Rice Planter : बड़े काम का धान रोपने का यंत्र

Rice Planter: आमतौर पर धान की खेती करने के लिए धान पौध की रोपाई परंपरागत तरीकों से की जाती है. हाथ से रोपाई करने का काम बहुत थकाने वाला होता है. धान की रोपाई में कई घंटों तक झुक कर रोपाई करनी होती है, जिस से बहुत परेशानी होती है. दूसरी तरफ आजकल मजदूरों की भी काफी कमी है. इन सब परेशानियों से बचने के लिए अब ज्यादातर किसान धान की रोपाई हाथ की जगह मशीनों से कर रहे हैं.

धान की रोपाई के लिए कई तरह के रोपाई यंत्र बाजार में मौजूद हैं. इन में हाथ से ले कर पैट्रोलडीजल से चलने वाले प्लांटर तक मौजूद हैं, जो 4, 6 और 8 कतारों में धान की रोपाई करते हैं. इन से रोपाई करने पर समय की बचत होती है और लागत भी कम आती है. रोपाई यंत्र एक निश्चित दूरी पर पौधों की रोपाई करता है, जिस से पैदावार अच्छी मिलती है.

धान रोपाई की सेल्फ प्रोपैल्ड

मशीन (चीनी डिजाइन)

आज के समय में किसानों में यह यंत्र खास पसंद किया जा रहा है. यह 8 कतारों में धान की बोआई करता है. यह धान की पौध को उठा कर बोआई करता है. इस में 3 एचपी का डीजल इंजन लगा होता है.

इस से कतार से कतार की दूरी 10-12 सेंटीमीटर रखी जा सकती है. साथ ही, मशीन के हैंडल को दाएंबाएं भी घुमाया जा सकता है व पौध रोपने के लिए यंत्र की गहराई को भी बढ़ायाघटाया जा सकता है.

1 दिन में यह 1 हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई कर सकता है. इस की कीमत करीब 1,25,000 रुपए के आसपास है.

जापानी पैडी प्लांटर

इस जापानी पैडी प्लांटर से मात्र 1 लीटर पैट्रोल से महज डेढ़ घंटे में 1 एकड़ खेत में धान की रोपाई की जा सकेगी. इस मशीन की खासीयत यह है कि अकेला किसान ही इस मशीन को चला सकता है.

मध्य प्रदेश सरकार ने पैडी प्लांटर मशीन के जरीए धान की रोपाई करने को बढ़ावा देने के लिए खास योजना भी बनाई है. मध्य प्रदेश के कृषि विभाग द्वारा इस मशीन का डेमो भी दिया जा रहा है.

मध्य प्रदेश के कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभी पैडी प्लांटर की कीमत 2 लाख, 50 हजार रुपए है. सरकार किसानोें को 1 लाख, 44 हजार रुपए तक की अधिकतम सब्सिडी देगी. किसानों को महज 1 लाख, 06 हजार रुपए ही देने होंगे.

पैडी प्लांटर से संबंधित अधिक जानकारी के लिए कुबोटा स्वप्निल से उन के मोबाइल नंबर पर 08754569228 पर बात कर सकते हैं.

महेंद्रा एंड महेंद्रा का पैडी प्लांटर

कृषि यंत्रों को बनाने वाली इस कंपनी की भी धान रोपाई की स्वचालित मशीन मौजूद है. यह मशीन 1 घंटे में 1 एकड़ खेत में धान की रोपाई करती है, जिस में 2 लीटर पैट्रोल की खपत होती है. इस मशीन को चलाने के लिए 2 व्यक्तियों की जरूरत होती है.

आरसी एग्रो का पैडी प्लांटर

इस कंपनी में काम करने वाले आशीष गुप्ता ने बताया कि उन के पास इस धान रोपाई यंत्र के 2 मौडल मौजूद हैं.

पहला मौडल 6 लाइनों में धान की रोपाई करता है. रोपाई करते समय पौधे से पौधे की दूरी घटाईबढ़ाई जा सकती है, जो अधिकतम 12 इंच तक कर सकते हैं. इस मौडल में 4 स्पीड गियर हैं. इस मशीन में 6.5 हार्सपावर का डीजल इंजन लगा होता है. मशीन से काम करने के लिए 3 लोगों की जरूरत होती है. एक मशीन को चलाता है और उस के सहयोगी रोपाई की देखभाल के लिए साथ रहते हैं. तीनों के लिए प्लांटर पर बैठने की जगह भी होती है. मशीन की कीमत 1 लाख, 60 हजार रुपए से ले कर 1 लाख, 80 हजार रुपए तक है.

