कृषि छात्रों को प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की पढ़ाई का मिलेगा मौका, मिट्टी की सेहत, जैविक खाद, फसल उत्पादन और बाजार से जुड़ी जानकारी पर रहेगा जोर.
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अब कृषि की पढ़ाई में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है.
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) प्राकृतिक खेती में एमएससी और पीएचडी के अलग पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए कृषि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और उद्योग से जुड़े लोगों से सुझाव मांगे गए हैं.
आईसीएआर ने अक्तूबर 2026 की शुरुआत में नई दिल्ली में इस विषय पर बैठक की. बैठक की अध्यक्षता कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डा. एमएल जाट ने की. उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए, जिस से छात्रों को खेती की व्यावहारिक जानकारी मिले और वे किसानों की जरूरतों को समझ सकें.
पढ़ाई में क्याक्या सिखाया जाएगा
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में प्राकृतिक खेती के तरीकों, मिट्टी की सेहत सुधारने, जैविक खाद और खेती में इस्तेमाल होने वाली दूसरी प्राकृतिक सामग्रियों की जानकारी दी जा सकती है. इसके साथ ही फसलों के उत्पादन, उपज की गुणवत्ता, प्रमाणन, बाजार और डिजिटल तकनीक जैसे विषय भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है.
पाठ्यक्रम में प्राकृतिक खेती और जैविक खेती के बीच का अंतर भी समझाया जाएगा, ताकि छात्र दोनों तरीकों को सही ढंग से जान सकें. इस के अलावा खेती से जुड़े कारोबार, उपज की बिक्री और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ काम करने की जानकारी देने पर भी जोर है.
छात्रों के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
प्राकृतिक खेती में एमएससी और पीएचडी शुरू होने से कृषि छात्रों को इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का मौका मिल सकता है. पढ़ाई पूरी करने के बाद वे किसानों को प्राकृतिक खेती की जानकारी देने, खेती से जुड़े शोध करने, उपज के प्रमाणन और बाजार तक पहुंच बनाने जैसे काम कर सकेंगे.
इस से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं के लिए प्रशिक्षित लोगों की जरूरत भी पूरी करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, रोजगार के अवसर इस क्षेत्र में आगे होने वाली भरतियों और बाजार की मांग पर निर्भर करेंगे.
गुजरात के विश्वविद्यालय को मिली जिम्मेदारी
प्राकृतिक खेती के नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी गुजरात प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय को दी गई है. विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सीके टिंबाडिया इस काम से जुड़ी समिति के अध्यक्ष हैं. बैठक में प्रस्तावित पाठ्यक्रम पर चर्चा हुई और विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए.
आईसीएआर के मुताबिक, इन सुझावों के आधार पर पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि इस की पढ़ाई किस शैक्षणिक सत्र से शुरू होगी और पहले चरण में किन कृषि विश्वविद्यालयों में इसे लागू किया जाएगा.
प्राकृतिक खेती में उच्च शिक्षा शुरू होने से इस क्षेत्र में पढ़ाई और शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इस से किसानों को प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद मिल सकती है और कृषि छात्रों के लिए भी एक नया क्षेत्र खुल सकता है. Natural Farming





