नीलहरित शैवाल (Blue-Green Algae), जो इस महंगाई के दौर में किसानों को राहत दे रहा है. यह धान किसानों के लिए एक तोहफा है और फसल के लिए गुणों का खजाना.
पौधों की रोपाई के एक हफ्ते बाद धान के खेत पर खड़े पानी में प्रति हेक्टेयर 10-15 किलोग्राम शैवाल का संरोप छिड़क देते हैं. संवर्धन के बाद 15 दिनों तक खेत में थोड़ाबहुत पानी रहने से संवर्धन का पूरा लाभ मिलता है. जिस से शैवाल बढ़ कर पूरे खेत में फैल जाता है. इस के बाद खेत में शैवाल डालने की जरूरत नहीं है.
सुझाव व सावधानियां
धान की पौध रोपने के एक हफ्ते बाद सूखे नीलहरित शैवाल का बारीक चूर्ण 10-15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से ठहरे पानी में बुरकें.
यदि खेत में नाइट्रोजन वाले उर्वरक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, तो 20-30 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से लाभ लेने के लिए नीलहरित शैवाल का उपयोग करें.
धान की फसल के लिए एकतिहाई नाइट्रोजन की जरूरत नीलहरित शैवाल का इस्तेमाल कर के पूरी की जा सकती है.
शैवाल को नाइट्रोजन वाले उर्वरकों की ज्यादा मात्रा के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्यारी को खुली जगह पर बनाना चाहिए, ताकि उसे खुली धूप व हवा मिल सके. उस की लंबाई हवा की दिशा के विपरीत होनी चाहिए, जिस से हवा के कारण इकट्ठी हुई शैवाल को फैलने के लिए ज्यादा जगह मिल सके.
शैवाल को केमिकल उर्वरकों, कीटनाशकों, फफूंदीनाशकों से दूर रखना चाहिए. अन्यथा कल्चर की अंकुरण शक्ति पर उलटा असर पड़ता है.
शैवाल उत्पादन के लिए मिट्टी साफ जगह से लेनी चाहिए. गंदा पानी और नाइट्रोजन वाले उर्वरक क्यारी में नहीं डालने चाहिए.
खरपतवारनाशकों व नुकसानदायक कीटों की रोकथाम व प्रबंधन के लिए सिफारिश की गई दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए.
शैवाल का कम से कम 3 मौसम इस्तेमाल जरूर करें. उस के बाद ये मिट्टी में स्थापित हो जाते हैं. फिर इस के इस्तेमाल की जरूरत नहीं होती है.
शैवाल की पपडि़यों को पूरी तरह से सुखा कर पौलीथीन की थैलियों में भर कर सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए या उन्हें दोबारा गुणन के लिए इस्तेमाल करना चाहिए.
शैवाल को सुपर फास्फेट के साथ प्रयोग करने से ज्यादा फायदेमंद नतीजे मिलते हैं.





