खेती के साथ गौपालन: आत्‍मनिर्भर बने किसान निर्मल

नीमच: आचार्य विद्या सागर गौसंवर्धन योजना का लाभ ले कर उन्‍नत नस्‍ल का गौपालन कर किसान एवं पशुपालक निर्मल पाटीदार एक समृद्ध पशुपालक बन गए हैं. इस योजना ने उन का जीवनस्‍तर काफी बदल दिया है. वे अब प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं.

परंपरागत रूप से खेती करने वाले नीमच जिले की मनासा जनपद के ग्राम चुकनी निवासी निर्मल पाटीदार पहले कृषि‍ कार्य से बमुश्किल अपने परिवार का खर्च चला पाते थे. वर्ष 2005 में निर्मल के पिता रतनलाल पाटीदार की एक प्रगतिशील पशुपालक से मुलाकात हुई और उन से प्रेरित हो कर रतनलाल ने बैंक ऋण ले कर 2 संकर नस्‍ल की गाएं खरीदीं, जिस से उन्‍हें 300 रुपए रोज की आमदनी होने लगी. अपने पिता रतनलाल पाटीदार के पशुपालन कार्य में निर्मल ने भी हाथ बंटाना प्रारंभ किया.

निर्मल कुमार ने वर्ष 2017-18 में पशुपालन अधिकारी डा. राजेश पाटीदार से मार्गदर्शन प्राप्‍त कर आचार्य विद्या सागर गौसंवर्धन योजना के तहत 10 क्रासब्रीड गायों को पालने के लिए ऋण लिया और राजस्‍थान से गाएं खरीद कर, पशुपालन कार्य करने लगे.

पशुपालक निर्मल पाटीदार कहते हैं कि वर्ष 2018 से उनके पास उन्‍नत नस्‍ल की 10 गाएं हो गई हैं. इस से उन्‍हें 900 रुपए प्रतिदिन आय होने लगी और जीवनयापन में सुधार होने लगा. वर्ष 2020-21 में उन्होंने 30 लिटर सुबह व 40 लिटर दूध शाम को कुल 70 लिटर दूध प्रतिदिन सांची दुग्‍ध संघ की डेयरी पर बिक्री किया, जिस से उन्‍हें 1500 रुपए रोजाना की आय हुई. इस प्रकार मासिक रुपए 45,000 और साढ़े 4 लाख से 5 लाख रुपए तक की सालाना आय हुई.

पशुपालन से अरिरिक्‍त (दूध व गोबर की खाद) की आय से वर्ष 2019 में निर्मल ने ट्रैक्टर खरीदा, जिस की किस्त भी दूध बेच कर होने वाली आय से चुका रहे हैं. वर्ष 2021 में पशुओं के लिए 1600 वर्ग फीट का शेड, जिस में फर्श सीसी का बनवाया है. इस शेड में पशुओं के लिए पंखे लगे हैं. चारे की कुट्टी बनाने के लिए विद्युतचलित चैफ कटर लगा लिया है.

इसी तरह आचार्य विद्या सागर गौसंवर्धन योजना का लाभ ले कर उन्‍नत नस्‍ल का गौपालन कर किसान एवं पशुपालक निर्मल पाटीदार एक समृद्ध पशुपालक बन गए हैं और अब वे प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं.

योजना का लाभ ले कर अजहरूद्दीन ने बकरीपालन को बनाया रोजगार

मंदसौर : जिले के तहसील सुवासरा गांव किशोरपुरा के रहने वाले अजहरूद्दीन मोहम्‍मद हुसैन मध्‍यमवर्गीय पशुपालक हैं. उन के परिवार की माली स्थिति ठीक नहीं होने के कारण इन्‍होंने खुद का व्‍यवसाय करने की सोची और उन्होंने पशुपालन विभाग से जानकारी ली.

अजहरूद्दीन को पशुपालक विभाग से बकरीपालन योजना की जानकारी मिली और इन्‍होंने खुद का बकरीपालन व्‍यवसाय शुरू किया. अजहरूद्दीन ने बकरीपालन योजना के अंतर्गत देशी नस्‍ल की 10 बकरी और एक बकरे को 77,456 रुपए में खरीदा. अजहरूद्दीन को बकरीपालन योजना में खुद का व्‍यवसाय करने के लिए पशुपालन विभाग से 30,982 रुपए का अनुदान मिला. बकरीपालन व्‍यवसाय करने के बाद हर महीने के 8,000 रुपए से अधिक कमा रहे हैं और अब वे अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं.