दूसरा मौडल 8 लाइनों में रोपाई करता है. इस मौडल में भी पौधे से पौधे की दूरी घटाईबढ़ाई जा सकती है. इस मशीन की कीमत 1 लाख, 85 हजार रुपए है. मशीन में हाइड्रोलिक सिस्टम होने के कारण कीमत में उतारचढ़ाव होता है.

आरसी एग्रो कंपनी पारंपरिक खेती को आधुनिक खेती की ओर अग्रसर करने की दिशा में काम कर रही है. यह कंपनी किसानों के लिए कंबाइन हार्वेस्टर, हैंड हार्वेस्टर व बेलर (बंडल बनाने की मशीन) जैसे कृषि यंत्र बनाती है. अधिक जानकारी के लिए किसान कंपनी के फोन नंबरों 91-7714062177, 2582431 व मोबाइल नंबर 9425513061 पर बात कर सकते हैं या कंपनी के कर्मचारी आशीष गुप्ता से उन के मोबाइल नंबर 09827162692 पर संपर्क कर सकते हैं.

धान (Paddy) की कटाई और भंडारण

दुनिया में भारत धान की पैदावार करने में चीन के बाद दूसरा सब से बड़ा देश है. देश में लगभग 50 फीसदी से ज्यादा  लोग चावल का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन धान की कटाई से ले कर उस का सही ढंग से रखरखाव करने तक लगभग 10 फीसदी धान का नुकसान किसानों को होता है. इस की सब से बड़ी वजह किसानों को सही जानकारी न होना है.

फसल की कटाई और इस के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की जरूरत आज के समय में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है. आमतौर पर देखा जाता है कि कटाई, मड़ाई, सुखाना और फिर फसल को रखने के दौरान नुकसान ज्यादा होता है. इस नुकसान से बचने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाना जरूरी है. इन्हीं कुछ तरीकों के बारे में हम आप को बता रहे हैं, जिस से आप की मेहनत की कमाई बेकार न जाए.

धान की कटाई

धान की कटाई किसान खुद करते हैं या फिर मजदूरी दे कर फसल को कटवाते हैं. इस के अलावा अब कई तरह की मशीनें भी लोगों के पास आ गई हैं, जिन से फसल कटवाना आसान हो गया है. मशीनों से समय भी काफी कम लगता है.  रीपर, कंबाइन व हारवेस्टर आदि ऐसी ही मशीनें हैं. मजदूरों से फसल की कटाई कराने में इसलिए ज्यादा समय लगता है, क्योंकि मजदूर धान की कटाई पारंपरिक तरीके यानी हंसियां से करते हैं. इस में समय ज्यादा लगता है, लेकिन फायदा ज्यादा होता है.

हंसिया से कटाई में फसल का काफी कम नुकसान होता है और धान का पुआल भी किसानों को मिल जाता है, जो पशुओं को खिलाने के काम आता है. इस के अलावा ईंधन और रसायन निर्माण में पुआल का इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही पुआल बेच कर किसान अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं. लेकिन हंसिया से कटाई कराने में काफी समय लगता है, जिस से कटाई का खर्च ज्यादा आता है.

मशीनों में रीपर और ट्रैक्टर चालित कंबाइनर का इस्तेमाल धान की कटाई में किया जाता है. मशीन धान काट कर लाइन में लगा देती है, जिसे बाद में इकट्ठा करने में आसानी रहती है. कंबाइनर से धान की कटाई जमीन से काफी ऊपर से की जाती है और कटाई के साथसाथ मड़ाई और औसाई भी हो जाती है. कटाई की कंबाइनर मशीनें कई तरह की आती हैं, कुछ सस्ती और कुछ महंगी भी. कंबाइनर से धान की कटाई में पुआल का नुकसान होता है और काफी धान टूट भी जाता है.

