Seed Identification: अच्छी फसल के लिए अच्छे बीज का अहम योगदान होता है. अच्छे बीजों से फसलों की पैदावार में 25 से 35 फीसदी तक का इजाफा कर सकते हैं.
बीज के मामले में सरकार की बात करें तो मुश्किल से 5 फीसदी किसानों को ही अच्छा बीज मिल जाता है, बाकी बचे किसान अच्छे बीज के नाम पर सिर्फ ठगे जाते हैं. महंगे बीज से भी यह उम्मीद नहीं होती कि फसल अच्छी होगी या नहीं. ऐसे हालात में किसानों को चाहिए कि वे खुद ही बीज उगाएं. उन की प्रोसेसिंग के साथ बीज प्रबंधन की जानकारी रखें.
आमतौर पर बीजों को 3 भागों में बांटा जाता है, आधार बीज, प्रजनक बीज और प्रमाणिक बीज. आधार बीज को प्रजनक बीज से तैयार किया जाता है और इस के लिए बीज प्रमाणन की जरूरत होती है. इस का उत्पादन सरकारी एजेंसियों, कृषि विश्वविद्यालयों के अनुसंधान केंद्रों या प्राइवेट बीज कंपनियों की देखरेख में किया जाता है. प्रजनक बीज को कृषि अनुसंधान संस्थाओं द्वारा तैयार किया जाता है, इसलिए उन के प्रमाणन की जरूरत नहीं पड़ती है. प्रमाणिक बीज को आधार बीज से तैयार किया जाता है और इस का उत्पादन भी सरकारी संस्थाओं और प्राइवेट कंपनियों द्वारा किया जाता है.
बीज उपचार : बोआई से पहले केमिकलों द्वारा बीजों का उपचार किया जाता है, इस से बोआई के बाद बीज के अंदर या बाहर बीमारी फैलाने वाली वजह का या तो पूरी तरह खात्मा हो जाता है या उन की बीमारी फैलाने की कूवत में कमी आ जाती है.
नतीजतन बीजों के अच्छे फुटाव से ज्यादा पैदावार मिलती है. बीज उपचारित करने से मिट्टी द्वारा पैदा होने वाली बीमारियों पर भी लगाम लगती है.
बीज सुखाना : मौजूदा हालात से यह जरूरी हो गया है कि किसान बीज खुद उगाएं और उस का रखरखाव भी सीखें. बीज को प्रोसेसिंग के लिए उस में नमी की मात्रा 15 फीसदी से ज्यादा नहीं रखनी चाहिए. ऐसा नहीं होने से बीज में फंगस लगने का खतरा रहता है, जिस से उस की उत्पादन कूवत में कमी आ जाती है. बीज को सुरक्षित स्तर तक सुखाना जरूरी है. इस से बीज की उम्र बढ़ जाती है.
बीज को सुखाने के लिए 2 तरीके कुदरती और कृत्रिम अपनाए जाते हैं. कुदरती तरीके में बीज को सूखे फर्श या ट्रे में डाल कर सूरज की रोशनी में सुखाया जाता है. कृत्रिम तरीके में मशीनों के जरीए हवा के तापमान को 5 से 10 डिगरी सेंटीग्रेड तक बढ़ा कर बीज को सुखाया जाता है. इस विधि में तापमान को तकरीबन 45 डिगरी सेंटीग्रेड तक कर के बीज को सुखाया जाता है.
बीज की सफाई : खेत से बीजों को लाते समय कई तरह के कीट और खरपतवार के बीज भी उस के साथ आ जाते हैं. उन्हें हटाने के लिए स्क्रीन मशीन का इस्तेमाल किया जाता है. इस से खराब दाने, धूल, भूसा वगैरह हवा में उड़ जाता है. मिट्टी के ढेले, टूटे दाने, खरपतवार और दूसरी फसलों के बीज भी अलग हो जाते हैं. गे्रवेटी सेपरेटर, स्पाइरल सेपरेटर, डिस्क सेपरेटर वगैरह मशीनों से स्वस्थ और सामान आकार के बीजों की छंटाई की जाती है.
पैकिंग का तरीका : बीज को लंबे समय तक महफूज रखने के लिए सुखाने और साफ करने के बाद उस की पैकिंग भी काफी जरूरी है. बीज रखने के लिए नए और साफ थैलों या बोरों का इस्तेमाल करें. आधार बीज के थैले पर सफेद और प्रमाणिक बीज के थैले पर नीला टैग लगाया जाता है.
