PMFBY 2026 : खेती में मेहनत के साथ जोखिम भी जुड़ा है. सूखा, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि, चक्रवात, कीट और रोग जैसी परिस्थितियां किसान की पूरी फसल को प्रभावित कर सकती हैं. ऐसे समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करती है.यह प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा है.
यह योजना वर्ष 2016-17 से लागू है और संबंधित राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित फसलों और क्षेत्रों के लिए गैर-निवारणीय प्राकृतिक जोखिमों से होने वाले फसल नुकसान को कवर करती है. अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने फिर स्पष्ट किया है कि योजना के तहत बुवाई से पहले से लेकर फसल कटाई के बाद तक के निर्धारित जोखिमों का कवरेज किया जाएगा.
PMFBY में किसान को कितना प्रीमियम देना पड़ता है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बड़ी खासियत किसानों के लिए सीमित प्रीमियम है.
* खरीफ फसलों के लिए अधिकतम 2 प्रतिशत बीमित राशि
* रबी फसलों के लिए अधिकतम 1.5 प्रतिशत
* वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत
बाकी पात्र प्रीमियम राशि में केंद्र और राज्य सरकारें योगदान करती हैं. मार्च 2026 में कृषि मंत्रालय ने भी इन अधिकतम किसान प्रीमियम दरों की पुष्टि की थी.
हालांकि, किसान को यह समझना जरूरी है कि कौन-सी फसल, कितनी बीमित राशि और कौन-सा क्षेत्र अधिसूचित है, यह राज्य और सीजन के अनुसार तय होता है.
PMFBY में किन जोखिमों से फसल का बीमा होता है?
PMFBY के तहत अधिसूचित फसलों को विभिन्न गैर-निवारणीय प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा मिल सकती है. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
* सूखा और शुष्क अवधि
* बाढ़ और जलभराव
* चक्रवात और तूफान
* ओलावृष्टि
* भूस्खलन
* कीट एवं रोग
* स्थानीयकृत आपदाएं
* निर्धारित परिस्थितियों में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान
क्लाउडबर्स्ट, जलभराव, ओलावृष्टि और कुछ अन्य स्थानीय जोखिमों के मामलों में नुकसान का आकलन व्यक्तिगत खेत के स्तर पर किया जा सकता है, जबकि व्यापक क्षेत्र में फसल उपज के आधार पर दावों का निर्धारण किया जाता है.
Prevented Sowing: बुवाई नहीं हो पाई तो भी मिल सकता है मुआवजा
PMFBY की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था Prevented Sowing/Planting है. यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम की वजह से बड़ी संख्या में बीमित किसान अपनी फसल की बुवाई या रोपाई नहीं कर पाते हैं, जबकि उन्होंने बुवाई के लिए खर्च किया है, तो योजना की निर्धारित शर्तें पूरी होने पर उन्हें बीमित राशि के अधिकतम 25 प्रतिशत तक indemnity मिल सकती है.
ध्यान रहे कि यह लाभ हर स्थिति में अपने आप नहीं मिलता. संबंधित क्षेत्र और फसल का योजना के नियमों के अनुसार अधिसूचित होना आवश्यक है.
फसल कटाई के बाद नुकसान भी हो सकता है कवर
PMFBY में कुछ परिस्थितियों में कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को भी कवर किया जाता है. आधिकारिक PMFBY website से प्राप्त जानकारी के अनुसार, निर्धारित फसलों के लिए कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक कुछ अधिसूचित जोखिमों से होने वाले नुकसान को कवर किया जा सकता है.
फसल खराब होने पर 72 घंटे में सूचना देना जरूरी
किसान के लिए केवल बीमा कराना ही पर्याप्त नहीं है. फसल नुकसान होने पर समय पर सूचना देना भी बेहद महत्वपूर्ण है. स्थानीयकृत आपदा और कुछ फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान के मामलों में योजना के तहत 72 घंटे के भीतर सूचना देने का प्रावधान लागू होता है.
किसान को नुकसान होने के बाद-
1. फसल की फोटो/वीडियो सुरक्षित रखनी चाहिए.
2. बीमा कंपनी या संबंधित अधिकारी को सूचना देनी चाहिए.
3. बैंक/CSC के माध्यम से आवेदन किया हो तो वहां भी जानकारी देनी चाहिए.
4. सूचना देने का प्रमाण सुरक्षित रखना चाहिए.
PMFBY में तकनीक की बढ़ रही भूमिका
फसल बीमा के आकलन को अधिक पारदर्शी और तकनीकी बनाने के लिए PMFBY में डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. सरकार ने YES-TECH, WINDS, CCE App, CLAP जैसी तकनीकी प्रणालियों को योजना के डिजिटल इकोसिस्टम का हिस्सा बनाया है. PMFBY के आधिकारिक पोर्टल पर किसानों के लिए आवेदन, प्रीमियम कैलकुलेटर, पॉलिसी स्टेटस और शिकायत/फसल नुकसान रिपोर्ट करने जैसी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध हैं.
जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने PMFBY में तकनीकी सुधारों के लिए ₹824.77 करोड़ के Fund for Innovation and Technology (FIAT) को भी मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य तकनीक के जरिए फसल नुकसान के आकलन और क्लेम सेटलमेंट में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाना था.
2026 में PMFBY से जुड़ा महत्वपूर्ण अपडेट
अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों से होने वाले फसल नुकसान को सामान्य रूप से PMFBY में पहले कवर नहीं किया जाता था, लेकिन राज्य सरकारें अपने खर्च पर इसे Add-on Cover के रूप में अधिसूचित कर सकती हैं. इसके लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार व्यक्तिगत नुकसान का आकलन किया जाएगा.
यह प्रावधान खासकर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जहां किसानों को जंगली जानवरों से फसल नुकसान की समस्या रहती है.
किसान PMFBY की जानकारी कहां से लें?
किसान अपनी फसल के लिए बीमा की अंतिम तारीख, अधिसूचित फसल, प्रीमियम और बीमा कंपनी की जानकारी राज्य और जिले के अनुसार जांच सकते हैं.
PMFBY के आधिकारिक पोर्टल पर-
फसल बीमा के लिए आवेदन
प्रीमियम कैलक्यूलेटर
पालिसी स्टेटस
इन्शुरेंस कंपनी डायरेक्टरी
ग्रीवेंस/कंप्लेंट
फसल नुक्सान रिपोर्टिंग
जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसलिए किसान को किसी सामान्य तारीख या सोशल मीडिया पोस्ट पर निर्भर रहने के बजाय अपने राज्य और जिले की आधिकारिक अधिसूचना जरूर देखनी चाहिए.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े जोखिमों के बीच आर्थिक सुरक्षा देने की महत्वपूर्ण व्यवस्था है. सीमित प्रीमियम, Prevented Sowing, स्थानीयकृत नुकसान और तकनीक आधारित फसल आकलन जैसे प्रावधान इसे किसानों के लिए उपयोगी बनाते हैं. लेकिन बीमा का लाभ तभी मिलेगा जब किसान समय पर नामांकन कराए, सही फसल और भूमि विवरण दर्ज कराए और नुकसान होने पर निर्धारित समय में सूचना दे. PMFBY 2026





