिव मोहित कुमार ने किया.

इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त, हरियाणा एवं पंचनद शोध संस्थान, अध्ययन केंद्र, हिसार के अध्यक्ष डा. जगबीर सिंह, मीडिया एडवाइजर डा. संदीप आर्य सहित पंचनद संस्थान के अनेक पदाधिकारी, वैज्ञानिक, किसान व छात्र उपस्थित थे.

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में किसान दिवस का आयोजन

हिसार: किसानों को उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के साथसाथ नवीनतम तकनीकों और मार्केटिंग रणनीतियों पर ध्यान देना होगा, ताकि उन के उत्पादों के बेहतर दाम मिलने के साथ अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में उन की मांग बढ़े.

ये विचार प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल ने कहे. वे आज चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किसान दिवस पर बतौर मुख्यातिथि किसानों को संबोधित कर रहे थे, जबकि समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने की.

कृषि मंत्री जेपी दलाल ने अपने संबोधन में सरकार द्वारा किसानों के हित के लिए चलाई जा रही कृषि योजनाओं को विस्तारपूर्वक बताया. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने कृषि का बजट जो कि पहले 800 करोड़ रुपए था, वह अब बढ़ा कर 3,900 करोड़ रुपए कर दिया है. बाजरे का भाव, जो पहले 800 रुपए होता था, आज 2,500 रुपए प्रति क्ंिवटल दिया जा रहा है. इस के अलावा सरकार ने नहरों, मछलीपालन, बिजली व ट्यूबवैल कनेक्शन के बजट की भी बढ़ोतरी की है.

उन्होंने कहा कि हरियाणा पहला एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां 14 फसलों की एमएसपी पर खरीदारी होती है. सरकार ने फसल बीमा योजना के तहत 9,000 करोड़ रुपए किसानों को वितरित किया है, जबकि फसल बीमा कंपनियों ने किसानों से 1973 करोड़ रुपए ही लिए थे. राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कृषि उत्पादों को बेचने के लिए सरकार द्वारा गन्नौर में विश्वस्तरीय सब से बड़ी मंडी बनाई जा रही है, जहां अंतर्राष्ट्रीय ग्राहक आएंगे. इस के लिए फतेहाबाद, हिसार, करनाल व कुरुक्षेत्र जिलों में उत्पादों की पैंकिग, ग्रेडिंग, सोर्टिंग और कोल्ड स्टोरेज सैंटर बनाए जाएंगे, जहां से उत्पादों को गन्नौर ले जा कर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर की मंडियों में बेचा जा सकेगा.

कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए सरकार 125 किसानों को ड्रोन की ट्रेनिंग दिलवा चुकी है और 13 लाख के इलैक्ट्रिक व्हीकल सहित ड्रोन व नैनो यूरिया भी वितरित किए गए हैं, ताकि कोई भी किसान 100 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करवा सकता है. इस काम में लगी शेष पूंजी का वहन सरकार द्वारा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत एक लाख एकड़ की मंजूरी सरकार द्वारा दे दी गई है.

प्राकृतिक संसाधन नई पीढ़ी की धरोहर, शुद्ध भोजन की शुरुआत अपने परिवार से करें

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा प्रदेश देश के कुल अनाज का 7 फीसदी उत्पादन करता है. राज्य में गेहूं का उत्पादन 6 गुना, चावल 8 गुना एवं तिलहनी फसलों का उत्पादन 5 गुना बढ़ा है.

उन्होंने कहा कि ये सब उपलब्धियां हरियाणा सरकार की किसान हितेषी नीतियों और चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा सिफारिश की गई कृषि संबंधी उन्नत व नवीनतम तकनीकों को अपनाने व किसानों की मेहनत का परिणाम है. प्रदेश में उन्नत बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय हर वर्ष विभिन्न फसलों का तकरीबन 22,500 क्ंिवटल से अधिक उन्नत बीज पैदा कर के राज्य के विभिन्न निगमों व किसानों को वितरित करता है. उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश देश के 60 फीसदी से अधिक बासमती चावल का निर्यात केवल हरियाणा से ही होता है.

कुलपति बीआर कंबोज ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन नई पीढ़ी की धरोहर है. प्राकृतिक खेती के मौडल को अपनाते हुए पोषणयुक्त खाद्यान्न पैदा करते हुए अपने परिवार से ही शुद्ध भोजन की शुरुआत करें.
उन्होंने किसानों से कहा कि वे कृषि में विविधीकरण को अपनाएं और उत्पादन की क्वालिटी बढ़ाएं, ताकि विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का मुकाबला किया जा सके. किसानों को कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है.

कुलपति बीआर कंबोज ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि कृषि विज्ञान केंद्रों की मदद से किसानों को प्रेरित करें कि वे नईनई तकनीकों को अपनाएं, ताकि उन की आय बढ़ाई जा सके.