भेड़ बकरियों के लिए टीकाकरण

जयपुर:निदेशक पशुपालन डॉ भवानी सिंह राठौड़ ने शुक्रवार को जयपुर जिले के दादिया पट्टी गांव में भेड़ बकरियों में पीपीआर रोग से बचाव के लिए पीपीआर रोग उन्मूलन टीकाकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया.

इस अवसर पर डॉ राठौड़ ने कहा कि पीपीआर विषाणुजनित एक खतरनाक बीमारी है, जो प्रायः भेड़ और बकरियों में पाई जाती है. यह इतनी खतरनाक बीमारी है कि संक्रमण के एक सप्ताह के भीतर पशु की मौत हो जाती है. इस बीमारी का संक्रमण होने पर पशुओं को तेज बुखार, आंख – नाक से पानी की तरह स्राव और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है. इस तरह के लक्षण दिखाई पड़ते ही पशुओं को तुरंत पशु चिकित्सक को दिखाना चाहिए. उन्होंने पशुपालकों से कहा कि टीकाकरण इसकी रोकथाम का प्रमुख उपाय है. इसलिए अपने अपने पशुओं को पीपीआर का टीका जरूर लगवाएं.

आज विश्व पशु कल्याण दिवस के अवसर पर निदेशक पशुपालन ने सभी ग्रामवासियों, पशुपालकों तथा पशुपालन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को जीव जंतुओं की रक्षा करने और प्रेम करुणा का भाव रखने की शपथ भी दिलाई.

कार्यक्रम में विभाग के डॉ दिनेश राणा अतिरिक्त निदेशक जयपुर, डॉ हनुमान सहाय जिला संयुक्त निदेशक जयपुर, डॉ तपेश माथुर संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य एवं प्रयोगशाला, डॉ राजेश साहनी उपनिदेशक, डॉ दल सिंह मीणा, डॉ रमेश शर्मा, डॉ विनय चौधरी, श्री हनुमान सहाय मीना सरपंच धमस्या, पंचायत समिति आंधी तथा बड़ी संख्या में ग्राम वासी उपस्थित थे.

मोबाइल वेटरिनरी यूनिट को देश में मॉडल बनाएं

जयपुर: शासन सचिव, पशुपालन डॉ. समित शर्मा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में शासन सचिव ने विभाग के सभी अधिकारियों तथा जिलों में स्थित सभी अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर आवश्यक दिशा—निर्देश प्रदान किए.

उन्होंने दवाईयों की आपूर्ति और उपलब्धता को विभाग की पहली प्राथमिकता बताते हुए कहा कि प्रत्येक पशु चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक दवाईयों और सर्जिकल आइटम्स की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित होनी चाहिए. कोई भी पशुपालक हमारे संस्थानों से खाली हाथ नहीं लौटना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें हमारे संस्थानों में जो भी उपलब्ध संसाधन हैं उनसे पशुपालकों को सर्वश्रेष्ठ सेवा देनी है.

टीकाकरण के काम में तेजी लाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में टीकाकरण की जो स्थिति है उसका कोई औचित्य नहीं है. केवल टीकाकरण करा देना ही काफी नहीं है संबंधित ऐप पर उसका इंद्राज होना भी बहुत आवश्यक है. उन्होंने निर्देश दिया कि आने वाले पंद्रह दिनों में टीकाकरण की स्थिति साफ हो जानी चाहिए.

पॉलीक्लिनिक पर उपलब्ध उपकरणों के रखरखाव और उसके उपयोग पर चर्चा करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि कई स्थानों पर हमारे उपकरण काम में नहीं लिए जा रहे हैं ऐसी स्थिति ठीक नहीं है. उन्होंने संस्थानों में खराब पड़े उपकरणों को ठीक कराने की व्यवस्था कर उन्हें काम में लेना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

उन्होंने कहा कि कम पैसे में हमारे संस्थानों को बेहतर बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए.
शासन सचिव ने कहा कि मोबाइल वेटरनरी यूनिट भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है 2 अक्टूबर से इसका हेल्पलाइन नंबर प्रायोगिक रूप से काम कर रहा है. पशुपालन मंत्री, श्री जोराराम कुमावत 9 अक्टूबर को इसका विधिवत शुभारंभ करेंगे. इसका लाभ अधिकतम पशुपालकों और पशुओं को मिले इसके लिए पूरी निष्पक्षता, ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करना होगा. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर भी एक छोटा आयोजन कर इसका प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए जिससे अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच सके.

