खुद मसालों की कीमत ज्यादा होती है, फिर मसाला बीजों (Spice Seeds) का तो कहना ही क्या. किसान अगर मसाला फसलों का खुद ही बीज तैयार करें तो मुनाफा बढ़ेगा, लागत कम आएगी और नकली बीजों के झंझट से मुक्ति मिलेगी.शुद्ध बीज तैयार करने के लिए इन बातों को ध्यान में रखना होता है:

खेती की तैयारी : शुद्ध बीज के लिए ऐसे खेत का चुनाव करें, जिस में पिछले साल वही फसल नहीं बोई गई हो. खेत की 3-4 जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें और पाटा लगा कर खेत को समतल कर लें. दीमक व मिट्टी में रहने वाले कीटों की रोकथाम के लिए क्यूनालफास डेढ़ फीसदी चूर्ण 25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से आखिरी जुताई के समय खेत में अच्छी तरह मिलाएं.

धनिया के लिए बीज दर व बोआई : धनिया के लिए 15 से 20 किलोग्राम बीज लाइन में 30×10 की दूरी पर मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक खेत में बोआई करें.

मेथी बीज के लिए 20-25 किलोग्राम बीज 30×10 सेंटीमीटर की दूरी पर अक्तूबर के आखिरी हफ्ते से नवंबर के पहले हफ्ते तक बोआई करें.

मिर्च में 1-1.5 किलोग्राम बीज 45×30 सेंटीमीटर की दूरी पर नर्सरी में मईजून के महीने में डालें और बीज डालने के एक महीने बाद पौध खेत में लगाएं.

सौंफ के लिए 10-12 किलोग्राम बीज मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक खेत में लगाएं.

जीरा बीज फसल के लिए 12-15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से लाइन में 30×10 सेंटीमीटर की दूरी पर 15 से 30 नवंबर के बीच खेत में डालें.

बीज की अनुवांशिकी व भौतिक शुद्धता बनाए रखने के लिए फसल में दूरी का खास ध्यान रखना चाहिए.

खाद व उर्वरक

बीज फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 8-10 टन सड़ी हुई देशी या कंपोस्ट खाद बोआई से 3-4 हफ्ते पहले खेत में डाल कर खेत तैयार करें. इस के साथ उर्वरक भी डालने चाहिए.

जीरा में एनपीके 30:20:0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल करें. नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फास्फोरस की पूरी मात्रा बोआई से पहले डालें और नाइट्रोजन की बची आधी मात्रा रोपाई के 30-35 दिन व 55-60 दिन बाद 2 बराबर भागों में खेत में छिड़क कर तुरंत सिंचाई करें.

धनिया में 60:40:20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से एनपीके खेत में डालें. नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बोआई से पहले खेत में डालें. नाइट्रोजन की बची आधी मात्रा रोपाई के 30 दिन व 55-60 दिन बाद 2 बराबर भागों में खेत में छिड़क कर सिंचाई करें.

मेथी में 40:40:0 के अनुपात में एनपीके का इस्तेमाल करें.

सौंफ में यह मात्रा 90:40:0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है.

मिर्च की फसल में एनपीके 70:48:50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल करें. उर्वरक डालने का तरीका अन्य फसलों की तरह ही है.

फालतू पौधे निकालना

बीज की शुद्धता बनाए रखने के लिए अलग किस्म व फसल के पौधे, खरपतवारों, बीमार पौधों को फूल आने से पहले, फूल आने के समय, बीज बनते समय, फसल कटाई से पहले निकालते रहना चाहिए.

समयसमय पर कीट व बीमारियों की जांच कर उन से फसल के बचाव के उपाय अपनाने चाहिए.

कटाईगहाई व भंडारण

मसाला फसल के पौधों की कटाई कर औसाई करें. कचरा, पौधे के डंठल वगैरह निकाल कर बीज को सुखा कर पौलिथीन की साफ थैली में भर कर स्टोर करें. स्टोर में थैलियों का ढेर दीवार से आधा मीटर दूरी पर लकड़ी के फट्टे पर लगा कर रखें.

बीज के भंडारण के समय बीज में नमी की मात्रा 10-12 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. दांतों से तोड़ कर भी बीज में नमी की जांच की जा सकती है. अगर कट की तेज आवाज होती है, तो समझना चाहिए कि बीज में सही नमी है.   Spice Seeds

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