प्रो. स्वामीनाथन (Prof Swaminathan) को भारत रत्न: भाकृअनुसं में आयोजन

नई दिल्ली: 13 फरवरी, 2024 को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने विशेष समारोह का आयोजन किया, जिस में प्रतिष्ठित भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन (Prof Swaminathan), एक प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक और भारतीय हरित क्रांति के जनक को समर्पित किया गया.

स्वागत भाषण डा. अशोक कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-भाकृअनुसं और सचिव, एनएएएस द्वारा दिया गया. उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र के लिए बहुत सम्मान व गर्व की बात है कि प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन को 9 फरवरी, 2024 को भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है.

उन्होंने प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन के आजीवन समर्पण एवं कृषि अनुसंधान, सतत विकास और खाद्य सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रो. स्वामीनाथन के दूरदर्शी नेतृत्व और नवीन दृष्टिकोण ने भारत और उस के बाहर के कृषि परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है.

इस के उपरांत डा. हिमांशु पाठक, सचिव, डेयर और महानिदेशक, भाकृअनुप एवं अध्यक्ष, एनएएएस ने प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और उन के जीवन के प्रतिबिंबों पर प्रकाश डाला. उन्होंने सीआरआरआई, कटक में प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन के साथ काम करने की अपनी यादें ताजा कीं.

Prof Swaminathan

मंच पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष डा. टी. महापात्र, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल के कुलाधिपति डा. आरबी सिंह और टीएएएस के संस्थापक अध्यक्ष डा. आरएस परोदा शामिल थे. डा. एचएस गुप्ता, डा. पंजाब सिंह, डा. केवी प्रभु और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में औनलाइन माध्यम से शामिल हुए.

प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन, जिन्हें भारत के हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है, को 1960-70 के दशक के दौरान गेहूं और धान की फसलों की उत्पादकता और उत्पादन बढ़ाने के अपने ऐतिहासिक काम के जरीए लाखों लोगों को भुखमरी से बचाने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने ‘‘हरित क्रांति‘‘ को ‘‘सदाबहार क्रांति‘‘ में बदलने की अद्वितीय अवधारणा भी प्रदान की. उन्होंने गरीबों को लाभान्वित करने के लिए विज्ञान की शक्ति में दृढ़ता से विश्वास रखा और वह किसानों को जानकारी और संसाधनों से सशक्त करने के मुखर समर्थक भी रहे. उन्होंने साल 1988 में एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की.

 

साथ ही, उन्होंने आर्थिक विकास के लिए रणनीतियों को विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए अपनी आखिरी सांस तक वहां काम किया, जिस का लक्ष्य सीधेतौर पर गरीब किसानों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार में वृद्धि करना था. उन की विरासत दुनियाभर के शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और अधिवक्ताओं को जलवायु परिवर्तन से ले कर सतत कृषि तक हमारे समय की गंभीर चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रेरित करती रहती है.

समारोह में प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन के शानदार जीवनवृत्त और स्थाई विरासत पर भाषण, प्रस्तुतियां और विचार प्रस्तुत किए गए. मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को कृषि, अनुसंधान और ग्रामीण विकास में उन के अमूल्य योगदान के लिए अपनी कृतज्ञता और सराहना व्यक्त करने का अवसर मिला.

जब उन्होंने 1960 के दशक में नोबल पुरस्कार विजेता डा. नार्मन बोरलाग के साथ हरित क्रांति की प्रमुख पहल की, तो बाद में उन्होंने सशक्त विकास के लिए कृषि सभी क्षेत्रों को समाहित करने के लिए एक सदैव हरित क्रांति की प्रेरणा की. प्रोफैसर स्वामीनाथन ने भारत में कई प्रमुख पदों को सुंदरता, नवीनता और रचनात्मकता के साथ संभाला जैसे कि निदेशक, भाकृअनुसं (1961-72), महानिदेशक, भाकृअनुप और नवगठित डेयर के सचिव (1972-79), कृषि सचिव, भारत सरकार।(1979), कार्यवाहक उपाध्यक्ष और सदस्य, योजना आयोग (1980-82).