उन्होंने कहा कि मोबाइल वेटरनरी यूनिट केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का भी प्रचार प्रसार करेगी. डॉ. शर्मा ने मोबाइल वेटरनरी यूनिट की क्रियान्विति इस तरीके से करने के निर्देश दिए जिससे यह देश में मॉडल के रूप में उभर सके.

डॉ. शर्मा ने जिलों में पशु चिकित्सा संस्थानों की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए निर्देश देते हुए कहा कि जिला कलक्टर्स के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान निकाला जाए. पशु चिकित्सा संस्थानों की जगह पर किसी का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए. पशुपालन सम्मान समारोह के लिए सभी जिलों से प्रगतिशील किसानों के नाम जल्द से जल्द मंगाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने सभी अधिकारियों को समयबद्धता, निष्पक्षता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से काम करने के निर्देश दिए.

बैठक में निदेशक पशुपालन डॉ. भवानी सिंह राठौड़ सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.

बजट घोषणाओं (Budget Announcements) को समय पर पूरा करें

जयपुर : डेयरी एवं पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि बजट घोषणा में लिए गए निर्णयों की क्रियान्विति समय पर सुनिश्चित की जाए. वह राजस्थान कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन के साथ डेयरी की बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि डेयरी उत्पादों में मिलावटखोरी और अनियमितता को किसी भी सूरत में बरदाश्त नहीं किया जाएगा और जो कोई भी उस में लिप्त पाया जाता है, उस के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाए.

उन्होंने डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले में गुणवत्ता नियंत्रण वाहन शुरू करने के निर्देश दिए. उन्होंने दुग्ध उत्पादक संबल योजना के तहत शेष रहे अनुदान की राशि का भी जल्द से जल्द हस्तांतरित करने के निर्देश दिए.

उल्लेखनीय है कि बजट घोषणा के अनुसार राज्य में 2,000 डेयरी बूथ और 1,500 दुग्ध सहकारी समितियां खोली जानी हैं. इस के अलावा 1,000 सरस मित्र बनाने का निर्णय भी बजट घोषणा में लिया गया है. उन्होंने इन सभी घोषणाओं को जल्द से जल्द क्रियान्विति में बदलने के निर्देश अधिकारियों को दिए.

मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि चित्तौड़, कोट और रानीवाड़ा सहित कुछ डेयरी प्लांट्स अपग्रेड किए जाने हैं, वहीं पाली में 95 करोड़ का पाउडर प्लांट खोला जाना है. पाली में पाउडर प्लांट खोलने के लिए जमीन की पहचान कर ली गई है. जल्द ही इस पर काम भी शुरू हो जाएगा.

बैठक में आरसीडीएफ की प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज, जयपुर डेयरी के प्रबंध निदेशक दिव्यम कपूरिया, आरसीडीएफ के वित्तीय सलाहकार ललित वर्मा और प्रबंधक संतोष कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया.

मत्स्यपालन विभाग में विशेष अभियान

नई दिल्ली : मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्यपालन विभाग प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) की पहल विशेष अभियान 4.0 की तैयारियों में है. 2 अक्तूबर से 31 अक्तूबर, 2024 तक चलाए जाने वाले इस अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत बनाना और सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों में कमी लाना है. विशेष अभियान 4.0 को 2 चरणों में चलाया जाएगा, जिन में 16 सितंबर से 30 सितंबर, 2024 तक प्रारंभिक चरण और 2 अक्तूबर से 31 अक्तूबर, 2024 तक कार्यान्वयन चरण शामिल है.

मत्स्यपालन विभाग स्वच्छता को बढ़ावा देने, लंबित संदर्भों के निबटान में तेजी लाने और अभिलेखों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित बनाने से संबंधित इस राष्ट्रव्यापी पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. यह अभियान कार्यालय में जगह के बेहतर प्रबंधन और परिचालन दक्षता के माध्यम से शासन में सुधार लाने के सरकार के व्यापक विजन के अनुरूप है.