धान टूटने से किसानों को उस की सही कीमत नहीं मिल पाती, जिस से बाजार कीमत से कम में धान बेचना किसानों की मजबूरी बन जाती है, लेकिन कंबाइनर से कटाई काफी जल्दी होती है, जिस से समय की बचत होती है साथ ही लागत भी कम आती है.

कटाई के समय निम्न बातों का ध्यान रखें :

*             फसल की कटाई उचित नमी और सही समय पर ही करनी चाहिए. धान की कटाई के लिए 20-22 फीसदी नमी सही रहती है. इस से ज्यादा नमी होने पर चावल कम मिलता है और कच्चे, टूटे और कम गुणवत्ता के दाने ज्यादा मात्रा में होते हैं. कम नमी पर कटाई करने से मिलिंग के दौरान धान टूट कर गिरने लगता है.

* फसल की कटाई देर से करने पर फसल जमीन पर गिर सकती है, जिस से चूहों, चिडि़यों और कीटों से फसल को नुकसान हो सकता है.

* यदि खेत में पानी भरा हो तो कटाई से 7-10 दिन पहले पानी निकाल देना चाहिए, जिस से कटाई आसानी से हो सके.

* कटाई के समय धान की सभी बालियों को एक दिशा में रखना चाहिए ताकि मड़ाई में दिक्कत न हो.

* कटाई के बाद धान को बारिश और ओस से बचाना चाहिए.

* धान को कटाई के बाद ज्यादा सुखाने से बचना चाहिए.

* धान की किस्मों के अनुसार कटाई करवानी चाहिए, जैसे अगेती किस्में 110-115 दिनों बाद, मध्यम किस्में 120-130 दिनों बाद और देर से पकने वाली किस्में लगभग 130 दिनों के बाद काटने लायक हो जाती हैं.

Paddyधान की मड़ाई

धान की बालियों यानी पुआल से बीजों को अलग करना मड़ाई कहलाता है. मड़ाई का काम मजदूरों, पशुओं और मशीनों से भी किया जाता है. मड़ाई का काम फसल कटाई के बाद जितनी जल्दी हो सके कर लेना चाहिए. मजदूरों द्वारा मड़ाई लकड़ी या लोहे के पाइप से की जाती है. 2-3 बार लकड़ी या लोहे से कूटने से धान के बीज पौधों से अलग हो जाते हैं. मड़ाई के लिए तारों से बने ड्रम का भी इस्तेमाल होता है. धान के पौधों को ड्रम पर इस तरह रखा जाता है कि बालियां तार को छूती रहें और ड्रम को पैर से घुमाया जाता है.

इस तरीके से मजदूरों की मड़ाई क्षमता बढ़ जाती है. मड़ाई का काम बैलों से भी किया जाता है. धान की बालियों को जमीन पर फैलाया जाता है और इस के ऊपर बैलों को घुमाया जाता है. उन के पैर के दबाव से धान पौधों से अलग हो जाता है.

इस के अलावा थ्रेसर से भी धान की मड़ाई की जाती है. मड़ाई में किसी वजह से देरी हो रही हो, तो धान का बंडल बना कर सूखी और छायादार जगह पर रखना चाहिए.

ओसाई

मड़ाई के बाद धान के बीजों के साथ भूसा, धूल के कण, बदरा और पुआल के टुकड़े रह जाते हैं. इसे हटाने के लिए धान की ओसाई की जाती है. ओसाई का काम उस समय भी किया जाता है, जब हवा चल रही हो. यदि हवा बंद हो जाए, तब 2 लोग चादर को तेजी के साथ झलते हैं, जिस से हवा निकलती है और ओसाई हो जाती है. आजकल बाजार में ओसाई के लिए बिना बिजली के बड़े पंखे आते हैं, जिन्हें हाथों से चलाया जाता है और ओसाई हो जाती है.

धान की सुखाई

धान की कटाई 20-22 फीसदी नमी पर की जाती है, लेकिन इतनी नमी में धान को रखा नहीं जा सकता है और न ही मिलिंग की जा सकती है. इसलिए धान की नमी कम करना बहुत जरूरी है. इस के लिए धान को पहले धूप में रख कर सुखाया जाता है. इस के लिए घर की छतों के फर्श, चटाई, तिरपाल, प्लास्टिक शीट आदि पर फैला कर कई दिनों तक धान के बीजों को सुखाया जाता है. धान को ज्यादा तेज धूप में नहीं सुखाना चाहिए. सुखाने के लिए सीमेंट के फर्श और तिरपाल का इस्तेमाल करना चाहिए.

