Delicious Indian Sweet. भारत की पारंपरिक मिठाइयों में शकरपारा पहले लंबे तिकौने आकार का बनता था, पर अब छोटेछोटे चौकोर आकार में भी बनने लगा है. शकरपारे को मीठा करने के लिए पहले चीनी की चाशनी तैयार की जाती है. चीनी को ही देहाती बोली में शक्कर कहा जाता है. शक्कर की चाशनी में डुबो कर शकरपारा तैयार किया जाता है. इस वजह से ही इस का नाम शकरपारा पड़ गया.
उत्तर भारत के गांवों में इस का बहुत प्रयोग किया जाता है. गांवों में यह त्योहार की मिठाइयों में सब से खास है. त्योहार के अलावा शादीविवाह में इस का प्रयोग लेनेदेने की मिठाइयों में किया जाता है.
सामान्य दिनों में भी इस मिठाई को खाने में प्रयोग किया जाता है. सब से बड़ी खूबी यह है कि यह मिठाई जल्दी खराब नहीं होती है. इस वजह से गांव के बाजारों में यह मिठाई खूब बिकती है. साथ ही, यह दूसरी मिठाइयों से सस्ती होती है.
शक्कर और मैदा से बनने के चलते इस में मिलावट का खतरा नहीं होता है. इस को बनाना आसान होता है. ऐसे में इस को बना कर बेचना और भी आसान है.
‘नाश्ता’ नाम से गृह उद्योग चला रही सीमा कौशिक शकरपारा जैसी बहुत सी चीजें बना कर बाजार में बेचने का काम कर रही हैं. वे कहती हैं, ‘‘भारत की पारंपरिक मिठाइयों की मांग फिर से बढ़ रही है. ऐसे में यह मिठाई बाजार में खूब बिक रही है.’’
शकरपारा बनाने की सामग्री
4 से 6 लोगों के लिए यह मिठाई आधे घंटे से एक घंटे में बन कर तैयार हो जाती है. जरूरी सामान के रूप में 200 ग्राम मैदा, एक कटोरी चीनी, 50 ग्राम घी, 4-5 इलायची का पाउडर, तलने के लिए डेढ़ कप तेल चाहिए. चाशनी बनाने के लिए कड़ाही की जरूरत पड़ती है.
शकरपारा बनाने की विधि
सब से पहले एक बड़े बाउल या परात में मैदा डालें और इस में घी डाल कर अच्छी तरह रगड़ कर मिलाएं. फिर इस में थोड़ाथोड़ा कर के पानी डालते जाएं यानी आटा सानते जाएं. यह न तो ज्यादा सख्त होना चाहिए और न ही ज्यादा मुलायम.
शकरपारे के लिए आटा गूंधने के बाद इसे 10-15 मिनट के लिए ढक कर रख दें. तय समय के बाद सभी आटे की लोइयां बना लें. कड़ाही में तेल डाल कर मध्यम आंच में गरम होने के लिए रख दें.
फिर एक लोई को बेलन से मोटी रोटी के आकार में बेल लीजिए. इस रोटी को चाकू के सहारे मनचाहे शेप के टुकड़े काट लीजिए.
सब से पहले रोटी पर सीधेसीधे चाकू चला लें. ऐसा करने से आटे के डायमंड शेप के टुकड़े काटे जा सकते हैं. इसी तरह दूसरी लोई से छोटे टुकड़े काट लें.
अब एक टुकड़ा कड़ाही में डाल कर जांच लें कि तेल ठीक से गरम हुआ भी है या नहीं. अगर टुकड़ा तेल में तुरंत ऊपर की ओर आ जाता है तोे इस का मतलब है कि तेल गरम हो चुका है.
इस के बाद कड़ाही के तेल में थोड़ाथोड़ा कर के आटे की लोई डाल कर चलाते हुए तलें.
ध्यान रखें कि इस दौरान आंच धीमी कर दें. अगर तेज आंच में शकरपारा तलेंगे तो यह ऊपर से जल जाएंगे लेकिन अंदर से कच्चे रहेंगे.
अब कड़ाही में चीनी और आधा कप पानी डाल कर मीडियम आंच पर चाशनी बनाने के लिए रखें. जब तक चाशनी बन रही है, बाकी के शकरपारे भी तल लें.
चाशनी को बीचबीच में चलाते रहें. इस में इलायची पाउडर डालें. 8-10 मिनट बाद एक चम्मच में चाशनी की कुछ बूंदें ले कर अंगूठे के बीच रख कर देखें. अगर मोटी तार बन रही है तो समझिए चाशनी तैयार है.
अब चाशनी में शकरपारे डुबो कर अच्छे से मिलाइए. कुछ समय बाद आंच बंद कर दें और शकरपारा और चाशनी को चलाते रहें. कड़ाही को आंच से हटा लें और अच्छी तरह चलाते हुए ठंडा कर लें.
कुछ समय बाद चाशनी ठंडी हो जाएगी. शकरपारे पर चाशनी की कोटिंग चढ़ जाएगी. ठंडा होने के बाद शकरपारा खाने के लिए तैयार हो जाएगा. इस को टाइट कंटेनर में रखें. हवा लगने के बाद यह खराब भी हो सकते हैं. Delicious Indian Sweet





