बस्तर से निकला ‘ब्लैक गोल्ड’ : छत्तीसगढ़ को मिला खास तोहफा

देश के इतिहास में अब एक और नया अध्याय जुड़ गया है. नक्सली हिंसा के लिए कुख्यात बस्तर अब अपनी एक नई पहचान बना रहा है. छत्तीसगढ़ का यह इलाका अब “हर्बल और स्पाइस बास्केट” के रूप में दुनिया का ध्यान अपनी ओर खीँच रहा है. इस बदलाव के नायक हैं किसान वैज्ञानिक डा. राजाराम त्रिपाठी, जिन्होंने काली मिर्च की एक अद्भुत किस्म विकसित कर के पूरे देश को गौरवांवित किया है.

कोंडागांव के रहने वाले डा. राजाराम त्रिपाठी ने सालों की कड़ी मेहनत और शोध से काली मिर्च की ‘मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16 (MDBP-16) उन्नत किस्म विकसित की है, जो कम बारिश वाले क्षेत्रों में भी औसत से 4 गुना अधिक उत्पादन देती है. इस प्रजाति को हाल ही में भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), कोझिकोड, केरल द्वारा मान्यता दी गई है.

इसे भारत सरकार के प्लांट वैरायटी रजिस्ट्रार द्वारा नई दिल्ली में भी पंजीकृत किया गया है. यह काली मिर्च की एकलौती उन्नत किस्म है, जिसे दक्षिणी राज्यों से अलग हट कर छत्तीसगढ़ के बस्तर में सफलतापूर्वक विकसित किया. साथ ही, इसे भारत सरकार ने नई किस्म के रूप में पंजीकरण कर मान्यता भी दे दी है. यह बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए एक बहुत बड़ी गौरवशाली उपलब्धि है.

सपने को सच कर दिया : 100 साल तक उत्पादन देने वाली काली मिर्च

डा. राजाराम त्रिपाठी की इस काली मिर्च को विकसित करने में 30 साल का समय लगा. यह लतावर्गीय पौधा है, जो सागौन, बरगद, पीपल, आम, महुआ और इमली जैसे पेड़ों पर चढ़ा कर उगाई जा सकती है. इन पेड़ों पर उगाई गई काली मिर्च न केवल 4 गुना अधिक उत्पादन देती है, बल्कि क्वालिटी में भी देश की दूसरी प्रजातियों से कहीं बेहतर है. इसलिए बाजार में भी इसे हाथोंहाथ लिया जा रहा है और दूसरी प्रजाति की काली मिर्च की तुलना में इस के दाम भी ज्यादा मिलते हैं.

उन्होंने आगे बताया कि इस किस्म ने सब से बेहतरीन परिणाम आस्ट्रेलियन टीक (सागौन) पर चढ़ कर दिए हैं. खास बात यह है कि यह प्रजाति कम सिंचाई और सूखे क्षेत्रों में भी बिना विशेष देखभाल के पनप सकती है.

मसालों की दुनिया में नई पहचान
कभी हिंसा और संघर्ष से प्रभावित बस्तर अब वैश्विक बाजार में मसालों का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है. डा. राजाराम त्रिपाठी का यह भी कहना है कि आज उन की काली मिर्च की किस्म देश के 16 राज्यों और बस्तर के 20 गांवों में उगाई जा रही है. लेकिन सरकारी मान्यता मिलने के बाद इस खेती में और तेजी आने की उम्मीद है.

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत अपने मसालों के लिए सदियों तक ‘सोने की चिड़िया’ कहलाता था. अगर सरकार और लोग मिल कर मसालों और जड़ीबूटियों पर ध्यान दें, तो भारत फिर से वह गौरव हासिल कर सकता है.

प्रधानमंत्री से मिलेंगे डा. राजाराम त्रिपाठी

अपनी सफलता से उत्साहित डा. राजाराम त्रिपाठी जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल कर इस विषय पर मार्गदर्शन चाहते हैं. उन का सपना है कि छत्तीसगढ़ और बस्तर की इस नई पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिले.

नए साल की शुरुआत में बस्तर से आई यह खबर भारत के हर किसान और कृषि वैज्ञानिक के लिए प्रेरणा है. यह सिर्फ एक काली मिर्च की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, नवाचार और आत्मनिर्भरता की मिसाल है. 2025 का यह नया अध्याय भारतीय कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा देने का वादा करता है.

पूसा संस्थान में तैयार हो रही अनेक फसलों की उन्नत किस्में

नई दिल्ली : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने संस्थान के कृषि फार्म का अवलोकन किया और वहां चल रहे अनुसंधान एवं नवीनतम कृषि तकनीकों को देखा.

