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मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत पशुपालकों को 2 मुर्रा भैंसें उपलब्ध कराई जाती हैं. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को 75 फीसदी तक, जबकि सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों को 50 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है.

2 मुर्रा भैंसों से शुरू कर सकते हैं डेयरी

मध्य प्रदेश में पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना संचालित की जा रही है. इस योजना में पात्र लाभार्थियों को 2 मुर्रा नस्ल की दुधारू भैंसों की इकाई उपलब्ध कराई जाती है. इस से किसान कम संख्या में पशुओं से डेयरी व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं.

मुर्रा भैंस देश की प्रमुख दुधारू नस्लों में शामिल है. इस की अच्छी नस्ल और उचित देखभाल होने पर दूध उत्पादन अच्छा मिलता है.

किसे कितना मिलता है अनुदान

योजना में लाभार्थी की श्रेणी के अनुसार सरकारी सहायता दी जाती है. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को इकाई लागत का 75 फीसदी तक अनुदान मिलता है. वहीं सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों के लिए 50 फीसदी तक अनुदान का प्रावधान है.

उदाहरण के तौर पर बड़वानी जिले में 2 मुर्रा भैंसों की इकाई लागत ढाई लाख रुपए बताई गई है. इस लागत पर सामान्य वर्ग के लाभार्थी को सवा लाख रुपए और एससीएसटी वर्ग के लाभार्थी को एक लाख, 87,000 रुपए तक का अनुदान बनता है. शेष राशि लाभार्थी को अपने अंशदान के रूप में लगानी होती है.

योजना के तहत अलगअलग जिलों में लक्ष्य, इकाई लागत और आवेदन की प्रक्रिया में अंतर हो सकता है.

दूध बेच कर बन सकती है नियमित आमदनी

डेयरी व्यवसाय में सब से महत्वपूर्ण बात दूध के उत्पादन और उस की बिक्री की है. 2 अच्छी दुधारू भैंसों से रोजाना मिलने वाले दूध को स्थानीय डेयरी, दूध विक्रेता, मिठाई की दुकानों या सीधे उपभोक्ताओं को बेच कर आमदनी की जा सकती है.

आवेदन से पहले ये जानकारी जरूर लें

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का लाभ लेने के लिए मध्य प्रदेश का निवासी होना और विभाग की निर्धारित पात्रता पूरी करना जरूरी है.

आवेदन, चयन, लाभार्थी अंशदान और जरूरी दस्तावेजों से संबंधित नियम जिले के अनुसार लागू हो सकते हैं, इसलिए इच्छुक किसान अपने जिले के पशुपालन एवं डेयरी विभाग या नजदीकी पशु चिकित्सा कार्यालय से संपर्क कर के वर्तमान आवेदन प्रक्रिया और अपने जिले में लागू इकाई लागत की जानकारी जरूर लें.

अगर किसान के पास पशुओं के लिए जगह, चारे की व्यवस्था और दूध बेचने का बाजार है, तो 2 मुर्रा भैंसों से डेयरी व्यवसाय की अच्छी शुरुआत की जा सकती है. सरकार की सब्सिडी शुरुआती लागत का बोझ कम करती है, लेकिन डेयरी को लाभ का कारोबार बनाने के लिए पशुओं की अच्छी नस्ल, बेहतर चारा, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और दूध की सही कीमत मिलना भी उतना ही जरूरी है. Dairy Business

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