ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का जैसी मोटे अनाज की फसलें आज किसानों को दे रही हैं मोटा मुनाफा, क्योंकि अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इनकी पहचान न्यूट्री-स्मार्ट फूड के तौर पर हो रही है. Nutri Smart Food
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना बना रही आत्मनिर्भर
आज दुनिया-भर के लोग अच्छी सेहत के लिए मिलेट्स यानी मोटे अनाज को अपने भोजन में शामिल कर रहे हैं. जिसके तहत आज मोटे अनाज की प्रोसेसिंग कर अनेक पौष्टिक उत्पाद बनाए जा रहे हैं.
हाल ही में राजस्थान के उदयपुर जिले के डबोक गांव में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत मेवाड़ क्षेत्र की परंपरागत फसलों के प्रसंस्करणों का उत्कृष्टता केंद्र के तहत पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘मेवाड़ क्षेत्र की परंपरागत फसलों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया. Nutri Smart Food
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण युवाओं और नवोद्यमियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध परंपरागत फसलों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना रहा.
‘न्यूट्री-स्मार्ट फूड’ के रूप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान
राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का जैसी मोटे अनाज की फसलें परंपरागत रूप से उगाई जाती रही हैं, किंतु लंबे समय तक इनके सीमित उपयोग के कारण किसानों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा था, लेकिन अब वर्तमान समय में मोटे अनाज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘न्यूट्री-स्मार्ट फूड’ के रूप में पहचान मिलने से इनके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की अपार संभावनाएं उभरकर सामने आ रही हैं. यह बात परियोजना प्रभारी डॉ. कमला महाजनी ने कही.
मोटे अनाज कैसे हैं लाभकारी
मोटे अनाज, हल्दी और अदरक के पोषणात्मक, औषधीय व स्वास्थ्य संबंधी लाभों पर विस्तार से व्याख्यान योगिता पालीवाल द्वारा दिया गया. उन्होंने बताया कि मोटे अनाज फाइबर, आयरन, कैल्शियम और सूक्ष्म पोषक तत्त्वों से भरपूर होते हैं, जो मधुमेह, हृदय रोग और कुपोषण जैसी समस्याओं के समाधान में सहायक हैं. साथ ही, हल्दी और अदरक के प्राकृतिक औषधीय गुणों, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उनकी भूमिका और घरेलू व औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं पर जानकारी दी.
मोटे अनाज के उत्पादों का है बड़ा बाजार
अंकिता पालीवाल ने मोटे अनाज की बढ़ती राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार मांग, उपभोक्ता रुझानों और मूल्य संवर्धन से मिलने वाले अतिरिक्त आर्थिक लाभों की जानकारी दी. प्रतिभागियों को मोटे अनाज आधारित विभिन्न नवाचारात्मक उत्पादों जैसे मल्टीग्रेन आटा मिश्रण, चकली, लड्डू, कुकीज, चॉकलेट, रेडी-टू-कुक मिक्स और रेडी-टू-ईट उत्पादों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई और बताया कि आज मोटे अनाज की प्रोसेसिंग कर इसके अनेक पौष्टिक उत्पाद तैयार हो रहे हैं, जिनकी बड़े पैमाने पर बाजार में मांग है.
इसके साथ-साथ नेहा शेखावत ने उत्पादों की गुणवत्ता, मानकीकरण, लेबलिंग और पैकेजिंग के महत्त्व पर भी चर्चा की गई जो मार्केटिंग बढ़ाने का बड़ा पहलू है.
प्रोसेसिंग तकनीक की मिली जानकारी
5 दिन के प्रशिक्षण आयोजन में प्रतिभागियों को मोटे अनाज, हल्दी और अदरक के प्रसंस्करण की आधुनिक व पारंपरिक तकनीकों से रूबरू कराया गया और हल्दी व अदरक की सफाई, उबालना, ब्लांचिंग, सुखाना, पिसाई, छानना, पैकेजिंग और भंडारण की वैज्ञानिक विधियों के बारे में बताया गया.
इसके अतिरिक्त, मोटे अनाज से बेकरी उत्पाद और पारंपरिक उत्पाद तैयार करने की प्रक्रियाओं का भी चरणबद्ध अभ्यास कराया गया, जिससे प्रतिभागियों को लघु उद्योग स्तर पर उत्पादन कैसे किया जाए, इसकी जानकारी भी मिली.
सरकारी योजनाओं का कैसे लें लाभ
कार्यक्रम के अंतर्गत सरकारी योजनाओं, उद्यमिता विकास और वित्तीय सहायता पर केंद्रित विशेष सत्रों का आयोजन किया गया. इन सत्रों में प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, अनुदान, सब्सिडी, बैंक ऋण, Nutri Smart Food स्वयं सहायता समूह आधारित उद्यम, स्टार्ट-अप योजनाओं और विपणन सहायता के बारे में नेहा शेखावत द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई.
विशेषज्ञों ने यह भी समझाया कि किस प्रकार सीमित पूंजी में छोटे स्तर की प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कर किसान और महिलाएं स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं.
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें उन्होंने अपनी जिज्ञासाएं और व्यावहारिक समस्याएं साझा कीं.
अंकिता पालीवाल द्वारा उनके प्रश्नों का समाधान कर उन्हें व्यावसायिक योजना निर्माण, लागत-लाभ विश्लेषण और बाजार से जुड़ने के व्यावहारिक सुझाव दिए गए. Nutri Smart Food
27 से 31 जनवरी, 2026 तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को न केवल तकनीकी ज्ञान और कौशल प्रदान किया, बल्कि स्थानीय परंपरागत फसलों के माध्यम से सतत आजीविका सृजन, ग्रामीण रोजगार व उद्यमिता विकास के प्रति जागरूक भी किया. ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अत्यंत महत्त्वपूर्ण साबित होते हैं.





