Seminar. भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर में अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसान और वैज्ञानिक संगोष्ठी एवं बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन 1 अक्तूबर 2026 को किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर ने की. इस में तकरीबन 200 किसानों ने भाग लिया.

कार्यक्रम में राजस्थान और गुजरात के 9 दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण से लौटे किसानों से उन के अनुभव, सुझाव और फीडबैक भी लिए गए. किसानों ने दोनों राज्यों में कृषि और पशुपालन से जुड़ी नई तकनीकों और गतिविधियों के बारे में अपने अनुभव साझा किए.

बाजार की मांग के अनुसार करें खेती

डा. अरुण कुमार तोमर ने कहा कि किसान नई तकनीक और नवाचार अपना कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. उन्होंने किसानों से भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने और भेड़पालन को बढ़ावा देने की अपील की.

किसान एफपीओ बना कर करें कमाई

किसानों को समूह, किसान उत्पादक संगठन बनाने पर उन्होंने भी जोर दिया. उन का कहना था कि सामूहिक प्रयासों से किसान बीज, उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार तक बेहतर तरीके से पहुंच बना सकते हैं.

उन्होंने किसानों से कहा कि खेती और पशुपालन में केवल उत्पादन पर ध्यान न दें, बल्कि बीज से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया को समझें. बाजार में जिस फसल या उत्पाद की मांग हो, उसी के अनुसार उत्पादन करने से किसानों को बेहतर आमदनी मिल सकती है.

किसानों को मिले उन्नत बीज

कार्यक्रम के दौरान किसानों को चने की जीएनजी-1581 (गणगौर) और जीएनजी-2261 (केशव) किस्मों के बीज वितरित किए गए. इस के अलावा सरसों की रुक्मणी (डीआरएमआर 1165-40), बीपीएम 1825 और बीपीएम 11 किस्मों के साथ सब्जियों के बीज किट भी दिए गए.

पशुपालन में सफाई पर जोर

किसानों और पशुपालकों को स्वच्छता का संदेश दिया गया. किसानों से गांव के दूसरे किसानों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की अपील की गई. उन्हें पशुओं के रहने की जगह को साफ रखने और पीने के पानी को दूषित होने से बचाने की सलाह दी गई.

वैज्ञानिकों ने बताया कि पशुओं के आसपास साफसफाई रखने से कई बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है.

किसान और वैज्ञानिक संगोष्ठी में डा. अजय कुमार, नोडल अधिकारी, अनुसूचित जाति उपयोजना परियोजना, डा. लीलाराम गुर्जर, प्रभारी टीओटीएसएस, डा. राजेश बिश्नोई, प्रभारी एटीक और डा. रंगलाल मीणा ने संस्थान की विभिन्न तकनीकों और उन के उपयोग की जानकारी किसानों को दी.

संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. अरविंद सोनी और तकनीकी कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया. Seminar

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें...