पपीते की खेती (Papaya Farming) सही तरीके से की जाए, तो यह आप के जीवन में मिठास भर सकती है. यह एक ऐसी फसल है, जो कम लागत में अच्छा उत्पादन देती है. पपीते की बाजार में हमेशा अच्छी मांग रहती है. इसे आप सीधे मंडियों में बेच सकते हैं या फिर स्थानीय बाजारों और छोटे दुकानदारों को भी दे सकते हैं. कच्चे पपीते की मांग भी सब्जी के रूप में होती है, जिस से दोहरे लाभ का मौका मिलता है.
पपीता की खेती (Papaya Farming) करना बहुत आसान है और इस का पौधा जल्दी फल देना शुरू कर देता है. इस की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है, चाहे वह कच्चा हो या पका.
पपीता सिर्फ एक फल नहीं है, बल्कि यह गुणों का खजाना है. इस में विटामिन ए और विटामिन सी भरपूर मात्रा में होते हैं, जो आंखों और त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद हैं. इस में एंटीऔक्सीडैंट्स भी होते हैं, जो शरीर को रोगों से लड़ने में मदद करते हैं. पपीते में मौजूद पपेन एंजाइम पाचन क्रिया को सुधारता है.
तो चलिए, आज हम पपीते की खेती से जुड़े हर पहलू को गहराई से सम झते हैं.
उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
पपीता गरम और आर्द्र जलवायु में सब से अच्छा होता है. इसे ज्यादा ठंड और पाले से बचाना जरूरी है. अगर तापमान 10 सैल्सियस से नीचे जाता है, तो पौधों को नुकसान हो सकता है. यह तेज हवाओं को भी सहन नहीं कर पाता, इसलिए ऐसी जगह चुनें, जहां हवा का बहाव कम हो.
जहां तक मिट्टी की बात है, तो पपीता किसी भी अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है. बलुई दोमट मिट्टी इस के लिए सब से उत्तम मानी जाती है. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि इस से पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं. मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए.
खेत की तैयारी
पपीते की रोपाई से पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई कर लें. मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए 2 से 3 बार हल चलाएं. खेत में जल निकासी की सही व्यवस्था करें. इस के लिए मेंड़ और नालियां बनाना सब से अच्छा रहता है. नालियों की मदद से पानी आसानी से बाहर निकल जाएगा और पौधों को नुकसान नहीं होगा.
उन्नत किस्में
सही किस्म का चुनाव करना बहुत जरूरी है, क्योंकि यही आप के मुनाफे को तय करेगा. पपीते की कुछ प्रमुख किस्में इस प्रकार हैं :
पूसा ड्वार्फ : यह एक बौनी किस्म है, जिस के पौधे छोटे होते हैं, इसलिए इसे घनी रोपाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
पूसा नन्हा : यह भी एक बौनी किस्म है, जो गमलों या घर के बगीचों के लिए बहुत अच्छी है.
पूसा जाइंट : यह एक बड़ी किस्म है, जिस के फल बहुत बड़े होते हैं.
कूर्ग हनीड्यू : यह एक लोकप्रिय किस्म है, जिस के फल मीठे और स्वाद से भरपूर होते हैं.
रैड लेडी : यह ताइवान की एक हाईब्रिड किस्म है, जिस के फल लाल रंग के और बहुत मीठे होते हैं. इस की मांग बाजार में बहुत ज्यादा है.
रोपाई का तरीका और समय : पपीते के बीज से पहले नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं. 30-45 दिन पुराने, स्वस्थ पौधों को खेत में रोपना चाहिए. रोपाई का सब से अच्छा समय जुलाईसितंबर और फरवरीमार्च का महीना होता है.
पपीते के पौधों को 1.8 मीटर × 1.8 मीटर की दूरी पर लगाएं. एक गढ्डे में 2 से 3 पौधे लगाएं. बाद में, जब पौधे बड़े हो जाएं, तो सब से स्वस्थ पौधे को छोड़ कर बाकी पौधे हटा दें.
खाद और उर्वरक
अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर सही खाद देना बहुत जरूरी है. खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 10 टन गोबर की खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला लें.
रासायनिक उर्वरकों के लिए प्रति पौधे के हिसाब से 250 ग्राम यूरिया, 250 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 250 ग्राम पोटाश का प्रयोग करें. इसे 6 बराबर भागों में बांट कर हर 2 महीने पर दें.
सिंचाई
पपीता पानी के प्रति बहुत संवेदनशील होता है. ज्यादा पानी से जड़ें सड़ जाती हैं और कम पानी से फल छोटे रह जाते हैं. गरमियों में 8-10 दिन के अंतराल पर और सर्दियों में 15-20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें. ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) सब से अच्छा तरीका है, क्योंकि इस से पानी की बचत होती है और पौधों को जरूरत के अनुसार पानी मिलता है.
कीट और रोग
पपीते में ये कुछ प्रमुख रोग और कीट लगते हैं, जिन से बचाव करना जरूरी है :
पत्ती मुड़ना : यह एक वायरस रोग है, जिस से पत्तियां मुड़ जाती हैं. इस का कोई इलाज नहीं है. इस से बचाव के लिए सफेद मक्खी को नियंत्रित करना जरूरी है, क्योंकि यही इस रोग को फैलाती है.
तना सड़न : ज्यादा पानी से यह रोग होता है. इस से बचने के लिए पौधों के पास पानी जमा न होने दें.
मिली बग : यह एक छोटा कीट है, जो पौधों का रस चूसता है. नीम तेल का स्प्रे करने से इसे नियंत्रित किया जा सकता है.
कटाई
पपीते के पौधे 9 से 12 महीने में फल देना शुरू कर देते हैं. जब फल का रंग हलका पीला होने लगे, तो उसे तोड़ लेना चाहिए. फल को सावधानी से तोड़ना चाहिए, ताकि वह चोटिल न हो. एक स्वस्थ पौधा एक साल में 20 से 40 किलो तक फल दे सकता है.
जरूरी सु झाव
* अपने खेत में सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप का उपयोग करें, यह सिंचाई के खर्च को कम करेगा.
* खेत में सहफसलीकरण करें. पपीते के पौधों के बीच धनिया, मेथी या फूलगोभी जैसी छोटी फसलें उगा कर अतिरिक्त कमाई की जा सकती है.
* सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं, जो बागबानी फसलों के लिए उपलब्ध हैं.