इस के अलावा वे अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, फिलीपींस (1982-88) के महानिदेशक बनने वाले पहले भारतीय थे. उन के नेतृत्व को 1987 में पहले विश्व खाद्य पुरस्कार से मान्यता मिली थी. उन की सब से महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक 2004 में आई, जब उन्हें राष्ट्रीय किसान आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. प्रोफैसर स्वामीनाथन ने अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (एआरएस) के निर्माण में भी महती भूमिका निभाई थी. कृषि के बारे में अपनी गहरी समझ और नीति निर्माताओं के साथ व्यापक जुड़ाव का लाभ उठाते हुए प्रो. स्वामीनाथन ने कृषि नीति पर निष्पक्ष, ज्ञान आधारित और समग्र मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए समर्पित एक स्वतंत्र ‘‘थिंक टैंक‘‘ के निर्माण का समर्थन किया, जिस के कारण साल 1990 में एनएएस की स्थापना हुई.

प्रो. एमएस स्वामीनाथन की उच्च आयु के बावजूद स्वामीनाथन अनुसंधान और समर्थन में सक्रिय रहे. उन्होंने अपने लेखन, सार्वजनिक भाषण और कई मंच और सम्मेलनों में भाग ले कर ग्रामीण विकास, खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि के बारे में चर्चा में योगदान करना जारी रखा. प्रोफैसर स्वामीनाथन ने कृषि विकास, अनुसंधान और नीति समर्थन के प्रति समर्पित संस्थाओं और संघों की स्थापना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

इन संस्थानों ने उन के दृष्टिकोण और मूल्यों को आज भी निरंतर बनाए रखा है. प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन की बेटियां डा. निथ्या, डा. माधुरा और डा. सौम्या ने कार्यक्रम में अपनी आभासी उपस्थिति दर्ज की और उन के जीवन के प्रतिबिंबों पर विचारविमर्श किया.

कार्यक्रम का समापन एनएएएस के सचिव डा. वजीर सिंह लाकड़ा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ.

‘सरस’ दूध (‘Saras’ Milk) : गुणवत्ता से समझौता नहीं

जयपुर: पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा है कि राजस्थान राज्य की सहकारी डेयरियों में उत्पादित ‘सरस’ दूध (‘Saras’ Milk)  की गुणवत्ता ही इस की पहचान है और इस से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि प्रदेश में नवगठित सरकार की पहली प्राथमिकता राज्यभर की सहकारी डेयरियों से जुड़े दुग्ध उत्पादकों का सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान है और इस के लिए नई कल्याणकारी योजनाएं अमल में लाई जाएंगी. ग्रास रूट लेवल तक दुग्ध उत्पादकों को सहकारी डेयरियों से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे और अधिक से अधिक संख्या में नई प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि ‘सरस’ ब्रांड को न केवल राजस्थान, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी लोकप्रिय बनाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाने चाहिए.

मंत्री जोराराम कुमावत सरस संकुल मुख्यालय में राज्यभर की सहकारी डेयरियों के निर्वाचित अध्यक्षों के साथ आयोजित परिचर्चा में डेयरी अधिकारियों और निर्वाचित अध्यक्षों को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दूध और ‘सरस’ ब्रांड के पशु आहार में किसी तरह की कोई मिलावट बरदाश्त नहीं की जाएगी.

इस के लिए एक राज्यस्तरीय टास्क फोर्स का गठन कर मिलावटखोरी को रोकने के लिए एक अभियान चलाया जाना चाहिए. प्रदेश में दुग्ध उत्पादकों की सामाजिक सुरक्षा और उन के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. वर्तमान में चल रही सुरक्षा योजनाओं को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा.

पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि जिला दुग्ध संघों के निर्वाचित पदाधिकारी और डेयरी अधिकारियों में बेहतर समन्वय स्थापित किए जाने के प्रयास होने चाहिए, ताकि इस का लाभ आम दुग्ध उत्पादकों को मिल सके.

उन्होंने आसीडीएफ सहित सभी जिला दुग्ध संघों में मानव संसाधनों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत 656 पदों पर तुरंत भरती किए जाने पर जोर दिया और शेष पदों के लिए एनडीडीबी की विशेषज्ञ सेवाएं लेने के निर्देश प्रदान किए.

Saras Milk

परिचर्चा के दौरान प्रदेशभर से आए जिला दुग्ध संघों से आए जिला दुग्ध संघों के निर्वाचित अध्यक्षों ने राज्य में डेयरी विकास के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए और व्यावहारिक समस्याओं की ओर मंत्री का ध्यान आकर्षित किया.

