Camel Milk-

रेगिस्तान का यह सफेद सोना अब गांव की बाउंड्री पार कर चुका है. जो दूध कभी सिर्फ राजस्थान के धोरों में मिलता था, आज उस की डिमांड शहरों तक पहुंच गई है.

आखिर क्यों खास है ऊंटनी का दूध?

इस का स्वाद गायभैंस से एकदम अलग है. हलका नमकीन, ज्यादा क्रीमी. इस में प्रोटीन, हैल्दी फैट और कैल्शियम भरपूर है. लोग इसे अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक अलग और प्रीमियम डेयरी चौइस के तौर पर देख रहे हैं.

दूध की प्रोसैसिंग में मुनाफा

ऊंटनी कम दूध देती है और दूध जल्दी खराब होता है. अगर आप सिर्फ कच्चा दूध बेचेंगे तो मुनाफा कम, इसलिए दूध से ऐसी चीज बनाओ जो 2 दिन नहीं, 2 महीने चले और 100 रुपए लीटर वाला दूध 500 रुपए किलो वाला प्रोडक्ट बन जाए, इसलिए दूध की प्रोसैसिंग कर अधिक मुनाफा कमाएं.

ऊंटनी के दूध से क्याक्या बन सकता है?

आइसक्रीम : ऊंटनी के दूध की आइसक्रीम एक लग्जरी प्रोडक्ट है. जैसलमेर के टूरिस्ट से ले कर दिल्ली के हाईएंड पार्लर तक, लोग नया टेस्ट ट्राई करने के लिए ज्यादा पैसा देने को तैयार हैं.

चौकलेट : दुबई में कैमल मिल्क चौकलेट काफी पसंद की जाती है. यहां भी इस तरह की शुरुआत कर के छोटेछोटे आइटम बनाए जा सकते हैं.

मिल्क पाउडर : ताजा दूध को एक जगह से दूसरी जगह भेजना कठिन है, क्योंकि दूध खराब हो जाएगा , लेकिन मिल्क पाउडर को आप कहीं भी, कभी भी लेकर जा सकते हैं. इस की लाइफ महीनों की हो जाती है. हां, इस के लिए घर की मशीन नहीं, छोटी इंडस्ट्रियल यूनिट और एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसैंस जरूरी है.

पैसा कहां से आएगा? हिसाब समझिए

मान लीजिए आप रोज 20 लीटर दूध 80 रुपए लीटर बेचते हैं = 1,600 रुपए.

वही 20 लीटर अगर आप आइसक्रीम में बदलते हैं तो करीब 200 कप आइसक्रीम बनेगी. एक कप 40 रुपए में भी बिका तो = 8,000 रुपए. दूध से पाउडर और चौकलेट का हिसाब इस से भी बड़ा है.

शुरुआत कैसे करें?

-सीधे बड़ा प्लांट मत लगाइए. पहले 2 प्रोडक्ट से शुरू करिए, जैसे फ्लेवर्ड मिल्क और आइसक्रीम.

-दूध को तुरंत ठंडा करने के लिए छोटा बल्क कूलर जरूरी है.

-लोकल एफएसएसएआई (FSSAI) जैसी संस्थाओं से ट्रेनिंग और लाइसैंस की जानकारी ले लीजिए.

ऊंट पालना अब सिर्फ परंपरा नहीं रहा, सही प्रोसैसिंग के साथ यह रेगिस्तान का स्टार्टअप बन सकता है. Camel Milk

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