Cattle Health Care-

पशुपालकों के लिए उन के मवेशी ही उन की आमदनी और परिवार को चलाने का जरीया होते हैं. ऐसे में मवेशियों की सेहत का खास खयाल रखने की जरूरत होती है. इनसानों की तरह मवेशियों को हलकी चोटें लगती रहती हैं या छोटीमोटी बीमारियां होती रहती हैं. मवेशियों के तुरंत उपचार के लिए पशुपालकों को फर्स्ट एड बौक्स रखना काफी जरूरी है. मवेशियों के प्रथमिक उपचार की जानकारी रख कर कमाऊ और पालतू मवेशियों को खतरनाक और गंभीर बीमारियों के चंगुल में फंसने से बचाया जा सकता है.

मवेशियों में कब्ज, हड्डी टूटना, पेट फूलना, घाव होना, सांप काटना, जहरीली घासपात खा लेना, पागल कुत्ते का काट लेना, लू लगना, ठंड लगना, दस्त होना वगैरह तमाम समस्याएं होती रहती हैं. अगर इन के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दे कर सही समय पर उपचार शुरू नहीं किया जाता, तो ये दिक्कतें जानलेवा साबित हो सकती हैं.

वेटनरी डाक्टर सुरेंद्र नाथ कहते हैं कि पशुपालकों को पशुओं के रोगों या पशुओं की दशा में होने वाले बदलावों की समझ होनी चाहिए. मवेशियों के खानपान, चाल, मलमूत्र व दूध वगैरह में बदलाव नजर आए तो पहले फर्स्ट एड बौक्स के जरीए तुरंत उस का प्राथमिक उपचार शुरू कर दें. उस के बाद भी पशुओं के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो तो मवेशियों के डाक्टर से इलाज कराएं.

जख्म होने पर : चोट लगने या गिरने से मवेशियों को अकसर जख्म हो जाते हैं. चोट लगने पर कभी केवल सूजन आ जाती है और कभी खून भी बहने लगता है. दोनों ही हालत में बर्फ या ठंडे पानी से चोट की जगह पर सिंकाई करनी चाहिए. खून बह रही जगह पर एंटीसेप्टिक क्रीम या टिंचर बैंजाइन लगा देनी चाहिए. घाव अगर बड़ा या पुराना हो, तो डाक्टरों से तुरंत सलाह लें.

कब्ज या दस्त होने पर : सड़ागला चारा, ज्यादा सूखा चारा या दाना खाने से मवेशी को कब्ज की शिकायत हो जाती है. 60 ग्राम काला नमक, 60 ग्राम सादा नमक, 15 ग्राम हींग, 50 ग्राम सौंफ को 500 ग्राम गुड़ में मिला कर 2 घंटे के अंतराल पर मवेशी को देने से फायदा होता है.

दस्त होने की स्थिति में मवेशी को गुड़, नमक और जौ के पके आटे का घोल पिलाना चाहिए. इस से शरीर में पानी की कमी नहीं हो पाती है. इस के अलावा मांड़ और खडि़या का घोल भी दस्त को ठीक करता है. बीमार मवेशी की त्वचा खींचने के बाद अपनी जगह पर आने में अगर 6 सेकेंड से ज्यादा समय ले, तो समझना चाहिए कि बीमारी का खतरा बढ़ गया है और तुरंत डाक्टर से इलाज कराने की जरूरत है.

जहरीली चीज खा लेने पर : जहरीला पौधा, कीटनाशक दवाएं, यूरिया, चूहा मारने की दवा, जहरीला चारा वगैरह खा लेने से मवेशी जहरबाद से पीडि़त हो जाता है. ऐसा होने पर मवेशी के मुंह में उदर नलिका से ज्यादा से ज्यादा पानी डालें. छोटे मवेशियों को कुनकुने पानी में नमक या पीसी हुई सरसों का घोल बना कर पिलाने से उलटी हो जाती है, इस से अमाशय में भरा जहर बाहर निकल जाता है. आंतों का जहर निकालने के लिए दस्तावर या बिरौयक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. बड़े मवेशी को 250 ग्राम और छोटे को 100 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट पानी में घोल कर पिलानी चाहिए.