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने दुग्ध उत्पादकों को बकाया भुगतान करने के लिए राज्य सरकार की ओर से देय राशि के तुरंत भुगतान सहित अन्य समस्याओं के अतिशीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया.

परिचर्चा में भाग लेते हुए पशुपालन एवं गोपालन के प्रमुख शासन सचिव विकास सीताराम भाले ने कहा कि राज्य में डेयरी की अपार संभावनाएं हैं. इन संभावनाओं को तलाशने में सहाकरी डेयरियों के निर्वाचित अध्यक्षों की महती भूमिका है.

उन्होंने खुशी जाहिर की कि राजस्थान ने दुग्ध उत्पादन में देशभर में पहला स्थान प्राप्त कर लिया है. उन्होंन आश्वस्त किया कि राज्य सरकार दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेगी.

डेयरी फेडरेशन की प्रबंध संचालक सुषमा अरोड़ा ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान आरसीडीएफ एवं जिला दुग्ध संघों द्वारा अर्जित उपलब्धियों को रेखांकित किया और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला. परिचर्चा में निर्वाचित अध्यक्ष के अलावा डेयरी फेडरेशन के वित्तीय सलाहकार ललित मोरोड़िया सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.

तिलहन फसलों को बढ़ावा,मनाया गया सरसों प्रक्षेत्र दिवस (Mustard Field Day)

छिंदवाड़ा: जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, छिंदवाड़ा द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत तिलहन फसल (Oilseed Crops) का रकबा बढ़ाने के लिए मिशन के अंतर्गत संचालित समूह पंक्ति प्रदर्शन में ग्राम खैरवाड़ा में सरसों का प्रक्षेत्र दिवस (Mustard Field Day) मनाया गया.

इस कार्यक्रम में किसान राजेश बट्टी व सोमलाल बट्टी के प्रक्षेत्र पर सरसों की किस्म आरएच 749 प्रदर्शन का अवलोकन किया गया, जिस में गांव के प्रगतिशील किसानों ने बढ़चढ़ कर सहभागिता की.

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डा. डीसी श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में बताया कि किसानों को जिले में तिलहनी फसल द्वारा सरसों का रकबा बढ़ाने के लिए सल्फर व एनपीके उर्वरक के उचित प्रबंधन पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई.

केंद्र के उद्यानिकी विषय से संबंधित वैज्ञानिक डा. आरके झाडे ने लहसुन व प्याज का उत्पादन बढ़ाने और उन का रखरखाव करने के संबंध में किसानों के बीच जानकारी साझा की. केंद्र की महिला वैज्ञानिक डा.सरिता सिंह ने सरसों फसल में लगने वाले रोग, कीट आदि को नियंत्रित करने और अधिक उत्पादन के लिए सरसों की विभिन्न किस्मों से अवगत कराया.

केंद्र के तकनीकी अधिकारी सुंदरलाल अलावा ने किसानों को सरसों की फसल में प्राकृतिक खेती के घटक जैसे बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत और आच्छादन आदि पर जानकारी दी.

प्रसार्ड ट्रस्ट, मल्हनी के दूसरे स्थापना दिवस पर गोष्ठी

प्रो. रवि सुमन, कृषि एवं ग्रामीण विकास ट्रस्ट , मल्हनी भाटपार रानी के तत्वावधान में 11 फरवरी, 2024 को कृषि एवं ग्रामीण विकास पर एक गोष्ठी का आयोजन ट्रस्ट प्रक्षेत्र कार्यालय, लक्ष्मणपुर रोड महुआवारी मेला (मल्हना) में आयोजित किया गया.

ट्रस्ट के निदेशक प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि ट्रस्ट की स्थापना के 2 साल पूरे होने के उपलक्ष में दूसरा वर्षगाठ मनाया जा रहा है. ट्रस्ट 11 फरवरी, 2022 में घोषित किया था.

इस का मुख्य उद्देश्य कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए सकारात्मक पहल करना, शिक्षा, कृषि शिक्षा, शोध, प्रसार एवं सामुदायिक विकास के उत्थान के लिए काम करना, प्राकृतिक, जैविक एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना, कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में विशेष परामर्श सेवा प्रदान करना, आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण, कार्यशाला, संगोष्ठी, प्रक्षेत्र दिवस, किसान मेला एवं प्रदर्शनी का आयोजन करना और कृषक उत्पादक संगठन यानी एफपीओ को बढावा देना है.

