बरसात में या धान, गन्ना वाले खेतों में अकसर ऊपर का पानी सूखने के बाद भी अंदर की मिट्टी में पानी भरा रहता है. जो दिखता नहीं, पर अंदर ही अंदर फसल की जड़ें सड़ने लगती हैं. पौधा पीला पड़ जाता है और पैदावार कम हो जाती है. इसी अंदरूनी जलभराव को निकालने के लिए ‘मोल प्लाऊ (Mole Plough) कृषि यंत्र ‘ सब से सस्ता और स्थायी उपाय है.

क्या है मोल प्लाऊ

यह कृषि यंत्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल द्वारा विकसित किया गया है.

मोल प्लाऊ का नाम क्यों पड़ा

मोल का मतलब होता है ‘छछूंदर’. छछूंदर जमीन के नीचे बिल बनाता है, ऊपर से खेत वैसा का वैसा दिखता है पर अंदर सुरंग बन जाती है. ठीक इसी तरह यह मशीन भी जमीन के अंदर बिना ऊपर की मिट्टी को खोले सुरंग जैसी नाली बना देती है. इसी वजह से इस का नाम भी मोल प्लाऊ रखा गया है.

जमीन के नीचे नाली बनती कैसे है

इसमें कोई पाइप नहीं डाला जाता. यह खुद मिट्टी से ही नाली बना देता है. आइए जानते हैं कैसे बनती है नाली.

यंत्र में सब से आगे लगा तेज चाकू जैसा पार्ट लगा होता है, जो ट्रैक्टर के खिंचाव से जमीन को 60 सैंटीमीटर गहरा चीरता हुआ चलता है. कटर के ठीक पीछे एक लोहे की गोली (बुलेट) लगी होती है. जब यह आगे बढ़ती है तो अपने आसपास की गीली चिकनी मिट्टी को चारों तरफ दबा कर एक गोल, चिकनी सुरंग बना देती है. जैसे कुम्हार मटके की दीवार को चिकना करता है, वैसे ही इस की दीवार भी कड़ी हो जाती है.

और जब ट्रैक्टर चलता है तो पीछेपीछे 60 सैंटीमीटर नीचे नाली बनती जाती है. आखिर में यह नाली खेत के बाहर बनी किसी खुली नाली या नाले में खोल दी जाती है, ताकि पानी बह कर बाहर निकल जाए.

किस तरह की मिट्टी में मिलेगी कामयाबी

जिस खेत की मिट्टी में 20-25 फीसदी से ज्यादा चिकनापन हो या खेत की मिट्टी काली और दोमट चिकनी मिट्टी सब से अच्छी है.
रेतीली या भुरभुरी मिट्टी में सुरंग बैठ जाती है, इसलिए रेतीली मिट्टी में यह तकनीक सफल नहीं है.

नमी का रखें ध्यान

खेत न ज्यादा सूखा हो न ही अधिक गीला या कीचड़ जैसा हो. खेत में जब हलकी नमी हो और जब खेत जुताई लायक हो, तब सब से मजबूत सुरंग बनती है.

ढलान और दूरी के रखें ध्यान

खेत में 2 से 4 फीसदी का हलका ढलान हो, एक नाली से दूसरी नाली की दूरी 6 से 12 मीटर रखें और ज्यादा पानी वाले खेत में दूरी 6 मीटर रखें.

क्या नाली ट्रैक्टर के दबाव से दब जाएगी

नहीं, इसीलिए इसे 60 सैंटीमीटर गहरा रखा जाता है. ट्रैक्टर के टायर का सारा वजन ऊपर के 25-30 सैंटीमीटर तक ही रहता है, नीचे तक असर नहीं पहुंचता. और चिकनी मिट्टी की दब कर बनी दीवार बहुत मजबूत होती है.

बस ये सावधानी रखें

नाली बनाने के 2-3 दिन तक उसी लाइन पर भारी ट्रॉली न निकालें और 3 से 5 साल बाद जब मिट्टी धीरेधीरे भर जाए तो इसे दोबारा नाली बनवा सकते हैं.

मशीन की जानकारी

60 से 75 एचपी के ट्रैक्टर से चलने वाला यह यंत्र 1 घंटे में 0.14 से 0.42 हेक्टेयर (आधा बीघा से 1 एकड़) काम करता है और इस कृषि यंत्र की कीमत लगभग 20,000 रुपए है.

अधिक जानकारी के लिए आप संस्थान के फोन नंबर 0755-2521136/2521139 पर संपर्क कर सकते हैं.

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