भेड़पालन की जानकारी आकाशवाणी केंद्र से मिलेगी

अविकानगर : भारतीय क़ृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संस्थान केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर तहसील मालपुरा जिला टोंक के निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर एवं आकाशवाणी केंद्र, जयपुर के निदेशक निलेश कुमार कालभोर के बीच आकाशवाणी केंद्र, जयपुर पर भेड़पालन तकनीकियों को किसान के द्वार पहुंचाने के लिए एमओयू साइन किया गया, जिस का उदेश्य अंतिम छोर के किसानों तक संस्थान की वैज्ञानिक पद्धति से भेड़बकरीपालन की तमाम जानकारी को पहुंचा कर लाभान्वित करना है.

निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर ने बताया कि आकाशवाणी केंद्र, जयपुर द्वारा “भेड़ा री बाता” पर अविकानगर संस्थान के विभिन्न विषय विशेषज्ञ व वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को भेड़पालन के विभिन्न पहलू पर विस्तार से जानकारी आकाशवाणी केंद्र के कार्यक्रम के माध्यम से दी जाएगी.

इस का प्रसारण आकाशवाणी केंद्र, जयपुर द्वारा किया जाएगा, जिस से देश के दूरदराज के गांवढाणी के किसान, जो किसी करणवश जानकारी और तकनीकी ज्ञान के लिए संस्थानों एवं विश्वविद्यालय मे नहीं जा पाते हैं, उन को आकाशवाणी केंद्र के माध्यम से संस्थान एक नवीन पहल पर भेड़पालन तकनीकियों को किसानो के गांवढाणी तक पहुंचाया जाएगा.

एमओयू के अवसर पर केंद्र के दोनों निदेशकों के साथ अविकानगर संस्थान के पोषण विभाग के अध्यक्ष डा. रणधीर सिंह भट्ट, एजीबी विभाग के अध्यक्ष डा. सिद्धार्थ सारथी मिश्र, प्रसार विभाग प्रभारी डॉ लीला राम गुर्जर एवं आकाशवाणी केंद्र कार्यक्रम समन्वयक भी मौजूद रहे.

पशुपालक रामरतन यादव कर रहे अच्छी कमाई

कटनी : आचार्य गौ संवर्धन योजना से लाभान्वित गांव बड़खेड़ा के बाशिंदे पशुपालक रामरतन यादव की डेयरी का भ्रमण उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा किया. रामरतन यादव द्वारा वर्ष 2018 में योजनान्तर्गत स्टेट बैंक औफ इंडिया बहोरीबंद बैंक से 5 पशु के लिए लोन ले कर डेयरी व्यवसाय शुरू किया गया. इस व्यवसाय से इन्हें लगभग 30,000 रुपए प्रतिमाह की आय हो रही है.

व्यवसाय अच्छा चलने के कारण रामरतन द्वारा बैंक का लोन भी समय पर चुका दिया है. समय पर बैंक लोन चुका दने के कारण अब इन्हें बैंक से 1 लाख, 63 हजार रुपए का केसीसी भी लिया गया है, जिस का भुगतान भी रामरतन द्वारा समय पर किया जा रहा है.

पशुओं की संख्या बढ़ने के कारण 60 से 70 लिटर दूध प्रतिदिन उत्पादन होने से डेयरी का व्यवसाय अच्छा चलने के परिणामस्वरूप प्राप्त हाने वाली आय से ही रामरतन द्वारा ढाई एकड़ जमीन भी खरीद ली है और पशुओं की खुराक के लिए इन्हें चारा काटने की मशीन भी पशुपालन विभाग से प्रदान की गई है.

गौपालन किसानों के लिए लाभकारी

झाबुआ : महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने पिछले दिनों ग्राम पंचायत बलोला के ग्राम मातासुला बारिया में 23.32 लाख रुपए की लागत से बन रही “श्री कृष्ण गोशाला” का शुभारंभ किया. उन्होंने गोशाला परिसर में संचालक व अन्य नागरिकों के साथ “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत पौध रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया.

महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि गाय हर किसान को पालनी चाहिए. वह हम सब की पालक है. वह पौष्टिक दूध तो देती ही है, साथ ही साथ उस का गोबर भी हमारे लिए उपयोगी होता है. वह जहां बैठती है, उस के आसपास का वातावरण भी शुद्ध कर देती है.

उन्होंने आगे कहा कि गाय को प्राचीन भारत और वर्तमान समय में भी समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. प्रदेश सरकार गोशालाओं का निर्माण करा कर गायपालन को बढ़ावा दे रही है.

मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि कृषि क्षेत्र में किसानों के लिए गौपालन लाभदायक माना जाता है. गाय के गोबर का उपयोग खेतों में उर्वरक के रूप में भी किया जाता है. इस के अलावा गोबर को सुखाया जाता है और ईंधन के काम में लाया जाता है.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि फसलों के लिए गोमूत्र सब से अच्छा उर्वरक है. गाय का घी और गोमूत्र का उपयोग कई आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में भी किया जाता है.

इस अवसर पर वरिष्ठ जनप्रतिनिधि छीतु सिंह मेड़ा, जिला पंचायत सदस्य वालसिंह मसानिया, ओंकार डामोर, चेनसिंह बारिया, किरन बेन, सरपंच हिंगली बाई, किशोर शाह सहित बड़ी संख्या में गांव वाले और अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे.

कृषि विभाग द्वारा कृषि पद्धति का प्रदर्शन

डिंडौरी : मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने विभागों के द्वारा आयोजित 18 प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया. सब से पहले उन्होंने कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में पारंपरिक कृषि उपकरण, आधुनिक कृषि उपकरण, डिंडौरी जिले के श्रीअन्न आदि कृषि परंपरा का अवलोकन किया. इस के बाद पशुपालन विभाग द्वारा कुक्कुटपालन और पशुपालन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया. मत्स्य विभाग ने जिले में की जा रही विभिन्न मत्स्य उत्पाद को प्रदर्शित किया. वैद्यशास्त्र पर आधारित रही आयुष विभाग की प्रदर्शनी में क्षेत्र के आयुर्वेद भंडार को प्रदर्शित किया गया.

डिंडौरी जिले में औषधियों की व्याप्तता है, जिन पर आयुष विभाग निरंतर काम कर रहा है. मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के सामने आयुर्वेद की विभिन्न विधाओं को प्रदर्शित किया गया.

महिला बाल विकास विभाग एवं आजीविका विभाग के तहत संचालित स्वसहायता समूहों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही, जिन में लौह शिल्प, हस्तशिल्प, मेहंदी और प्रसाधन स्टाल, बांस उत्पाद, बेकरी, कोदोकुटकी से बने उत्पाद और अन्य हस्तनिर्मित डिंडौरी जिले के प्रसिद्ध उत्पादों को प्रदर्शित किया गया.

आयुष विभाग और वन विभाग द्वारा चंद्रविजय कालेज परिसर में नवग्रह वाटिका बनाई गई. इस के तहत 9 ग्रहों पर आधारित 9 पौधों का पौधारोपण किया. 9 ग्रह वाटिका में मदार, पीपल, अपामार्ग, गूलर, पलाश, खैर, दुर्वा, शमी और कुशा का पौधा शामिल है.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने पीपल, राज्य मंत्री नगरीय विकास विभाग एवं आवास विभाग सह जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिमा बागरी ने गूलर, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने अपामार्ग का पौधा रोपित किया.

उक्त प्रदर्शनी के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष अवधराज बिलैया, जिला पंचायत अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते, नरेंद्र राजपूत, पंकज सिंह तेकाम, नरबदिया मरकाम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अंजू ब्यौहार सहित अन्य लोग मौजूद रहे.

देश के पहले राष्ट्रीय वेटरनिटी सम्मेलन का आयोजन

जबलपुर : प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने पिछले दिनों पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के सभागार में देश के पहले राष्ट्रीय वेटरनरी सम्मेलन का शुभारंभ किया. एग्रीविजन संस्था द्वारा आयोजित 2 दिन के इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विधायक अशोक रोहाणी, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डा. मनदीप शर्मा, वेटरनरी काउंसिल औफ इंडिया के अध्यक्ष डा. उमेश शर्मा, चेतस सुखाड़िया, शालिनी वर्मा, शुभम सिंह पटेल, डा. देवेंद्र पोधाड़े एवं तमाम विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे.

