Rabies in Animals-
बागपत के खैला गांव में आवारा कुत्ते के काटने के करीब दो महीने बाद एक दुधारू भैंस की रेबीज से मौत हो गई. इसके बाद किसान के आठ अन्य पशुओं में भी बीमारी की आशंका जताई जा रही है.
नहीं लगवाया था रेबीज का टीका
गांव निवासी किसान के बेटे के अनुसार, करीब दो महीने पहले उनकी दो भैंस, दो गाय, एक कटिया, दो छोटे मवेशी और दो बछिया को आवारा कुत्ते ने काट लिया था. उस समय पशुओं को रेबीज का टीका नहीं लगवाया गया.
शनिवार को उनकी एक दुधारू भैंस को बुखार आया. इसके बाद उसमें रेबीज जैसे लक्षण दिखाई दिए और रविवार को उसकी मौत हो गई. किसान के अनुसार भैंस की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये थी. अब कुत्ते के संपर्क में आए आठ अन्य पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है.
जागरूकता से बच सकती थी भैंस
किसी भी इंसान या पशु को कुत्ते के काटने के बाद तुरंत कराएं टीकाकरण करवाना चाहिए. गांव में घटी इस घटना से पशुपालकों को बड़ी सीख मिलती है. अगर किसी गाय, भैंस, बकरी या दूसरे पशु को कोई आवारा कुत्ता काट ले तो उसे सामान्य बात समझकर नहीं छोड़ना चाहिए. पशु को तुरंत दूसरे पशुओं से अलग करें और पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
रेबीज का संक्रमण है खतरनाक
रेबीज की आशंका वाले पशु को बिना सुरक्षा के छूना, उसके मुंह में हाथ डालना या उसकी लार के संपर्क में आना खतरनाक हो सकता है. रेबीज का संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित पशु की लार के काटने या लार के खुले घाव, आंख, नाक या मुंह जैसी जगहों के संपर्क में आने से फैलता है.
बीमार पशुओं को अलग रखना जरूरी-
– रेबीज की आशंका वाले पशुओं को स्वस्थ पशुओं के साथ न रखें.
– उनके इलाज या जांच के दौरान पशु चिकित्सक की सलाह और जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन करें.
– किसी पशु की मौत होने पर उसके शव को खुद काटने या खोलने की कोशिश न करें. ऐसे मामले में पशुपालन विभाग को सूचना देकर सुरक्षित निस्तारण कराया जाना चाहिए.
दूध बना चिंता का विषय
इस भैंस का दूध परिवार और आसपास के लोगों को दिया जाता था और दूध की आपूर्ति दिल्ली तक होने की बात सामने आई है. घटना के बाद दूध पीने वाले लोगों में चिंता होना स्वाभाविक है.
हालांकि, राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दूध पीने से रेबीज फैलने का कोई प्रमाण नहीं है. केवल संक्रमित पशु का दूध पी लेने को रेबीज के टीके की जरूरत का आधार नहीं माना जाता.
फिर भी रेबीज से संक्रमित पशु का दूध इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति को उस भैंस या किसी संदिग्ध पशु ने काटा है, खरोंचा है या उसकी लार खुले घाव, आंख, मुंह या नाक के संपर्क में आई है, तो उसे दूध पीने की बात से अलग तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाकर रेबीज से बचाव की चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए.
पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानियां
– कुत्ते के काटने के बाद पशु को तुरंत पशु चिकित्सक को दिखाएं.
– संदिग्ध पशु को बाकी पशुओं से अलग रखें.
– पशु की लार के सीधे संपर्क से बचें.
– बीमार पशु का दूध इस्तेमाल न करें.
– कुत्ते के काटने की घटना को छिपाएं नहीं और पशुपालन विभाग को सूचना दें.





