Waste to Energy. यमुना नदी को साफ करने की कवायद सालों से चली आ रही है लेकिन नतीजा संतोषजनक नहीं निकलता. अब गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक और नए कदम की शुरुआत होने जा रही है. क्या है वह नई शुरुआत? क्या है सरकार की योजना?
गौशालाओं का गोबर पहुंचेगा अब सीधे संयंत्र तक
नई योजना के तहत अब दिल्ली की गौशालाओं और डेयरियों से निकलने वाला गोबर अब सीधे गैस और खाद संयंत्रों तक पहुंचाया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया. सरकार का मानना है कि इससे यमुना में गंदगी जाने से रुकेगी और कचरे को संसाधन में बदलने का रास्ता भी खुलेगा.
यमुना बनेगी प्रदूषण फ्री, नया राजनीतिक कदम
दिल्ली में यमुना नदी में होने वाली गंदगी किसी से छिपी नहीं है और राजनीतिक दलों की शिकार भी यमुना नदी बनती आई है. लेकिन सभी के वादे केवल वादे ही बनकर रह गए. अब भाजपा सरकार की यह योजना कितनी सफल होगी, यह तो समय बताएगा.
दिल्ली में यमुना को साफ करने की दिशा में केंद्र सरकार ने नई कार्ययोजना पर काम तेज कर दिया है. इसी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में यमुना की सफाई को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनमें दिल्ली की गौशालाओं और डेयरियों से निकलने वाले गोबर को सीधे गैस और खाद संयंत्रों तक पहुंचाने की योजना प्रमुख रही.
अमित शाह ने कहा-
स्वच्छ और निर्मल यमुना सरकार का संकल्प है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यमुना की सफाई का काम अलग-अलग विभागों या राज्यों के स्तर पर नहीं, बल्कि एकीकृत कार्ययोजना और टीम भावना के साथ किया जाना चाहिए. शाह ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करना होगा, तभी यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य समय पर हासिल किया जा सकेगा.
गंदी होती यमुना के पीछे की कहानी
यमुना प्रदूषण की सबसे बड़ी वजहों में डेयरियों और गौशालाओं से निकलने वाला अपशिष्ट भी शामिल है. इसे रोकने के लिए बैठक में तय किया गया कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच एक MoU साइन किया जाएगा. इसके तहत डेयरियों और गौशालाओं से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक कचरे को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र कर गोबर गैस और जैविक खाद बनाने वाले संयंत्रों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे यमुना में गंदगी कम हो, वहीं दूसरी ओर कचरे से ऊर्जा और खाद तैयार की जा सके.
वैज्ञानिक प्रबंधन से साफ होगी यमुना
गृह मंत्री ने कहा कि यमुना किनारे कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेयरी और गौशालाओं के अपशिष्ट का निस्तारण ऐसी व्यवस्था के तहत किया जाए, जिससे वह किसी भी स्थिति में नदी तक न पहुंचे. सरकार का मानना है कि यह मॉडल दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में भी मददगार साबित होगा.
यमुना की गाद से होगा निर्माण कार्य
बैठक में यमुना की डीसिल्टिंग यानी नदी की तलहटी में जमा गाद हटाने के काम की भी समीक्षा की गई, इसलिए डीसिल्टिंग का काम तेजी से पूरा किया जाए और निकाली गई गाद का इस्तेमाल विभिन्न निर्माण और परियोजनाओं में किया जाएगा. उनका कहना था कि यदि गाद को किनारों पर छोड़ दिया गया तो बारिश के दौरान वह दोबारा नदी में पहुंच सकती है, इसलिए उसका वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
केवल कागज पर नहीं, धरातल पर दिखे काम
इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों को लेकर भी गृह मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखाई देने चाहिए. बैठक में यह भी तय किया गया कि यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना की प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में की जाएगी. तय समय-सीमा के भीतर अपने लक्ष्य पूरे करें और परियोजना की रफ्तार बनी रहे.
गृह मंत्री ने यमुना सफाई के इस अभियान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे यमुना किनारे कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेयरी और गौशालाओं के अपशिष्ट का निस्तारण ऐसी व्यवस्था के तहत किया जाए, जिससे वह किसी भी स्थिति में नदी तक न पहुंचे. Waste to Energy





