किसी भी फसल से किसानों को तभी फायदा होगा जब उस का इस्तेमाल लंबे समय तक हो सकेगा. फसल के समय उस की कीमत घट जाती है. ऐसे में अगर किसी फसल का कुछ ऐसा इस्तेमाल हो सके जो बाद में काम दे तो उस की खेती मुनाफा देगी.

गाजर का इस्तेमाल सब्जी से ले कर सलाद और जूस तक में होता है. गाजर के गुणों के चलते ही इस को सब्जी, फल, सलाद, जूस और हलवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

गाजर अकेली ऐसी फसल है जिस का इस्तेमाल कई तरह से हो सकता है. ऐसे में अगर किसान गाजर की खेती करें और गाजर से जुड़े इन कारोबारों को करें तो उन का मुनाफा बढ़ सकता है. गाजर का इस्तेमाल अचार के रूप में खूब किया जा रहा है. इस की वजह से गाजर की खेती बढ़ रही है.

गाजर का अचार भी 2 तरह से बनता है. अगर अचार को लंबे समय तक रखना है तो उस में तेल का इस्तेमाल किया जाता है. जिन लोगों को तेल से दिक्कत होगी है, वे बिना तेल वाला गाजर का अचार खाना ज्यादा पसंद करते हैं.

गुणों से भरपूर गाजर का अचार बिना तेल के भी बनाया व खाया जा सकता है. यह सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता और स्वाद में भी अच्छा लगता है. इस को बनाना बहुत आसान है.

कानपुर की रहने वाली नलिनी शर्मा कहती हैं कि बिना तेल वाले गाजर अचार की डिमांड सब से ज्यादा होती है. कसबों में इसे दुकानों में बेचा जा सकता है.

इस के अलावा हर कसबे में ढाबे और खानेपाने की दुकानें होती हैं. वहां पर भी इस को बेचा जा सकता है. इस तरह गाजर से जुड़े कारोबार को बढ़ावा दिया जा सकता है.

गाजर का अचार बनाने की विधि

गाजर 1 किलोग्राम, छोटी राई 6 चम्मच, लाल मिर्च का पाउडर 3 चम्मच, पिसी हलदी 2 चम्मच, हींग 1 चम्मच, नमक स्वादानुसार, सौंफ 4 चम्मच, गन्ने का सिरका 1 कप.

गाजर को पानी से अच्छे से धो कर छील लें. उस के लंबेलंबे तकरीबन 2 इंच पतलेपतले टुकड़े काट लें.

डेढ़ से 2 घंटे के लिए धूप में सुखाने रखें. अब गैस के ऊपर लोहे का तवा या कड़ाही गरम करने रखें. अब कड़ाही या तवे में छोटी राई और सौंफ डालें, धीमी आंच पर डेढ़ से 2 मिनट भून लें. जब राई चटकने लगे, तब गैस बंद कर दें और तुरंत ही हलदी, लाल मिर्च पाउडर व हींग डाल कर सारी चीजों को अच्छी तरह से मिला लें. इस के बाद ये मसाले मिक्सी में या सिलबट्टे पर पीस लें. अब एक बड़ा कटोरा लें. उस में सारे मसाले, कटी हुई गाजर, नमक और गन्ने का सिरका डालें. इन सारी चीजों को अच्छी तरह से मिला लें.

गाजर का बिना तेल अचार अब तैयार है. नमक थोड़ा तेज ही रखें, इस से अचार खराब नहीं होगा. इस को बेचने के लिए पैकिंग का सहारा लेना पड़ता है. खुले में रखा अचार जल्दी खराब हो सकता है.

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