भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने विगत दिनों लगभग दो दशकों की लंबी बातचीत के बाद एक नया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) तैयार किया. यह समझौता भारतीय कृषि, उद्योग और निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. क्या India–EU FTA से किसानों के लिए नए अवसर खुलेंगे और कृषि क्षेत्र के लिए नई संभावनाएँ जागेंगी, यह जानने के लिए पढ़ें यह लेख-

भारत और यूरोपीय संघ के मध्य किया गया यह समझौता सिर्फ निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को नई तकनीक, मूल्य-आधारित उत्पादन और आधुनिक कृषि प्रथाओं की ओर भी प्रेरित करता है. यह समझौता भारत की कृषि, प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात क्षमता को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिसकी सफलता इसके संतुलित और चरणबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करे.

FTA का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे भारतीय कृषि उत्पादों की मांग यूरोप में बढ़ेगी, जबकि घरेलू बाजार और छोटे किसानों की सुरक्षा भी बनी रहेगी.

FTA का उद्देश्य क्या है?

भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत के किसानों और कृषि उत्पादकों को वैश्विक बाजारों तक सीधे पहुँच देना और उनकी आय बढ़ाना है. यह समझौता न केवल व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा, बल्कि कृषि क्षेत्र के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोल सकता है.

समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाना है. इसके तहत आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क को धीरे-धीरे कम किया जाएगा, जिससे व्यापार की लागत घटेगी और बाजार तक पहुंच बेहतर होगी.इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, निर्यात बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की उम्मीद की जा रही है.

सरल शब्दों में, यह समझौता भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार में सीधे बेचने का मौका देगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगा.India–EU FTA

कृषि क्षेत्र पर FTA का प्रभाव

1. कृषि निर्यात को मिलेगा नया बाजार
FTA से भारतीय कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी. कई कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क में छूट या विशेष पहुंच दी गई है. इससे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं.
मुख्य लाभार्थी उत्पाद-
• प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ
• चाय, कॉफी और मसाले
• खाने योग्य अंगूर
• भेड़ और मेमने का मांस
• खीरा, स्वीट कॉर्न, सूखा प्याज
• कुछ चुनिंदा फल और सब्जियां
इन उत्पादों के निर्यात बढ़ने से किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि-आधारित उद्योगों की आय में वृद्धि हो सकती है.India–EU FTA

2. संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि मुक्त व्यापार समझौते में कृषि के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. ऐसे क्षेत्र जिनसे छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका सीधे जुड़ी है, उन्हें आयात शुल्क में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी.
इन संरक्षित क्षेत्रों में शामिल हैं-
• दूध और डेयरी उत्पादन
• अनाज
• मुर्गी पालन
• सोया आटा
• कुछ चुनिंदा फल और सब्जियां
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी आयात से घरेलू किसानों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े और स्थानीय कृषि व्यवस्था संतुलित बनी रहे.India–EU FTA

3. मूल्य-आधारित खेती और नवाचार
FTA केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि को मात्रा-आधारित उत्पादन से मूल्य-आधारित उत्पादन की ओर ले जाने में मदद कर सकता है.
उच्च गुणवत्ता, बेहतर पैकिंग, प्रसंस्करण और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने से किसान केवल कच्चा माल बेचने के बजाय मूल्य-आधारित उत्पाद बेच पाएंगे और अधिक मूल्य प्राप्त कर सकेंगे. इससे कृषि क्षेत्र में नवाचार, निवेश और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की गति तेज हो सकती है.
सरल शब्दों में: अब किसान अच्छी फसल, बेहतर पैकिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार तीनों के समन्वय से ज्यादा लाभ कमा सकते हैं.

कृषि क्षेत्र की चुनौतियाँ

FTA के संभावित लाभों के साथ-साथ कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है-

1. बुनियादी ढांचे की आवश्यकता

अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग को पूरा करने के लिए बेहतर भंडारण, कोल्ड चेन, गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग सुविधाओं की जरूरत होगी. यदि इन क्षेत्रों में निवेश नहीं हुआ, तो छोटे किसानों के लिए निर्यात के अवसर सीमित रह सकते हैं.

2. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

किसानों और कृषि उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों, ट्रेसेबिलिटी, खाद्य सुरक्षा, उत्पादन पैकिंग के सही तरीके और गुणवत्ता नियंत्रण के बारे में प्रशिक्षण देना आवश्यक होगा. इससे वे वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुसार उत्पादन कर सकेंगे.

भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता भारतीय कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है. बेहतर बाजार पहुंच, निर्यात की संभावनाएं और मूल्य-आधारित उत्पादन की दिशा में यह समझौता कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है.

हालांकि, India–EU FTA की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार, उद्योग और किसान मिलकर बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाते हैं. यदि यह संतुलन सही बना रहा, तो यह समझौता भारतीय कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है. साथ ही किसानों को वैश्विक स्तर पर अपनी उपज बेचने और अधिक कमाई करने का अवसर प्रदान कर सकता है.

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