Blue-Green Algae. किसान नीलहरित शैवाल का उत्पादन अपनी जरूरत के अनुसार या कारोबारी स्तर पर कर सकते हैं. देश में अलगअलग स्थानों पर सुविधानुसार नीलहरित शैवाल उत्पादन के लिए अलगअलग विधियों का इस्तेमाल किया जाता है:

नांद विधि

ढलवां लोहे की 2 ×1 ×1/4 मीटर आकार या जरूरत के मुताबिक आकार की नांद में 8-10 किलोग्राम साफ व छनी हुई मिट्टी और 200 ग्राम सुपर फास्फेट डाल कर 5-10 सेंटीमीटर पानी भर देते हैं. अगर मिट्टी अम्लीय हो तो उस में चूना मिला कर ठीक कर लेते हैं.

स्थिर पानी की सतह पर नीलहरित शैवाल का मातृ संरोप यानी मदर कल्चर छिड़क देते हैं और नुकसानदायक कीटों से बचाव के लिए लगभग 25 ग्राम मेलाथियान या कार्बोफ्यूरान का इस्तेमाल करते हैं. गरमी के मौसम व खुली धूप में लगभग 7-10 दिनों में शैवाल की परत (15-20 किलो) तैयार हो जाती है, जिसे सुखा कर थैलों में भर लेते हैं. इस तरह तैयार शैवाल को 2-3 साल तक इस्तेमाल कर सकते हैं.

गड्ढा विधि

इस विधि में 1.8 मीटर लंबा, 0.9 मीटर चौड़ा व 0.23 मीटर गहरा गड्ढा खोद लेना चाहिए. वैसे किसान गड्ढे की लंबाई, चौड़ाई व गहराई अपनी जरूरत के मुताबिक घटाबढ़ा भी सकते हैं. नांद की विधि के अनुसार शैवाल उत्पादन करें.  गड्ढे के एक कोने में पत्थर या ईंट के 4-5 टुकड़े डाल दें, जहां से पानी डालना हो. गड्ढे में 20-21 दिनों  तक शैवाल को बढ़ने दें. फिर पानी को सूखने दें.

पानी सूखने पर शैवाल की पपडि़यां अपनेआप उचट जाएंगी, जिन्हें धूप में सुखा कर पौलीथिन की थैलियों में भर कर सुरक्षित जगह पर भंडारित करें या दोबारा उत्पादन के लिए इस्तेमाल करना चाहिए. इस विधि में दोबारा उत्पादन के लिए मिट्टी नहीं डालनी पड़ेगी.  इस प्रकार एक गड्ढे से 1.5-2.0 किलोग्राम सूखी शैवाल प्राप्त हो जाती है.

नर्सरी में शैवाल उत्पादन

इस विधि में किसान धान की पौध तैयार करने के साथ शैवाल का भी उत्पादन कर सकते हैं. इस में लगभग 40 वर्ग मीटर क्षेत्र में 15-20 किलो शैवाल तैयार हो जाता है, जो धान के एक हेक्टेयर खेत के लिए जैव उर्वरक के रूप में काफी है. क्यारी का क्षेत्र सुविधानुसार बढ़ाया जा सकता है, लेकिन चौड़ाई 2 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए. कम चौड़ी क्यारी होने से किनारे पर भी सभी कृषि क्रियाएं की जा सकती हैं.

खेत में उत्पादन

इस विधि में खेत का लगभग 40 वर्ग मीटर क्षेत्र शैवाल के लिए इस्तेमाल करते हैं. अगर शैवाल का उत्पादन फसल की कटाई के बाद करना हो, तो फसल ठूंठों को निकाल कर मिट्टी को भलीभांति उलटपलट देते हैं, ताकि खेत में पानी ठहर सके.

उस के बाद खेत के चारों ओर मिट्टी की 15 सेंटीमीटर चौड़ी मेंड़ बना कर ढाई सेंटीमीटर गहराई तक पानी भर देते हैं. अब इस में 12 किलोग्राम सुपर फास्फेट  और मच्छरों व खरपतवारों की रोकथाम के लिए 25 ग्राम फ्यूरोडान व कार्बोफ्यूरान डाल कर 5 किलोग्राम शैवाल का संरोप बीज डालते हैं.Blue-Green Algae

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