संस्थान के निदेशक डा. सीएच श्रीनिवासराव ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का स्वागत करते हुए संस्थान के प्रमुख अनुसंधान कार्यों और उन की उपलब्धियों पर जानकारी दी.

संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डा. सी. विश्वनाथन ने चल रही उन्नत अनुसंधान परियोजनाओं और नई किस्मों के विकास के बारे में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को विस्तार से बताया.

डा. बीएस तोमर, अध्यक्ष, शाकीय विज्ञान संभाग ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को संस्थान में की जा रही पूसा लाल गोभी संकर-1, पूसा गोभी संकर-81, गोल्डन एकड़, पूसा स्नोबौल एच-1, गांठ गोभी, पूसा साग-1 और पूसा भारती जैसी उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी दी. साथ ही, उन्होंने उन्हें एक जीवंत फसल प्रदर्शनी भी दिखाई.

varieties of crops

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने फल एवं बागबानी प्रौद्योगिकी का भी निरीक्षण किया. फल एवं बागबानी प्रौद्योगिकी संभाग के प्राध्यापक डा. आरएम शर्मा ने उन्नत नीबूवर्गीय फलों जैसे पूसा शरद और पूसा राउंड की जानकारी दी.

इस के अलावा किन्नू, संतरा, और मौसंबी के बागों का भी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अवलोकन किया.
उत्तर प्रदेश में चने की खेती को और अधिक विकसित किया जा सके, इस के लिए उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने चने की उन्नत खेती के लिए पूसा मानव और पूसा पार्वती जैसी नई किस्मों की भी जानकारी ली.

मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने संस्थान के अनुसंधान कार्यों को देखा और उन की सराहना की. साथ ही, वहां उपस्थिति किसानों के लिए खेती को और अधिक लाभदायक बनाने के लिए कुछ सुझाव भी दिए.

कृषि उत्पादन वृद्धि (Agricultural Production) के लिए भरतपुर में कार्यशाला

भरतपुर : देश के विभिन्न क्षेत्रों में कृषि उत्पादन की वृद्धि के लिए अपनाई जा रही तकनीक व कृषि क्रियाओं पर काम कर रही विभिन्न संस्थानों के अनुभवों को साझा कर समावेशी जिला विकास मौडल बनाने की दृष्टि से भरतपुर में ‘समृद्ध भारत अभियान’ संस्था की पहल पर दोदिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ.

इस आयोजन में विषय विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, चिंतक व विचारकों ने भाग लिया. कार्यशाला में विभिन्न संस्थाओं के कार्यों एवं कृषि उत्पादन वृद्धि और रसायनमुक्त खेती के संबंध में आए सुझावों को नीति आयोग को भेजा जाएगा, ताकि नीति आयोग ग्रामीण विकास अथवा आकांक्षी जिला कार्यक्रम में इन सुझावों को शामिल कर सके, ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके.

‘समृद्ध भारत अभियान’ के निदेशक सीताराम गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला में ‘राष्ट्रीय रबड़ बोर्ड’ के चेयरमैन डा. सांवर धनानिया, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी नरेंद्र सिंह परमार, वेद प्रकाश, ग्वालियर के संत स्वामी ऋषभ देवानंद, कनेरी मठ (महाराष्ट्र) के कृषि विशेषज्ञ डा. रविंद्र सिंह, ‘सर्वोदय फाउंडेशन’ की अंशु गुप्ता, ‘जीवजंतु कल्याण बोर्ड’ के सदस्य जब्बर सिंह, नोएडा, उत्तर प्रदेश के सत्येंद्र सिंह, विमल पटेल, पना (भरतपुर) के कमल सिंह, इंदौर की रीना भारतीय, जालौर (राजस्थान) के ईश्वर सिंह, ग्वालियर के डा. अंकित अग्रवाल, संजीव गोयल, आगरा के मो. हबीब, इंदौर की ध्वनि रामा, कांकरोली (राजसमंद) के विनीत सनाढ्य आदि ने कृषि एवं गोपालन के क्षेत्र में किए जा रहे अनुभवों की जानकारी दी.

कार्यशाला में सभी वक्ताओं ने सुझाव दिया कि रसायनमुक्त एवं कीटनाशकमुक्त खेती करने के लिए हमें प्राचीन परंपरागत खेती अर्थात प्राकृतिक व जैविक खेती शुरू करनी होगी. साथ ही, खेती के साथ गोपालन के काम को भी प्रोत्साहित करना होगा.

कृषि उत्पादन वृद्धि (Agricultural Production)

सभी वक्ताओं ने बताया कि रसायन एवं कीटनाशक दवाओं के उपयोग के चलते कृषि उत्पाद इतने जहरीले हो गए हैं कि इन से आज कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी सामने आ रही है. सभी वक्ताओं ने एक मत से सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को प्राकृतिक खेती अथवा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर प्रशिक्षण शिविर व प्रदर्शन आयोजित किए जाएं.