थैले पर एक लेबल चिपका कर उस पर बीज की किस्म का नाम, शुद्धता, अंकुरण की मात्रा, परीक्षण की विधि, प्रमाणन की अवधि और अन्य सूचनाएं लिख देने के बाद उस के इस्तेमाल में आसानी होती है.
ऐसे करें भंडारण : बीज की थैलियों को फर्श पर रखने के बजाय उसे पौलीथिन की चादर और बांस की चटाई या लकड़ी की चौकी पर रखना चाहिए. थैलों को दीवार या छत से सटा कर नहीं रखें. बीज रखने के पहले कमरे में एक लीटर मेलाथियान 50 ईसी को 3 सौ लीटर पानी में मिला कर 100 वर्ग मीटर की दर से छिड़काव करें. इस से कमरा कीटों से मुक्त हो जाता है.
कमरे में रखे बीज का समयसमय पर मुआयना करते रहें और किसी भी तरह का कीट नजर आने पर कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें. जिस कमरे में बीज को रखा गया है उस का तापमान 60 डिगरी फारेनहाइट और नमी 30 से 40 फीसदी होनी चाहिए.
बीज की पहचान
बोआई से पहले बीज की अंकुरण क्षमता की जांच करना ही बीज परीक्षण कहलाता है. बीज का पता उस की उपज के बाद ही लगता है. किसान बीज को तो अपने खेत में बोता है, लेकिन वह इतना कम जमता है कि वह अच्छी फसल के लिए सही नहीं होता और किसान को खेत में दोबारा बीज डालना पड़ता है. जिस से किसान की लागत बढ़ने के साथ बोआई का सही समय निकल जाने के कारण सही उत्पादन नहीं मिल पाता है. अगर किसान उसी खेत में जगहजगह पर खाली स्थान में दोबारा बीज डालते हैं, तो फसल में एकरूपता भी नहीं रहती है. नतीजतन, फसल अलगअलग समय में पकती है और दूसरी ओर किसान को निराईगुड़ाई में भी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं.
बीज परीक्षण : हमारे देश के किसान आज भी पिछले साल की फसल में से रखे हुए अनाज को बीज के रूप में बोते हैं. यह काम हमारे किसान कई सालों तक करते रहते हैं, जिस से उन अनाजों में एक ओर बीज से पैदा होने वाली बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है, तो दूसरी ओर अंकुरण क्षमता में कमी के साथ उस में खरपतवारों व अन्य फसलों के बीजों की संख्या भी ज्यादा होने लगती है. कई बार ऊपर से देखने में तो बीज सुंदर व मजबूत लगते हैं, लेकिन खेतों में जमते कम हैं. घरों में रखे हुए अनाजों में कीट व फंगस भी लग जाती है. लेकिन अगर किसानों को बोआई से पहले ही पता चल जाए कि उन के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बीजों की अंकुरण क्षमता व शुद्धता न्यूनतम मानक से काफी कम है, बीजों में खरपतवारों व अन्य फसलों के बीजों की संख्या काफी ज्यादा है या बीज बीमारी व कीटों से घिरे हैं तो ऐसे बीजों को न बो कर नुकसान से बच सकते हैं.
कैसे लें बीज नमूना
अब यहां बात आती है कि बीज परीक्षण के लिए नमूना किस तरह से लिया जाए. बीज का नमूना बीज पात्र, बोरा या ढेर से इस तरह लें कि नमूना, बोरे या बरतन के ऊपर, नीचे, मध्य व बगल के भागों से ही आए.
इस तरह बीज ढेर या बोरों से लिए गए नमूनों को एकसाथ अच्छी तरह मिला लें व एक कंपोजिट सैंपल यानी मिश्रित नमूना बना लें. कंपोजिट नमूनों को फसल के अनुसार नजदीक की किसी बीज जांच प्रयोगशाला में कपड़े की थैली में अच्छी तरह बंद कर के भेजें, जिस में एक चिट के साथ विवरण पता सहित लिखा हो.
