Engineer Turned Farmer Harinath Reddy –
कृषि में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती सेहत और रासायनिक खेती पर निर्भरता के बीच कर्नाटक के युवा किसान हरिनाथ रेड्डी एस ने प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाकर एक सफल मॉडल तैयार किया है. 4 एकड़ में 30 से अधिक फसलों की खेती के साथ वे वैल्यू एडिशन और एग्री-बिजनेस से भी जुड़े हैं.
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद खेती को बनाया करियर
कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के बागेपल्ली तालुक के मुम्मदिवारिपल्ली गांव के रहने वाले हरिनाथ रेड्डी एस की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो खेती को सिर्फ पारंपरिक व्यवसाय नहीं बल्कि आधुनिक उद्यम के रूप में देखना चाहते हैं.
33 वर्षीय हरिनाथ रेड्डी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और एक निजी कंपनी में नौकरी भी की. लेकिन परिवार में खेती से जुड़ी समस्याओं, बढ़ती लागत और मिट्टी की खराब होती स्थिति को देखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़कर कृषि की ओर लौटने का फैसला किया. पत्नी की मदद से उन्होंने ‘भूसंकल्प ऑर्गेनिक्स’ नाम से अपना उद्यम शुरू किया और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपने व्यवसाय का आधार बनाया.
KVK से मिली तकनीकी मदद, प्राकृतिक खेती को बनाया आधार
खेती को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने के लिए हरिनाथ रेड्डी ने आईसीएआर-कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), चिंतामणि के वैज्ञानिकों से तकनीकी मार्गदर्शन लिया. इसके अलावा उन्होंने Organic Mandya में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया.
उन्होंने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती (ZBNF) के सिद्धांतों को अपनाने के साथ जीवामृत और घनजीवामृत जैसे जैविक इनपुट का इस्तेमाल शुरू किया. खेती में पानी और मिट्टी के बेहतर प्रबंधन के लिए उन्होंने WAPSA तकनीक को भी अपनाया. इन प्रयासों का उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना, नमी बनाए रखना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना रहा.
4 एकड़ में 30 से अधिक फसलों की खेती
हरिनाथ रेड्डी ने अपने 4 एकड़ खेत को एक विविधीकृत बहुफसली मॉडल के रूप में विकसित किया है. उनके खेत में एक सीजन में 30 से अधिक फसलों की खेती की जाती है.
प्रत्येक एकड़ में करीब 40 बेड तैयार किए गए हैं और तीन स्तरों वाली फसल प्रणाली अपनाई गई है. इसमें मुख्य फसलों के रूप में सब्जियां, किनारों पर जड़ वाली सब्जियां और बीच में पत्तेदार सब्जियों को शामिल किया गया है. इस मॉडल से खेत में फसल विविधता बनी रहती है और किसान को अलग-अलग फसलों से आय प्राप्त करने का अवसर मिलता है.
मिट्टी की सेहत पर विशेष जोर
हरिनाथ रेड्डी के खेती मॉडल की खास बात केवल फसल विविधता नहीं, बल्कि मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन भी है. वे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने, प्राकृतिक पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और जैविक इनपुट के इस्तेमाल पर जोर देते हैं. WAPSA तकनीक के माध्यम से मिट्टी में नमी और वायु संचार को बेहतर बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है. इससे खेती में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और लंबे समय तक मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिल रही है.
खेती से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर फोकस
हरिनाथ रेड्डी ने केवल कच्ची कृषि उपज बेचने के बजाय वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स तैयार करने पर भी ध्यान दिया है. वे मोरिंगा से कई उत्पाद तैयार करते हैं, जिनमें शामिल हैं-
* मोरिंगा लीफ पाउडर
* मोरिंगा टी बैग
* मोरिंगा एनर्जी बार
* मोरिंगा जूस, जो फिलहाल वैलिडेशन प्रक्रिया में है.
इसके अलावा वे वुड-प्रेस्ड मूंगफली तेल, ऑर्गेनिक शहद, मिलेट लड्डू, मोरिंगा पाउडर वाले रोस्टेड ज्वार पॉप्स और ब्लैक राइस जैसे उत्पादों का भी विपणन करते हैं. यानि उनका मॉडल खेती से शुरू होकर प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग तक पहुंचता है.
