Mat Nursery . परंपरागत तरीके की नर्सरी और मैट नर्सरी में काफी अंतर है. मशीन द्वारा रोपनी के लिए चटाईनुमा नर्सरी (मैट) होती है, जिस से एक पौधे की जड़ दूसरे पौधे की जड़ों को जकड़े रहती है.  मैट नर्सरी  बनाने से पहले कुछ साजोसामान का इंतजाम कर लें जैसे, साफसुथरे प्रमाणित बीज, नर्सरी बेड की जगह (एक एकड़ खेत के लिए 1.2 मीटर×20 मीटर), प्लास्टिक शीट (100 माइक्रोन वाली, बेड के अनुसार) मिट्टी छानने की छन्नी, महीन मिट्टी, वर्मी कंपोस्ट और गोबर की खाद, जूट की बोरियां, आधा इंच ऊंचाई वाला लोहे का फ्रेम, लकड़ी का तख्ता वगैरह.

बीज की मात्रा

एक हेक्टेयर खेत में 20-22 किलोग्राम बीज की जरूरत पड़ती है. बीज को उपचारित कर लेना चाहिए. पौध रोपाई के 20 दिन पहले नर्सरी में बीज डाल दें. बोने से पहले बीज को 10 लीटर पानी में 8-10 घंटे के लिए डाल दें. इस के बाद पानी से बीजों को निकाल कर जमीन पर फैलाने के बाद गीले जूट के बोरों से ढक देना चाहिए. समयसमय पर ऊपर से पानी का छिड़काव करते रहें. 24 घंटे के अंदर 2-3 बार बीजों को पलटते रहना अच्छा होता है. 24 घंटे के अंदर बीजों में अंकुरण होने लगता है.

नर्सरी बेड की तैयारी

20 मीटर लंबा, 1.2 मीटर चौड़ा और 10-15 सेंटीमीटर ऊंचाई का बेड 1 एकड़ खेत में रोपाई के लिए काफी होता है. 2 बेडों के बीच में नाली होनी चाहिए, ताकि बिजाई के 3-4 दिन बाद पूरे बेड को पूरी तरह पानी में कुछ समय के लिए डुबोया जा सके. अगर बेड की मिट्टी सख्त नहीं है, तो इस पर प्लास्टिक शीट बिछा दें ताकि पौध की जड़ें मिट्टी में न जा पाएं.

प्लास्टिक शीट फैलाना

बेड को एकसार करने के लिए पाटे से मिट्टी को दबा कर समतल कर लें. 100 माइक्रोन मोटाई वाली पौलीथिन शीट को बेड पर फैलाने से पहले जगहजगह पर या मोड़ों पर छोटेछोटे छेद कर देने चाहिए, ताकि बेड और पौलीथिन के बीच की हवा निकल जाए और पौलीथिन बेड की मिट्टी से अच्छी तरह चिपक जाए.

मिट्टी को बेड पर फैलाना

पौलीथिन शीट के ऊपर मिट्टी, गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट के मिश्रण  को आधा इंच की परत में फैलाना होता है. मिश्रण को तैयार करने के लिए हलकी भुरभुरी मिट्टी, जो खरपतवार के बीजों से मुक्त हो, अच्छी होती है. इस मिट्टी को 2 जाली वाली छन्नी से छान लें. अब इस मिट्टी में गोबर की खाद व केंचुआ खाद अच्छी तरह से मिला लें.

मिश्रण में बिजाई

पहले से अंकुरित बीजों को मिश्रण पर हाथ से छिटक देना चाहिए. बीजों को इस तरह फैलाना चाहिए कि एक वर्ग इंच में 3-4 बीज जरूर रहें. बीज डाल कर उस के ऊपर आधा सेंटीमीटर मिट्टी मिश्रण की एक परत डाल दें. मिश्रण उतना ही डालें कि बीज दिखाई दे.

नर्सरी की सिंचाई

मिश्रण पर बीज फैलाने और उन्हें ढकने के बाद फव्वारे से हलकी सिंचाई करनी चाहिए. 3-4 घंटे के अंतर पर 3-4 दिनों तक सिंचाई करें. 3-4 दिनों के बाद बीजों की जड़ें एकदूसरे को जकड़ लेती हैं और तब पूरे बेड को कुछ समय के लिए बेडों के बराबर में बनाई नाली के पानी में डुबोया जा सकता है, ताकि नमी देर तक बनी रहे. इसे तब तक दुहराते रहें जब तक कि नर्सरी 15-18 दिनों की न हो जाए. इस तरह से बिचड़ों की जड़ें एकदूसरे को अच्छी तरह से जकड़ लेती हैं और यह एक मैट यानी चटाई का रूप ले लेता है.

कटाई और रोपनी

नर्सरी की रोपनी से 12 घंटे पहले से सिंचाई देना बंद कर दें. राइस ट्रांसप्लांटर में बनी ट्रे के साइज के अनुसार नर्सरी को 60×20 सेंटीमीटर के आकार में चाकू से काट लें और ट्रांसप्लांटर की टे्र में रख दें. एक एकड़ खेत में मशीन से रोपनी के लिए इस आकार के 200 टुकड़ों की जरूरत पड़ती है.

मैट नर्सरी को कारोबारी तौर से भी उगाया जा सकता है. इस काम के लिए एक पौलीथिन शीट को 3 बार  बिचड़े को उगाने के लिए इस्तेमाल में लाना चाहिए. एक किसान एक मौसम में 3 बार इस तकनीक से नर्सरी तैयार कर सकता है. Mat Nursery

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