Kalaignar Integrated Agriculture Development scheme : हर गांव बने समृद्ध, हर किसान हो आत्मनिर्भर

आज खेती केवल अनाज उगाने तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि मौसम के बदलते हालत से खेती में बढ़ती लागत, जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और बाजार के उतार-चढ़ाव ने किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऐसे समय में केवल एक फसल पर निर्भर रहना किसानों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है. अब जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें खेती के साथ पशुपालन, बागबानी, मत्स्य पालन, कृषि प्रसंस्करण और बेहतर विपणन व्यवस्था भी जुड़ी हो.

तमिलनाडु सरकार ने इसी सोच को आधार बनाकर कलाईग्नर आल विलेज इंटीग्रेटेड एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (KAVIADP) शुरू किया. साल 2021-22 से लागू यह कार्यक्रम गांव केंद्रित समग्र कृषि विकास का मॉडल है. इस का उद्देश्य केवल फसल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे गांव की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है.

देश की सबसे अनूठी गांव आधारित कृषि योजना

अधिकांश योजनाएं किसी एक क्षेत्र—जैसे सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण या बागवानी—पर केंद्रित होती हैं, लेकिन KAVIADP इन सभी को एक साथ जोड़ती है. कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, कृषि अभियांत्रिकी, कृषि विपणन और सहकारिता विभाग मिलकर गांव की जरूरत के अनुसार विकास कार्य करते हैं.

यही वजह है कि यह योजना केवल अनुदान वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की समग्र कृषि व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास करती है.

अब तक की उपलब्धियां और भविष्य का क्या है प्लान

तमिलनाडु सरकार के अनुसार वर्ष 2026-27 तक यह योजना राज्य की सभी 12,525 ग्राम पंचायतों तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है. अब तक—

-लगभग 10,187 ग्राम पंचायतों में योजना लागू की जा चुकी है.

-करीब 707 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं.

-61 लाख से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिला है.

-लगभग 58,712 एकड़ परती भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाया गया.

-53 लाख नारियल पौधे तथा 21 लाख फलदार पौध किट किसानों को वितरित की गईं.

2025-26 में मिला बड़ा बजट

तमिलनाडु के कृषि बजट 2025-26 में KAVIADP के लिए 269.50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया. इस राशि से लगभग 2,338 ग्राम पंचायतों में योजना का विस्तार किया जा रहा है.

योजना की सबसे बड़ी ताकत :

गांव की जरूरत के अनुसार विकास

इस योजना में पहले गांव का विस्तृत सर्वे किया जाता है. इसमें देखा जाता है :

-कौन-सी फसलें उगाई जाती हैं.

-पानी की उपलब्धता कितनी है.

-कितनी परती भूमि है.

-पशुधन कितना है.

-किसानों की मुख्य समस्याएं क्या हैं.

-बाजार कितनी दूर है.

इन्हीं जानकारियों के आधार पर प्रत्येक गांव के लिए कृषि विकास खाका तैयार किया जाता है.

एक ही योजना में मिलते हैं कई विभागों के लाभ :

KAVIADP की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसान को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, बल्कि योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को आवश्यकता के अनुसार उन्नत बीज, पौध सामग्री, कृषि यंत्रों पर अनुदान, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, खेत तालाब योजना, डेयरी एवं बकरी पालन सहायता, मत्स्य पालन, प्रशिक्षण और एफपीओ से जोड़ने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.

पानी की हर बूंद का बेहतर उपयोग

तमिलनाडु के कई जिले कम वर्षा वाले हैं. इसलिए योजना में जल संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है.

इसके तहत—

-खेत तालाब योजना.

-वर्षा जल संचयन.

-ड्रिप सिंचाई योजना.

-स्प्रिंकलर, सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत भूजल संरक्षण जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि कम पानी में अधिक उत्पादन लिया जा सके.

फसल विविधीकरण से बढ़ रही आमदनी :

सरकार किसानों को केवल धान या पारंपरिक फसलों तक सीमित रहने की बजाय फल, सब्जियां, फूल, मसाले, मोटे अनाज, नारियल, बागवानी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

इससे किसानों की आय के कई स्रोत बन रहे हैं और बाजार का जोखिम भी कम हो रहा है.

इसके अलावा इस योजना से किसान रोज नई गाथाएं लिख रहे हैं, जिसमें किसानों की सफलता की कहानियां उनकी मिसाल बन रही हैं. इसके अलावा महिला किसानों और युवाओं की भूमिका, एफपीओ के जरिए भी किसानों की मदद हो रही है.