गले में कुछ अटकने पर : कई बार बड़े आकार का फल, नारियल या आलू वगैरह मवेशी के खाने की नली में अटक जाता है. ऐसी हालत में मवेशी के मुंह से लार बहने लगती है और वह गले में अटकी चीज को निगलने की कोशिश में बेचैन दिखता है. पानी पीने पर पानी नाक से बाहर बहने लगता है. ऐसे में मवेशी के गले पर हाथ फेर कर पता करें कि रुकावट कहां पर है. पता चलने पर उसे दबाव दे कर सहलाने से अटका हुआ खाना अंदर चला जाता है. इस के बाद भी मवेशी को आराम नहीं मिले तो डाक्टर को दिखाएं.

ज्यादा खून बहने पर: कटी हुई जगह पर कस कर कपड़े का टुकड़ा बांध कर खून के बहने को रोका जा सकता है. कई बार कपड़े को बांधना मुमकिन नहीं हो पाता है, तो कपड़े को फिटकिरी के घोल में भिगो कर कटी जगह पर लगाने से खून का बहना रुक जाता है. डाक्टर के आने तक इस उपचार के जरीए खून का बहना रोका जा सकता है.

सांप काटने पर : मवेशी के जिस्म के जिस हिस्से में सांप ने डसा हो उस के 4-5 इंच ऊपर डोरी से कम कर बांध देना चाहिए. डसी गई जगह पर नए ब्लेड से चीरा लगा कर जहर को खून के साथ बाहर निकलने दें. डाक्टर के आने तक मवेशी को गरम पानी या चाय पिलाते रहें, ताकि उसे नींद न आ सके.

पागल कुत्ते के काटने पर : पागल कुत्ता जिस जगह पर काटे, उस जगह को साबुन लगा कर 4-5 बार धोएं. उस के  बाद कारबोलिक एसिड से घाव को जला दें. उस मवेशी को बाकी मवेशियों और इनसानों से दूर रखें, क्योंकि अगर रोगी मवेशी की जान जाती है तो उस के आसपास के मवेशी भी चपेट में आ सकते हैं.

लू या ठंड लगने पर : गरमियों में लू लगने पर मवेशी को ठंडी जगह में रख कर उस के शरीर पर ठंडा पानी डालें. ठंडे पानी में चीनी, भूना जौ का आटा और नमक मिला कर बारबार पिलाएं. पुदीना और प्याज का अर्क देने से भी आराम मिलता है.

जाड़े के मौसम में ठंड लगने पर जानवर की नाक और आंखों से पानी बहता है और जानवर कांपने लगता है. ऐसी हालत में कुनकुने पानी में गुड़ मिला कर देने से बीमार मवेशी को राहत मिलती है. अजवायन, सेंधा नमक व अदरक की बराबर मात्रा गुड़ में मिला कर खिलाने से आराम मिलता है. तारपीन या सरसों के तेल में कपूर मिला कर उस से रोगी मवेशी की मालिश करनी चाहिए.

फर्स्ट एड बौक्स के सामान

मवेशियों के फर्स्ट एड बौक्स में रुई, फिटकिरी, बांस की खपच्ची, टिंचर बैंजोइन, एंटीसेप्टिक क्रीम, नया ब्लेड, कारबोलिक एसिड, मैग्नीशियम सल्फेट, जमालगोटा, जौ का आटा, तारपीन का तेल, कपूर, मांड़, खडि़या, अरंडी का तेल, सेवलौन या डिटौल व बोरिक एसिड वगैरह चीजें होनी चाहिए.

इस के अलावा पशु अस्पताल का फोन नंबर और नजदीक के वेटनरी डाक्टर का फोन या मोबाइल नंबर भी पशुपालक को अपने पास जरूर रखना चाहिए, ताकि मवेशी के बीमार पड़ने पर तुरंत ही डाक्टर से संपर्क किया जा सके. इस से व्यर्थ की भागदौड़ में समय बरबाद नहीं होगा.    Cattle Health Care

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