संस्थान द्वारा अपने उद्देश्यों को ध्यान में रख कर कृषि एवं ग्रामीण विकास गोष्ठी का आयोजन किया गया. डा. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि फरवरी माह में कद्दूवर्गीय सब्जियों जैसे – लौकी, नेनुआ, करेला, कोहड़ा, खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा आदि के साथसाथ भिंडी, लोबिया, अरूई, बंडा आदि की बोआई कर सकते हैं. अपने आसपास की खाली पड़ी जगह पर पोषण वाटिका बना सकते हैं. 250 वर्गमीटर क्षेत्रफल से एक समान्य परिवार के लिए सालभर हरी सब्जियां प्राप्त कर सकते हैं. उड़द व मूंग की बोआई का उचित समय है.

डा. विकास मौर्य, फिजियोथेरैपिस्ट ने बताया कि इस समय मौसम बदल रहा है, सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. सुबह टहलना, नियमित व्यायाम करना, समय से नाश्ता एवं भोजन करना चाहिए. किसान कामों के चक्कर में समय से खानपान पर ध्यान नहीं देते, जिस से कई समस्या पैदा हो जाती है.

डा. रामजी कुशवाहा ने जैविक उत्पाद पर प्रकाश डाला, वहीं चंद्र प्रकाश मौर्य ने पशुपालन पर जानकारी दी. बशिष्ठ मिश्रा ने समाज में फैली कुरीतियों के उन्मूलन पर जानकारी दी. मंगलम (लाल बाबू) नर्सरी के प्रबंधक ओम प्रकाश ने बताया कि इस समय आम में मंजर आ रहा है, उस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त मेजर मोहन यादव, सुरेशचंद्र, भोला, गोलू, आकाश, बृजेश सहित अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारी और किसानों ने हिस्सा लिया.

मिर्ची की खेती (Chilli Cultivation) ने बदली गांव की तसवीर

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के खंडार उपखंड के छान गांव का नजारा इन दिनों लालिमा लिए हुए है. यदि पहाड़ की ऊंचाई पर चढ़ कर देखें, तो दूरदूर तक सिर्फ मिर्ची ही मिर्ची सूखती हुई दिखाई देती हैं. यहां की मिर्ची न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी धूम मचा रही है. देशभर के व्यापारी गांव में आ कर मंडी लगाते हैं और यहां से विदेशों तक सप्लाई करते हैं.

किसान फारुख खान, गुलफाम एवं जुनैद खान ने बताया कि गांव में सभी किसान मिर्ची का उत्पादन करते हैं. हमारे गांव की जलवायु मिर्ची के लिए बहुत उपयोगी है. पहले हम भी सामान्य तरीके से गेहूं, सरसों, चना, ज्वार, बाजरा, तिल की फसल लेते थे, पहले गांव के किसानों की स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन जब से मिर्ची एवं अन्य सब्जियों का उत्पादन वैज्ञानिक विधियों से करने लगे हैं, किसानों के दिन बदलने लगे हैं.

गांव में मिल रहा है लोगो को रोजगारः-

आज हमारे गांव में राजस्थान व मध्य प्रदेश के लगभग 2,000 लोगों को 9-10 माह तक लगातार मिर्ची की फसल से रोजगार मिल रहा है. लोग अस्थाई तौर पर यहां आ कर रहने लगे हैं.

जब मजदूरों से बात की, तो बोले कि हमें रोज 500-600 रुपए मजदूरी के रूप में मिल जाते हैं. हम परिवार सहित यहां रहते हैं.

Mirch

किसानों से जब छान की मिर्ची के प्रसिद्ध होने का राज पूछा, तो उन्होंने बताया कि हम उन्नत किस्म के बीजों का चयन करते हैं, वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद, उर्वरक एवं दवाओं का उपयोग करते हैं, समयसमय पर निराईगुड़ाई एवं रोग से ग्रसित पौधों का उपचार करते हैं.

हमारा गांव चारों तरफ से पहाड़ से घिरा हुआ है, इसलिए यहां सर्दी के मौसम में पाले एवं सर्दी का प्रकोप कम होता है, जिस वजह से सर्दी के मौसम में यहां फसल में नुकसान कम होता है.