कुलपति बीआर कंबोज ने जल संरक्षण पर उचित उपाय अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि जल का दोहन इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले समय में कृषि उत्पादन में 30 फीसदी तक की कमी की संभावना है. जल संसाधनों का बेहतर प्रयोग, वाटरशेड विकास, वर्षा जल संचय और उन्नत तकनीकों को अपना कर पानी का उचित प्रबंध करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि बूंदबूंद पानी का सदुपयोग करें.

शिक्षा, चिकित्सा, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में महिलाएं निभा रहीं अग्रणी भूमिका

राज्यसभा सांसद जनरल डीपी वत्स ने अपने संबोधन में समारोह में उपस्थित महिला किसानों की अधिक संख्या पर खुशी जताई और कहा कि महिलाओं की जिस भी क्षेत्र में हिस्सेदारी रही है, वह क्षेत्र हमेशा आगे रहा है. हमारा देश 70 से ज्यादा देशों में खाद्यान्न का निर्यात करता है, जो दर्शाता है कि हमारा देश कृषि के क्षेत्र में कितना अग्रणीय है.

उन्होंने आगे कहा कि हमें जाति से ऊपर उठ कर राष्ट्र हित में अपना योगदान देना चाहिए, ताकि हमारा देश नंबर वन बन सके. साथ ही, उन्होंने समय के साथसाथ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किसान उपयोगी आधुनिक तकनीक व उन्नत किस्में विकसित करने के लिए उन की प्रशंसा की.

विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं विस्तार शिक्षा निदेशक डा. बलवान सिंह मंडल ने सभी का स्वागत किया, जबकि कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. एसके पाहुजा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया.

इस अवसर पर मुख्यातिथि जेपी दलाल ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया. इस अवसर पर मुख्यातिथि जेपी दलाल ने विश्वविद्यालय व कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने वाले किसानों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया.

किसानों की समृद्धि के लिए चैधरी चरण सिंह की नीतियां बहुत कारगर

हिसार: चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आज भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चैधरी चरण सिंह की 121वीं जयंती मनाई गई. इस अवसर पर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बीआर कंबोज मुख्य अतिथि थे. उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित चैधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि चैधरी चरण सिंह किसान व कमेरा तबके के सच्चे हितैषी थे. स्वयं एक किसान व ग्रामीण परिवेश से होने के चलते वे किसानों की समस्याओं को अच्छी तरह से समझते थे. वे मानते थे कि देश के विकास का रास्ता खेतखलिहानों से हो कर गुजरता है, इसलिए उन्होंने ताउम्र किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए संघर्ष किया.

प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह ने देश में किसानों के जीवन और स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए कई नीतियां बनाईं. उन्होंने विभिन्न राजनीतिक पदों पर रहते हुए देश में जमींदारी प्रथा समाप्त कराना, भूमि सुधार अधिनियम लागू कराना, ऋण निमोचन विधेयक पारित कराना और केंद्र में ग्रामीण पुनरुत्थान मंत्रालय स्थापित करना जैसे अनेक महत्वपूर्ण काम किए. किसानों के लिए उन के अतुलनीय योगदान के दृष्टिगत वर्ष 2001 से 2023 दिसंबर को उन की जयंती को राष्ट्रीय किसान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है.

उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि इस विश्वविद्यालय का नाम इस महान नेता के साथ जुड़ा हुआ है. हम आज उन की जयंती को किसान दिवस के रूप में मना रहे है. हमारा प्रयास है कि प्रदेश व देश के प्रत्येक किसान को इस विश्वविद्यालय में विकसित कृषि तकनीकों का लाभ पहुंचे. उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे किसानों की समृद्धि व कल्याण के लिए सदैव प्रयत्नशील रहें.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न कालेजों के अधिष्ठाताओं, निदेशकों व अन्य अधिकारियों सहित वैज्ञानिकों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों और हौटा एवं हौंटिया के पदाधिकारियों ने भी पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए.

कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने जीता प्रथम पुरस्कार

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट, असम में ‘अगली पीढ़ी की खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए तैयारी’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है.

इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डा. करिश्मा नंदा एवं डा. संदीप आर्य द्वारा ‘मिलिया दुबिया-जौ आधारित कृषि वानिकी प्रणाली के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता’ विषय पर लिखे गए शोधपत्र को ‘जैव विविधता, वानिकी, जैविक और प्राकृतिक खेती’ थीम के अंतर्गत पुरस्कृत किया गया है.

उन्हें इस शोधपत्र की उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए दृष्टिगत प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया.

इस सम्मेलन में विभिन्न प्रदेशों से आए 500 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया, जिस का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डा. त्रिलोचन मोहपात्रा ने किया था.

ज्ञात रहे कि गत वर्ष भी इन शोधकर्ताओं ने केरल कृषि विश्वविद्यालय, त्रिशूर व शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, श्रीनगर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में भी पुरस्कार जीते थे.

उपरोक्त वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी. इस मौके पर ओएसडी डा. अतुल ढींगड़ा और कुलसचिव एवं विस्तार शिक्षा निदेशक डा. बलवान सिंह मंडल भी उपस्थित रहे.