देश में बढ़ रही मोटे अनाज (Coarse Grains) की खेती

देश को पोषक आहार उपलब्ध कराने, घरेलू और वैश्विक मांग पैदा करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष (आईवाईएम) घोषित करने का संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव किया था. भारत के इस प्रस्ताव को 72 देशों का समर्थन मिला और संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने मार्च, 2021 में वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित कर दिया.

भारतीय मोटे अनाजों को वैश्विक बाजारों में पहुंचाने और अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के उद्देश्य को हासिल करने के लिए भारत सरकार ने सक्रिय हो कर अनेकानेक हितधारकों (केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, राज्यों व संघ शासित प्रदेशों, किसानों, स्टार्टअप, निर्यातकों, खुदरा कारोबारियों, होटलों, भारतीय राजदूतावासों आदि) को इस से जोड़ने के दृष्टिकोण के साथ काम किया.

अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 के दौरान पूरा फोकस उत्पादन और उत्पादकता, उपभोग, निर्यात, मूल्य श्रंखला को मजबूत बनाने, ब्रांडिंग, स्वास्थ्य लाभ जागरूकता बढ़ाने आदि पर रहा. भारत सरकार ने इसे जनअभियान बनाने के लिए अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया, ताकि भारतीय मोटे अनाजों, उन के व्यंजनों, मूल्यवर्धित उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया जा सके.

भारत में जी20 अध्यक्षता, मिलेट पाककला उत्सव, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों, शेफ सम्मेलन, कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ), रोड शो, किसान मेलों, अर्धसैनिक बलों के लिए रसोइया प्रशिक्षण, दिल्ली और इंडोनेशिया में आसियान भारत मिलेट त्योहार आदि में श्रीअन्न (मिलेट) को बढ़ावा दिया गया.

अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), के पूसा परिसर, नई दिल्ली में 18-19 मार्च, 2023 को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम वैश्विक मिलेट (श्रीअन्न) सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिस का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और मोटे अनाज पर आयोजित प्रदर्शन को 3 दिन और बढ़ाया गया.

भारत को ‘श्रीअन्न’ का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने के लिए मिलेट के बेहतर तौरतरीकों, शोध और प्रौद्योगिकियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने के लिए भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर), हैदराबाद को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र घोषित किया गया.

भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद मोटे अनाज के मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों, दैनिक व्यंजनों आदि को ले कर किसानों, महिला किसानों, गृहणियों, छात्रों और युवा उद्यमियों को प्रशिक्षण और उन्हें अपने उद्यम स्थापित करने में सहायता भी दे रहा है.

संस्थान ने ’’ईट्राइट’’ टैग, संगठित जागरूकता कार्यक्रमों, कृषि व्यवसाय इन्क्यूबेटर, प्रौद्योगिकी व्यवसाय इन्क्यूबेटर आदि के तहत मोटे अनाज के खाद्य पदार्थ, उन की ब्रांडिंग के लिए ‘‘रेडी टू ईट’’ और ‘‘रेडी टू कुक’’ सहित मूल्यवर्धित प्रौद्योगिकी भी विकसित की है.

राजस्थान में बाड़मेर के निकट गुडामलानी में बाजरा के नए क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र का 27 सितंबर, 2023 को उद्घाटन किया गया. वैश्विक स्तर पर मिलेट को ले कर जागरूकता और अनुसंधान सहयोग मजबूत बनाने के लिए एक नई पहल जैसे कि, ‘मिलेट और अन्य प्राचीन अनाज अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान पहल (महारिषी)’ को भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान अपनाया गया.

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने मिलेट आधारित उत्पादों के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को 800 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ वर्ष 2022-23 से 2026-27 के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण अभियान के तहत भी मोटे अनाज को शामिल किया गया.

इस के अलावा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस), एकीकृत बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) और मध्याह्न भोजन के तहत मोटा अनाज खरीद बढ़ाने के लिए अपने दिशानिर्देशों में संशोधन किया.

भारत से मोटे अनाज का निर्यात संवर्धन, विपणन और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मोटे अनाज को बढ़ावा देने को समर्पित एक निर्यात संवर्धन फोरम स्थापित की गई. ईट राइट (सही खानपान) अभियान के तहत स्वस्थ और विविध आहार के हिस्से के तौर पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) मिलेट उपयोग बढ़ाने को जागरूकता बढ़ा रहा है.