उन्होंने बताया कि पहाड़ की वजह से जमीन की तुलना में पत्थर गरम रहता है और जब हम पहाड़ पर मिर्ची सुखाते हैं, तो नीचे एवं ऊपर का तापमान अच्छा होने की वजह से मिर्ची का रंग गहरा लाल हो जाता है. इसलिए उत्तर प्रदेश के किसानों से भी व्यापारी मिर्ची खरीद कर यहां सुखाने लाते हैं.

जब किसानों से फसल से मिलने वाले मुनाफे की बात की, तो किसान जुनैद एवं फारुख खान ने कुछ यों समझाया मुनाफे का गणित:

एक बीघा यानी 0.25 हेक्टेयर में यदि मौसम खराब हो या अन्य परिस्थिति अनुकूल न हो तो 150 मण उत्पादन हो जाता है. यदि सारी परिस्थिति अनुकूल हो, तो ये उत्पादन 500 मण तक हो जाता है, लेकिन हम 300 मण औषत उत्पादन मान लेते हैं.

औसत भाव 25 रुपए किलोग्राम मिल जाता है. इस प्रकार एक बीघा में औसत उत्पादन 3,00,000 रुपए तक हो जाता है, जिस में अधिकतम 1,00,000 रुपए तक खर्चा हो जाता है. इस प्रकार हमें लगभग 2,00,000 रुपए तक प्रति बीघा मुनाफा मिल जाता है.

महिलाओं को मिलेट्स (Millets) से पोषक उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग

उदयपुर: महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत कार्यस्त अखिल भारतीय समन्वित कृषिरत महिला अनुसंधान परियोजना द्वारा बडगांव पंचायत समिति के गांव धूर में ‘जैसा तन वेसा मन’ विषय पर 3 दिवसीय महिला प्रशिक्षण का आयोजन प्रशिक्षण प्रभारी डा. विशाखा सिंह के निर्देशन में 5 फरवरी से 7 फरवरी 2024 को किया गया.

यह प्रशिक्षण धूर गांव में न्यूट्री स्मार्ट विलेज स्कीम के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिस का उद्देश्य महिलाओं में पोषण व स्वास्थ्य और खुशहाल जीवनशैली के प्रति जागरूकता लाना एवं मिलेट्स (पोषक अनाजों) से मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाने का कौशल विकसित करना था.

आहार एवं पोषण वैज्ञानिक डा. सुमित्रा मीना ने महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए उचित आहार एवं पोषण का महत्व एवं पोषक अनाजों की स्वास्थ्य उपयोगिता और इन के मूल्य संवर्धित उत्पादों की जानकारी दी.

उन्होंने आगे बताया कि महिलाओं को मिलेट्स के उत्पाद ज्वार मामरा नमकीन, मिलेट्स के शक्करपारे, मिलेट मठरी, लड्डू इत्यादि बनाना सिखाया गया. वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. गायत्री तिवारी ने महिलाओं को खुशहाल जीवन जीने के तौरतरीके सिखाए, प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया, मनोरंजक खेल खिलाए एवं स्वस्थ रहने के लिए महिलाओं से आग्रह किया कि आप जीवन में व्यस्त रहें, मस्त रहें.

प्रशिक्षण के दौरान प्रश्नोत्तरी एवं खेल प्रतियोगिता भी आयोजित की गई. समापन समारोह में विजेता प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाणपत्र एवं उपहार भेट कर सम्मानित किया गया.

मुख्य अतिथि सरपंच जगदीश बंद्र गांछा ने महिलाओं से प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी का उपयोग अपने पोषण स्तर को सुधारने एवं सुखद जीवन जीने में करने को कहा.

अंत में वंग प्रोफैशनल डा. खेहा ने धन्यवाद व्यक्त किया. इस प्रशिक्षण के आयोजन में डा. प्रियंका जोशी एवं दीपाली का भी विशेष योगदान रहा.

देश का शीर्ष उद्यानिकी सम्मान (Horticulture Honor) छत्तीसगढ़ के  डा. राजाराम  त्रिपाठी को

बस्तर: वर्ष 2023 का कृषि उद्यानिकी का देश का शीर्ष सम्मान ‘चैधरी गंगाशरण त्यागी मैमोरियल ‘बैस्ट फार्मर अवार्ड इन हार्टिकल्चर’, बस्तर, छत्तीसगढ़ के डा. राजाराम त्रिपाठी को प्रदान किया गया.