कटाई के बाद जितनी जल्दी हो सके धान को सुखा लेना जरूरी है.

सुखाते समय धान को पक्षियों, चूहों और कीटपतंगों से बचाना चाहिए, क्योंकि इस से काफी नुकसान हो जाता है.

Paddy

धान का भंडारण

घर में पूरे साल धान मौजूद रहे, इस के लिए जरूरी है कि उसे रखने के लिए घर में अच्छी व्यवस्था हो. भंडारण के पहले धान में नमी की मात्रा देख लेनी चाहिए. यदि आप को अधिक समय के लिए भंडारण करना है, तो नमी की मात्रा 12 फीसदी और कम समय के लिए 14 फीसदी होनी चाहिए.

भंडारण से पहले या बाद में धान का कीटों से बचाव करना भी जरूरी है. भंडारण लिए कई तरह के ड्रम या कोठी इस्तेमाल किए जाते हैं. ये मिट्टी, लकड़ी, बांस, जूट की बोरियों, ईंटों व कपड़े आदि से बनाए जाते हैं, लेकिन इस तकनीक से ज्यादा समय तक भंडारण करना संभव नहीं है, क्योंकि इन में हवा जाने की कोई जगह नहीं होती.

ज्यादा समय तक भंडारण के लिए पूसा कोठी, धात्विक बिन व साइलो आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है. फसल खराब न हो, इस के लिए समयसमय पर ऐसा बंदोबस्त करना चाहिए, जिस से कि हवा जाती रहे वरना धान खराब हो सकता है.

गरमी के मौसम में खेती के काम

गरमी के मौसम में वैसे भी चिलचिलाती धूप होती है. इस के बावजूद भी किसान अपने काम में जुटे रहते हैं. इन दिनों किसानों को मानसून के आने का बेसब्री से इंतजार रहता  है.

यह मौसम धान के लिहाज से खास होता है. देश के एक बड़े हिस्से में धान की खेती की जाती है, इसलिए इस महीने के दूसरे हफ्ते तक धान की नर्सरी डालने का काम निबटाएं.

* धान की नर्सरी डालने के लिए उम्दा किस्म का चयन करें. किस्म का चुनाव अपने क्षेत्र के हिसाब से करें. अच्छे बीज की जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र की मदद ले सकते हैं.

अगर धान की नर्सरी पिछले महीने ही डाल चुके हों, तो उस के पौधे रोपाई लायक होने पर रोपाई का काम खत्म करें. रोपाई 15-20 सैंटीमीटर के फासले पर सीधी लाइन में करें.

धान की रोपाई के लिए पैडी प्लांटर जैसे यंत्र का भी उपयोग कर सकते हैं. यह धान रोपाई का यंत्र लाइन में धान पौध की रोपाई करता है.

इस के अलावा आजकल धान के बीजों को सीधे ही बोया जाता है. इस के लिए ड्रम सीडर यंत्र का इस्तेमाल करना होता है, जिस की अधिकतम कीमत भी नहीं होती. ड्रम सीडर यंत्र से धान बोने से पहले उस को थोड़ा अंकुरित करना होता है, वरना जो कम जोत वाले किसान हैं, वे मजदूरों से रोपाई करा सकते हैं.

मध्यम व देर से पकने वाली धान की किस्में हैं, स्वर्णा, पंत-10, सरजू-52, नरेंद्र- 359, जबकि टा.-3, पूसा बासमती-1, हरियाणा बासमती सुगंधित और पंत संकर धान-1 व नरेंद्र संकर धान-2 प्रमुख संकर किस्में हैं. इस के अलावा अपने क्षेत्र के हिसाब से बीजों का चयन करें.

* समयसमय पर अपने गन्ने के खेतों का मुआयना करें. तीखी धूप से अकसर खेतों का पानी भाप बन कर उड़ जाता है. खेत जरा भी सूखे नजर आएं, तो उन की बाकायदा सिंचाई करें.

