Guava Plantation : आमतौर पर अमरूद के पौधे 5×5 मीटर या 6×6 मीटर पर रोपे जाते हैं, जबकि सघन विधि में प्रति हेक्टेयर 500 से 5000 तक लगाए जा सकते हैं.
सघन रोपित विधि में 3×1.5 मीटर यानी 2,222 पौधे, 3×3 मीटर यानी 1,111 पौधे और 3×6 मीटर यानी 555 पौधे प्रति हेक्टेयर रोपे जाते हैं.
इस सघन विधि में कलम से तैयार पौधे से पौधे की दूरी 1.5 मीटर और लाइन से लाइन की दूरी 3 मीटर रखी गई. नतीजतन, 1 हेक्टेयर की वाटिका में तकरीबन 2,222 पौधे लगाए जाते हैं. इस तकनीक में पौधों की सघनता व छतरी झाड़ीनुमा की तरह बनाने का इंतजाम किया जाता है. खासतौर से पौधों की आकृति को नियंत्रण में रख कर इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि लागत कम आए और फलों की पैदावार ज्यादा हो. साथ ही, फलों की पौष्टिकता भी बेहतर बनी रहे.
पौध प्रशिक्षण प्रणाली को अपना कर इस बात पर ज्यादा जोर दिया जाता है कि सघन फल वाटिका से बौनी किस्मों से जल्दी उत्पादन लिया जाए. जैसे ही पौधों को वाटिका में लगाया जाए तो शुरू से ही उन के आकार और ऊंचाई को जरूरत के अनुसार रखा जाए जिस से पौधों की सघनता और उत्पादकता ज्यादा हो.
पहले साल में अमरूद के पौधों की बढ़वार, कटाईछंटाई और दूसरे कामों पर खासा ध्यान दिया जाता है क्योंकि अमरूद का पौधा तभी झाड़ीनुमा यानी छतरी की तरह बन पाएगा.
एक साल के पौधे में जमीन से 60-70 सैंटीमीटर तक की शाखाओं को साफ कर दिया जाता है. इस के बाद तने पर 4-5 सेहतमंद शाखाओं को महफूज रखा जाता है जिस से पौधा शुरू से ही शाखाओं का रूप ले ले. इन शाखाओं को 40-50 सैंटीमीटर तक बढ़ोतरी करने दी जाती है. 4-5 महीने में ये शाखाएं तैयार हो जाती हैं. मई महीने में इन शाखाओं की कटाईछंटाई की जाती है. इस के बाद जो शाखाएं निकलती हैं, उन को 40 सैंटीमीटर तक ही बढ़ने दिया जाता है.
इस तरह इस क्रिया को दूसरे साल तक जारी रखते हैं. सीधी शाखाओं को काट दिया जाता है और जो शाखाएं जमीन के समानांतर बढ़ती हैं, उन को जबतब काट दिया जाता है. इसलिए 2 साल बाद पौधा झाड़ीनुमा संयुक्त व सटा हुआ मजबूत रूप धारण कर लेता है. हर साल मई माह में पौधों की कटाईछंटाई की जाती है. अधिक सघनता 2,222 मीटर कटाईछंटाई वाली वाटिका से फल 73 टन प्रति हेक्टेयर ले सकते हैं.