सरकारी कर्मचारियों में मोटा अनाज उपभोग प्रोत्साहित करने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों को विभागीय प्रशिक्षणों, बैठकों में श्रीअन्न से तैयार जलपान और विभागीय कैंटीनों में श्रीअन्न आधारित खाने की चीजों को शामिल करने को कहा गया है.

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग 28 राज्यों और जम्मूकश्मीर और लद्दाख – दो संघ शासित प्रदेशों के सभी जिलों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत पोषक अनाजों (मिलेट) पर एक उपमिशन चला रहा है. एनएफएसएम कार्यक्रम के तहत ज्वार, बाजरा, रागी, मंडुआ, गौण मिलेट जैसे कि कंगनी, काकुन, चीना, कोदो, झंगोरा, सांवा, कुटकी और दो छद्म मिलेट कुट्टू और चैलाई जैसे पोषक अनाज शामिल हैं.

एनएफएसएम के तहत पोषक अनाजों के तहत राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से फसल उत्पादन और सुरक्षा प्रौद्योगिकियों, फसल प्रणाली आधारित प्रदर्शनों, नई जारी किस्मों व संकरों के प्रमाणित बीजों का उत्पादन और वितरण, एकीकृत पोषक तत्व और कीटनाशक प्रबंधन तकनीकों, बेहतर कृषि उपकरणों, औजारों, संसाधन संरक्षण मशीनरी, जल संरक्षण उपकरण, फसल मौसम के दौरान प्रशिक्षण से किसानों का क्षमता निर्माण, कार्यक्रमों, कार्यशालाओं का आयोजन, बीज मिनीकिट वितरण, प्रिंट और इलैक्ट्रोनिक मीडिया आदि के माध्यम से प्रचार के जरीए किसानों को प्रोत्साहन दिया जाता है.

इस के अलावा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत भारत सरकार राज्यों को राज्य विशिष्ट जरूरतों, प्राथमिकताओं के लिए लचीलापन भी प्रदान करती है. राज्य आरकेवीवाई के तहत राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय मंजूरी समिति से मंजूरी ले कर मिलेट (श्रीअन्न) को बढ़ावा दे सकते हैं. साथ ही, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने मिलेट को बढ़ावा देने के लिए राज्य में मिलेट मिशन की शुरुआत की है.

गेहूं (Wheat) की बिक्री के लिए तुरंत करें पंजीयन

भोपाल: जिला आपूर्ति नियंत्रक मीना मालाकार ने बताया कि जिले में रबी विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर गेहूं (Wheat) बिक्री के लिए पंजीयन के लिए किसानों द्वारा स्वयं के मोबाइल अथवा कंप्यूटर, ग्राम पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्र, सहकारी समिति पर निःशुल्क पंजीयन और एमपीऔनलाइन कियोस्क, कौमन सर्विस सैंटर, लोक सेवा केंद्रों पर, निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर 50 रुपए का शुल्क जमा करा कर 1 मार्च, 2024 तक सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक गेहूं का पंजीयन करवा सकते हैं.

मीना मालाकार ने बताया सिकमी, बंटाईदार एवं वन पट्टाधारी किसानों के पंजीयन सहकारी समिति सहकारी विपणन सहकारी संस्था के केंद्रों पर किए जाएंगे. किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा, जबकि भूअभिलेख में दर्ज खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधारकार्ड में दर्ज नाम से होगा.

पंजीयन के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन उस से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमीट्रिक डिवाइस से किया जाएगा.

किसान के परिवार में जिन सदस्यों के नाम भूमि होगी, वे सभी अपना अलगअलग पंजीयन कराएंगे. किसान की भूमि यदि दूसरे जिले में है, तो उस जिले में पंजीयन कराया जाएगा. जिले में अलगअलग स्थानों पर भूमि होने पर एक ही केंद्र पर सभी भूमियों का पंजीयन होगा.

उन्होंने किसानों से अपील की कि 1 मार्च, 2024 तक अनिवार्य रूप से पंजीयन कराएं. निर्धारित समयावधि के पश्चात पंजीयन किया जाना संभव नहीं होगा.

ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय में स्थापित सुविधा केंद्र एमपी किसान एप पर पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है एवं एमपी औनलाइन कियोस्क, सर्विस सैंटर, लोक सेवा केंद्र, निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर पंजीयन की सशुल्क 50 रुपए प्रति पंजीयन की व्यवस्था की गई है.

सरसों (Mustard) उत्पादन में राजस्थान पहले नंबर पर

जयपुर: राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय द्वारा 5वें ब्रासिका सम्मेलन का सरसों अनुसंधान समिति के सहयोग से आयोजन शुरू हुआ. तीनदिवसीय सम्मेलन का आरंभ कृषि मंत्री डा. किरोड़ी लाल मीणा ने किया.

कृषि मंत्री डा. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राजस्थान सरसों उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और राजस्थान के पूर्वी जिलों में सर्वाधिक सरसों उत्पादन होता है. उन्होंने बताया कि राजस्थान उच्च गुणवत्ता की सरसों का उत्पादक राज्य है, फिर भी इतनी पैदावार होने के बाद भी सरसों का आयात करना पड़ता है, क्योंकि आईसीएआर के अनुसार, पहले तेल की प्रति व्यक्ति उपभोग दर 8 किलोग्राम थी और वर्तमान में उपभोग दर बढ़ कर 19 किलोग्राम हो गई है, इसलिए प्रति व्यक्ति उपभोग दर बढ़ने से कमी का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रहे हैं, इसलिए हमें भी आत्मनिर्भर होने के लिए काम करने की जरूरत है. उन्होंने वैज्ञानिकों से विचारविमर्श करते हुए कहा कि हमें सरसों में प्राकृतिक आपदा और चेंपा जैसी समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी ईजाद करनी चाहिए.

विश्वविद्यालय के कुलपति डा. बलराज सिंह ने बताया कि राजस्थान सरसों उत्पादन का मुख्य राज्य है, जिस में पैदावार की अपार संभावनाएं हैं, जिस पर हमें काम करने की जरूरत है, वहीं एफिड की समस्या के अतिरिक्त वातावरण परिवर्तन की अनेक समस्याओं के साथसाथ बीमारियों की समस्याएं भी सरसों की पैदावार घटाने में अहम हैं, जिस पर हमें ध्यान देूने की जरूरत है. राजस्थान के कई जिले अन्य तिलहन फसलों के उत्पादक हैं. सरसों व तारामीरा तेल उत्पादन के साथसाथ शहद उत्पादन में भी मुख्य भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में अखिल भारतीय गेहूं सुधार परियोजना के तहत कई किस्में विकसित की गई हं,ै जिन में राज 3077 सब से पुरानी किस्म है और जौ में माल्टिंग प्रयोग, दोहरे प्रयोग की किस्में और चारे के लिए प्रयोग की किस्में विकसित की गई हैं. साथ ही, खाद्य प्रयोग के लिए प्रयुक्त जौ पर काम किया जा रहा है, जो मधुमेह के मरीजों के लिए लाभदायक होता है.

इस दौरान सारांश पुस्तिका एवं डा. मनोहर राम एवं अन्य वैज्ञानिकों द्वारा लिखी गई सरसों एवं तारामीरा के इतिहास पुस्तिका का विमोचन किया गया. सम्मेलन में देशभर से आए तकरीबन 176 वैज्ञानिकों ने शिरकत की. सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि के तौर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्र भी उपस्थित रहे.

पंद्रह किसान सेवा केंद्र मिले असंचालित, मिला नोटिस

जयपुर: कृषि विभाग द्वारा पिछले दिनों राज्यभर के किसान सेवा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया. प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी वैभव गालरिया ने बताया कि राजकीय सेवा में सुशासन के उच्च मानक विकसित करने और प्रशासनिक सुधार की दृष्टि से राज्य सरकार के निर्देशानुसार समय की पांबदी, राजकार्य में संवेदनशीलता, पारदर्शिता, प्रदेश के किसानों को विभागीय योजनाओं से लाभान्वित करने, विभागीय कामों की प्रगति की समीक्षा और प्रभावी मौनिटरिंग के लिए जिलेवार प्रभारी नियुक्त कर विभागीय अधिकारियों द्वारा पूरे प्रदेश के कृषि कार्यालयों और कृषि सेवा कंेद्रों में आकस्मिक निरीक्षण किए गए.

