Mango. गर्मियों का मौसम आते ही बाजार से लेकर घरों तक आम की खुशबू छा जाती है। दशहरी, लंगड़ा, चौसा, सफेदा या अल्फांसो… हर किस्म का आम अपने स्वाद और सुगंध से लोगों का मन मोह लेता है. आम सिर्फ स्वाद का ही नहीं, बल्कि पोषण का भी खजाना माना जाता है. लेकिन बाजार में बढ़ती मांग के बीच फलों को जल्दी पकाने के लिए रसायनों के इस्तेमाल की खबरें भी सामने आती रहती हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम जो आम खा रहे हैं, वह वास्तव में सुरक्षित है?
इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए डॉ. दिव्यांशु सेंगर , मेडिकल ऑफिसर , लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज, मेरठ से बातचीत की गई. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से पके आम स्वाद और पोषण, दोनों के लिहाज से बेहतर होते हैं, जबकि प्रतिबंधित रसायनों से पकाए गए आम स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं. आइए जानते हैं उन्होंने इस विषय पर क्या क्या जानकारियां दीं .
आम को सदियों से ‘फलों का राजा’ कहा जाता है. लेकिन इस मिठास का असली आनंद तभी है, जब आम प्राकृतिक तरीके से पका हो. यदि यही आम रसायनों की मदद से पकाया गया हो, तो स्वाद के साथ सेहत भी दांव पर लग सकती है.
आम सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत का भी खजाना
आम में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, आंखों की रोशनी बनाए रखने, त्वचा को स्वस्थ रखने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है.
बागबान की मेहनत का सम्मान भी है जरूरी
एक स्वादिष्ट और रसदार आम हमारी थाली तक पहुंचने से पहले बागबान की महीनों की मेहनत से गुजरता है. पेड़ों की देखभाल, सिंचाई, रोग-कीट नियंत्रण और मौसम की मार झेलने के बाद तैयार होने वाले फलों को समय पर बाजार तक पहुंचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में अधिक मुनाफे या जल्दी बिक्री की होड़ में यदि कहीं रसायनों से आम पकाए जाते हैं, तो इसका नुकसान केवल उपभोक्ता को ही नहीं, बल्कि उन ईमानदार बागबानों को भी होता है जो प्राकृतिक तरीके से गुणवत्तापूर्ण फल तैयार करते हैं.
डॉ सेंगर का मानना है कि यदि उपभोक्ता प्राकृतिक रूप से पके आमों को प्राथमिकता दें और विश्वसनीय बागबानों या विक्रेताओं से खरीदारी करें, तो सुरक्षित फल खाने के साथ-साथ किसानों को भी बेहतर मूल्य मिल सकता है. इससे प्राकृतिक तरीके से आम उत्पादन और विपणन को बढ़ावा मिलेगा तथा बाजार में रसायनों के अनावश्यक प्रयोग पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी.
जब मिठास में घुल जाए रसायन…
बाजार में मांग बढ़ने के साथ कई जगह आमों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. इसे कई क्षेत्रों में ‘पुड़िया मसाला’ या ‘पाल लगाना’ भी कहा जाता है.
कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आकर एसीटिलीन गैस छोड़ता है, जो फल को जल्दी तो पका देती है, लेकिन यह प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं होती. ऐसे रसायनों में मौजूद हानिकारक अशुद्धियां शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं.
रसायनों से पके आम खाए तो हो सकती हैं ये परेशानियां
-पेटदर्द, गैस, दस्त या कब्ज.
-मुंह और गले में जलन.
-सिरदर्द और एलर्जी.
-लंबे समय तक सेवन करने पर लिवर और तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल असर.
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए अधिक जोखिम.
ऐसे करें असली और नकली पकाव की पहचान
-आम बाहर से पूरी तरह पीला दिखे, लेकिन दबाने पर सख्त लगे.
-फल पर कहीं हरा और कहीं गहरा पीला रंग दिखाई दे.
-स्वाद फीका हो और रस कम निकले.
-अंदर से फल पूरी तरह पका हुआ न हो.
ध्यान रखें :
पानी में डालकर आम की जांच करने का तरीका पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, इसलिए केवल इसी पर भरोसा न करें.
घर पर ऐसे पकाएं आम, स्वाद भी रहेगा और सेहत भी
यदि संभव हो तो थोड़ा कच्चा आम खरीदें और घर पर प्राकृतिक तरीके से पकाएं.
-सूखी घास या पुआल में रखें.
-गत्ते या लकड़ी की पेटी में अखबार बिछाकर रखें.
-सामान्य कमरे के तापमान पर 2–5 दिन तक छोड़ दें.
-सीधे धूप या फ्रिज में रखकर आम न पकाएं.
आम खाते समय रखें ये छोटी-छोटी सावधानियां
-विश्वसनीय दुकान से ही आम खरीदें.
-खाने से पहले 15–20 मिनट साफ पानी में भिगोकर अच्छी तरह धो लें.
-डंठल वाला हिस्सा हटाकर ही सेवन करें.
-यदि स्वाद असामान्य या रस कम लगे तो ऐसे आम खाने से बचें.
-आम का सेवन संतुलित मात्रा में करें.
मिठास भी, सेहत भी
आम का मौसम साल में कुछ ही महीनों के लिए आता है, इसलिए इसकी मिठास का भरपूर आनंद लें, लेकिन थोड़ी सावधानी के साथ. प्राकृतिक तरीके से पके आम न केवल स्वाद में बेहतर होते हैं, बल्कि उनमें पोषक तत्व भी सुरक्षित रहते हैं. याद रखिए, थोड़ी-सी सतर्कता आपकी थाली में मिठास के साथ अच्छी सेहत भी परोस सकती है.