विशेष अभियान 4.0 की तैयारी के लिए मत्स्यपालन विभाग के सचिव अभिलक्ष लिखी ने मत्स्यपालन विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) सागर मेहरा और विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ एक तैयारी बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में विभागीय स्तर पर और साथ ही सभी फील्ड कार्यालयों/इकाइयों में अभियान के दौरान गतिविधियों और अभियान की योजना और क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया.

इस के अतिरिक्त मत्स्यपालन विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई), केंद्रीय मत्स्यपालन तटीय इंजीनियरिंग संस्थान (सीआईसीईएफ), राष्ट्रीय मत्स्यपालन पोस्टहार्वेस्ट प्रौद्योगिकी एवं प्रशिक्षण संस्थान (एनआईपीएचएटीटी), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), केंद्रीय मत्स्य नौचालन एवं इंजीनियरी प्रशिक्षण संस्थान (सिफनेट), तटीय जलीय कृषि प्राधिकरण (सीएए) सहित विभाग की क्षेत्रीय इकाइयों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में इन संस्थानों में विशेष अभियान के लिए चल रही तैयारियों का आकलन किया गया.

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कार्यान्वयन चरण के दौरान विभाग लंबित संदर्भों के निबटान के लिए विशेष अभियान चलाएगा, जिस में निम्‍नलिखित पर विशेष ध्यान दिया जाएगा :

-मंत्रियों, संसद सदस्यों, राज्य सरकारों, अंतरमंत्रालयी संचार, पीएमओ संदर्भ, लोक शिकायत और संसदीय आश्वासनों से लंबित संदर्भों का निपटान.

-केंद्रीय सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया मैनुअल (सीएसएमओपी) और सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अनुपालन में भौतिक फाइलों/अभिलेख की समीक्षा, अभिलेखन और छंटाई.

-कार्यालय में स्थान खाली करने के लिए अनुपयोगी स्टोर और कार्यालय उपकरणों को अलग करना और उन का निबटान करना, कार्यालय आवास और परिसरों में स्वच्छता को बढ़ावा देना, अव्यवस्था में कमी लाना और कामकाज के लिए सुव्‍यवस्थित और उपयोगी वातावरण सुनिश्चित करना.

अभियान की तैयारी के लिए सचिव (मत्स्यपालन) ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नई दिल्ली में कृषि भवन और चंद्रलोक भवन में विभाग के कार्यालयों का निरीक्षण किया. निरीक्षण में विभिन्न अनुभागों/इकाइयों में पुरानी फाइल/अभिलेख, अनुपयोगी स्टोर और पुरानी पत्रिकाओं/अख़बारों का ढेर पाया गया. अभिलेख प्रबंधन में सुधार और कार्यालय स्थान के कुशल उपयोग के लिए पुराने अभिलेख /फाइलों और स्टोर को समय पर अलग करने और निबटान सुनिश्चित करने के लिए तत्काल निर्देश जारी किए गए.

विशेष अभियान 4.0 कार्यालय के बेहतर प्रबंधन, स्वच्छता और लंबित मामलों के त्वरित समाधान के माध्यम से शासन में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है. मत्स्यपालन विभाग स्वच्छता को अपनी संगठनात्मक संस्कृति का स्थायी हिस्सा बनाने के लिए है और एक स्वच्छ और अधिक कुशल कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होना जारी रखेगा.

मत्स्यपालन के क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

नई दिल्ली : 22 सितंबर, 2024 को देश में मत्स्यपालन क्षेत्र के विकास के लिए कृषि भवन, दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पशुपालन, मत्स्यपालन एवं डेयरी व पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह के मध्य हुई.

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मत्स्यपालन के क्षेत्र में आईसीएआर द्वारा काफी अच्छा अनुसंधान किया जा रहा है, नई प्रौद्योगिकियां विकसित की गई हैं, वहीं अनेक पहल की गई हैं, इन सब का लाभ देशभर के किसानों को और भी तत्काल अधिकाधिक कैसे मिले, इस संबंध में विचारविमर्श हुआ एवं संबंधित अधिकारियों को दिशानिर्देश दिए गए.

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मत्स्यपालन का क्षेत्र गत वर्षों में देश में काफी विकास हुआ है, वहीं आगे और भी विकास की असीम संभावनाएं हैं, साथ ही, इस से रोजगार के अवसर भी बड़ी संख्या में बढ़ेंगे. इस दिशा में यह फैसला लिया गया है कि समस्त संभावनाओं को तलाशने, क्रियान्वित करने के लिए सभी संबंधित विभाग एकसाथ मिलबैठ कर काम करें, प्रधानमंत्री मोदी की भी यहीं मंशा रही है कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र मिल कर काम करें, ताकि किसानों, मत्स्यपालकों, पशुपालकों आदि को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचे.

