PMFBY 2026-
खरीफ की फसल किसान के लिए सिर्फ खेती का मौसम नहीं, बल्कि पूरे साल की आय का आधार होती है. लेकिन बारिश की अनिश्चितता, सूखा, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि और कीट-रोग जैसी परिस्थितियां फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं.
ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसान के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बनती है. लेकिन दूसरी तरफ यदि फसल बीमा पोर्टल पर तकनीकी समस्या आ जाए और आवेदन समय पर दर्ज न हो पाए, तो किसान के सामने एक अलग तरह का जोखिम खड़ा हो जाता है.
यही वजह है कि किसान को केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि PMFBY की अंतिम तारीख क्या है. उसे यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका आवेदन वास्तव में सिस्टम में दर्ज हुआ है या नहीं. तारीख बढ़ी, लेकिन क्या किसान का बीमा सच में हो पाया? जानने के लिए पढ़ें यह लेख –
PMFBY की अंतिम तारीख पूरे देश में एक जैसी नहीं
फसल बीमा की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी अंतिम तारीख हर राज्य और फसल के लिए एक जैसी नहीं होती. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित फसल, क्षेत्र और सीजन के अनुसार नामांकन की समय-सीमा निर्धारित की जाती है. उदाहरण के लिए, अगस्त 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए जारी जानकारी में खरीफ 2026 के PMFBY नामांकन की प्रक्रिया और 31 अगस्त 2026 तक प्रीमियम डेबिट की समय-सीमा बताई गई थी. इसलिए किसान को किसी दूसरे राज्य की अंतिम तारीख देखकर अपने राज्य के लिए वही तारीख नहीं माननी चाहिए. अपने जिले की कृषि विभाग की अधिसूचना, बैंक/सहकारी समिति या PMFBY के आधिकारिक पोर्टल से तारीख की पुष्टि करें.
पोर्टल की तकनीकी समस्या किसान के लिए क्यों बड़ी परेशानी है?
फसल बीमा की प्रक्रिया अब काफी हद तक डिजिटल हो चुकी है. किसान, बैंक, सहकारी समिति, CSC, बीमा कंपनी और सरकारी विभाग एक डिजिटल सिस्टम से जुड़े हैं.
ऐसे में अगर-
* राज्य का विकल्प नहीं दिख रहा हो
* अधिसूचित फसल उपलब्ध नहीं हो
* खसरा नंबर fetch नहीं हो रहा हो
* भूमि रिकॉर्ड में समस्या आ रही हो
* आवेदन आगे नहीं बढ़ रहा हो
* भुगतान/प्रीमियम की जानकारी अपडेट न हो रही हो
तो किसान का आवेदन अटक सकता है. PMFBY का आधिकारिक डिजिटल इकोसिस्टम इसी तरह विभिन्न stakeholders को एक प्लेटफॉर्म से जोड़कर प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है.
KCC किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC से जुड़े किसानों के लिए बैंक और वित्तीय संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. इसलिए किसान को केवल यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि बैंक या समिति ने प्रक्रिया पूरी कर दी है. उसे आवेदन और बीमा की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए.
खासकर यदि किसान के खाते से प्रीमियम काटा गया है, तो उसे-
* प्रीमियम कटने का प्रमाण
* आवेदन संख्या
* पॉलिसी/रसीद
* फसल और भूमि का विवरण, सुरक्षित रखना चाहिए.
आवेदन करते समय किसान ये 7 सावधानियां जरूर रखें
1. फसल अधिसूचित है या नहीं जांचें
अपने क्षेत्र और सीजन के लिए कौन-सी फसल PMFBY के तहत अधिसूचित है, पहले इसकी पुष्टि करें.
2. अंतिम तारीख की पुष्टि करें
राज्य, जिला और फसल के अनुसार अंतिम तारीख अलग हो सकती है.
3. भूमि और फसल का विवरण जांचें
खसरा नंबर, भूमि क्षेत्र और फसल का नाम सही दर्ज होना जरूरी है.
4. आवेदन की रसीद लें
आवेदन कराने के बाद उसकी रसीद या एप्लीकेशन नंबर जरूर लें.