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने सम्मेलन का उद्घाटन किया. पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने सम्मेलन में जम्मूकश्मीर, हरियाणा, तेलंगाना सहित देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए सभी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस सम्मेलन में उन्हें कई नई चीजों को सीखने और समझने के अवसर मिलेगा.

उन्होंने सम्मेलन की सफलता की कामना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पशुपालन और पशु चिकित्सा का महत्व बढ़ता जा रहा है. पशुपालन ऐसा क्षेत्र है, जिसे अपना कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं. इस क्षेत्र को अपनाने वाले हर विद्यार्थी को इसे एक अच्छा अवसर मान कर अपना श्रेष्ठतम देने के प्रयास करने चाहिए. उन्हें निश्चित रूप से सफलता मिलेगी.

मंत्री लखन पटेल ने प्रदेश मंत्रिमंडल में पशुपालन जैसे विभाग की बागडोर देने पर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि वे इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास करेंगे. पहली बार प्रदेश में पशुपालन विभाग का बजट 40 फीसदी बढ़ाया गया है. प्रदेश में पशु चिकित्सालयों को साधन संपन्न बनाने और सुविधाएं बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र शासन से भी उन्हें मदद मिल रही है. साथ ही, पशु चिकित्सा महाविद्यालयों में भी छात्रों को बेहतर शैक्षिक सुविधाएं मिलें, इस के लिए भी हर संभव कोशिशें की जा रही हैं.

पशु चारा प्रबंधन पर प्रशिक्षण कार्यशाला

बेंगलुरु : भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र-सीईएएच, बेंगलुरु, भारतीय पशुपालन अकादमी और क्षेत्रीय चारा स्टेशन (आरएफएस), हिसार द्वारा “भारत में पशु चारा प्रबंधन में प्रगति (एएफएमआई-2024)” विषय पर पांचदिवसीय पहली राष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम भारत सरकार के संयुक्त आयुक्त (राष्ट्रीय पशुधन मिशन) डा. एचआर खन्ना, सीईएएच के संयुक्त आयुक्त एवं निदेशक डा. महेश पीएस के मार्गदर्शन में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित किया गया.

इस कार्यक्रम का उद्घाटन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. (डा.) बीआर कंबोज द्वारा किया गया. इतने बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया इस तरह का यह पहला कार्यक्रम था. इस अवसर पर लुवास विश्वविद्यालय से पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. गुलशन नारंग, छात्र कल्याण निदेशक एवं संपदा अधिकारी डा. पवन कुमार व सीसीएसएचएयू के शोध निदेशक डा. राजबीर गर्ग भी उपस्थित रहे. इस के अलावा डा. एसके पाहुजा, एचआरएम निदेशक डा. रमेश कुमार, क्षेत्रीय चारा स्टेशन के निदेशक डा. पीपी सिंह व केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म, हिसार के निदेशक डा. रुंतु गोगोई भी शामिल हुए.

इस कार्यशाला में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय (लुवास) के 10 पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों सहित 14 राज्यों (महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड) के कुल 71 प्रतिभागियों ने भाग लिया.

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व अन्य मंत्रालयों और चारे के क्षेत्र में काम करने वाले उद्योग के प्रख्यात वक्ताओं द्वारा अनुभव साझा किए गए.

