Drum Seeder. धान की खेती के दौरान हर कदम पर मजदूरों की जरूरत पड़ती है और आजकल मजदूर आसानी से नहीं मिलते और मिलते भी हैं तो मजदूरी बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में पैडी ड्रम सीडर के जरीए धान की खेती बहुत आसान हो जाती है.
ड्रम सीडर यंत्र में तुरंत अंकुरित हुए बीज इस्तेमाल किए जाते हैं, क्योंकि ज्यादा लंबे अंकुर वाले बीज छेद के बीच फंसते हैं. धान की वैरायटी का चुनाव जमीन की स्थिति के अनुसार करना चाहिए. इस यंत्र से धान की खेती कर के किसान, मजदूरों की किल्लत से निबट सकते हैं.
खेत की तैयारी
खेत को बोआई से 2 दिन पहले अच्छी तरह कदवा कर उसे समतल कर लें. बोआई के समय खेत में ज्यादा पानी न हो, इस में केवल पानी की पतली परत ही रहनी चाहिए, नहीं तो बीज अपने स्थान से खिसक कर किसी दूसरे स्थान पर जमा हो सकते हैं. इसलिए कीचड़ किए खेत से बोआई के 24 घंटे पहले पानी की निकासी कर लें ताकि कदवा अच्छी तरह सेट हो जाए. खेत में उर्वरक व कंपोस्ट का इस्तेमाल बीज के अनुसार करना चाहिए.
बोआई तकनीक
अगर ड्रम सीडर यंत्र के हिस्से अलगअलग रखे हों, तो सब से पहले वर्गाकार शाफ्ट को कस लें फिर एकएक कर के बीज बौक्स, पहिया व हैंडल को जोड़ कर इसे तैयार कर लें और सभी नटबोल्टों को कस लें.
सभी बीज बौक्सों में अंकुरित बीज डालें. बीज बौक्स की क्षमता के केवल दोतिहाई भाग को ही भरें, नहीं तो बीज यंत्र के छेद से ठीक से नहीं निकलेगा. बौक्स के ढक्कन बंद कर के लाक कर दें.
कीचड़ वाले खेत में यंत्र को सीधा व सामान्य गति से आगे की ओर चलाएं ताकि लाइन टेढ़ी न हो. खेत के आखिर में यंत्र को मोड़ लें. इस तकनीक से लाइनों में बीज खेत की सतह पर गिरते जाते हैं, बीज जहांतहां नहीं गिरते हैं बल्कि हिल ड्रोपिंग होता है.
बोआई के समय बौक्सों के छेदों से बीज गिरने की जांच करते रहें और जब बौक्सों में एकचौथाई बीज बचें तब उन्हें फिर से भर लें.
खेत के एक कोने में 2-3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अंकुरित बीज की बोआई भी अलग कर लें ताकि 10 दिन बाद अगर लाइनों में खाली जगह दिखे तो उस जगह पर रोपाई की जा सके.
बोआई के 10-12 दिन तक हर 3 दिन के अंतर पर खेत में हलका पानी डालें. फिर जरूरत के अनुसार खेत की सिंचाई करें. शुरुआती अवस्था में गीलासूखा विधि से सिंचाई करें और गाभा की अवस्था के पहले से ले कर फसल कटने के 10 दिन पहले तक खेत में 2-3 सेंटीमीटर पानी रखें.
बोआई के 2-3 दिन तक खेत की जांच करने के लिए एक आदमी की व्यवस्था रखें ताकि चिडि़या बीज न चुगने पाएं.
खरपतवार की करें रोकथाम
इस तकनीक से बोआई वाले खेत में समय पर खरपतवार की रोकथाम जरूरी है. लाइनों के बीच चलने वाले कोनोवीडर का इस्तेमाल 3-4 बार किया जाता है. इस में पैडी वीडर केवल एक दिशा में ही चलाया जा सकता है, जिसे पहली बार बोआई के 15 दिन बाद और 10 दिन के अंतर पर 3 बार चलाया जाता है. कोनोवीडर नहीं होने पर बोआई के 2 दिन बाद खरपतवारनाशी का इस्तेमाल करें और अगर जरूरत हो तो दूसरा छिड़काव बोआई के 30 दिन बाद करें.