5. बैंक खाते की जानकारी जांचें
प्रीमियम कटने और पॉलिसी से संबंधित बैंक रिकॉर्ड संभालकर रखें.
6. पोर्टल की समस्या का स्क्रीनशॉट लें
यदि ऑनलाइन आवेदन नहीं हो रहा है, तो समस्या का स्क्रीनशॉट या फोटो लें. इससे शिकायत करते समय प्रमाण मिल सकता है.
7. समस्या की सूचना तुरंत दें
बैंक,कॉमन सर्विस सेंटर , सहकारी समिति, बीमा कंपनी या संबंधित कृषि अधिकारी को तकनीकी समस्या के बारे में तुरंत बताएं.
फसल नुकसान होने पर किसान क्या करे?
फसल खराब होने के बाद किसान को सबसे पहले नुकसान की सूचना देने की प्रक्रिया समझनी चाहिए. स्थानीयकृत आपदा और कुछ post-harvest नुकसान के मामलों में 72 घंटे के भीतर सूचना देने का प्रावधान है.
किसान को नुकसान की-
* फोटो
* वीडियो
* आवेदन/पॉलिसी विवरण
* सूचना देने का समय
* शिकायत/रिपोर्ट नंबर, जैसी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए.
PMFBY में 2026 का एक महत्वपूर्ण बदलाव: Wild Animal Damage
किसानों के लिए 2026 का एक महत्वपूर्ण अपडेट वन्यजीवों से होने वाले फसल नुकसान से जुड़ा है. केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें wild animal damage को Add-on Cover के रूप में अधिसूचित कर सकती हैं. यह कवरेज राज्य सरकार के खर्च पर और निर्धारित नियमों के अनुसार व्यक्तिगत नुकसान के आकलन के आधार पर दिया जा सकता है. इसलिए जिन इलाकों में नीलगाय, जंगली सूअर या अन्य वन्यजीवों से फसल नुकसान की समस्या है, वहां किसानों को अपने राज्य की PMFBY अधिसूचना जरूर देखनी चाहिए.
PMFBY में कितना प्रीमियम देना पड़ता है?
किसान के लिए अधिकतम प्रीमियम-
खरीफ फसल — 2%
रबी फसल — 1.5%
वाणिज्यिक/बागवानी फसल — 5% हो सकता है. शेष पात्र actuarial premium में सरकारों की हिस्सेदारी रहती है.
PMFBY का कवरेज कितना बड़ा है?
PMFBY की पहुंच पिछले वर्षों में काफी बढ़ी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2016-17 में योजना शुरू होने के बाद दिसंबर 2025 तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदन बीमित किए गए और करीब ₹1.96 लाख करोड़ के दावों का भुगतान किया गया, जिससे लगभग 24.31 करोड़ किसान लाभान्वित हुए. यह आंकड़ा बताता है कि फसल बीमा अब देश के कृषि जोखिम प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.
किसान की सबसे बड़ी सुरक्षा क्या है?
फसल बीमा में किसान की सुरक्षा सिर्फ पॉलिसी लेने से पूरी नहीं होती. तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण हैं- समय पर आवेदन, सही जानकारी और नुकसान की समय पर सूचना. यदि आवेदन समय पर दर्ज नहीं हुआ, फसल/भूमि की जानकारी गलत है या नुकसान की सूचना निर्धारित समय में नहीं दी गई, तो किसान के लिए दावा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
PMFBY का उद्देश्य किसान को प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले फसल नुकसान के आर्थिक प्रभाव से बचाना है. लेकिन डिजिटल व्यवस्था के दौर में किसान के लिए अपनी application status और documents की निगरानी करना भी उतना ही जरूरी हो गया है.
किसान को अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए. बीमा जल्द कराएं, application number और receipt सुरक्षित रखें और पोर्टल पर कोई समस्या आए तो उसका रिकॉर्ड बनाकर तुरंत संबंधित संस्था को सूचित करें.यही छोटी-छोटी सावधानियां मुश्किल समय में किसान के बीमा के हक को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं. PMFBY 2026





