Bonsai Trees-

सदाबहार पेड़ :

अनार, आम, अमलताश, आकाश, नीम, बरगद, बाटल ब्रश, कनेर, संतरा, गूलर, पीपल, बरगद, चीकू, जकरेंडा, लीची, चीड़, केशिया, रबर, नीम, नीबू, इमली, जामुन व अंजीर वगैरह.

पतझड़ पेड़:

ओक, बेर, बर्च, देवदार, फर, नाशपाती, अडूसा, आंवला, अमरूद, चाइनीस नारंगी, पलाश, देवदार, चंपा, चैरी, सेमल, चिनार, शमी, सेमल, गुड़हल, बोगनवेलिया व गुलमोहर वगैरह.

पीपल :

पीपल की खासीयत यह है कि ये 24 घंटे आक्सीजन छोड़ता है. यह पेड़ ज्यादातर सार्वजनिक या धार्मिक जगहों पर ही लगाया जाता है. पीपल का पेड़ बहुत विशाल होता है और घर के पास लगाने से यह घर की नींव को नुकसान पहुंचा सकता है, पर इसे बोनसाई के रूप में घर में लगाया जाता है.

बांस :

बांस का पेड़ जमीन के अंदर ही अंदर खुदाई करते हुए बढ़ता है. यह तडि़त विद्युत यंत्र का काम करता है. जहां ये पेड़ लगे होते हैं, वहां आकाशी बिजली गिरने की संभावना कम हो जाती है.

तुलसी :

तुलसी का पौधा लगाने से आसपास का वातावरण कीड़ों रहित हो जाता है.

तुलसी का पौधा औसतन 10 पेड़ों के बराबर आक्सीजन छोड़ता है. इस पौधे का औषधीय महत्त्व भी है. आयुर्वेदिक दवाएं बनाने और खांसीजुकाम के इलाज में इस की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है.

नीम :

इस पेड़ का औषधीय महत्त्व बहुत ज्यादा है. यह आयुर्वेद में करीब 300 दवाएं बनाने के काम में लाया जाता है. इस की लड़की से बने फर्नीचर व दरवाजों में कभी दीमक नहीं लगती. इस की टहनी का इस्तेमाल दांतुन के रूप में किया जाता है. यह अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध कर देता है, इसलिए इसे घर के आसपास लगाना अच्छा माना जाता है.

केला :

केले के पौधे को शादी के मंडप को सजाने के काम में लाते हैं. इस के पत्तों पर भोजन रख कर खाना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है.

गुड़हल :

गुड़हल का पौधा घर में कहीं भी लगाने से पूरा लाभ मिलेगा, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि इसे सही धूप मिले.

हरसिंगार : छोटेछोटे फूलों वाले हरसिंगार के पेड़ से अच्छी खुशबू मिलती है.

बोनसाई के लिए जरूरी बातें

* पेड़ों को पात्रों में सही तरह से लगाना चाहिए.

* पेड़ों को लगाते समय जड़ों के बीच में हवा न रहे, लिहाजा पेड़ को अच्छी तरह से दबा देना चाहिए.

* बोनसाई को खुली हवा में रखें और इस बात का ध्यान रखें कि धूप चारों ओर से लगे.

* बोनसाई को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, लिहाजा उसे रोजाना पानी दें और तब तक दें, जब तक कि पानी पात्र से बहने न लगे.

* बोनसाई को वैसा ही आकार व प्रकार दें, जैसा कि वह कुदरती रूप से होता है.

* तांबे के तारों को कस कर न बांधें वरना पौधों पर तारों के निशान पड़ जाएंगे.

सर्दी के दिनों में बोनसाई की देखरेख :

सर्दी के दिनों में बोनसाई की देखरेख पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि बोनसाई छिछले पात्रों में लगाया जाता है और बड़े पेड़ों की तरह इस की जड़ें जमीन के नीचे दबी नहीं होतीं. जब वातावरण में तापामन बहुत कम हो, तो बोनसाई को अंदर कमरों में रखना चाहिए. अगर अंदर रखना मुमकिन न हो तो, पहले उसे कागज या कपड़े से ढकें फिर ऊपर से पालीथीन से ढक दें. जब तापमान बढ़े तो पालीथीन को हटा दें.

गरमी के दिनों में बोनसाई की देखरेख :

गरमी के दिनों में जब दिन का तापमान बहुत ज्यादा हो, तो बोनसाई को केवल सुबह और शाम की धूप लगने दें और दोपहर के सम उसे छाया में रखें. इन दिनों पानी की जरूरत ज्यादा होती है, इसलिए पौधों में पानी की कमी न होने दें. Bonsai Trees

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