Paddy Sowing Schedule : पंजाब में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है. धान की खेती में पानी की खपत भी बहुत होती है जिसके चलते पंजाब सरकार ने धान की खेती को लेकर बड़ा फरमान जारी किया है. क्या है सरकार का फरमान, आइए जानते हैं :
4 चरणों में करें किसान धान की बोआई
सरकार के आदेश के अनुसार इस बार राज्य में धान की बोआई 4 चरणों में की जाएगी, ताकि भूजल संरक्षण किया जा सके और बिजली प्रबंधन हो, सभी किसानों को समुचित पानी भी मिल सके.
मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेश के तहत राज्य को 4 जोनों में बांटकर अलग-अलग तारीखों पर धान की बोआई कराई जाएगी. इस कदम से पानी की खपत का संतुलन और किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी.
पहले चरण में सीधी बोआई (DSR) तकनीक अपनाएं किसान
# पहला जोन : पंजाब के पूरे राज्य में 15 मई से 31 मई तक धान की सीधी बोआई (DSR) तकनीक से करनी होगी. इस तकनीक में धान बीज को बिना तैयार करे सीधे ही खेत में लगाया जाता है. इसके लिए अधिक पानी की जरूरत नहीं होती और कृषि यंत्रों की मदद या सीधे ही खेत में बीज लगाया जाता है. डीएसआर तकनीक से न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि अधिक मजदूरों की भी जरूरत नहीं होती.
1 जून से पारंपरिक तरीकों से इन हिस्सों में होगी धान रोपाई
इस दौरान किसानों को रोजाना 8 घंटे लगातार बिजली मिलेगी जिससे बिना रुके खेती का काम हो सके. जानिए जोन के अनुसार बोआई का शेड्यूल दूसरे चरण में कहां और कब होगी धान रोपाई :
# दूसरा जोन : 1 जून, 2026 से गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, होशियारपुर में धान की रोपाई हो सकेगी.
# तीसरा जोन : 5 जून, 2026 से फरीदकोट, बठिंडा, फिरोजपुर, श्रीमुक्तसर साहिब और फाजिल्का में धान लगा सकेंगे.
# चौथा जोन: 9 जून, 2026 से लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, संगरूर, बरनाला, कपूरथला, जालंधर, नवांशहर में होगी धान की बोआई.
सिंचाई के लिए पानी की नहीं होगी कमी
राज्य सरकार ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूती देने के लिए 6,700 करोड़ रुपए का निवेश किया है. इसके तहत 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन की सफाई और 7,000 जलमार्गों व नहरों का निर्माण किया गया है. इसके अलावा कपास, मक्का, बागबानी और चारा फसलों के लिए भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी.
अलग-अलग समय पर बोआई से किसानों को मिलेगी सुविधा
पंजाब सरकार का मानना है कि इस तरीके से धान बोआई करने पर किसानों को खेती में अधिक सुविधा के साथ, अच्छी पैदावार मिलेगी और मंडी में जब उपज जाएगी तो उसमें भी लाभ मिलेगा.