कृषि विशेषज्ञों का क्या है कहना. आइए जानते हैं.

एफपीओ से छोटे किसानों को मिल रही बड़ी ताकत :

भारतीय कृषि में अधिकांश किसानों के पास खेती की कम जमीन है. ऐसे किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उचित दाम पर बीज और उर्वरक खरीदना तथा अपनी उपज को अच्छे बाजार तक पहुंचाना होता है. लेकिन अब कलाईग्नर समेकित कृषि विकास कार्यक्रम में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को विशेष महत्व दिया गया है.

एफपीओ के माध्यम से किसान सामूहिक रूप से बीज, उर्वरक और कृषि यंत्र खरीदते हैं, जिससे लागत कम होती है. वहीं सामूहिक विपणन से बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है. कई एफपीओ अब प्राथमिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग का काम भी कर रहे हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिल रही है.

महिला किसान बन रही हैं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत

तमिलनाडु में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कृषि से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है. कई गांवों में महिलाएं मशरूम उत्पादन, मधुमक्खीपालन, नर्सरी, सब्जी उत्पादन, मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे कार्यों से अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं.

इस योजना के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न विभागों की सहायता योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है. इससे परिवार की आय बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण भी हो रहा है.

ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि में पैदा हो रहे नए अवसर

आज का युवा केवल पारंपरिक खेती नहीं, बल्कि तकनीक आधारित कृषि अपनाना चाहता है. KAVIADP के माध्यम से युवाओं को आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रोन आधारित सेवाएं, सटीक खेती (Precision Farming), उद्यमिता और कृषि प्रसंस्करण से जोड़ने पर बल दिया जा रहा है.

कृषि विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित करता है, जिनमें नई तकनीकों, डिजिटल कृषि और बाजार प्रबंधन की जानकारी दी जाती है. इससे खेती रोजगार का आधुनिक और लाभकारी विकल्प बन रही है.

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी है प्राथमिकता

योजना का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि मिट्टी और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी है. इसके लिए खेत तालाब, वर्षा जल संचयन, सूक्ष्म सिंचाई, जैविक खाद, हरी खाद और फसल अवशेष प्रबंधन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होगा, तभी भविष्य में उत्पादन और किसानों की आमदनी बढ़ेगी .

KAVIADP की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘कन्वर्जेंस मॉडल’ है. इसमें कृषि, बागवानी, कृषि अभियांत्रिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता और ग्रामीण विकास जैसे विभाग मिलकर काम करते हैं.

इससे योजनाओं का दोहराव कम होता है और किसान को एक ही मंच पर कई प्रकार की सहायता मिल जाती है. यही कारण है कि इस मॉडल को देश की सबसे प्रभावी समेकित कृषि विकास पहलों में माना जाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में गांव आधारित समेकित कृषि विकास मॉडल ही भविष्य की जरूरत है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार केवल उत्पादन बढ़ाना किसानों की आय बढ़ाने की गारंटी नहीं है. खेती को पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ना आवश्यक है.

इस योजना के बारे में Farm N Food का कहना है कि देश की कृषि अब बदलाव के दौर से गुजर रही है. बढ़ती लागत, जलवायु परिवर्तन और बाजार के उतारचढ़ाव ने किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऐसे समय में केवल अनुदान आधारित योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं. बल्कि तमिलनाडु का कलाईग्नर ऑल विलेज इंटीग्रेटेड एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (KAVIADP) यह बताता है कि यदि गांव को विकास की इकाई मानकर कृषि, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन, जल संरक्षण, कृषि यंत्रीकरण और किसान संगठनों को एक साथ जोड़ा जाए, तो किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव है.

यह केवल तमिलनाडु की योजना नहीं, बल्कि भविष्य की भारतीय कृषि का एक प्रभावी मॉडल है. यदि अन्य राज्य भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार इस तरह की समेकित योजनाएं लागू करें, तो कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

इस योजना की 5 बड़ी बातें-

-हर गांव के लिए अलग कृषि विकास योजना तैयार की जाती है.

-खेती के साथ पशुपालन, बागवानी और मत्स्य पालन को जोड़ा गया है.

-जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई पर विशेष जोर है.

-एफपीओ के माध्यम से छोटे किसानों को मजबूत बनाया जा रहा है.

-महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें कृषि उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है.

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