विशेषज्ञों ने चारा उत्पादन के विभिन्न पहलुओं जैसे चारा उत्पादन का परिदृश्य, उपलब्धता और अंतर, चारा उत्पादन के तहत क्षेत्र को बढ़ाने के लिए आवश्यक पहल, चारे की उत्पादकता बढ़ाने के उपाय और विभिन्न प्रकार के चारा उत्पादों में प्रौद्योगिकी और मूल्य संवर्धन की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी.pashu chara prabandhan 2

चारा प्रबंधन के महत्व, फसलों में कीट प्रबंधन, चारा उत्पादन क्षेत्र के समक्ष चुनौतियों से निबटने के तरीकों और चारा विकास पर भारत सरकार की गतिविधियों और कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई. एक्सीलेंट इंटरप्राइजेज प्रा. लिमिटेड, खन्ना (पंजाब), पुणे के मैसर्स भाग्यलक्ष्मी डेयरी, मैसर्स कोर्टेवा एग्रीसाइंस (हैदराबाद) और एडवांटा समूह (हैदराबाद) जैसे चारा उद्यमियों ने भी प्रतिभागियों के साथ अपने प्रौद्योगिकी को साझा किया.

भारत सरकार देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में स्थित 8 क्षेत्रीय चारा केंद्र (हिसार, श्रीनगर, धाम रोड (सूरत), हेसरघट्टा (बेंगलुरु), अलामाधी (चेन्नई), कल्याणी (पश्चिम बंगाल), सूरतगढ़ (राजस्थान) और हैदराबाद) चला रही है, जहां उच्च गुणवत्ता वाले आधार/प्रमाणित बीज का उत्पादन हो रहा है.

इन स्टेशनों के सभी निदेशकों ने अपने स्टेशनों में किए जा रहे कार्यों को कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों के साथ विस्तार से साझा किया. इस अवसर पर लुवास के छात्र कल्याण निदेशक डा. पवन कुमार ने अपने विचार प्रतिभागियों से साझा करते हुए बताया कि डेयरी फार्मिंग में भारत में लोगों की आय, रोजगार, पोषण सुरक्षा और आजीविका बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं. किफायती डेयरी फार्मिंग में डेयरी पशुओं को हरा चारा खिलाने की महत्वपूर्ण भूमिका है. भारत में विश्व में सब से अधिक मवेशी हैं, लेकिन प्रति पशु उत्पादकता कम है. राशन में गुणवत्तापूर्ण आहार और चारे की अनुपलब्धता इस के प्रमुख कारण हैं. डेयरी पशुओं की पोषक तत्वों की आवश्यकताओं को पूरा करने और भोजन की लागत को कम करने के लिए राशन में हरे चारे का उचित उपयोग करना चाहिए, जिस से पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है और प्रजनन व दूध उत्पादन में भी मदद करते हैं.pashu chara prabandhan 2

प्रतिभागियों को लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और भारत सरकार के विभिन्न संगठनों में चल रही क्षेत्रीय गतिविधियों को जाननेसमझने का अवसर भी मिला. क्षेत्रीय चारा स्टेशन, हिसार का दौरा प्रतिभागियों के लिए बहुत ही उत्साहजनक था.

समापन समारोह के अवसर पर लुवास के छात्र कल्याण निदेशक और संपदा अधिकारी डा. पवन कुमार व कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. एसके पाहुजा उपस्थित थे. संयुक्त आयुक्त और निदेशक, सीईएएच,बेंगलुरु डा. महेश पीएस व निदेशक, क्षेत्रीय चारा स्टेशन डा. पीपी सिंह, हिसार व निदेशक क्षेत्रीय चारा स्टेशन, चेन्नई डा. अजय कुमार यादव द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए. प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला के आयोजन पर संतोष व्यक्त किया और सरकार से उन के ज्ञान और लाभ के लिए ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया.

पशुपालन पर औनलाइन संगोष्ठी

हिसार : लाला लाजपत राय विश्वविद्यालय, पशु चिकित्सा और पशुपालन विज्ञान (लुवास), हिसार, हरियाणा ने भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी, हैदराबाद के सहयोग से “पशु चिकित्सा और डेयरी विज्ञान में उद्यमिता विकास” पर एक औनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को लुवास के टैक्नोलौजी इनक्यूबेशन सैंटर और इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल के साथसाथ नार्म के एग्रीकल्चर में उद्यमिता के विकास एसोसिएशन ने समर्थन प्रदान किया.

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. गुलशन नारंग ने पशु चिकित्सा व्यवसायी की नवोन्मेषक और उद्योग अनुभवी के रूप में परिवर्तनीय संभावनाओं को उजागर किया. उन के भाषण ने पशु चिकित्सा और डेयरी उद्योगों की बदलती चुनौतियों का सामना करने के लिए उद्यमिता की सोच की आवश्यकता को सुदृढ़ किया.