सभी विशेषज्ञों का कहना था कि जैविक खेती की शुरुआत में कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा, किंतु मानव शरीर पर रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों के कारण पैदा होने वाली बीमारियों से जरूर नजात मिल जाएगी.

सभी वक्ताओं ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों को जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाना होगा और प्राकृतिक अथवा जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष अनुदानित योजना लागू करनी होगी.

महिलाओं और युवाओं को मिलेंगे रोजगार (Employment)

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में 10,000 नवगठित बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), डेयरी व मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी की जन्म शताब्दी के दिन 10,000 नई बहुद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (MPACS), डेयरी व मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारंभ हो रहा है.

अमित शाह ने कहा कि 19 सितंबर, 2024 को इसी स्थान पर हम ने एक SOP बनाई थी. उस के 86 दिन के अंदर ही हम ने 10,000 पैक्स को रजिस्टर करने का काम समाप्त कर दिया है. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की, तो उन्होंने ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र दिया था.

मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ तभी संभव है, जब हर पंचायत में सहकारिता उपस्थिति हो और वहां किसी न किसी रूप में काम करे. उन्होंने कहा कि हमारे देश के त्रिस्तरीय सहकारिता ढांचे को सब से ज्यादा ताकत प्राथमिक सहकारी समिति ही दे सकती है, इसलिए मोदी सरकार ने 2 लाख नए पैक्स बनाने का निर्णय लिया था.

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नाबार्ड (NABARD), एनडीडीबी(NDDB) और एनएफडीबी (NFDB) ने 10,000 प्राथमिक सहकारी समितियों के पंजीकरण में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है. सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद सब से बड़ा काम सभी पैक्स का कंप्यूटराइजेशन करने का काम किया गया.

उन्होंने आगे कहा कि कंप्यूटराइजेशन के आधार पर पैक्स को 32 प्रकार की नई गतिविधियों से जोड़ने का काम किया गया. हम ने पैक्स को बहुआयामी बना कर और उन्हें भंडारण, खाद, गैस, उर्वरक एवं जल वितरण के साथ जोड़ा है.

मंत्री अमित शाह ने कहा कि ट्रेंड मैनपावर न होने के कारण ये सब हम नहीं कर सकते. इस के लिए आज यहां प्रशिक्षण मौड्यूल का भी शुभारंभ हुआ है, जो पैक्स के सदस्यों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम करेंगे.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि ये प्रशिक्षण मौड्यूल हर जिला सहकारी रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी बनेगी कि पैक्स के सचिव एवं कार्यकारिणी के सदस्यों का अच्छा प्रशिक्षण सुनिश्चित हो.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि यहां 10 सहकारी समितियों को रुपे किसान क्रेडिट कार्ड (RuPay Kisan Credit Card), माइक्रो एटीएम (Micro ATM) का वितरण किया गया है. इस अभियान के तहत आने वाले दिनों में हर प्राथमिक डेयरी को माइक्रो एटीएम दिया जाएगा. माइक्रो एटीएम और रुपे किसान क्रेडिट कार्ड (RuPay Kisan Credit Card) हर किसान को कम खर्च पर लोन यानी ऋण देने का काम करेगा.

मंत्री अमित शाह ने कहा कि पैक्स के विस्तार के लिए विजिबिलिटी, रेलेवेंस, वायबिलिटी और वाइब्रेंसी का ध्यान रखा गया है. पैक्स में 32 कामों को जोड़ कर इसे विजिबल और वायबल बनाया गया है.

उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि गांव में कौमन सर्विस सैंटर (Common Service Centre) (CSC) का जब पैक्स बन जाता है, तो गांव के हर नागरिक को किसी न किसी रूप में पैक्स के दायरे में आना पड़ता है. इस प्रकार हम ने इस की रेलेवेंस भी बढ़ाई है.

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब पैक्स गैस वितरण, भंडारण, पैट्रोल वितरण आदि का काम करते हैं, तो उन की वाइब्रेंसी अपनेआप बढ़ जाती है. साथ ही, पैक्स के बहुद्देश्यीय होने से पैक्स का जीवन भी लंबा होने की पूरी संभावना रहती है.

उन्होंने कहा कि यह एक बहुद्देशीय कार्यक्रम है, जिस से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रयास होगा.

मंत्री अमित शाह ने कहा कि कंप्यूटराइजेशन और टैक्नोलौजी से पैक्स में पारदर्शिता आएगी, सहकारिता का जमीनी स्तर पर विस्तार होगा और ये महिलाओं और युवाओं के रोजगार का माध्यम भी बनेगा. साथ ही, पैक्स, कृषि संसाधनों की आसान उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगा.