यह पुरस्कार गुलाबी नगरी जयपुर में आयोजित ‘इंडियन हार्टिकल्चर सम्मिट ऐंड इंटरनैशनल कौंफ्रैंस’ कार्यक्रम में सोसायटी फौर हार्टिकल्चर रिसर्च ऐंड डवलपमैंट, इंडियन कौंसिल औफ एग्रीकल्चर रिसर्च आईसीएआर, राजस्थान एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय के राणा प्रताप सभागार में संपन्न भव्य समारोह में 3 फरवरी, 2024 को एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. बलराज सिंह, डा. बीएस तोमर, हेड, सागसब्जी, आईसीएआर-आईएआरआई व भारतीय हार्टिकल्चर रिसर्च एंड डवलपमैंट सोसायटी के सचिव डा. सोमदत्त त्यागी के हाथों प्रदान किया गया.

डा. राजाराम त्रिपाठी को यह पुरस्कार काली मिर्च की नई किस्म मां दंतेश्वरी काली मिर्च के विकास के लिए और आस्ट्रेलिया टीक एवं काली मिर्च के साथ जड़ीबूटियों की जैविक खेती की सफल जुगलबंदी के साथ ही नैचुरल ग्रीनहाउस की सफल अवधारणा के विकास आदि कई नवाचारों के जरीए उद्यानिकी विज्ञान के शोध एवं विकास में विशेष योगदान के लिए प्रदान किया गया.

उल्लेखनीय है कि डा. राजाराम त्रिपाठी द्वारा मात्र 7-8 सालों में तैयार होने वाले बहुपयोगी और बहुमूल्य आस्ट्रेलियन टीक के पेड़ों के रोपण के जरीए विकसित किए गए एक एकड़ के नैचुरल ग्रीनहाउस की लागत महज डेढ़ से 2 लाख रुपए आती है, जबकि एक एकड़ के प्लास्टिक व लोहे से तैयार होने वाले वर्तमान पौलीहाउस की लागत तकरीबन 40 लाख रुपए होती है.

वैसे, सामान्य पौलीहाउस की उपयोगी उम्र महज 7 साल होती है, उस के बाद वह प्लास्टिक और लोहे का कबाड़ हो जाता है, जबकि डा. राजाराम त्रिपाठी द्वारा विकसित 2 लाख रुपए की लागत वाला एक एकड़ के ‘नैचुरल ग्रीनहाउस‘ का मूल्य आस्ट्रेलियन टीक की बहुमूल्य लकड़ी और काली मिर्च से 10 सालों में कई करोड़ों का हो जाता है, इस के साथ ही इस में कई दशक तक खेती भी की जा सकती है.

इस अवसर पर डा. राजाराम त्रिपाठी ने मुख्य वक्ता की हैसियत से देशविदेश के कृषि एवं उद्यानिक वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के सामने अपने ‘नैचुरल ग्रीनहाउस’ मौडल की अवधारणा के समस्त वैज्ञानिक पहलुओं और तकनीकी बिंदुओं को विस्तार से रखते हुए अपना लीड लैक्चर प्रस्तुत किया.

डा. राजाराम त्रिपाठी का यह शोध आलेख अंतर्राष्ट्रीय कौंफ्रैंस के सोवेनिअर जर्नल में भी छपा है. 1 से 3 फरवरी तक चलने वाले उद्यानिकी के इस महाकुंभ में कई देशों से आए कृषि वैज्ञानिक, देश के कई प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, कृषि एवं उद्यानकी के विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों सहित बड़ी तादाद में कृषि शोध छात्रों की सहभागिता रही.

अक्षय धागा प्रोजैक्ट (Akshaya Dhaaga) के जरीए निःशुल्क सिलाई सीखेंगी युवतियां

बस्ती: ग्रामीण क्षेत्र की युवतियों को हुनरमंद बनाने के लिए 5 फरवरी को विकास खंड, बनकटी के थरौली ग्राम पंचायत के बोकनार में अक्षय धागा (Akshaya Dhaaga) निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ युवा विकास समिति के स्थानीय संयोजन में अक्षय शक्ति वेलफेयर एसोसिएशन, मुंबई के सहयोग से किया गया. केंद्र का उद्घाटन ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुनील पांडेय ने किया. इस दौरान मुख्य अतिथि ने युवतियों से कहा कि वे मन लगा कर प्रशिक्षण प्राप्त करें.

उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण युवतियां और महिलाएं अगर अक्षय धागा के तहत रेडीमेड गारमेंट और सिलाईकटाई का प्रशिक्षण लें, तो इस से व्यक्तिव्यक्ति, परिवारपरिवार होते हुए पूरा देश सशक्त हो सकेगा.
समाजसेवी सुरेश पांडेय ने कहा कि गंवई युवतियां सिलाई का कौशल सीख गांव वालों के कपड़े सिल कर तो आय अर्जित कर ही सकती हैं, बल्कि उन के लिए रेडीमेड सैक्टर में नौकरी के अवसर भी मुहैया होंगे और वे आत्मनिर्भर बनेंगी.

युवा विकास समिति के सचिव बृहस्पति कुमार पांडेय ने बताया कि अक्षय धागा केंद्र पर 2 बैच में 60 युवतियों को निःशुल्क सिलाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिस से सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर युवतियां माली तौर पर सबल हो सकेंगी और उन्हें रोजगार मिलेगा. केंद्र में स्कूल की ड्रैस, कारपोरेट सैक्टर की यूनिफार्म के अलावा कपड़ों की सिलाई का काम सिखाया जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद इन युवतियों को कपड़ा फैक्टरी में नौकरी दिलाई जाएगी.

प्रशिक्षिका सुनीता यादव ने बताया कि जिन युवतियों को घर की माली तंगी के कारण उन्हें आगे पढ़ने का मौका नहीं मिला, वे युवतियां भी सिलाई के काम को अपना व्यवसाय बना कर परिवार की आय बढ़ाने में सहयोग कर पाएंगी.

उन्होंने कहा कि अक्षय शक्ति वेलफेयर एसोशिएशन के अक्षय धागा प्रोजैक्ट के माध्यम से इन युवतियों के सपने साकार होने जा रहे हैं. इस मौके पर प्रेम नारायण उपाध्याय, माधुरी, हर्ष देव, तुलिका, सहित अनेकों लोग मौजूद रहे.

हमारे अन्नदाता देश की शान- अर्जुन मुंडा

नई दिल्ली: 26 जनवरी, 2024. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष पहल पर केंद्र सरकार के आमंत्रण पर विभिन्न राज्यों से देश की राजधानी दिल्ली आए डेढ़ हजार से ज्यादा किसान भाईबहनों ने गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में जोश व उमंग के साथ शिरकत की. इन में से कई किसान पहली बार राजधानी आए थे.

कर्तव्य पथ पर मुख्य समारोह में शामिल होने के बाद ये किसान पूसा परिसर में आए, जहां केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने इन का स्वागत किया. इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री कैलाश चैधरी व शोभा करंदलाजे, डेयर के सचिव व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक और वैज्ञानिक एवं तमाम अधिकारी उपस्थित थे.

पूसा में 2 दिवसीय किसान सम्मेलन के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वें गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में नारी शक्ति को प्रधानता दी, जिस के लिए उन का हार्दिक धन्यवाद दिया. प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं, युवाओं, किसानों व गरीबों के लिए लगातार काम कर रहे हैं और इन तबकों के लिए देश में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं, साथ ही विकसित भारत बनाने में इन सब का अविस्मरणीय योगदान रहेगा.

उन्होंने कहा कि हमारे अन्नदाता, हमारे देश की शान हैं , जो किसी जातिवर्ग से बंधे हुए नहीं हैं, बल्कि समग्र रूप से देश का पेट भर रहे हैं और मुझे खुशी है कि ऐसे अन्नदाताओं के बीच काम करने का मौका मिल रहा है.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि किसानों को इस भावना के साथ काम करना चाहिए कि हम किसी से कम नहीं, वहीं अपने लहलहाते खेतों व उर्वरा मिट्टी के माध्यम से विकसित भारत में अपना योगदान देना चाहिए. किसानों की नई पीढ़ी भी इस दिशा में आगे आए.

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मंत्री अर्जुन मुंडा ने जानकारी दी कि देश में रिकौर्ड खाद्यान्न उत्पादन हुआ है, जिस का श्रेय किसानों को जाता है. साल 2013-14 में उत्पादन तकरीबन 265 मिलियन टन था, वहीं 2022-23 में बढ़ कर 329.69 मिलियन टन हो गया. बागबानी उत्पादन भी 351.92 मिलियन टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है.