गन्ने के खेतों में खरपतवार नजर आएं, तो निराईगुड़ाई कर के उन्हें निकालें, क्योंकि खरपतवारों की वजह से गन्ना ठीक से पनप नहीं पाता.

गन्ने की फसल में किसी रोग या कीड़ों का हमला नजर आए, तो कृषि वैज्ञानिकों को दिखा कर उस की रोकथाम करें.

* मक्का की बोआई भी इस महीने निबटा लें. अगर सिंचाई की सुविधा हो, तो बोआई 15 जून तक कर लेनी चाहिए. संकर मक्का की शक्तिमान-1, एचक्यूपीएम-1, संकुल मक्का की तरुण, नवीन, कंचन, श्वेता और जौनपुरी सफेद व मेरठ पीली देशी प्रजातियां हैं.

* सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए भिंडी की फसल की बोआई के लिए यह उपयुक्त समय है. परभनी क्रांति, आजाद भिंडी, अर्का अनामिका, वर्षा, उपहार, वीआरओ- 5, वीआरओ-6 और आईआईवीआर-10 भिंडी की अच्छी किस्में हैं. इस के अलावा लौकी, खीरा, चिकनी तोरई, आरा तोरई, करेला व टिंडा की बोआई के लिए यह उपयुक्त समय है.

* अरहर की भी बोआई इसी महीने में की जाती है. बोआई से पहले बीजों को कार्बंडाजिम से उपचारित करना न भूलें. उपचारित करने से बीज महफूज रहते हैं और उन का अंकुरण भी ढंग से होता है.

जिस खेत में अरहर बोई गई है, उस में पानी निकास की व्यवस्था हो, वरना खेत में पानी ठहरने पर उस के पौधे खराब हो सकते हैं.

अरहर बोने के लिए 15 से 20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें. बोआई में 50 सैंटीमीटर का फासला रखें और सीधी रेखा में बोआई करें.

Farming* बाजरे की बोआई का इरादा हो और आप के इलाके में बाजरे की खेती होती हो, तो मानसून की पहली बरसात होने के बाद बाजरे की बोआई करें.

बाजरे की बोआई के लिए 5 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें. बाजरे की बोआई सीधी लाइन में 50 सैंटीमीटर का फासला रखते हुए करें.

* अगर ज्वार बोने का मन हो, तो जून के आखिरी हफ्ते में यह काम करें. बोआई के लिए 15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें.

* मूंगफली की बोआई भी जून में निबटा लेना ठीक है. मूंगफली की बोआई के लिए 60-70 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगेंगे.

मूंगफली के बीजों को कार्बंडाजिम से उपचारित कर के बोना चाहिए. बोआई सीधी रेखा में 50 सैंटीमीटर के फासले पर करें.

* जायद में बोई गई उड़द, मूंग की फसल पक चुकी हो, तो उस की कटाई का काम निबटाएं. फसल की कटाई में देरी करना मुनासिब नहीं रहता.

* आजकल सोयाबीन की भी काफी मांग है, इसलिए  अगर आप के इलाके में सोयाबीन की खेती अच्छी होती हो, तो सोयाबीन  की बोआई करें. अपने क्षेत्र के अनुसार कृषि वैज्ञानिक से सोयाबीन की उम्दा किस्मों की जानकारी मिल जाएगी.

सोयाबीन की बोआई के लिए 80 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगेंगे. बोआई सीधी लाइन में 50 सैंटीमीटर के फासले पर करें.

* 15 जून के बाद सूरजमुखी की बोआई की जा सकती है. यह फसल भी काफी फायदे की होती है. लिहाजा, इस की बोआई करने में हर्ज नहीं है. वैसे भी तिलहनी फसलें मुनाफे का सौदा होती हैं.

* जिन किसानों ने कपास लगाई है, वे भी कपास के खेतों का मुआयना करें. अगर खेत सूखे लगें, तो सिंचाई कर दें. अगर पौधों में कीट या रोगों के लक्षण नजर आएं, तो माहिरों से पूछ कर दवा का इस्तेमाल करें.

* इस महीने शरदकालीन बैगन की नर्सरी डालें. बोआई के लिए अच्छी किस्म के बीजों का चुनाव करें.

