आज भी दुनिया का सब से मशहूर दशहरी आम (Mango Fruit) केवल 15-20 दिन ही बाजार में रहता है. भारत के कुल फल उत्पादन में करीब 22 फीसदी हिस्सा आम का है. भारत में आम को राष्ट्रीय फल घोषित किया गया है. भारत में करीब डेढ़ करोड़ टन आम की पैदावार होती है. यहां आम की 14 सौ किस्में हैं.

लखनऊ के दशहरी की औसत उम्र 15 से 20 दिन की होती है. 1 जून को दशहरी आम पहली बार मंडी पहुंचता है. 1-2 बार बागबान को अच्छा भाव भले ही मिल जाता हो, पर उस के बाद भाव एकदम नीचे आ गिरता है. अगर दशहरी की कोई उन्नत प्रजाति तैयार की गई होती, जो कुछ समय तक टिक सकती, तो शायद दशहरी को मंडी में बेहतर भाव मिलता.

दशहरी की प्रजातियों में सुधार करने के लिए केंद्र सरकार ने मलिहाबाद में रिसर्च इंस्टीट्यूट खोला है. यहां काम कर रहे वैज्ञानिकों ने दशहरी किस्म के सुधार के लिए कोई खास काम नहीं किया, जिस से दूसरे आमों के मुकाबले दशहरी का बाजार खत्म हो रहा है.

आम की प्रोसेसिंग

दुनिया भर में फलों का एक बड़ा बाजार है. आयातनिर्यात के साधन बढ़ने से यह कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है. फ्रूट प्रोसेसिंग की नईनई तकनीकें आने के बाद फलों का स्वाद साल भर लिया जा सकता है. फलों के बीज और किस्मों में सुधार कर के पूरे साल फल देने वाले पेड़ भी तैयार होने लगे हैं. फलों में सब से ज्यादा पैदावार और खपत के लिहाज से आम सब से खास फल माना जाता है. इसी कारण आम को फलों का राजा कहा जाता था.

मलिहाबादी आमों की खासीयत

उत्तर प्रदेश के मलिहाबादी आमों में अनारकली, नयनतारा और जहांआरा खासतौर पर लोगों के द्वारा पसंद किए जाते हैं. मलिहाबादी दशहरी आम काट कर खाने में बहुत स्वादिष्ठ होता है. चूस कर खाने में मिलासी और काला पहाड़ का कोई जवाब नहीं है. काट के खाने वाले आमों में शमशुल असमार, चौसा, जौहरी सफेदा और दशहरी अच्छे माने जाते हैं.

आम की की तुड़ाई

आम की फसल तैयार होने के बाद इस की तुड़ाई सही तरह से करनी चाहिए. आम को ठंडल सहित तोड़ना चाहिए और आम को चोट नहीं लगनी चाहिए. कम ऊंचाई वाले पेड़ों से फलों को सिकेटियर के जरीए तोड़ना चाहिए. ऊंचे पेड़ों से आम तोड़ने के लिए मशीन का इस्तेमाल करना चाहिए. आम की पैकिंग करने के पहले उन की ग्रेडिंग करनी चाहिए. पैकिंग के लिए लकड़ी की पेटी या गत्ते का इस्तेमाल किया जाता है.

मंडी में आम को 12 डिगरी सेंटीग्रेड तामपान पर रखना चाहिए. नमी 90-95 फीसदी होनी चाहिए.

आम से बनते अनेक उत्पाद

आम को हर तरह से खाया जाता है. जब यह कच्चा रहता है तो इस की चटनी बनाई जाती है. पुदीना और गुड़ डाल कर बनाई गई चटनी का खयाल आते ही मुंह में पानी आ जाता है. आम को पका कर काला नमक, जीरा डाल कर इस का पना बनाया जाता है. कच्चा आम विटामिन सी से भरपूर होता है. इस में मिठास नहीं होती जिस से वजन बढ़ने का खतरा कम हो जाता है.

आम के केक, पेस्ट्री भी बनने लगे है. आम के रस को निकाल कर उसे सुखा कर रखा जाता है. इस को अमावट कहते हैं. यह भी साल भर इस्तेमाल में लाया जा सकता है.

सेहत के लिए लाभकारी

आम ताकत से भरपूर हैवी कैलोरी वाला होता है. जिन लोगों को लो एनर्जी की शिकायत रहती है, वे इस का भरपूर उपयोग कर सकते हैं. आम खाना आंखों के लिए लाभदायक होता है. इस में एंटी आक्सीडेंट होते हैं. यह उम्र के बढ़ते प्रभाव को रोकने में मददगार होता है.

आम में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिस से यह कब्ज को रोकता है. भरपूर आयरन होने से गर्भवती महिलाओं को आम जरूर खाना चाहिए. आम खट्टा होने के बाद भी एसीडिटी को बढ़ाता नहीं है.

आम (Mango Fruit) अलगअलग शरीर पर अपना अलग प्रभाव दिखाता है. इस को खाने से कुछ लोगों को मुंहासे हो जाते हैं. इस में ज्यादा कैलोरी होती है, इस के चलते डायबिटीज वाले लोगों को आम का सेवन संभल कर करना चाहिए. आम को पचाना मुश्किल होता है. डायबिटीज के मरीजों और मोटे लोगों को देशी रसीले आम का सेवन करना चाहिए.

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