Monsoon. इस साल जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो के प्रभाव के कारण देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भी कई इलाकों में कमजोर मानसून का अनुमान जताया है. अगर ऐसा होता है तो देश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है.
इसी को देखते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. इससे पहले भी जून की शुरुआत में उन्होंने ऐसी बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया था. सरकार ने उन जिलों की पहचान कर ली है, जहां कम बारिश का सबसे ज्यादा खतरा है.
315 जिले हैं निगरानी में
कृषि मंत्रालय के अनुसार देश के 315 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. इनमें 111 जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं. इन इलाकों में सिंचाई की सुविधा बहुत कम है और खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है.
महाराष्ट्र के लगभग 20 जिले भी इसी श्रेणी में आते हैं. ऐसे इलाकों में खरीफ फसलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है.
खरीफ की खेती पर पड़ेगा असर
धान, मक्का, सोयाबीन, बाजरा, ज्वार, दालें और कपास जैसी खरीफ फसलें समय पर होने वाली बारिश पर निर्भर करती हैं. अगर ऐसे ही बारिश कम हुई तो बोआई में देरी होगी जिससे फसल की पैदावार में गिरावट आ सकती है.
कोई खेत नहीं रहेगा बोआई से खाली
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि सरकार कोशिश कर रही है कि कोई खेत खाली न रहे. जितनी बारिश होगी, उसी के अनुसार किसानों को फसल चुनने की सलाह और जरूरी सहायता दी जाएगी.
सरकार ने शुरू की तैयारी
संभावित सूखे को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है. सरकार का ध्यान खासतौर पर इन बातों पर है :
# कम पानी में तैयार होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराना.
# पानी का बेहतर प्रबंधन करना.
# सिंचाई के लिए बिजली और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना.
जून के अधिकांश दिनों में देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई. महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में वर्षा की कमी दर्ज की गई.
अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं बढ़ी तो खरीफ की खेती पर इसका सीधा असर पड़ेगा.
बढ़ सकती है महंगाई भी
कम बारिश का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. यदि फसल का उत्पादन घटा तो अनाज, दाल, तेलहन, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं. इसका असर हर परिवार की रसोई पर पड़ेगा. साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी कमजोर हो सकती है.
अब क्या करना होगा?
ऐसे समय में किसानों को कम पानी वाली फसलों और सूखा सहन करने वाली किस्मों की जानकारी देना बहुत जरूरी है. साथ ही वर्षा जल को बचाने, तालाबों और जलाशयों का संरक्षण करने तथा ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देना होगा.
जलवायु परिवर्तन अब एक सच्चाई है और आने वाले समय में ऐसी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं, इसलिए केवल बारिश होने का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है बल्कि अभी से जल संरक्षण, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और वैज्ञानिक खेती पर ध्यान देना होगा.
यदि समय रहते सही तैयारी की गई, तो कमजोर मानसून और संभावित सूखे के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. यही समय की सबसे बड़ी जरूरत है. Monsoon





