Mawa Jalebi-

मध्य प्रदेश का कटनी शहर चूना पत्थर के नाम से मशहूर है. यहां के स्लिमनाबाद गांव में देश का सब से मशहूर संगमरमर पत्थर मिलता है. कटनी के आसपास घूमने की मशहूर जगहें भी हैं. इन में दीमरखेड़ा, बहोरीबंद, मुरवाड़ा और करोदी हैं. कटनी का नाम यहां बहने वाली कटनी नदी के नाम पर पड़ा है.

चर्चा में आई जलेबी

कटनी एक बार तब भी चर्चा में आया था जब यहां के लोगों ने हिजड़ा उम्मीदवार को चुनाव जिता दिया था. कटनी की एक और पहचान यहां बिकने वाली मावा जलेबी है. पूरे मध्य प्रदेश में बिकने वाली मावा जलेबी की शुरुआत कटनी से ही हुई थी. यहां आज भी मावा जलेबी पुराने तरीके से मावा और तिखुर मिला कर बनाई जाती है. कटनी की यह मावा जलेबी भले ही देखने में बहुत अच्छी न लगती हो पर इस का स्वाद लोगों की जबान पर चढ़ कर बोलता है.

मावा जलेबी की खासीयत

मावा जलेबी की खासीयत तिखुर होता है. तिखुर जंगलों में पाया जाता है. यह कंदमूल जैसा जमीन में पैदा होता है. इस को सुखा कर पीस कर तैयार किया जाता है. तिखुर के कारण ही कटनी की मावा जलेबी का स्वाद सब से अलग होता है. यह देखने में जलेबी जैसी लगती है, पर इस को खाने पर गुलाब जामुन का स्वाद आता है. चाशनी मिली होने के कारण यह काफी रसीली होती है.

बनाने की विधि :

मावा जलेबी बनाने के लिए एक किलोग्राम चिकना मावा, 4 सौ ग्राम तिखुर, एक किलोग्राम शुद्ध घी और एक किलोग्राम शक्कर लें. सब से पहले तिखुर को पानी में डाल कर फुला लें. अब इसे कपड़े में छान कर एक घंटे के लिए रख दें. तिखुर नीचे जम जाएगा और पानी अलग हो जाएगा. पानी हटा कर तिखुर को अलग कर लें.

अब एक कढ़ाई में मावे को अच्छी तरह से भून लें. इस को तब तक भूनें जब तक मावा चिपकना बंद न कर दे. उस में जमा हुआ तिखुर मिला दें. इसे अच्छी तरह से मिलाएं और फेंट लें. इस को कुछ देर के लिए गाढ़ा और ठंडा होने के लिए छोड़ दें. अब शक्कर की चाशनी तैयार कर लें. चाशनी न ज्यादा गाढ़ी हो और न पतली.

अब एक कढ़ाई में घी डाल कर उसे आंच पर रखें. एक साफ मोटा कपड़ा लें. उस में एक छेद बना लें. कपडे़ में मावा और तिखुर के मिश्रण को ले कर घी में जलेबी की तरह डाल कर तलें. जब यह लाल हो जाए तो इस को निकाल लें. चाशनी में डालें. इसे तब तक चाशनी में में पड़ा रहने दें, जब तक इस में चाशनी भर न जाए. अब यह खाने के लिए तैयार है.

मैदा मावा जलेबी:

मावा जलेबी पूरे मध्य प्रदेश में खूब पसंद की जाती है. मावा जलेबी अब कुछ अलग तरीके से भी बनाई जाने लगी है, जिस से इस का रंग सुनहरा दिखता है. ऐसी जलेबी तैयार करने के लिए खोए के साथ मैदा मिलाया जाता है. मैदा मिले होने के कारण इस का रंग काला नहीं पड़ता. हर जगह पर तिखुर आसानी से मिलता नहीं, इस कारण मैदा का इस्तेमाल होने लगा है. खोए और मैदे को दूध में मिला कर पेस्ट तैयार किया जाता है. इस को कपड़े में भर कर जलेबी की ही तरह गरम तेल में डाल कर तला जाता है. तैयार जलेबी को चाशनी में डाला जाता है. Mawa Jalebi

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