Rabi Crop-

इस बार रबी सीजन की तैयारी अलनीनो के खतरे को देखते हुए की गई है. केंद्र सरकार का कहना है कि चाहे मौसम की मार हो या खाद का संकट, सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है.

दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को भरोसा दिया कि रबी की बोआई के लिए खाद, बीज और पैसे की कोई कमी नहीं होगी.

सरकार है सतर्क

इस बार अलनीनो की आशंका को देखते हुए सरकार अप्रैल महीने से ही तैयारी कर रही है. अभी तक मानसून में 12 फीसदी कम बारिश हुई है. पहले यह कमी 14 फीसदी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों की अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी है. कृषि विज्ञान के हिसाब से 19 फीसदी से ज्यादा कमी होने पर ही इसे गंभीर सूखा माना जाता है, इसलिए अभी घबराने की जरूरत नहीं है.
अलनीनो के बावजूद खरीफ की बोआई पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. कुल बोआई में सिर्फ 1 फीसदी की कमी आई है.

धान का रकबा 16.32 लाख हेक्टेयर घटा है, लेकिन अच्छी बात यह है कि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और अरहर जैसी कम पानी वाली फसलों का रकबा बढ़ा है.

रबी के लिए सरकार की तैयारी

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कहना है कि यह तैयारी अचानक नहीं हुई है. पिछले 2 सप्ताह से राज्य सरकारें जिला स्तर पर तैयारी कर रही थीं. दिल्ली में सभी राज्यों के कृषि सचिव और कृषि उत्पादन आयुक्तों के साथ सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक 10 घंटे लगातार बैठक हुई. उस के बाद सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ मिल कर रबी की राष्ट्रीय योजना को अंतिम रूप दिया गया.

खाद का भरपूर भंडार, नहीं होगी कमी

किसानों के मन में सब से बड़ा सवाल खाद को ले कर है. इस पर सरकार ने बड़ा भरोसा दिया है. दुनिया में उर्वरक की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, लेकिन इस का बोझ किसान पर नहीं पड़ेगा.

राज्यों ने रबी के लिए कुल 380 लाख मीट्रिक टन खाद मांगी है. देश में इस समय 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का स्टौक मौजूद है. पिछले साल इसी समय यह स्टौक सिर्फ 122 लाख टन था. मतलब इस बार 41 लाख टन ज्यादा खाद पहले से तैयार है.

मिट्टी जांच से होगी खाद की बचत

खाद बचाने के लिए सरकार ने नया तरीका भी निकाला है. खरीफ में कुछ जिलों में मिट्टी जांच कर खाद डाली गई तो 27 फीसदी खाद कम लगी और 1,400 करोड़ रुपए की बचत हुई.

‘खेत बचाओ अभियान’ से मिलेगी जानकारी

अब 22 अक्तूबर से 30 नवंबर तक पूरे देश में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलेगा. इस में आईसीएआर के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी सीधे आप के खेत में आ कर बताएंगे कि कितनी खाद डालनी है.

कितना अनाज पैदा होगा

पिछले साल 362.60 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 376.56 मिलियन टन अनाज पैदा हुआ. इस बार अलनीनो को देखते हुए कुल 373.93 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है, जिस में अकेले रबी का लक्ष्य 177.72 मिलियन टन है. जहां पानी कम है, वहां किसानों को दलहन, तिलहन और मोटे अनाज लगाने की सलाह दी जा रही है.

उपज का मिलेगा पूरा दाम

सरकार ने तय किया है कि अगर मंडी में दाल और तेल की कीमत एमएसपी से नीचे गई तो नेफेड और एनसीसीएफ राज्यों का इंतजार किए बिना सीधे खरीद शुरू कर देगी. किसानों को औनेपौने दाम पर फसल नहीं बेचनी पड़ेगी. इस के लिए राज्यों को 7,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि पहले ही दी जा चुकी है.

कुलमिला कर अलनीनो के इस संकट में सरकार की पूरी तैयारी है. खाद से ले कर बीज तक और दाम से ले कर राहत तक, हर मोरचे पर सरकार किसानों के साथ खड़ी है.

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