अमित शाह ने कहा कि हमारी 3 नई राष्ट्रीय स्तर की कोऔपरेटिव्स के माध्यम से पैक्स, और्गेनिक उत्पादों, बीजों और ऐक्सपोर्ट के साथ किसानों की समृद्धि के रास्ते भी खोलेगा. इस से सामाजिक और आर्थिक समानता भी आएगी, क्योंकि नए मौडल में महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित की है, जिस से सामाजिक समरसता भी बढ़ेगी.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने लक्ष्य रखा है कि अगले 5 साल में 2 लाख नए पैक्स का गठन करेंगे. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 5 साल से पहले ही हम इस लक्ष्य को पूरा लेंगे.

उन्होंने आगे बताया कि पहले चरण में नाबार्ड 22,750 पैक्स और दूसरे चरण में 47,250 पैक्स बनाएगा. इसी प्रकार एनडीडीबी 56,500 नई समितियां बनाएगा और 46,500 मौजूदा समितियों को और मजबूत बनाएगा. वहीं एनएफडीबी 6,000 नई मत्स्य सहकारी समितियां बनाएगा और 5,500 मौजूदा मत्स्य सहकारी समितियों का सशक्तीकरण करेगा. इन के अलावा राज्यों के सहकारी विभाग 25,000 पैक्स बनाएंगे.

अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि नए मौडल के साथ अब तक 11,695 नई प्राथमिक सहकारी समितियां पंजीकृत हुई हैं, जो हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. साथ ही, 2 लाख नए पैक्स बनने के बाद फौरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेजेस के माध्यम से किसानों की उपज को वैश्विक बाजार में पहुंचाना बड़ा आसान हो जाएगा.

सरस मेलों से ग्रामीण महिलाएं (Rural Women) बन रहीं सशक्त

जयपुर : कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डा. किरोड़ी लाल मीणा ने राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) द्वारा जवाहर कला केंद्र, जयपुर में संचालित ‘सरस राजसखी मेला, 2024’ का अवलोकन करते हुए कहा कि सरस मेलों का ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने में अहम योगदान है. इन मेलों में देश की ग्रामीण महिलाएं अपने हाथों से बने शोपीस आइटम बेचती है.

मेले में मंत्री डा. किरोड़ी लाल ने सरस मेले में सभी स्टालों का अवलोकन किया एवं विभिन्न राज्यों से आए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत की और उन के उत्पादों की सराहना की. मेले में 250 से अधिक जीआई टैग उत्पादों के तकरीबन 400 स्टाल थे.

उन्होंने आगे कहा कि सरस मेले में राजीविका दीदियों द्वारा बने शिल्पकला, एंब्रौयडरी, जैविक उत्पाद, घर का साजोसामान एवं खानेपीने से संबंधित चीजों को एक स्थान पर खरीदारी करने का अवसर प्रदान करता है. ये मेले पारंपरिक भारतीय कला एवं संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि मेले में विभाग द्वारा पैकेजिंग, ब्रांडिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर कार्यशालाओं का आयोजन भी किया गया, जिस से कि राजीविका महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा उत्पाद बेचने के अवसर उपलब्ध हो सकें.

सरस मेले में नैशनल क्रेडिट कोर यानी एनसीसी के 70 कैडेटों ने भी अवलोकन किया और खरीदारी कर मेले का लुत्फ उठाया. साथ ही, अजमेर एवं अलवर जिले से आई स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा भी मेले का भ्रमण किया गया एवं भविष्य में मेले में अपने उत्पादों के साथ सहभागिता निभाने की मंशा जाहिर की गई.

यह मेला ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने का एक अहम प्रयास है, जिस में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया. मेले में देशभर के 250 से अधिक भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग वाले उत्पादों और पारंपरिक शिल्प का शानदार संग्रह देखने को मिला.

सरस राज्य सखी राष्ट्रीय मेला एक अद्वितीय मंच है, जहां विभिन्न राज्यों की महिला सदस्य अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, हैंडलूम, खाद्य उत्पाद और उन्नत तकनीकी उत्पादों का प्रदर्शन कर रही है. इस आयोजन में क्षेत्रवाद मंडप बनाए गए, जिन में प्रत्येक राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक कलाकृतियां और पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित हुए. यहां पर तकरीबन 300 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने उत्पादों को बेचा. यह मेला देश की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक स्वादों और हस्तशिल्प के अनूठे संगम को दर्शाता है.