भाकृअनुप-नार्म निदेशक डा. चिरुकमल्ली श्रीनिवास राव और टैक्नोलौजी इनक्यूबेशन सैंटर के अध्यक्ष एवं मानव संसाधन एवं प्रबंधन निदेशक डा. राजेश खुराना ने भविष्य के पशु चिकित्सा व्यवसायियों में उद्यमिता की सोच को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया. उन के नेतृत्व और दृष्टिकोण ने भारतीय दुग्ध व्यवसाय और पशु चिकित्सा उद्यमिता की दिशा को आकार दिया है.

अतिरिक्त सीईओ, ए-आईडिया डा. विजय अविनाशिलिंगम और प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवं प्रमुख, मानव संसाधन प्रबंधन डा. बी. गणेश कुमार द्वारा दिए गए योगदानों के साथसाथ सफल उद्यमियों की अंतर्दृष्टियों ने पशु चिकित्सा और डेयरी क्षेत्रों में उद्यमों को बनाने और बढ़ाने के लिए व्यावहारिकरण नीतियां प्रदान की.

यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा, जिस में लुवास के छात्रों को इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार के लिए उद्यमिता को एक उत्प्रेरक के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. संगोष्ठी ने यह स्पष्ट किया कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह महत्वपूर्ण समाधानों को बनाने के बारे में है, जो पशु कल्याण को बढ़ाते हैं, संचालन प्रक्रियाओं को अनुकूलित करते हैं और सतत विकास में योगदान करते है.

यह संगोष्ठी लुवास के छात्रों को नवाचार में नेतृत्व करने और पशु चिकित्सा और डेयरी विज्ञान में सतत विकास को प्रेरित करने के लिए आवश्यक उपकरण और प्रेरणा प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है.

टोल फ्री नंबर 1962 पर घर बैठे पशुओं का इलाज

कटनी : जिले में चलित पशु चिकित्सा इकाई के तहत संचालित 7 एंबुलेंस वाहनों के माध्यम से अब तक 8,000 पशुओं का घर पहुंच कर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई है. घर पहुंच कर चिकित्सा सुविधा के संचालन के लिए काल सैंटर के टोल फ्री नंबर 1962 पर डायल कर किसान और पशुपालक पशुओं के लिए घर पर ही चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकते हैं.

उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के डा. आरके सिंह ने बताया कि जिले में संचालित 7 एंबुलेंस वाहन में प्रत्येक में एक डाक्टर, एक पैरावेट और एक ड्राइवर कम अटेंडेंट की तैनाती की गई है. एंबुलेंस वाहन में पशुओं के उपचार से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

घरबैठे चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए पशुपालकों से मात्र 150 रुपए लिया जाता है और सभी उपचार एवं दवाएं निःशुल्क हैं. पशुपालकों से पशुओं के उपचार के बाद अब तक 12 लाख रुपए का शुल्क भी प्राप्त हुआ है.

पशुपालकों के लिए वरदान बनी पशु चिकित्सा एंबुलेंस योजना केंद्र और राज्य सरकार की सहभागिता से संचालित हुई है. प्रदेश में टी एंड एम प्राइवेट लिमिटेड आउटसोर्स एजेंसी द्वारा पशु चिकित्सा एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है. चिकित्सा एंबुलेंस योजना कटनी जिले के सभी 6 विकासखंडों और कटनी शहर मे संचालित है.