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छोटे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले. माडल फार्म को विकसित किया जाना चाहिए, ताकि किसान संबद्ध कार्यों द्वारा भी अपनी आय बढ़ा सकें. खेती व संबद्ध क्षेत्रों में किसानों व अन्य लोगों की गरीबी दूर हो कर आमदनी बढ़ना चाहिए, इस पर सरकार का फोकस है और अनेक योजनाओं व कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिशा में काम किया जा रहा है.

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बैठक में इस संबंध में मत्स्यपालन के क्षेत्र में एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया है, जिस में मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय व आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित रहेंगे. समिति नियमित बैठकें करेगी व रोडमैप भी तैयार करेगी.

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस में राज्यों की सहायता ली जाए व सभी ताकत से जुटें, ताकि अच्छे परिणाम आएं. बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सफल किसानों की बातें अधिकाधिक प्रसारित करने के साथ ही जागरूकता कार्यक्रम और शिविर भी आयोजित किए जाएं.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि मत्स्यपालन में आईसीएआर ने काफी अच्छा रिसर्च किया है, जो बहुत उपयोगी है. इसे किसानों, गांवगांव, नए स्टार्टअप्स तक पहुंचाने के लिए बैठक की गई है, ताकि आगे और भी सुधार हो सके.

उन्होंने बताया कि मछली उत्पादन में नीली क्रांति हुई है और भारत आज विश्व में दूसरे स्थान पर है. सालाना 60,000 करोड़ रुपए का निर्यात हो रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ भी बड़े पैमाने पर देश के किसानों को मिल रहा है. साथ ही, दुग्ध उत्पादन में भारत दुनिया में पहले नंबर है, निर्यात बढ़ाने व देश को एफएमडी मुक्त करने पर केंद्र द्वारा योजनाबद्ध ढंग से काम किया जा रहा है.

बैठक में आईसीएआर के उपमहानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) डा. जेके जेना ने 8 मत्स्य अनुसंधान संस्थानों के महत्वपूर्ण अनुसंधान क्षेत्रों और प्रौद्योगिकी विकास की प्रस्तुति दी. बैठक में मत्स्यपालन विभाग के सचिव डा. अभिलक्ष लिखी और आईसीएआर के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक भी उपस्थित थे.

पशुचारे के नहीं होगी कमी

गोवा : केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने गोवा में सीएलएफएमए औफ इंडिया की दोदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया. सीएलएफएमए औफ इंडिया देश में पशुधन क्षेत्र का सब से बड़ा संगठन है. इस अवसर पर सीएलएफएमए औफ इंडिया के अध्यक्ष सुरेश देवड़ा; पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यपालन मंत्रालय में पशुपालन आयुक्त डा. अभिजीत मित्रा और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव ओपी चौधरी भी उपस्थित थे.

अपने संबोधन में राजीव रंजन ने पशुपालन में घरेलू समाधानों को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण प्रयासों के बारे में बताया. उन्होंने असंगठित डेयरी क्षेत्र को संगठित करने और चारे की कमी को दूर करने के उद्देश्य से जारी कई योजनाओं का भी उल्लेख किया. सीएलएफएमए की पहल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की चर्चाओं से सरकार को नीति बनाने में मदद मिलेगी.

सुरेश देवड़ा ने भारतीय अर्थव्यवस्था में पशुधन क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह किसानों और पशुपालन से जुड़े लोगों को रोजगार प्रदान करता है. इस उद्योग का सालाना कारोबार 12 लाख करोड़ रुपए है. उन्होंने कहा कि अंडे, मांस, दूध और पनीर जैसे उच्च गुणवत्ता वाले पशुधन उत्पादों की दुनियाभर में मांग लगातार बढ़ रही है.

डा. अभिजीत मित्रा ने भारत के पशुधन क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया. कार्यक्रम में सीएलएफएमए औफ इंडिया ने ओपी चौधरी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया.

पशुओं की सर्जरी में प्रशिक्षण कार्यशाला

हिसार : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के सर्जरी एवं रेडियोलौजी विभाग में देश के विभिन्न विभागों से आए पशु चिकित्सकों के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए लुवास के स्नातकोत्तर अधिष्ठाता डा. मनोज रोज ने सभी प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई दी.

उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अनुरोध करते हुए कहा कि आप इन सारी तकनीकों का अपने क्षेत्र के पशुपालकों एवं पशुओं की भलाई के लिए अवश्य उपयोग करें एवं इसे अपने आसपास के पशु चिकित्सकों को भी सिखाएं, जिस से पशुधन की सर्जरी और भी अच्छी तरीके से की जा सके.

पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. गुलशन नारंग ने कहा कि पशुधन किसानों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आप सभी प्रशिक्षणार्थियों से यही उम्मीद है कि आप सब ने इस प्रशिक्षण के दौरान जो सीखा, उस से पशुपालकों की मदद करने में सहायक सिद्ध होंगे और पशुओं की बीमारी से होने वाले माली नुकसान को कम कर सकेंगे.

प्रशिक्षण के बारे में जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष डा. आरएन चौधरी ने बताया कि इस प्रशिक्षण में 9 राज्यों (जम्मूकश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओड़िसा, तेलंगना, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक) के 20 पशु चिकित्सकों को एनेस्थिसिया, जनरल सर्जरी, यूरिनरी सर्जरी, डायफारमेटिक हर्निया, आंखों के मोतियाबिंद और अन्य सर्जरी में प्रशिक्षित किया गया.

भेड़बकरी, खरगोशपालन : खर्चा कम, कमाई अधिक

अविकानगर : भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के एचआरडी विभाग द्वारा 8 दिवसीय (4 सितंबर से 11 सितंबर, 2024) स्ववित्तपोषित 13वां राष्ट्रीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम को निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर की अध्यक्षता मे कौंफ्रैंस हाल मे शुरुआत की गई.

इस 8 दिवसीय वैज्ञानिक भेड़बकरी एवं खरगोशपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 9 राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र एवं अरुणाचल प्रदेश) के 27 प्रशिक्षिणार्थियों ने रजिस्ट्रेशन करा कर भाग लिया.

निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर ने अपने संबोधन में किसानों को संस्थान के पशु भेड़बकरी एवं खरगोशपालन के अवसर एवं उपयोगिता पर उदारहणस्वरूप विस्तार से संवाद किया और बताया कि भेड़ सब से कम संसाधनों में पालने वाला पशु है, जो अपने शारीरिक ग्रोथ भी बकरी की अपेक्षा जल्दी करता है. इसलिए आप देश की मांस की मांग को ध्यान मे रखते हुए अपनी रूचि के अनुसार भेड़बकरी एवं खरगोश का पालन करें.

उन्होंने आगे कहा कि भेड़ एवं बकरी में टीकाकरण के बाद विभिन्न प्रकार के प्रबंधन (आवास, चारा, दाना व विभिन्न मौसम आधारित सावधानी आदि) पर ध्यान दे कर आप अच्छी आमदनी कमा सकते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि इस बैच में जिस तरह के पढ़ेलिखे लोग यहां उपस्थित हैं, उन से मुझे उम्मीद है कि ये व्यवसाय आने वाले समय में हौर्टिकल्चर व पोल्ट्री की तरह पशुपालन उद्यमिता का रूप जरूर लेगा.

उन्होंने आगे कहा कि विकसित भारत निर्माण तभी होगा, जब देश का हर नागरिक देश की तरक्की में भागीदारी होगा. मेरे संस्थान के पशु आत्मनिर्भर भारत में देश की युवाशक्ति के बल पर जरूर इस में रोजगारपरक व्यवसाय के जरीए योगदान देंगे.

अंत में निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर ने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले सभी लोगों से संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुभव से सीखने का निवेदन करते हुए अपने पहले से उपलब्ध नोलेज बढ़ाने का आग्रह किया.

प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयक डा. सुरेश चंद शर्मा एवं डा. लीलाराम गुर्जर द्वारा किया जा रहा है. प्रशिक्षण के उद्धघाटन के अवसर पर एजीबी विभाग अध्यक्ष डा. सिद्धार्थ सारथी मिश्र, डा. अजय कुमार, डा. सत्यवीर ड़ागी, डा. विनोद कदम, डा. अरविंद सोनी आदि ने अपने अनुभव से ट्रेनिंग में भाग ले रहे लोगों से चर्चा की. यह जानकारी अविकानगर के मीडिया प्रभारी डा. अमर सिंह मीना दी.