इस के अलावा बीज को खेत में बोने से 15 दिन पहले भीगे हुए स्याही सोखते कागज की 2 तहों के बीच में रख कर उसे घर के अंधेरे वाले कमरे में रख दें. बीचबीच में बूंदबूंद पानी कागज को सूखने से बचाने के लिए डालते रहें. अगर ये भी न कर पाते हों तो मोटे सूती कपड़े या जूट के बोरे की 2 तहों के बीच करीब सौ बीज को 3 गुणन में कर के रखें. 10-15 दिन बाद बीजों में अंकुरण का पता चल जाता है.
अगर किसान ये भी नहीं कर पाते हैं तो तीसरी विधि में घर के चूल्हे की राख को ले कर गहरी थाली में मोटी तह में फैला दें. फिर उस में बीज बराबर दूरी पर रख कर राख से ढक दें फिर थोड़ी नमी के लिए पानी डाल दें व बीचबच में बीज को सूखने से बचाने के लिए पानी डालते रहें. अगर पानी ज्यादा डाल दिया हो तो उसे निकाल दें.
कुछ ही दिनों में गिनती में डाले गए बीजों व अंकुरित बीजों का अनुपात निकाल कर अंकुरण फीसदी की गणना कर लें कि बीज बोने लायक है या नहीं. बताई गई किसी भी विधि से बीज अंकुरण क्षमता की जांच कर के ही किसान अपने खेतों में बीज को बोएं.
कुछ खास फसलों के बीज उपचार
गेहूं: गेहूं को बीज से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए थाइरम या मैंकोजेब से बीज को उपचारित कर बोआई करें. एक किलो बीज के लिए ढाई ग्राम दवा का इस्तेमाल कारगर साबित होता है.
पात कंडुआ और अनावृत कंडुआ बीमारी के लिए बिटाबैक्स या कार्बंडाजिम दवा से बीज उपचार करें. इस में भी एक किलो बीज के लिए 2 ग्राम दवा का इस्तेमाल करें.
ईयर काकिल व डुंडु बीमारी से बचाव के लिए बीज को 20 फीसदी नमक के घोल में भिगो कर रखें. नीचे बचे स्वस्थ बीज को अलग छांट कर साफ कर के पानी में धो लें और उन्हें सुखा कर बोआई करें. ऊपर तैरते बीजों को निकाल कर खत्म कर दें. उन की उपज अच्छी न होगी.
जौ : आवृत कंडुआ और पत्तीधारी बीमारी से फसल बचाने के लिए बीज को 3 ग्राम थिरम या ढाई ग्राम मैंकोजेब प्रति किलो की दर से उपचारित करें. अनावृत कंडुआ के लिए 2 ग्राम कार्बंडाजिम या बिटाबैक्स से उपचारित किया जा सकता है.
सरसों : बोआई से पहले बीज को ढाई ग्राम मैंकोजेब प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें. सफेद रोली के हमले से बचने के लिए एप्रोन 35 एसडी 6 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें. जहां तना गलन का हमला होता है, वहां कार्बंडाजिम 2 ग्राम प्रति किलो से उपचारित करें.
चना : जड़ गलन की रोकथाम के लिए कार्बंडाजिम 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज को उपचारित करें.
ईसबगोल : तुलासिता के असर से फसल को बचाने के लिए एप्रोन 35 एसडी 5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से इस्तेमाल करें. उकठा से बचाव के लिए कार्बंडाजिम से बीज उपचारित करें.
सौंफ : बीज को कार्बंडाजिम 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करें. पौध गलन या जड़ गलन बीमारी के लिए कार्बंडाजिम एक ग्राम और थिरम 1 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें.
प्याज : प्याज को गुलाबी जड़ सड़न बीमारी से बचाव के लिए बीजों को कार्बंडाजिम 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करें और पौध की रोपाई से पहले कार्बंडाजिम के घोल से जड़ों को उपचारित कर के रोपाई करें.
धनिया : धनिया में उकटा व लोगिया की रोकथाम के लिए कार्बंडाजिम 0.75 ग्राम व थिरम डेढ़ ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करें. जैविक उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी से बीज उपचारित करें.
जीरा : बीज को 2 ग्राम कार्बंडाजिम या 4 ग्राम ट्राईकोडर्मा विरिडी प्रति किलो बीज से उपचारित करें.
अजवायन : ढाई ग्राम कार्बंडाजिम या केप्टान प्रति किलो बीज दर से बीज को उपचारित कर के बोएं. Seed Identification