* अपने लहसुन के खेतों का मुआयना करें. अगर फसल तैयार हो गई हो, तो खुदाई का काम खत्म करें. खुदाई के बाद फसल को 2-3 दिनों तक खेत में ही सूखने दें. चौथे दिन लहसुन की गड्डियां बना कर उन्हें हवादार जगह पर रखें.

* मिर्च के खेतों में भी जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें. पकी मिर्चें तोड़ कर मार्केट में भेजें.

अगली फसल के लिए मिर्च की नर्सरी डालनी है, तो यह काम भी निबटा सकते हैं.

* अदरक व हलदी के खेत सूखे लगें, तो उन की सिंचाई करें. अदरक के खेतों में 50 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालें. इस से फसल बेहतर होगी.

* मोटा अनाज रामदाना की बोआई करनी हो, तो जून के पहले पखवारे तक यह काम जरूर कर लें. इस की बोआई के लिए डेढ़ किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगेंगे.

* पशुओं के चारे के लिहाज से अन्य फसलों की बोआई भी जून महीने में कर देनी चाहिए.

* अपने पशुओं की सेहत का ध्यान रखें. जून की गरमी और लू से अपने पशुओं को बचाने का पूरा बंदोबस्त करें. गरमियों में हरे चारे की भी कमी हो जाती है. दुधारू पशुओं का दूध भी कम हो जाता है, इसलिए उन के खानपान का भी खास खयाल रखें.

* गायभैंसों को दिन में धूप से बचाएं, पर रात के समय उन्हें बाहर बांध सकते हैं. पशुओं को पानी की कमी न होने दें. साथ ही, इन के नहाने का भी खयाल रखें.

* अपने मुरगेमुरगियों को भी लू व गरमी से बचाने का इंतजाम करें. उन के लिए भी पंखे व कूलर लगाएं.

ड्रम सीडर से सीधे बोआई

धान की रोप  में काफी लागत और मजदूरों की कमी के चलते किसानों को तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और फायदा कम ले पाते हैं. लागत कम करने के लिए ड्रम सीडर का प्रयोग काफी उपयोगी है.

प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि धान की सीधी बोआई वाली एक मशीन वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई है, जिसे पैडी ड्रम सीडर कहते हैं.  जो किसान किसी वजह से धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं, वे धान की कम अवधि की प्रजाति की बोआई सीधे ड्रम सीडर से कर सकते हैं. यह बहुत ही सस्ती और आसान तकनीक है. इस की बनावट बिलकुल आसान है.

उन्होंने कहा कि यह मशीन मानवचालित है. 6 किलोग्राम वजन व 170 सैंटीमीटर लंबी यह मशीन है. बीज भरने के लिए 4 से 6 प्लास्टिक के खोखले ड्रम लगे रहते हैं, जो एक बेलन पर बंधे रहते हैं. ड्रम में 2 पंक्तियों पर 9 मिलीमीटर व्यास के छेद बने होते हैं.

Machinesड्रम की एक परिधि में बराबर की दूरी पर कुल 15 छेद होते हैं. 50 फीसदी छेद बंद रहते हैं. बीज का गिराव गुरुत्वाकर्षण के कारण इन्हीं छेदों के द्वारा होता है. बेलन के दोनों किनारों पर  पहिए लगे होते हैं. इन का व्यास 60 सैंटीमीटर होता है, ताकि ड्रम पर्याप्त ऊंचाई पर रहे.

मशीन को खींचने के लिए एक हत्था लगा रहता है. आधे छेद बंद रहने पर मशीन द्वारा सूखा बीज दर 25 से 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है. पूरे छेद खुले होने पर 55 से 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है.

प्रत्येक ड्रम  के लिए अलगअलग ढक्कन बना होता है, जिस में बीज भरा जाता है. मशीन में पूर्व अंकुरित धान का बीज प्रयोग में लाते हैं. बोआई के समय लेव लगे हुए समतल खेत में 2 से 2.5 इंच पानी होना आवश्यक है.

एक दिन में ड्रम सीडर से 1 से 1.40 हेक्टेयर खेत में बोआई की जाती है. ड्रम सीडर की उपयोगिता धान की रोपाई न करने से बढ़ जाती है. इस में नर्सरी तैयार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है. 20 सैंटीमीटर की दूरी पर पंक्तिबद्ध बीज का जमाव होता है, जिस से फसल का विकास अच्छा होता है और निराई व अन्य क्रियाओं में सुगमता होती है. वहीं फसल सुरक्षा पर कम खर्च आता है.