सोशल मीडिया से सीधे ग्राहकों तक पहुंच
आज के डिजिटल दौर में किसानों के लिए केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि मार्केटिंग भी बेहद महत्वपूर्ण है. हरिनाथ रेड्डी ने इस दिशा में भी पहल की है. वे Instagram, Facebook और WhatsApp जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं. इसके अलावा बागेपल्ली में साप्ताहिक ऑर्गेनिक प्रोड्यूस स्टॉल भी संचालित करते हैं.
वे KVK द्वारा आयोजित प्रदर्शनियों और बेंगलुरु के GKVK में आयोजित रायथा संथे जैसे कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेते हैं. भविष्य में उनका अपना ऑर्गेनिक रिटेल आउटलेट शुरू करने की योजना भी है.
किसानों और ग्रामीण युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण
हरिनाथ रेड्डी ने अपने खेत को सिर्फ उत्पादन का केंद्र नहीं रहने दिया, बल्कि इसे लर्निंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर के रूप में भी विकसित किया है. वे सप्ताहांत में किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं. इस माध्यम से वे खेती में जैविक इनपुट, बहुफसली खेती, वैल्यू एडिशन और उद्यमिता के बारे में जानकारी साझा करते हैं.
इस पहल से उनका अनुभव दूसरे किसानों और युवाओं तक भी पहुंच रहा है.
4 एकड़ से ₹45.28 लाख का सालाना राजस्व
हरिनाथ रेड्डी के खेती और वैल्यू एडिशन मॉडल का आर्थिक पक्ष भी उल्लेखनीय है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उनके 4 एकड़ खेत से सब्जियों के माध्यम से लगभग ₹41.28 लाख की वार्षिक आय होती है. इसके अलावा आम से करीब ₹2 लाख और मोरिंगा उत्पादों से लगभग ₹2 लाख की आय दर्ज की गई है.
इस तरह कुल वार्षिक राजस्व करीब ₹45.28 लाख बताया गया है. खेती से संबंधित कुल वार्षिक खर्च लगभग ₹14.52 लाख है, जिसके बाद करीब ₹30.76 लाख का वार्षिक शुद्ध लाभ बताया गया है. यह आंकड़ा उनके विविधीकृत खेती और वैल्यू एडिशन मॉडल की आर्थिक संभावनाओं को दर्शाता है.
खेती में रोजगार और पोषण सुरक्षा पर भी जोर
हरिनाथ रेड्डी का मॉडल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है. विविध फसलों की खेती से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं. वहीं अलग-अलग प्रकार की सब्जियों और कृषि उत्पादों का उत्पादन पोषण सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. प्राकृतिक इनपुट के इस्तेमाल और मिट्टी की सेहत पर ध्यान देने से खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं.
‘तालुक स्तर के प्रगतिशील किसान’ का सम्मान
प्राकृतिक एवं जैविक खेती में उनके प्रयासों को मान्यता भी मिली है. कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बेंगलुरु (UAS Bengaluru) द्वारा आयोजित कृषि मेला 2025 में उन्हें ‘तालुक स्तर के प्रगतिशील किसान’ के सम्मान से नवाजा गया. यह सम्मान प्राकृतिक खेती, उद्यमिता और किसान-नेतृत्व वाले नवाचार के क्षेत्र में उनके कार्यों को मिली पहचान को दर्शाता है.
युवाओं के लिए खेती को बनाया उद्यम का मॉडल
हरिनाथ रेड्डी की कहानी यह दिखाती है कि आधुनिक कृषि केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है. प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, वैल्यू एडिशन, डिजिटल मार्केटिंग और प्रशिक्षण को एक साथ जोड़कर खेती को व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है.
इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर खेती में आए हरिनाथ रेड्डी ने अपने 4 एकड़ के खेत को एक ऐसे मॉडल में बदलने का प्रयास किया है, जहां मिट्टी की सेहत, किसान की आय और उद्यमिता तीनों पर एक साथ ध्यान दिया जाता है. उनका अनुभव खास तौर पर उन ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो खेती को आधुनिक तकनीक और बिजनेस मॉडल के साथ जोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं. Engineer Turned Farmer