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वर्षा ऋतु में पशुओं की देखभाल जरूरी

भोपाल : बदलते मौसम में जहां मानव जीवन के स्वास्थ्य सुरक्षा पर फोकस जरूरी है, वहीं पशुधन की भी वर्षा ऋतु में देखभाल बहुत आवश्यक है. पशुपालन विभाग की ओर से विशेष जागरूकता अभियान चला कर पशुपालकों को उन के पशुओं की देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इस मौसम में वातावरण में आई नमी में बढ़ोतरी की वजह से पशुओं पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिस से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जीवाणु, विषाणु फफूंदजनित एवं पशु परजीवियों जैसे जूं, मक्खी व मच्छरों से होने वाली सभी प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपसंचालक ने बताया कि विभाग पशुपालकों को पशुओं की देखभाल के लिए जागरूक कर रहा है. बरसात के मौसम में पशुपालकों को पशुओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पशुओं को सूखे स्थान पर रखें, जहां हवा व धूप की मात्रा पर्याप्त में हो. साफसफाई का भी विशेष ध्यान रखें.

उन्होंने आगे कहा कि पशुओं को यदि पक्के फर्श पर रखा जाता है, तो उस स्थान पर सप्ताह में कम से कम 2 बार कीटाणुनाशक दवा से सफाई करें. परजीवियों से बचाव के लिए पशुपालक पशुबाड़े में मच्छरदानी का प्रयोग करें और समयसमय पर नजदीकी पशु चिकित्सक से परामर्श कर के परजीवियों से बचाव के लिए दवाएं व जानकारी प्राप्त करें.

साथ ही, पशुओं के खुरों को समयसमय पर साफ करते रहें, क्योंकि इस मौसम में फफूंद को बढ़ावा मिलता है. पशुओं को समय पर पेट के कीड़ों की दवा दें व नियमित टीकाकरण कराएं.

उन्होंने सलाह दी है कि अगर किसी भी बीमारी का लक्षण पशुओं में दिखाई दे, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें और पशु चिकित्सक की सलाह से उचित उपचार करवाएं.

कृषि शिक्षा पर केंद्र सरकार का फोकस : शिवराज सिंह चौहान, कृषि मंत्री

 नई दिल्ली :  14 अगस्त, 2024. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि और संबद्ध विज्ञान में उच्च शिक्षा के लिए आसियानभारत फैलोशिप लांच की. आईसीएआर कन्वेंशन सैंटर, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर, पूसा, नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी भी उपस्थित थे.

यहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आसियान देशों का जिक्र करते हुए कहा कि हम सब एक हैं और एकदूसरे के बिना हमारा काम नहीं चल सकता. कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. आज भी हमारी एक बड़ी आबादी खेती से ही रोजगार प्राप्त करती है. आज कृषि के सामने जलवायु परिवर्तन सहित कई चुनौतियां हैं. भारत ने सदैव कृषि को प्रधानता दी है.

उन्होंने आगे कहा कि समस्याओं के समाधान में कृषि शिक्षा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है. सरकार ने पिछले समय में कृषि शिक्षा पर बहुत ध्यान दिया है, फोकस किया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद इस काम में गंभीरता से लगी हुई है. देश में 66 राज्य कृषि विश्वविद्यालय, 4 डीम्ड विश्वविद्यालय, 3 केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय और कृषि संकाय वाले 4 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, जिन की देखरेख आईसीएआर द्वारा की जाती है.

उन्होंने कहा कि ये संस्थान स्नातक से ले कर डाक्टरेट तक कई तरह के पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं, जिन में कृषि, बागबानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, पशु चिकित्सा, कृषि इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं. वे कृषि विज्ञान में महत्वपूर्ण शोध भी करते हैं और किसानों व हितधारकों को सेवाएं प्रदान करते हैं. उच्च कृषि शिक्षा के लिए छात्रों को आकर्षित करने व कृषि और संबद्ध विज्ञान विषयों में शिक्षण और अनुसंधान में शैक्षिक उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए, आईसीएआर यूजी, पीजी और पीएचडी के छात्रों को परिषद द्वारा विकसित निर्धारित मानदंडों के आधार पर विभिन्न छात्रवृत्ति प्रदान कर के सहायता करता है.

ये छात्रवृत्ति आईसीएआर कोटा सीटों, आईसीएआर प्रवेश परीक्षा द्वारा कृषि विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को प्रदान की जाती हैं. आईसीएआर एयू प्रणाली की क्षमता और योग्यता को अब दुनियाभर में मान्यता मिल चुकी है. कई विकासशील देशों के छात्र भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में विकसित अनुसंधान और शिक्षण सुविधाओं से आकर्षित हो कर लाभान्वित हो रहे हैं.