3 लाख लिटर दूध प्रतिदिन की क्षमता का नया संयंत्र (New Milk Plant) लगेगा

जयपुर : दूध उत्पादक सहकारी संघ गोवर्धन परिसर, उदयपुर में पंजाब के राज्यपाल एवं प्रशासक चंडीगढ़ गुलाबचंद कटारिया के मुख्य आतिथ्य में विशाल ‘किसान सहकार सम्मेलन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के अध्यक्ष डालचंद डांगी ने संघ का संयंत्र अत्यंत पुराना होने के मद्देनजर राज्यपाल पंजाब एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत से उदयपुर में 3 लाख लिटर दूध प्रतिदिन की क्षमता का नया संयंत्र स्थापित कराने एवं 150 टन प्रतिदिन की क्षमता का पशु आहार संयंत्र लगाने का अनुरोध करते हुए विस्तृत परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत किया.

कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं प्रशासक चंडीगढ़ गुलाबचंद कटारिया ने अपने उदबोधन में पशुपालकों की माली हालत को मजबूत करने और कीमत अंतर राशि दूध समितियों के बजाय सीधे दूध उत्पादकों के बैंक खातों में भेजने का सुझाव दिया. साथ ही, बाजार की होड़ के मद्देनजर दूध एवं दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया.

पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने अपने उद्बोधन में दूध उत्पादकों को दर अंतर दिए जाने पर ख़ुशी जाहिर करते हुए दुग्ध संघ, उदयपुर के अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक के प्रयासों की सराहना की एवं भविष्य में दर अंतर राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे दूध उत्पादकों के बैंक खाते मे भेजने का सुझाव दिया.

उन्होंने आगे कहा कि दूध उत्पादकों को दूध पर दी जाने वाली सब्सिडी जारी रखी जाएगी. इस से दूध उत्पादकों की माली हालत और भी मजबूत होगी. उन्होंने सभी से अपना पूरा दूध दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति पर ही देने के लिए कहा, ताकि उन को सहकारी डेयरी से मिलने वाली सभी सुविधाओं का लाभ मिल सके.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पशुपालकों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं जैसे दुधारू पशु बीमा योजना, गोपालक कार्ड योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना, पशु मोबाइल चिकित्सा योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इन का लाभ उठाने को कहा. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार दूध में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही कर रही है.

उदयपुर डेयरी परिसर में स्थित पार्लर को सरस संकुल पार्लर, जयपुर की तर्ज पर विकसित करने पर भी उन्होंने जोर दिया और कहा कि आगामी बजट मे उदयपुर में 3 लाख लिटर का नया संयंत्र एवं 150 टन प्रतिदिन की क्षमता का पशु आहार संयंत्र स्थापित लगाने का प्रयास किया जाएगा.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनजाति विकास एवं गृह रक्षा मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन एवं डेयरी व्यवसाय को रोजगार एवं आजीविका का सशक्त माध्यम बताया एवं ज्यादा से ज्यादा किसानों एवं पशुपालकों से सहकारी डेयरी से जुड़ कर आमदनी बढाने का आह्वान किया.

उदयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक विपिन शर्मा ने किसान सहकार सम्मेलन कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया.

सिद्धार्थ नगर में बड़े पैमाने पर काला नमक चावल का हो रहा उत्पादन

सिद्धार्थ नगर: जिला प्रशासन अधिकारियों एवं कृषि विभाग के प्रयास से जिले में काला नमक चावल की पहचान पूरी दुनिया में पहुंचाने के लिए पिछले दिनों क्रेताविक्रेता सम्मेलन का कार्यक्रम 2 दिनों के लिए आयोजित किया गया. जिलाधिकारी का प्रयास जिले के किसानों को काला नमक चावल के उत्पादन की अच्छी कीमत मिले, यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है.

कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ओडीओपी के अंतर्गत जिले के काला नमक चावल को चुना गया है. आज जिले में काला नमक चावल का उत्पादन 18,000 एकड़ भूमि में किया जा रहा है. भारत सरकार द्वारा नौनबासमती चावल का निर्यात बंद कर दिया गया था. उस के लिए वाणिज्य मंत्री भारत सरकार से मिल कर किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए खुलवाया गया, जिस से काला नमक चावल व अन्य चावल का उत्पादन करने वाले किसानों को उचित मूल्य प्राप्त हो सके.

सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए दृढ़संकल्पित है. इस के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है. कृषि विभाग द्वारा पारदर्शी रूप से किसानों को सोलर पंप, कृषि यंत्र आदि पर सब्सिडी दे कर लाभांवित किया जा रहा है.

काला नमक चावल लंबे समय तक रखने पर उस की खुशबू चली जाती थी. उस के लिए अब वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं, जिस से काला नमक चावल की सुगंध बनी रहे. किसानों को काला नमक चावल का सही बीज मिले, इस के लिए वैज्ञानिकों द्वारा शोध किया जा रहा है.

