Balanced Fertilizer Usage : हरियाणा का यमुनानगर जिला खेती में संतुलित उर्वरक उपयोग का उदाहरण बनकर उभरा है. यहां किसानों की जागरूकता और कृषि विभाग की रणनीति के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में यूरिया की खपत में लगभग 22% की कमी दर्ज की गई है.
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, जिले में 2024-25 में यूरिया की खपत लगभग 1.52 लाख मीट्रिक टन थी, जो 2025-26 में घटकर करीब 1.25 लाख मीट्रिक टन रह गई. इसे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है.
किसानों की जागरूकता से कम हुआ यूरिया उपयोग
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह कमी लगभग 6.136 लाख यूरिया बैग के बराबर है. हर 45 किलो के बैग पर सरकार करीब 2,000 रुपये की सब्सिडी देती है. इस तरह जिले ने एक साल में लगभग 123 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचाने में योगदान दिया है.
यमुनानगर के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप दबास ने बताया कि, किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए लगातार जागरूक किया गया, जिससे खेती अधिक टिकाऊ बनी और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ.
कृषि विभाग की रणनीति से बदली तस्वीर
कृषि विभाग ने गांव स्तर पर उर्वरक प्रबंधन योजना तैयार की और किसानों को सही मात्रा में खाद उपयोग की जानकारी दी. खेतों में प्रदर्शन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उर्वरक उपयोग के फायदे समझाए गए.
POS मशीनों और “मेरी फसल मेरा ब्योरा” पोर्टल के जरिए उर्वरक वितरण की रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई, जिससे रियायती यूरिया सही किसानों तक पहुंच सका और फर्जी खरीद पर रोक लगी.
नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई
सब्सिडी वाले यूरिया के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कृषि विभाग ने 14 मामले दर्ज किए और 6,845 यूरिया बैग जब्त किए. नियमों का उल्लंघन करने वाले 30 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस भी रद्द किए गए.





