Food Processing. कच्ची हलदी से सूखी हलदी की गांठों को लेने तक कंदों को कई दौर से गुजरना पड़ता है. इस में गांठों को धोना, छीलना, सुखाना, रंग मिलाना, पौलिशिंग करना, पीसना व भंडारण करना शामिल है.
आमतौर पर किसान हलदी उबाल कर धूप में सुखाने के बाद हलदी पाउडर से रंग देते हैं. इस विधि से दोयम दर्जे की हलदी मिलती है. इस का बाजार भाव भी अच्छा नहीं मिलता. अच्छा बाजार भाव लेने के लिए केंद्रीय खाद्य अनुसंधान एवं तकनीकी संस्थान, मैसूर द्वारा हलदी प्रसंस्करण की तकनीक की खोज की गई है. इस का निम्न खुलासा किया गया है:
कंदों की सफाई व सुखाना :
सब से पहले सूखे कंदों को उन के गुच्छों से अलग कर मिट्टी झाड़ कर निकाल देते हैं. उस के बाद पक्के टैंक या ड्रमों में डाल कर पानी से धुलाई की जाती है. स्वच्छ धुले कंदों को पक्के फर्श या तिरपाल पर फैला कर सुखा लेते हैं.
कंदों को उपचारित कर पकाना (क्योरिंग) :
हलदी के साफ और सूखे कंदों को छेद वाली तली वाले केटों अथवा बांस की कैजूरीना झाड़ू, अरहर बेल अथवा शहतूत की बनी टोकरियों में रख दिया जाता है. इस के बाद बडे़ से कड़ाहे में 0.1 फीसदी सोडियम कार्बोनेट का घोल बना कर हलदी से भर केटों को उस में पूरी तरह डुबो देते हैं. इन कंदों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में तब तक उबालते हैं, जब तक कि मुलायम न पड़ जाएं. जब उबलते हुए इन कंदों से एक खास तरह की महक आने लगे, तब यह समझ लेना चाहिए कि कंद पक गए हैं और केटों सहित उन्हें बाहर निकाल लेना चाहिए. क्षारीय घोल में उबालने से हलदी के पीले रंग में निखार आने के साथ ही कंद देखने से सुंदर व मनमोहक हो जाती हैं.
उबली गांठों को सुखाना :
हलदी को सुखाने की खासतौर से 2 विधियां इस्तेमाल में लाई जाती हैं. सीमेंट के पक्के साफ फर्श पर बालू वगैरह की 5-7 सैंटीमीटर की मोटी तह बिछा कर गांठों को कड़ी धूप में सुखाना चाहिए. इस विधि से सुखाने पर 12-15 दिन लगते हैं. समय की बचत और अच्छी गुणवत्ता वाली हलदी हासिल करने के लिए बिजली से चलने वाले क्रौस फ्लोहाट एयर या एयर घुमाव ओवन का इस्तेमाल किया जाता है. इस में हलदी को 60 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान पर सुखाया जाता है.
हलदी को चमकाना (पौलिशिंग) :
हलदी को चमकाने के लिए 2 विधियों का इस्तेमाल किया जाता है. पहली विधि में हलदी को बोरे में भर कर पैर से खूब रगड़ाई की जाती है, जिस से हलदी में चमक आ जाती है. दूसरी विधि द्वारा हलदी में पौलिश करने के लिए बड़ा सा ड्रम जो लकड़ी के 2 खंबों के सहारे लगा होता है. ड्रम एक तरफ से बंद व दूसरी तरफ से ढक्कन लगा होता है, जिसे कुंडे की मदद से बंद किया जाता है.
गांठों पर रंग चढ़ाना :
हलदी की गांठों में पीला रंग व चमक लाने के लिए इस पर रंग चढाना बहुत जरूरी है. शुष्क विधि के तहत रोहरी ड्रम द्वारा पौलिश करने के बाद 500-1,000 ग्राम हलदी पाउडर ड्रम को लगातार 10-15 मिनट तक घुमाने पर हलदी का पीला रंग निखर आता है. नम विधि से रंगाई के लिए सूखी गांठों को एक ड्रम में डाल कर उन के ऊपर सोडियम बाईसल्फेट और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की बराबर मात्रा के बने घोल को छिड़कने के बाद आपस में रगड़ कर चमकदार बना दिया जाता है. एक क्विंटल सूखी हलदी को रंगने के लिए 50 ग्राम सोडियम बाईसल्फेट और 50 ग्राम हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का घोल मुनासिब रहता है.