उन्होंने बताया कि भारत सहित विकासशील देशों में निजी क्षेत्र में अधिक नौकरियां पैदा हो रही हैं, इसलिए विकासशील देशों के छात्रों में भारतीय कृषि को समझने के लिए भारत आ कर अध्ययन करने की रुचि बढ़ रही है. भारत में उन के उच्च अध्ययन का समर्थन करने के लिए, आईसीएआर द्वारा नेताजी सुभाष फैलोशिप, भारतअफ्रीका फैलोशिप, भारतअफगानिस्तान फैलोशिप, बिम्सटेक फैलोशिप जैसे कई कार्यक्रम/फैलोशिप शुरू किए गए हैं.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आसियानभारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और उस के बाद इस पर निर्मित ‘इंडोपैसिफिक विजन’ की आधारशिला है. भारत आसियान एकता, आसियान केंद्रीयता, इंडोपैसिफिक पर आसियान के दृष्टिकोण का समर्थन करता है. हमारे लिए आसियान के साथ राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा सहयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है. भारत आसियान और पूर्वी एशिया शिखर मंचों को जो प्राथमिकता देता है, वह पिछले साल हमारे जी-20 शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा से साफ है. उन्होंने 12 सूत्रीय योजना की घोषणा की थी, जिस पर काफी हद तक अमल किया गया है.

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत और आसियान के सदस्य देशों के बीच कृषि सहयोग की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि आसियान व भारत कृषि जलवायु क्षेत्रों के मामले में बहुत समानताएं साझा करते हैं. अब कृषि और वानिकी में आसियानभारत सहयोग के लिए कृषि व संबद्ध विज्ञान में उच्च शिक्षा के लिए आसियानभारत फैलोशिप आरंभ की जा रही है. फैलोशिप विशेष रूप से कृषि और संबद्ध विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में शक्तियों की पूर्ति और क्षमता का दोहन करने के लिए साझा हितों के नए और उभरते क्षेत्रों में स्नातकोत्तर कार्यक्रम के लिए है. इस से आसियान सदस्य देशों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शोध आधारित शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जिस से भारत और आसियान समुदाय एकदूसरे के करीब आएंगे व आसियान देशों से आने वाले छात्रों के बीच जानकारी के अंतर-सांस्कृतिक और अंतर्राष्ट्रीय आदानप्रदान के लिए मंच प्रदान होगा.

फैलोशिप से आसियान राष्ट्रीयता के छात्रों को आईसीएआर व कृषि विश्वविद्यालय प्रणालियों के तहत सर्वश्रेष्ठ भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में, जरूरत अनुसार, पहचाने गए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कृषि व संबद्ध विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी.

इस के अलावा भाग लेने वाले संस्थानों के भारतीय संकाय सदस्यों की आसियान सदस्य देशों में परिचयात्मक यात्राओं के माध्यम से आसियान क्षमता निर्माण में सहायता प्रदान की जाएगी. इस से कृषि और संबद्ध विज्ञान क्षेत्र के विकास के लिए आसियान में विशेषज्ञ मानव संसाधन के एक पूल के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा.
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा पेश किए जाने वाले मास्टर्स प्रोग्राम छात्रों को अत्याधुनिक शोध से परिचित कराएंगे, उन्हें भविष्य के नवाचारों के लिए तैयार करेंगे. साथ ही, देश में दीर्घकालिक डिगरी कोर्स शोधकर्ताओं को लंबे समय तक जुड़े रहने में मदद कर सकता है और आसियान व भारत को कृषि से संबंधित मुद्दों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है. शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से कृषि और संबद्ध विज्ञान में मास्टर डिगरी के लिए आसियान सदस्य देशों के छात्रों को 50 फैलोशिप (प्रति वर्ष 10) प्रदान की जाएंगी. परियोजना 5 साल के लिए आसियानभारत कोष के तहत वित्त पोषण के लिए मंजूर की गई है, जिस में फैलोशिप, प्रवेश शुल्क, रहने का खर्च व आकस्मिकता शामिल है.