Livestock Farmers. क्या आपके पशु सिर्फ सूखा भूसा खा रहे हैं? अगर हां, तो हो सकता है कि उन्हें भरपेट चारा मिलने के बावजूद पर्याप्त पोषण न मिल रहा हो. अच्छी बात यह है कि इसी साधारण भूसे को वैज्ञानिक तरीके से अधिक पौष्टिक बनाया जा सकता है. इसे यूरिया उपचारित भूसा (Urea Treated Straw) कहा जाता है. यह तकनीक वर्षों से पशुपोषण विशेषज्ञों द्वारा सुझाई जाती रही है और सही तरीके से अपनाने पर पशुओं के पोषण, पाचन और दूध उत्पादन में सकारात्मक परिणाम दे सकती है.

आखिर यूरिया उपचारित भूसा क्या है?

अधिकांश पशुपालक यूरिया को केवल खेतों में इस्तेमाल होने वाली खाद मानते हैं, लेकिन जुगाली करने वाले पशुओं के लिए इसका एक और महत्वपूर्ण उपयोग भी है. विशेषज्ञ बताते हैं कि जब सूखे भूसे का वैज्ञानिक तरीके से यूरिया से उपचार किया जाता है, तो उसकी पोषण गुणवत्ता बढ़ जाती है.

पशु विशेषज्ञों के कहना है कि यूरिया स्वयं प्रोटीन नहीं है, बल्कि यह रूमेन (पशु के पहले पेट) में रहने वाले सूक्ष्मजीवों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है. ये सूक्ष्मजीव प्रोटीन का निर्माण करते हैं, जिससे पशु को बेहतर पोषण मिलता है और दूध उत्पादन में भी मदद मिलती है.

क्यों जरूरी है यह तकनीक?

गांवों में अधिकांश पशुओं को गेहूं या धान का सूखा भूसा खिलाया जाता है. इसमें ऊर्जा तो होती है, लेकिन प्रोटीन और पाचन क्षमता कम होती है. यूरिया उपचार के बाद भूसा अधिक मुलायम, सुपाच्य और पौष्टिक बन जाता है. इससे पशु चारे का बेहतर उपयोग कर पाते हैं.
यदि पशुओं के आहार में पहले प्रोटीन की कमी थी, तो इस तकनीक से दूध उत्पादन में सुधार देखा जा सकता है. साथ ही महंगे सान्द्र आहार (दाना) पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है.

ऐसे तैयार करें यूरिया उपचारित भूसा

100 किलोग्राम सूखे भूसे के लिए 4 किलोग्राम यूरिया लें.

यूरिया को लगभग 40 लीटर पानी में अच्छी तरह घोल लें.

इस घोल का भूसे पर समान रूप से छिड़काव करें.

भूसे को अच्छी तरह मिलाकर प्लास्टिक शीट, तिरपाल या पॉलीथिन से पूरी तरह हवा बंद कर दें.

इसे 21 दिन तक बंद रखें.

निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भूसे को कुछ देर खुली हवा में रखकर ही पशुओं को खिलाएं.

गुड़ और मिनरल मिक्सचर भी है फायदेमंद

यूरिया उपचारित भूसा खिलाते समय प्रतिदिन 250–300 ग्राम गुड़ देने से रूमेन के सूक्ष्मजीव अधिक सक्रिय रहते हैं. साथ ही मिनरल मिक्सचर देने से पशुओं को आवश्यक खनिज तत्व मिलते हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य और उत्पादन बेहतर बना रहता है.

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    •  यूरिया कभी भी सीधे पशु को न खिलाएं.
    •  केवल वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया उपचारित भूसा ही उपयोग करें.
    •  निर्धारित मात्रा से अधिक यूरिया का प्रयोग न करें.
    •  पहली बार इस तकनीक को अपनाने से पहले पशु चिकित्सक या पशुपोषण विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें.

यूरिया उपचारित भूसा एक वैज्ञानिक पशुपोषण तकनीक है. संतुलित आहार, हरा चारा, स्वच्छ पानी, मिनरल मिक्सचर और उचित प्रबंधन के साथ इसका उपयोग किया जाए तो यह दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन बढ़ाने में अच्छा मददगार साबित हो सकता है.

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