फसल 10 से 15 दिन पहले पक जाती है, जिस से अगली फसल गेहूं की बोआई समय पर संभव होती है और उस का उत्पादन अच्छा मिलता है. पहली सिंचाई 3-4 दिन बाद हलकी व धीरेधीरे शाम के समय करें.

पैडी प्लांटर से धान रोपाई

हाथ से धान की रोपाई करने का काम बहुत थकाने वाला होता है. धान की रोपाई में कई घंटों तक झुक कर रोपाई करनी होती है, जिस से बहुत परेशानी होती है, समय भी बहुत लगता है. अब बहुत से किसान धान की रोपाई हाथ की जगह मशीनों से कर रहे हैं.

धान की रोपाई के लिए बाजार में कई तरह के रोपाई यंत्र मौजूद हैं. इन में हाथ से ले कर पैट्रोलडीजल से चलने वाले प्लांटर तक मौजूद हैं, जो 4, 6 और 8 लाइनों में धान की रोपाई करते हैं. इन से रोपाई करने पर समय की बचत होती है और लागत भी कम आती है. रोपाई यंत्र एक निश्चित दूरी पर पौधों की रोपाई करता है, इस यंत्र से रोपाई करने के लिए नर्सरी को ट्रे में तैयार करना पड़ता है.

सैल्फ प्रोपैल्ड मशीन

आज के समय में किसानों में यह यंत्र खास पसंद किया जा रहा है. यह 8 कतारों में धान की बोआई करता है. धान की पौध को उठा कर यह यंत्र बोआई करता है. इस यंत्र में 3 एचपी का डीजल इंजन लगा होता है.

इस से कतार से कतार की दूरी 10-12 सैंटीमीटर रखी जा सकती है. साथ ही, मशीन के हैंडल को दाएंबाएं भी घुमाया जा सकता है व पौध रोपने के लिए यंत्र की गहराई को भी बढ़ायाघटाया जा सकता है.

एक दिन में यह एक हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई कर सकता है.

जापानी पैडी प्लांटर

इस प्लांटर से महज एक लिटर पैट्रोल से डेढ़ घंटे में तकरीबन एक एकड़ खेत में धान की रोपाई की जा सकेगी. जापानी पैडी प्लांटर की खासीयत यह है कि अकेला किसान ही इस मशीन को चला सकता है. इन कृषि यंत्रों पर सरकार द्वारा अनुदान भी दिया जाता है.

पैडी प्लांटर से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप इस मोबाइल फोन नंबर पर 08754569228 पर बात कर सकते हैं.

महेंद्रा ऐंड महेंद्रा का पैडी प्लांटर

कृषि यंत्रों को बनाने वाली इस कंपनी की भी धान रोपाई की स्वचालत मशीन मौजूद है. यह मशीन एक घंटे में एक एकड़ खेत में धान की रोपाई करती है, जिस में 2 लिटर पैट्रोल की खपत होती है. इस मशीन को चलाने के लिए 2 आदमियों की जरूरत होती है.

आरसी एग्रो का पैडी प्लांटर

इस कंपनी के धान रोपाई यंत्र के 2 मौडल मौजूद हैं. पहला मौडल 6 लाइनों में धान की रोपाई करता है. रोपाई करते समय पौधे से पौधे की दूरी घटाईबढ़ाई जा सकती है, जो अधिकतम 12 इंच तक कर सकते हैं. इस मौडल में 4 स्पीड गियर हैं. इस मशीन में 6.5 हार्सपावर का डीजल इंजन लगा होता है. मशीन से काम करने के लिए 3 लोगों की जरूरत होती है. एक मशीन को चलाता है और उस के सहयोगी रोपाई की देखभाल के लिए साथ रहते हैं. तीनों के लिए प्लांटर पर बैठने की जगह भी होती है. मशीन की कीमत तकरीबन 1 लाख, 60 हजार रुपए से ले कर 1 लाख, 80 हजार रुपए तक है.

दूसरा मौडल 8 लाइनों में रोपाई करता है. इस मौडल में भी पौधे से पौधे की दूरी घटाईबढ़ाई जा सकती है.