प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया ने बताया कि राज्यभर में प्रभारी अधिकारियों द्वारा 95 किसान सेवा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया, जिस में 80 किसान सेवा केंद्र संचालित व 15 असंचालित पाए गए और 12 कार्मिक अनुपस्थित मिले. अनुपस्थित व अन्य कामों में लापरवाही बरतने वाले 17 कार्मिकों को नोटिस जारी किए गए.

प्रभारी अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान कार्मिकों को निर्देश दिए कि किसान सेवा केंद्र में आने वाले किसानों को विभागीय योजनाओं एवं दी जा रही सुविधाओं के बारे में बताया जाए और डीबीटी स्कीम योजना के तहत लंबित पत्रावलियों की समयबद्ध फिजिकल वेरिफिकेशन करवा कर अनुदान संबंधी कार्यवाही करें. किसान सेवा केंद्रों को स्वच्छ व किसान सेवा केंद्र रजिस्टरों को सुचारु रूप से अपडेट रखने के लिए भी कहा.

किसान निःशुल्क लें ड्रोन (Drone) प्रशिक्षण, करें तुरंत आवेदन

चंडीगढ़: हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा हरियाणा में ड्रोन (Drone) के उपयोग से खेती के काम में नई तकनीक के प्रयोग को प्रोत्साहन देने के लिए अनेक काम किए जा रहे हैं, जिन में से ड्रोन के उपयोग से खेती में नई क्रांति लाई जा रही है. इसी दिशा में विभाग द्वारा निःशुल्क ड्रोन प्रशिक्षण के लिए दूसरे चरण में औनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं.

विभाग के एक प्रवक्ता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि किसानों और नौजवानों को ड्रोन चलाने का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 10वीं पास युवक, जिस की उम्र 18 से 45 साल होगी, सीएचसी या एफपीओ के सदस्य हैं, आवेदन के पात्र हैं.

प्रवक्ता ने आगे बताया कि इस से खेती के काम में नए सुधारों से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा. किसानों को आधुनिक तकनीक मिलेगी. साथ ही, उन के उत्पाद और आसानी से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहुंचेंगे.

प्रवक्ता ने यह भी बताया कि लाभार्थियों का चयन संबंधित जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारी समिति के माध्यम से निर्धारित चयन प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा. औनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 19 फरवरी, 2024 है.

इच्छुक किसान, युवा और महिलाएं आवेदन व पंजीकरण के लिए www.agriharyana.gov.in  पर जा कर आवेदन व पंजीकरण कर सकते हैं.

कांग्रेस ने ‘भारत बंद’ (Bharat Bandh) के लिए आईफा को दिया समर्थन

देश के बहुसंख्यक किसानों और विभिन्न तबकों ने शांतिपूर्ण ‘भारत बंद‘ (Bharat Bandh) का आवाह्न किया. सर्वविदित है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उन की केंद्र सरकार ने किसानों को ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य‘ दिलाने की गारंटी देने के बावजूद और सत्ता में 10 साल रहने के उपरांत भी इस पर कोई फैसला नहीं लिया है.

यह सरासर वादाखिलाफी है. इस से देश के किसानों की दशा बद से बदतर हो गई है.

आज किसान अपनी सभी फसलों के लिए ‘एमएसपी गारंटी कानून‘ के अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, पुलिस मामलों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘न्याय‘, दिल्ली आंदोलन के दौरान मारे गए किसान परिवारों को मुआवजा और प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी की भी मांग आदि को ले कर किसान संघर्षरत हैं.

किसानों की तरफ से जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है.

इस अवसर पर देशभर के 45 किसान संगठनों का सब से बड़ा महासंघ ’अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा)’ इन जरूरी मुद्दों पर अपने सभी साथी संगठनों और किसानों के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है.

समर्थन के लिए किसान संगठनों की ओर से डा. राजाराम त्रिपाठी ने कांग्रेस कमेटी कोंडागांव को धन्यवाद दिया और सभी किसानों से अपील की कि ‘भारत बंद’ के दौरान किसी भी तरह की हिंसा, अनुशासनहीनता, असंयम, दुव्र्यवहार की स्थिति कदापि नहीं आनी चाहिए.

आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक हो और कानून को हाथ में लेने से हर हाल में बचें. स्कूली बच्चों, चिकित्सा संबंधी और अन्य अनिवार्य सेवाएं बाधित न होने पाएं.

रबी फसल के मिलेंगे सही दाम, करें फसल पंजीयन (Crop Registration)

विदिशा: भारत सरकार की प्राइज सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत रबी वर्ष 2023-24 (विपणन वर्ष 2024-25) के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर चना, मसूर, सरसों के लिए पंजीयन कार्यवाही 20 फरवरी से शुरू होगी और 10 मार्च तक जारी रहेगी. कलक्टर उमा शंकर भार्गव ने बताया कि विदिशा जिले में गेहूं का पंजीयन कार्य जिन केंद्रों पर किया जा रहा है, उन केंद्रों पर चना, मसूर, सरसों का भी पंजीयन कार्य किया जाएगा. इस प्रकार जिले में 123 पंजीयन केंद्रों पर गेहूं, चना, सरसांे, मसूर का पंजीयन कार्य निर्धारित तिथियों तक किया जाएगा.

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उपसंचालक केएस खपडिया ने बताया कि पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था के तहत स्वयं के मोबाइल एमपीकिसान एप के माध्यम से ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों एवं पूर्व वर्ष की भांति सहकारी समितियों द्वारा (सिकमी, बंटाईदार, कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं विपणन सहकारी संस्था स्तर पर स्थापित पंजीयन केंद्रों पर उपलब्ध होगी) पंजीयन सशुल्क 50 रुपए दे कर एमपी औनलाइन कियोस्क, लोक सेवा केंद्रों, कौमन सर्विस सैंटर कियोस्क पर, निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर भी सशुल्क पंजीयन करा सकेंगे.

कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों से अपील की गई है कि अपनी उपज का पंजीयन कराने से पहले आधारकार्ड नंबर से बैंक खाता एवं मोबाइल नंबर को लिंक अवश्य करा लें. विस्तृत जानकारी के लिए कंट्रोल रूम संचालित किया जा रहा है, जिस का टैलीफोन नंबर 07592-233153 पर संपर्क कर समाधान प्राप्त कर सकते हैं.

प्रो. स्वामीनाथन (Prof Swaminathan) को भारत रत्न: भाकृअनुसं में आयोजन

नई दिल्ली: 13 फरवरी, 2024 को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने विशेष समारोह का आयोजन किया, जिस में प्रतिष्ठित भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन (Prof Swaminathan), एक प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक और भारतीय हरित क्रांति के जनक को समर्पित किया गया.

स्वागत भाषण डा. अशोक कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-भाकृअनुसं और सचिव, एनएएएस द्वारा दिया गया. उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र के लिए बहुत सम्मान व गर्व की बात है कि प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन को 9 फरवरी, 2024 को भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है.

उन्होंने प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन के आजीवन समर्पण एवं कृषि अनुसंधान, सतत विकास और खाद्य सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रो. स्वामीनाथन के दूरदर्शी नेतृत्व और नवीन दृष्टिकोण ने भारत और उस के बाहर के कृषि परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है.

इस के उपरांत डा. हिमांशु पाठक, सचिव, डेयर और महानिदेशक, भाकृअनुप एवं अध्यक्ष, एनएएएस ने प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और उन के जीवन के प्रतिबिंबों पर प्रकाश डाला. उन्होंने सीआरआरआई, कटक में प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन के साथ काम करने की अपनी यादें ताजा कीं.

Prof Swaminathan

मंच पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष डा. टी. महापात्र, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल के कुलाधिपति डा. आरबी सिंह और टीएएएस के संस्थापक अध्यक्ष डा. आरएस परोदा शामिल थे. डा. एचएस गुप्ता, डा. पंजाब सिंह, डा. केवी प्रभु और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में औनलाइन माध्यम से शामिल हुए.