मोदी सरकार ने किसानों के लिए कई लाभकारी योजनाएं चलाई हैं, साथ ही किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी लाभ पहुंचाया गया है. विशेष रूप से बीते एक दशक में धान एमएसपी में 66.79 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि गेहूं एमएसपी 62.50 फीसदी बढ़ी है, जो किसानों के लिए अनुकूल व सुरक्षित वातावरण बनाती है. इसी तरह केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-औयल पाम के जरीए खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इस का मकसद अतिरिक्त क्षेत्रों को औयल पाम की खेती में शामिल करना है.

उन्होंने बताया कि साल 2019 में पीएम किसान सम्मान निधि की शुरुआत से अब तक 11 करोड़ से अधिक किसानों को हर साल 6 हजार रुपए की अतिरिक्त आय सहायता प्रदान करना भी एक गेमचेंजर साबित हुआ है. इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी कृषि मंत्रालय की प्रमुख पहल है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2016 में शुरू किया था.

 

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किसान नामांकन के मामले में दुनिया की यह सब से बड़ी फसल बीमा योजना व बीमा प्रीमियम में तीसरे नंबर की यह योजना 22 राज्यों व संघ राज्य क्षेत्रों में लागू जा रही है, जिस में अन्य राज्य जुड़ रहे हैं. इस में किसानों के नामांकन में अत्यधिक वृद्धि के साथ साल 2023 में 2 करोड़ से अधिक का सर्वकालिक उच्च नामांकन हुआ है. बीमित क्षेत्र में भी साल 2022-23 में पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो 497 लाख हेक्टेयर से अधिक के व्यापक कवरेज तक पहुंच गई है.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जैसी पहलों से किसानों को सशक्त बनाया जा रहा है व खेतीकिसानी को बढ़ावा दिया जा रहा है. जैविक व प्राकृतिक खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने जनांदोलन के रूप में प्राकृतिक खेती पर बल दिया है.

मंत्री अर्जुन मुंडा सम्मेलन के पहले और बाद में किसानों से अलगअलग समूहों के साथ फोटो सैशन में शामिल हुए और उन से अपनेअपने राज्यों में कृषि क्षेत्र से संबंधित चर्चाएं की. दिल्ली प्रवास के दौरान किसानों ने पूसा में प्रशिक्षण लिया.

प्रसार्ड ट्रस्ट द्वारा गणतंत्रता दिवस पर किसान गोष्ठी का आयोजन

देवरिया: किसानों एवं गांव वालों के उत्थान के लिए समर्पित स्वयं सेवी संस्था प्रो. रवि सुमन, कृषि एवं ग्रामीण विकास (प्रसार्ड) ट्रस्ट मल्हनी, भाटपार रानी, देवरिया के वरिष्ठ सदस्य सुरेश चंद्र मौर्य द्वारा 26 जनवरी को प्रातः 10 बजे राष्ट्रीय ध्वजारोहण ट्रस्ट सैंटर महुआवारी पर किया गया.

इस के उपरांत किसान गोष्ठी आयोजित की गई. बाहर रहने के कारण ट्रस्ट के निदेशक प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने डिजिटल माध्यम से सभी को शुभकामनाएं देते हुए कृषि एवं ग्रामीण विकास के उत्थान पर बल दिया. साथ ही, वर्तमान में पड़ रही शीत लहर एवं ठंड से आमजन, पशुओं एवं फसलों को बचाने के उपाय बताए.

गोष्ठी को संबोधित करते हुए चंद्र प्रकाश मौर्य ने कहा कि इस समय जैविक खेती पर विशेष बल देने की जरूरत है, जो पशुपालन से ही मुमकिन है. रासायनिक खेती से बहुत सी बीमारियां हो रही हैं. कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का गठन कर उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है.

डा. विकास कुमार मौर्य ने फिजियोथैरेपी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फिजियोथैरेपी के माध्यम से इनसान की बहुत सी बीमारियों को दूर किया जा सकता है.

नर्सरी उत्पादक ओमप्रकाश ने जायद की सब्जियों की खेती पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फरवरी माह में भिंडी, लौकी, कद्दू, तुरई, खीरा, ककड़ी, करेला आदि की बोआई कर सकते हैं.

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त लेखाकार, प्रदीप कुमार, सेवानिवृत्त मेजर चंद्र मोहन यादव, ग्राम प्रधान स्वामी प्रसाद, संजय यादव, जयराम, ब्रजेश गुप्ता सहित कई दर्जन वरिष्ठ नागरिक, सेवानिवृत्त लोगों ने भाग लिया.