लगातार बढ़ रहे पेस्टीसाइड (Pesticides) के ज्यादा इस्तेमाल से एक ओर जहां खेती की लागत बढ़ रही है, तो वहीं दूसरी ओर उस से भी बढ़ कर सेहत पर बुरा असर भी पड़ रहा है. इस के अलावा एक ही प्रकार के रासायनिक पेस्टीसाइड लगातार इस्तेमाल करने से कीटों में उन के प्रति प्रतिरोधकता भी बन जाती है, जबकि जैविक कीटनाशी के साथ ऐसा नहीं है. इन के इस्तेमाल से उत्पादित कोई भी फसल इनसानों या जानवरों के स्वास्थ पर किसी भी प्रकार का हानिकारक प्रभाव नहीं डालती है.

जैविक कीटनाशी सस्ते होने के साथसाथ घर पर आसानी से तैयार भी किए जा सकते हैं. किसान अपने घरों में नीम की पत्तियों, नीम के फलों, तंबाकू (खैनी) के डंठलों, मिर्च, लहसुन व गोमूत्र वगैरह से कीटनाशी बना सकते हैं.

कैसे बनते हैं ये कीटनाशी

नीम के फलों से कीटनाशी : नीम के फलों से कीटनाशी बनाने के लिए 1 किलोग्राम नीम के सूखे बीजों को पीस कर उस में 20 लीटर पानी मिला दिया जाता है. 10-12 घंटे पानी में भिगोने के बाद घोल को अच्छी तरह मिला कर छान लिया जाता है. छानने के बाद उस में 20 ग्राम कपड़ा धोने वाला साबुन घोल दिया जाता है. इस तरह तैयार घोल का फसलों पर कीटनाशी के तौर पर छिड़काव किया जाता है.

वाइट फ्लाई, फ्रूट बोरर, कई प्रकार की सूडि़यां, सफेद ग्रब, थ्रिप्स, मिली बग व लीफ हापर वगैरह कीट इस कीटनाशी से काबू किए जा सकते हैं.

नीम की पत्ती से कीटनाशी :

नीम की पत्तियों से कीटनाशी बनाने के लिए 5 किलोग्राम नीम की पत्तियों को एक बड़ी बाल्टी में 20 लीटर पानी मिला कर 4 दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है. 5वें दिन पत्तियों को अच्छी तरह से मिला कर छान लिया जाता है. छानने के बाद उस में 20 ग्राम कपड़ा धोने वाला साबुन घोल कर फसलों पर छिड़काव करना चाहिए.

कट वर्म, भुनगा, दीमक, नीबू का लीफ माइनर, अरहर का फलीछेदक, फल मक्खी समेत कई कीटों को इस कीटनाशी से काबू किया जा सकता है.

तंबाकू (खैनी) के डंठलों से कीटनाशी :

तंबाकू की पैदावार कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा व बिहार सूबों में खूब होती है. तंबाकू के डंठलों से भी कीटनाशी बनाया जा सकता है. इस के लिए 1 किलोग्राम तंबाकू के डंठलों का चूर्ण बना लेना चाहिए. इसे 10 लीटर पानी में घोल कर आधे घंटे तक गरम करना चाहिए. ठंडा होने पर 2 ग्राम कपड़े धोने वाला साबुन घोल कर इस में 50 लीटर पानी मिलाएं. तैयार घोल से बतौर कीटनाशी फसलों पर छिड़काव करना चाहिए.

वाइट फ्लाई व फ्रूट बोरर कीटों के सफाए के लिए यह बेहद कारगर कीटनाशी है.

मिर्चलहसुन से कीटनाशी :

इसे बनाने के लिए 3 किलोग्राम हरी मिर्च के डंठल निकाल कर मिर्चों को पीस दिया जाता है. इस मिर्च पेस्ट को 10 लीटर पानी में घोल कर रात भर छोड़ दिया जाता है. सुबह घोल को छान लिया जाता है.

इसी तरह दूसरे बरतन में आधा किलोग्राम लहसुन को पीस कर 250 मिलीलीटर केरोसीन में मिला कर रात भर छोड़ दिया जाता है. इसे भी सुबह छान कर अलग कर लिया जाता है. इस के बाद 75 ग्राम कपड़ा धोने वाले साबुन का घोल बना लिया जाता है. मिर्च, लहसुन व साबुन के घोलों को 80 लीटर पानी में मिला कर विशेष घोल बना लिया जाता है. यह घोल असरदार कीटनाशी होता है.

इस कीटनाशी से फ्रूट बोरर समेत तमाम कीटों का सफाया किया जा सकता है. वे सभी कीट जो नीमयुक्त कीटनाशक से नियंत्रित हो सकते हैं, मिर्चलहसुन वाले कीटनाशी से भी काबू किए जा सकते हैं.

गोमूत्र से कीटनाशी :

गोमूत्र से कीटनाशी बनाने के लिए 5 किलोग्राम ताजे गोबर को 5 लीटर गोमूत्र के साथ मिला कर 5 लीटर पानी में घोला जाता है. घोल को किसी मिट्टी के बरतन में ढक्कन से ढक कर रख दिया जाता है. 4 दिन सड़ने के बाद घोल को अच्छी तरह मिला कर छान लिया जाता है. इस घोल में 100 ग्राम चूना मिला कर 80 लीटर पानी में मिला दिया जाता है. इस प्रकार गोमूत्र वाला कीटनाशी तैयार हो जाता है.

इस कीटनाशी से गेहूं और सब्जियों के तमाम कीटों का सफाया किया जा सकता है. Pesticides

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