प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन, जिन्हें भारत के हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है, को 1960-70 के दशक के दौरान गेहूं और धान की फसलों की उत्पादकता और उत्पादन बढ़ाने के अपने ऐतिहासिक काम के जरीए लाखों लोगों को भुखमरी से बचाने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने ‘‘हरित क्रांति‘‘ को ‘‘सदाबहार क्रांति‘‘ में बदलने की अद्वितीय अवधारणा भी प्रदान की. उन्होंने गरीबों को लाभान्वित करने के लिए विज्ञान की शक्ति में दृढ़ता से विश्वास रखा और वह किसानों को जानकारी और संसाधनों से सशक्त करने के मुखर समर्थक भी रहे. उन्होंने साल 1988 में एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की.

 

साथ ही, उन्होंने आर्थिक विकास के लिए रणनीतियों को विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए अपनी आखिरी सांस तक वहां काम किया, जिस का लक्ष्य सीधेतौर पर गरीब किसानों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार में वृद्धि करना था. उन की विरासत दुनियाभर के शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और अधिवक्ताओं को जलवायु परिवर्तन से ले कर सतत कृषि तक हमारे समय की गंभीर चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रेरित करती रहती है.

समारोह में प्रोफैसर एमएस स्वामीनाथन के शानदार जीवनवृत्त और स्थाई विरासत पर भाषण, प्रस्तुतियां और विचार प्रस्तुत किए गए. मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को कृषि, अनुसंधान और ग्रामीण विकास में उन के अमूल्य योगदान के लिए अपनी कृतज्ञता और सराहना व्यक्त करने का अवसर मिला.

जब उन्होंने 1960 के दशक में नोबल पुरस्कार विजेता डा. नार्मन बोरलाग के साथ हरित क्रांति की प्रमुख पहल की, तो बाद में उन्होंने सशक्त विकास के लिए कृषि सभी क्षेत्रों को समाहित करने के लिए एक सदैव हरित क्रांति की प्रेरणा की. प्रोफैसर स्वामीनाथन ने भारत में कई प्रमुख पदों को सुंदरता, नवीनता और रचनात्मकता के साथ संभाला जैसे कि निदेशक, भाकृअनुसं (1961-72), महानिदेशक, भाकृअनुप और नवगठित डेयर के सचिव (1972-79), कृषि सचिव, भारत सरकार।(1979), कार्यवाहक उपाध्यक्ष और सदस्य, योजना आयोग (1980-82).

इस के अलावा वे अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, फिलीपींस (1982-88) के महानिदेशक बनने वाले पहले भारतीय थे. उन के नेतृत्व को 1987 में पहले विश्व खाद्य पुरस्कार से मान्यता मिली थी. उन की सब से महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक 2004 में आई, जब उन्हें राष्ट्रीय किसान आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. प्रोफैसर स्वामीनाथन ने अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (एआरएस) के निर्माण में भी महती भूमिका निभाई थी. कृषि के बारे में अपनी गहरी समझ और नीति निर्माताओं के साथ व्यापक जुड़ाव का लाभ उठाते हुए प्रो. स्वामीनाथन ने कृषि नीति पर निष्पक्ष, ज्ञान आधारित और समग्र मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए समर्पित एक स्वतंत्र ‘‘थिंक टैंक‘‘ के निर्माण का समर्थन किया, जिस के कारण साल 1990 में एनएएस की स्थापना हुई.

प्रो. एमएस स्वामीनाथन की उच्च आयु के बावजूद स्वामीनाथन अनुसंधान और समर्थन में सक्रिय रहे. उन्होंने अपने लेखन, सार्वजनिक भाषण और कई मंच और सम्मेलनों में भाग ले कर ग्रामीण विकास, खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि के बारे में चर्चा में योगदान करना जारी रखा. प्रोफैसर स्वामीनाथन ने कृषि विकास, अनुसंधान और नीति समर्थन के प्रति समर्पित संस्थाओं और संघों की स्थापना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

इन संस्थानों ने उन के दृष्टिकोण और मूल्यों को आज भी निरंतर बनाए रखा है. प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन की बेटियां डा. निथ्या, डा. माधुरा और डा. सौम्या ने कार्यक्रम में अपनी आभासी उपस्थिति दर्ज की और उन के जीवन के प्रतिबिंबों पर विचारविमर्श किया.

कार्यक्रम का समापन एनएएएस के सचिव डा. वजीर सिंह लाकड़ा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ.