काला नमक चावल शुगर फ्री, प्रोटीन, विटामिन व अन्य गुणवत्ता से युक्त है. भारत सरकार द्वारा 2,396 मिलियन टन नौनबासमती चावल का निर्यात किया गया था. इस से अधिक निर्यात केवल उत्तर प्रदेश द्वारा हो, इस के लिए प्रयास किया जाए.

कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने जिलाधिकारी को नौगढ़शोहरतगढ़ के बीच आम फैसिलिटेशन सैंटर बनाए जाने का निर्देश दिया, जिस से किसान अपना चावल उस में रख सकें. उन्होंने कहा कि मखाने की खेती करने के लिए ब्लौक स्तर पर गोष्ठी आयोजित कर किसानों को प्रेरित किया जाए, जिस से किसानों को काला नमक चावल के साथ मखाने की खेती से अच्छी आय प्राप्त हो सके.

Black salt rice

डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि काला नमक चावल की ब्रांडिंग एवं निर्यात के लिए क्रेताविक्रेता सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. जिला प्रशासन द्वारा काला नमक चावल को विश्व में पहचान के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है. काला नमक चावल विलुप्त होता जा रहा था, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री के प्रयास से इस की पहचान बढ़ी है.

काला नमक चावल का उत्पादन जिस तरह से हो रहा है, उस की सही कीमत किसानों को नहीं मिल रही है. इस क्वालिटी का चावल पूरी दुनिया में नहीं मिल रहा है. काला नमक चावल को शुगर का मरीज भी खा सकता है. जापान के चावल का मुकाबला आज हमारे जिले का काला नमक चावल कर रहा है. आज पूरी दुनिया में और्गेनिक फूड का महत्व बढ़ रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा डा. स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू किया गया. जनपद में काला नमक भवन बनाने के लिए भारत सरकार से सीएसआर मद से काम करने का प्रयास किया जा रहा है. इस भवन के बनने से बाहर से आने वाले लोगों को काला नमक चावल आसानी से प्राप्त हो जाएगा. वहीं से ही इस की मार्केटिंग भी हो सकेगी. कार्यक्रम के अंत में सांसद डुमरियागंज ने जिला प्रशासन, कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों को शुभकामनाएं दीं.

कृषि स्टार्टअप्स को सशक्त बनाने के लिए SABAGRIs वेबसाइट लांच

भागलपुर: कृषि नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के कुलपति ने आज SABAGRIs (सबौर एग्री इनक्यूबेटर्स) की आधिकारिक वेबसाइट www.sabagris.com को लांच किया. यह वेबसाइट कृषि स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और कृषि नवाचारकर्ताओं को संसाधन, समर्थन और सहयोग के अवसर प्रदान करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगी.

SABAGRIs, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की एक एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन पहल है,जिस का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और शोध को प्रोत्साहित करना है. यह इनक्यूबेटर कृषि स्टार्टअप्स को विचार विकास से लेकर व्यवसाय के विस्तार तक संपूर्ण समर्थन प्रदान करता है, जिस में आधुनिक कृषि के लिए स्थायी और तकनीकी समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाता है.

वेबसाइट लांच का आयोजन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशालय अनुसंधान में किया गया. इस अवसर पर SABAGRIs के परियोजना अन्वेषक और निदेशक अनुसंधान डा. एके सिंह और उन की टीम के सदस्य उपस्थित रहे.

यह पहल कृषि क्षेत्र में विकास को गति देने और नवोन्मेषी विचारों को व्यवसायिक रूप देने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी.

काला नमक चावल (Black Salt Rice) की पहचान पूरी दुनिया में पहुंची

सिद्धार्थनगर: जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर द्वारा आयोजित बुद्धा राइस क्रेता विक्रेता सम्मेलन कार्यक्रम के समापन एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के मौके पर किसान सम्मान दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंत्री श्रम एवं सेवायोजन, समन्वय विभाग उत्तर प्रदेश अनिल राजभर द्वारा सांसद डुमरियागंज जगदंबिका पाल, विधायक शोहरतगढ़ विनय वर्मा, जिलाध्यक्ष भाजपा कन्हैया पासवान, पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी व जिलाधिकारी डा. राजा गणपति आर, पुलिस अधीक्षक अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार आदि की उपस्थिति में किया गया.

मुख्य अतिथि मंत्री श्रम एवं सेवायोजन, समन्वय विभाग उत्तर प्रदेश अनिल राजभर द्वारा जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में बुद्धा रत्ना कंपनी के कालानमक के उत्पाद का विमोचन किया गया. किसान सम्मान दिवस के मौके पर कृषि में बेहतरीन कार्य करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया गया. नव चयनित आशाबहुओं को प्रशिक्षण के लिए प्रमाण पत्र एवं ओडीओपी योजना के लाभार्थियों को टूल किट का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया.

