World Idli Day : आज 30 मार्च का दिन हेल्दी और दक्षिण भारतीय खाना पसंद करने वालों के लिए खास है, क्योंकि आज है इडली दिवस जो दुनिया भर में 30 मार्च को मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस खास डिश और खास दिन के बारे में.
इडली में ऐसा क्या है खास और क्या है इसका राज
इडली एक ऐसा पौष्टिक, स्वादिष्ट और कम समय में तैयार होने वाला व्यंजन है, जो स्वादिष्ट होने के साथ साथ हेल्दी भी है. यह एक दक्षिण भारत के का पकवान है, जो आज देश भर में पसंद किया जाता है. हालांकि इडली एक ऐसा स्वादिष्ट व्यंजन है जो टेस्टी होने के साथ काफी हेल्दी भी है, इसलिए विश्वभर में इस डिश को एक परफेक्ट ब्रेकफास्ट माना जाता है. देश भर में ऐसे कई परिवार हैं जहां सुबह के नाश्ते में इडली बनाई जाती है.
कब और कैसे शुरू हुई इडली बनाना
इडली का नाम सुनते ही यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि शुरुआत कहां से और कैसे हुई? आइए जानते हैं.
इंडोनेशिया से चली इडली भारत में मनाया इडली दिवस
इडली का नाम मन में आते ही लगता है इसकी शुरुआत दक्षिण भारत से हुई होगी लेकिन ऐसा नहीं है. जानकारियों के अनुसार इडली की उत्पत्ति करीब 7वीं से 12वीं सदी के बीच इंडोनेशिया से हुई . हालांकि आज भी यह डिश वहां काफी पसंद की जाती है. वहां इसे केदली या केदारी के नाम से जाना जाता है.
समझें इडली के इतिहास को
इडली के संदर्भ में इंडोनेशिया की बात करें तो उस समय इंडोनेशिया पर हिंदू राजवंशों का शासन था. ये राजा लोग अपने लिए योग्य दुल्हन की तलाश में भारत आते थे, तो उनके साथ उनके शाही रसोइए भी आते थे. उस दौरान ये रसोइए अपने साथ भाप में खाना पकाने की अलग तकनीक का हुनर लेकर आए और इसी आनेजाने के दौरान इंडोनेशियाई की ‘केडली’ भारतीय रसोइयों के हाथों में पहुंचकर ‘इडली’ बन गई.
इसके अलावा इडली की उत्पत्ति को लेकर एक और दिलचस्प जानकारी है. भारत के तटीय इलाकों में आकर बसे अरब व्यापारी अक्सर चावल के आटे को चपटा आकर करके भाप में पकाते थे और उसे नारियल की चटनी के साथ खाते थे. इन व्यापारियों ने भारतीय रसोइयों को खमीर उठाने की तकनीक सिखाई.
क्यों मनाया जाता है इडली दिवस
बाद में भारतीय रसोइयों ने इस रेसिपी में देसी तड़का लगाते हुए उड़द की दाल का मिश्रण तैयार किया. इस तरह अरब की सादगी और इंडोनेशिया की तकनीक मिलकर आज की आधुनिक इडली के रूप में विकसित हुई
जानकारी के अनुसार साल 2015 में चेन्नई के एक रेस्टोरेंट के मालिक ने इस खास दिन को मनाने की शुरुआत की थी. बताया जाता है कि इस दिन को और भी खास बनाने के लिए वहां के मालिक ने अनेक प्रकार की इडलियां बनाईं. इसके अलावा एक बहुत बड़े आकार और वजन वाली इडली भी बनाई और इस मौके पर लोगों ने इस दिन को खास बना दिया . तब से 30 मार्च को लोग विश्व इडली दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं.
गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च हुई इडली
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि साल 2025 में गूगल पर इडली को विभिन्न नामों से सबसे ज्यादा सर्च किया गया.
नए अवतार में इडली
आजकल परंपरागत चावल उड़द के अलावा अन्य पौष्टिक अनाजों का इस्तेमाल कर के भी इडली को नए नए कलेवर दिए जा रहे हैं, जो पौष्टिकता के लिहाज से भी अधिक लाभकारी मानी जाती हैं. जैसे –
* इडली बर्गर – इसमें बंद की जगह इडली इस्तेमाल की जाती है.
* नारियल पानी से बनी इडली.
* कोदो-कुटकी मिलेट्स से भी आजकल इडली-डोसा बन रहे हैं. इसके लिए सरकार भी पहल कर रही है.