‘सरस’ दूध (‘Saras’ Milk) : गुणवत्ता से समझौता नहीं

जयपुर: पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा है कि राजस्थान राज्य की सहकारी डेयरियों में उत्पादित ‘सरस’ दूध (‘Saras’ Milk)  की गुणवत्ता ही इस की पहचान है और इस से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि प्रदेश में नवगठित सरकार की पहली प्राथमिकता राज्यभर की सहकारी डेयरियों से जुड़े दुग्ध उत्पादकों का सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान है और इस के लिए नई कल्याणकारी योजनाएं अमल में लाई जाएंगी. ग्रास रूट लेवल तक दुग्ध उत्पादकों को सहकारी डेयरियों से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे और अधिक से अधिक संख्या में नई प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि ‘सरस’ ब्रांड को न केवल राजस्थान, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी लोकप्रिय बनाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाने चाहिए.

मंत्री जोराराम कुमावत सरस संकुल मुख्यालय में राज्यभर की सहकारी डेयरियों के निर्वाचित अध्यक्षों के साथ आयोजित परिचर्चा में डेयरी अधिकारियों और निर्वाचित अध्यक्षों को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दूध और ‘सरस’ ब्रांड के पशु आहार में किसी तरह की कोई मिलावट बरदाश्त नहीं की जाएगी.

इस के लिए एक राज्यस्तरीय टास्क फोर्स का गठन कर मिलावटखोरी को रोकने के लिए एक अभियान चलाया जाना चाहिए. प्रदेश में दुग्ध उत्पादकों की सामाजिक सुरक्षा और उन के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. वर्तमान में चल रही सुरक्षा योजनाओं को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा.

पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि जिला दुग्ध संघों के निर्वाचित पदाधिकारी और डेयरी अधिकारियों में बेहतर समन्वय स्थापित किए जाने के प्रयास होने चाहिए, ताकि इस का लाभ आम दुग्ध उत्पादकों को मिल सके.

उन्होंने आसीडीएफ सहित सभी जिला दुग्ध संघों में मानव संसाधनों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत 656 पदों पर तुरंत भरती किए जाने पर जोर दिया और शेष पदों के लिए एनडीडीबी की विशेषज्ञ सेवाएं लेने के निर्देश प्रदान किए.

Saras Milk

परिचर्चा के दौरान प्रदेशभर से आए जिला दुग्ध संघों से आए जिला दुग्ध संघों के निर्वाचित अध्यक्षों ने राज्य में डेयरी विकास के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए और व्यावहारिक समस्याओं की ओर मंत्री का ध्यान आकर्षित किया.

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने दुग्ध उत्पादकों को बकाया भुगतान करने के लिए राज्य सरकार की ओर से देय राशि के तुरंत भुगतान सहित अन्य समस्याओं के अतिशीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया.

परिचर्चा में भाग लेते हुए पशुपालन एवं गोपालन के प्रमुख शासन सचिव विकास सीताराम भाले ने कहा कि राज्य में डेयरी की अपार संभावनाएं हैं. इन संभावनाओं को तलाशने में सहाकरी डेयरियों के निर्वाचित अध्यक्षों की महती भूमिका है.

उन्होंने खुशी जाहिर की कि राजस्थान ने दुग्ध उत्पादन में देशभर में पहला स्थान प्राप्त कर लिया है. उन्होंन आश्वस्त किया कि राज्य सरकार दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेगी.

डेयरी फेडरेशन की प्रबंध संचालक सुषमा अरोड़ा ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान आरसीडीएफ एवं जिला दुग्ध संघों द्वारा अर्जित उपलब्धियों को रेखांकित किया और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला. परिचर्चा में निर्वाचित अध्यक्ष के अलावा डेयरी फेडरेशन के वित्तीय सलाहकार ललित मोरोड़िया सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.

अधिक मुनाफा वाली सरसों कि उन्नत किस्में (Mustard Varieties)

हिसार: चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित सरसों की उन्नत किस्में न केवल हरियाणा, बल्कि देश के अन्य प्रदेशों के किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगी. इस के लिए विश्वविद्यालय ने नैशनल क्राप साइंस, बीकानेर (राजस्थान), माई किसान एग्रो नीमच (मध्य प्रदेश), फेम सीड्स (इंडिया) व उत्तम सीड्स हिसार के साथ तकनीकी व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध किसानों तक नहीं पहुंचेंगे, तब तक उस का कोई फायदा नहीं है. इसलिए इस तरह के समझौतों से विश्वविद्यालय का प्रयास है कि यहां विकसित फसल की उन्नत किस्मों व तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जा सके.