कालानमक के प्रचार प्रसार हेतु ब्रांड एम्बेसडर महेंद्र नाथ पाण्डेय को शाल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया. मुख्य अतिथि मंत्री श्रम एवं सेवायोजन, समन्वय विभाग उत्तर प्रदेश अनिल राजभर ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर याद करते हुए सभी किसानों को किसान सम्मान दिवस की शुभकामनाएं दी.

उन्होंने आगे कहा कि महात्मा गौतम बुद्ध की धरती पर जनपद के प्रभारी मंत्री के रूप में पहली बार सभी अन्नदाता किसानों से मुलाकात हो रही है. मुख्यमंत्री जी द्वारा ओडीओपी के अंतर्गत सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल और चंदौली के ब्लैक राइस को चुना गया है. इस क्रेता विक्रेता सम्मेलन के कार्यक्रम की चर्चा अन्य जनपदों में भी हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि किसानों की आय दोगुनी हो उन के इस संकल्प को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है.

श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि उत्पादन को बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अनुदान देकर किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. किसानों को उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो इस के लिए कार्य योजना भी बनाई जा रही है.

इस के साथ ही, पूर्वांचल के 500 किसानों को विदेशों में भ्रमण कर अच्छी तकनीकियों का प्रयोग कर खेती करने के लिए प्रेरित किया जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 6000 मजदूरों को इसराइल भेजा गया है. साथ ही 25000 श्रमिकों को इसराइल भेजने का लक्ष्य भी है उत्तर प्रदेश से जो श्रमिक इसराइल गए हैं, उन को आज अच्छी आय प्राप्त हो रही है. साथ ही, आज क्रेता विक्रेता सम्मेलन के माध्यम से किसान उद्यमियों को काला नमक के उत्पादन को बढ़ाने व उस के निर्यात के लिए जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, जिस से उनको उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो सके.

जिलाधिकारी डाक्टर राजा गणपति आर एवं मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार के निर्देशन में जिला प्रशासन के अधिकारियों एवं कृषि विभाग के प्रयास से आज जनपद में काला नमक की पहचान पूरी दुनिया में पहुंचने के लिए क्रेता विक्रेता सम्मेलन का कार्यक्रम दो दिनों तक आयोजित किया गया. जिलाधिकारी का यह प्रयास है, कि जनपद के किसानों को काला नमक चावल के उत्पादन की अच्छी कीमत मिल सके.

सांसद डुमरियागंज जगदंबिका पाल ने कहा कि यह तथागत गौतम बुद्ध की जन्मस्थली है. जनपद प्रभारी मंत्री को जनपद में प्रथम आगमन पर बधाई दी गई. सांसद डुमरियागंज ने इतने बड़े कार्यक्रम के आयोजन को मूर्तरूप देने वाले जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व कृषि विभाग को बधाई दी.

उन्होंने आगे कहा कि यह क्रेता विक्रेता सम्मेलन नये प्रयोग के साथ काला नमक चावल के ब्रांडिंग एवं निर्यात के लिए आयोजित किया गया है. जिला प्रशासन द्वारा कालानमक चावल को विश्व में पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है. कालानमक चावल की क्वालिटी का चावल पूरी दुनिया में नहीं मिल रहा है. काला नमक चावल को शुगर का मरीज भी सेवन कर सकता है.

आज जापान के चावल का मुकाबला हमारे जनपद का काला नमक चावल कर रहा है. जनपद में काला नमक भवन बनाने के लिए भारत सरकार से सीएसआर मद व्यय कर काम करने का प्रयास किया जा रहा है. इस भवन के बनने से बाहर से आने वाले लोगों को कालानमक चावल आसानी से प्राप्त हो जाएगा और वहीं से ही इस की मार्केटिंग भी हो सकेगी.

काला नमक चावल (Black Salt Rice)

सांसद डुमरियागंज जगदंबिका पाल ने कहा कि कालानमक चावल विभिन्न कर्मशियल प्लेटफार्म के माध्यम से आज देश विदेश में अपनी सुगंध फैला रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जी 20 की बैठक में भी अतिथियों को भेंट किया गया था. साथ ही, उन्होंने जिला प्रशासन, कृषि वैज्ञानिकों एवं किसान भाइयों को भी शुभकामनाएं दी.

विधायक शोहरतगढ़ विनय वर्मा ने कहा कि कालानमक चावल को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा इस के निर्यात के लिए अच्छा प्रयास किया जा रहा है जिस से किसानों को उन के उत्पाद का अच्छा मूल्य प्राप्त हो सके और महात्मा बुद्ध का प्रसाद कालानमक की खुशबू देशविदेश तक पहुंच सके.

पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने कहा कि कालानमक चावल के उत्पादन एवं निर्यात के लिए क्रेता विक्रेता सम्मेलन के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है, जिस से किसानों को कालानमक चावल का अच्छा मूल्य प्राप्त होगा.

जिलाध्यक्ष भाजपा कन्हैया पासवान ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का प्रसाद, कालानमक चावल के लिए जिला प्रशासन द्वारा क्रेता विक्रेता सम्मेलन का कार्यक्रम हो रहा है. जनपद के किसानों द्वारा अधिक मात्रा में कालानमक की खेती की जा रही है. इस के निर्यात के लिए विकल्प हो जाने पर जनपद के किसान और अधिक मात्रा में काला नमक की खेती कर अच्छी आय प्राप्त कर सकेंगे.

बुद्धा राइस क्रेता विक्रेता सम्मेलन कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर दो चरणों में वैज्ञानिको द्वारा किसानों को कालानमक चावल के प्रसंस्करण एवं विपणन के बारे में पूरी जानकारी दी गई. प्रसंस्करण सत्र के दौरान डा. रितेश शर्मा बासमती एक्सपोर्ट बोर्ड, डा. एमएस अनंथा आईआईआरआर हैदराबाद, केके अग्रवाल आई.आई.ए द्वारा किसानों को कालानमक चावल के प्रसंस्करण के बारे में सभी जानकारी दी गई.

विपणन सत्र के दौरान डा. मंजुल प्रताप सिंह निदेशक ओराइजो राइस घर एग्रो वर्ल्ड प्रा.लि. वाराणसी, सुरेश गुप्ता प्रदेश सचिव, लघु उद्योग भारती उत्तर प्रदेश, अविनाश चंद्र तिवारी संयुक्त कृषि निदेशक मंडल बस्ती, डा. मार्कण्डेय सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र सोहना द्वारा कालानमक चावल के प्रसंस्करण के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई.

इस अवसर पर उपरोक्त के अतिरिक्त उप कृषि निदेशक अरविंद विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी मो. मुजम्मिल, जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक दूबे, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी कृषि रवि शंकर पाण्डेय, उपायुक्त उद्योग उदय प्रकाश, जिला उद्यान अधिकारी नन्हे लाल वर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय व अन्य संबंधित अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे.

हाईटेक कृषि ज्ञान वाहनों से मिल रहा हर सवाल का जवाब

सबौर: बिहार कृषि विश्वविद्यालय, द्वारा संचालित “सवालजवाब” कार्यक्रम अब किसानों तक और भी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफौर्म पर लोकप्रिय इस कार्यक्रम का प्रसारण आज से कृषि ज्ञान वाहनों के माध्यम से भी किया गया.

समस्तीपुर, पूर्णिया और पटना जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद इन कृषि ज्ञान वाहनों पर किसानों ने विश्वविद्यालय के मीडिया सेंटर से प्रसारित सवालजवाब कार्यक्रम को देखा और वैज्ञानिकों से सीधे प्रश्न पूछे. आज के कार्यक्रम में “जाड़े के मौसम में पशुओं के रखरखाव” विषय पर चर्चा की गई.

इस अवसर पर प्रसार शिक्षा निदेशक डा. आरके सोहाने, पशु विज्ञान विशेषज्ञ डा. राजेश कुमार, डा. एमज़ेड होदा और डा. ज्योतिमला ने किसानों के सवालों के उत्तर दिए. कार्यक्रम का संचालन अन्नू द्वारा किया गया.

यह कार्यक्रम हर शनिवार को प्रसारित होता है. साथ ही, अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कृषि ज्ञान वाहनों के साथसाथ बामेती, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना और डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वाहनों में भी उपलब्ध है. इन वाहनों में बड़े टीवी स्क्रीन पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया.

इस नई पहल पर खुशी जाहिर करते हुए कुलपति डा. डीआर सिंह ने कहा ” इस कदम से दूरदराज के किसानों को खेती और पशुपालन से जुड़ी समस्याओं का समाधान रियल टाइम में मिल सकेगा. यह पहल किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.”

हाईटेक कृषि ज्ञान वाहन

गौरतलब है कि इस वर्ष बिहार कृषि विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हाईटेक कृषि ज्ञान वाहनों का निर्माण किया गया था, जिस का लोकार्पण बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था. ये वाहन किसानों को कृषि और पशुपालन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं.

किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण

यह कार्यक्रम न केवल किसानों के दरवाजे तक पहुंच कर उन्हें जागरूक कर रहा है, बल्कि उन की समस्याओं का तुरंत समाधान भी प्रदान कर रहा है. इस से राज्य में कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में प्रगति को नई गति मिलेगी.