El Nino का नाम इन दिनों लगातार सुनाई दे रहा है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसके कारण कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश, लंबे समय तक गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं. इसका सीधा असर केवल खेती पर ही नहीं, बल्कि पशुपालन पर भी पड़ता है. भीषण गर्मी, पानी और हरे चारे की कमी से पशुओं की सेहत बिगड़ सकती है, दूध उत्पादन घट सकता है और पशुपालकों की आय प्रभावित हो सकती है.

राहत की बात यह है कि यदि समय रहते सही तैयारी कर ली जाए तो एल-नीनो से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. भाकृअनुप–केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIRC), मेरठ ने पशुपालकों के लिए वैज्ञानिक सलाह जारी की है, जिनका पालन करके पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है.

सबसे पहले बचाएं पशुओं को गर्मी से

एल-नीनो के दौरान सबसे बड़ी चुनौती हीट स्ट्रेस होती है. अधिक तापमान के कारण पशु सुस्त हो जाते हैं, उनकी भूख कम लगती है, दूध उत्पादन घट जाता है और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.

इससे बचाव के लिए पशुशाला में अच्छी छाया और हवा का इंतजाम करें. जरूरत हो तो पंखे, फॉगर्स या पानी के छिड़काव की व्यवस्था करें. पशुओं को सुबह और शाम के ठंडे समय में चारा खिलाएं तथा हर समय साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं.

आज से करें चारे का इंतजाम

कम बारिश के कारण हरे चारे की कमी हो सकती है, इसलिए अभी से ज्वार, बाजरा, नेपियर और लोबिया जैसी सूखा सहन करने वाली चारा फसलों की तैयारी करें.

साथ ही साइलेज और सूखी घास (हे) का भंडारण करें. धान और गेहूं के भूसे का वैज्ञानिक तरीके से यूरिया उपचार कर उसे पौष्टिक चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. पशुओं के आहार में मिनरल मिक्सचर और संतुलित दाना भी जरूर शामिल करें.

बीमारी से बचाव भी जरूरी

गर्मी और पानी की कमी के समय पशुओं में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए समय पर टीकाकरण और कृमिनाशन कराएं. प्राथमिक उपचार की दवाएं पहले से रखें और बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. आसपास लगने वाले पशु स्वास्थ्य शिविरों का भी लाभ उठाएं.

गर्भवती और दुधारू पशुओं का रखें विशेष ध्यान

गर्भवती, नवजात और अधिक दूध देने वाले पशु गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. इन्हें पौष्टिक आहार, पर्याप्त स्वच्छ पानी और आरामदायक वातावरण दें. प्रजनन संबंधी कार्य भी पशु चिकित्सक की सलाह से ही कराएं.

पानी की हर बूंद है कीमती

एल-नीनो के दौरान पानी का संकट बढ़ सकता है. ऐसे में वर्षा जल संचयन, तालाबों और कुओं का संरक्षण तथा पानी का सोच-समझकर उपयोग बहुत जरूरी है. पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल की नियमित व्यवस्था बनाए रखें.

मौसम पर रखें नजर, तैयारी रखें पूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि एल-नीनो को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही प्रबंधन से इसके प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है. मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर नजर रखें, चारा और पानी का पहले से प्रबंध करें, पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करें और आवश्यकता होने पर पशुधन बीमा का भी लाभ लें.

याद रखें

आज की गई थोड़ी-सी तैयारी कल बड़े नुकसान से बचा सकती है. यदि समय रहते वैज्ञानिक सलाह अपनाई जाए तो भीषण गर्मी, सूखे और चारे की कमी के बावजूद पशुधन को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन व पशुपालकों की आय पर पड़ने वाले असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. El Nino

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