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित सरसों की किस्म आरएच 1424 समय पर बोआई और बारानी परिस्थितियों में खेती के लिए उपयुक्त है, जबकि आरएच 1706 एक मूल्यवर्धित किस्म है.

उन्होंने आगे जानकारी देते हुए यह भी कहा कि उपरोक्त किस्में सरसों उगाने वाले राज्यों की उत्पादकता को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी . हरियाणा पिछले कई सालों से सरसों फसल की उत्पादकता के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है. यह मुकाम विश्वविद्यालय में सरसों की अधिक उपज देने वाली किस्मों के विकास एवं किसानों द्वारा उन्नत तकनीकों को अपनाने के कारण ही संभव हुआ है. अब तक यहां अच्छी उपज क्षमता वाली सरसों की कुल 21 किस्मों को विकसित किया गया है.

एकसाथ 4 कंपनियों के साथ हुआ समझौता

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कुलपति प्रो. बीआर कंबोज की उपस्थिति में विश्वविद्यालय की ओर से समझौता ज्ञापन पर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. एसके पाहुजा ने हस्ताक्षर किए. राजस्थान स्थित बीकानेर की नैशनल क्राप साइंस सरसों की किस्म आरएच 1424 के लिए समझौता ज्ञापन पर कंपनी की तरफ से राजेश पूनियां ने हस्ताक्षर किए हैं.

मध्य प्रदेश स्थित नीमच की माई किसान एग्रो के साथ सरसों की किस्म आरएच 1706 के लिए समझौता ज्ञापन पर कंपनी की ओर से सीईओ जसवंत सिंह ने हस्ताक्षर किए हैं. हिसार की 2 कपंनियां, जिन में फेम सीड्स (इंडिया) के साथ सरसों की किस्मों आरएच 1706 व आरएच 1424 के लिए समझौता ज्ञापन पर कंपनी की तरफ से हिमांशु बंसल ने हस्ताक्षर किए हैं.

दूसरी कंपनी उत्तम सीड्स के साथ सरसों की किस्मों आरएच 1706 व आरएच 1424 के लिए समझौता ज्ञापन पर कंपनी की तरफ से शुभम ने हस्ताक्षर किए है.

सरसों की किस्मों की विशेषताएं

बारानी परीक्षणों में नव विकसित किस्म आरएच 1424 में लोकप्रिय किस्म आरएच 725 की तुलना में 14 फीसदी की वृद्धि के साथ 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत बीज उपज दर्ज की गई है. यह किस्म 139 दिनों में पक जाती है और इस के बीजों में तेल की मात्रा 40.5 फीसदी होती है. सरसों की दूसरी किस्म आरएच 1706 में 2.0 फीसदी से कम इरूसिक एसिड होने के साथ इस के तेल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिस का उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लाभ होगा. यह किस्म पकने में 140 दिन का समय लेती है और इस की औसत बीज उपज 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. इस के बीजों में 38 फीसदी तेल की मात्रा होती है.
विश्वविद्यालय के साथ किसानों को भी होगा फायदा

मानव संसाधन प्रबंधन निदेशालय की निदेशक डा. मंजू मेहता ने बताया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद अब कंपनियां विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस अदा करेंगी, जिस के तहत उन्हें बीज का उत्पादन व विपणन करने का अधिकार प्राप्त होगा. इस के बाद किसानों को भी इस उन्नत किस्मों का बीज मिल सकेगा. सरसों की किस्में तैयार कर कंपनियां किसानों तक पहुंचाएंगी, ताकि किसानों को इन किस्मों का विश्वसनीय बीज मिल सके और उन की पैदावार में इजाफा हो सके.

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर ओएसडी डा. अतुल ढींगड़ा, मीडिया एडवाइजर डा. संदीप आर्य, एसवीसी कपिल अरोड़ा, तिलहन अनुभाग के अध्यक्ष डा. करमल सिंह, डा. राम अवतार, आईपीआर सेल के प्रभारी डा. विनोद सांगवान भी उपस्थित रहे.